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पुणे में एक हालिया आपराधिक मामले में, पुलिस जांच के दौरान महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, लोहगढ़ किले पर हुई एक युवक की मृत्यु के मामले में पुलिस का दावा है कि इस घटना को एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। जांच के मुताबिक, युवक की मंगेतर पर आरोप है कि उसने इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस का मानना है कि मंगेतर ने जानबूझकर एक बहाना बनाया ताकि वह नीचे बैठ सके। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जब युवक गिरे तो बचाव के लिए उसे न पकड़ पाए। इसके बाद, कथित तौर पर युवक को गहरी खाई में धक्का दे दिया गया।
आशीष कुमार मिश्रा
पुणे में एक हालिया आपराधिक मामले में, पुलिस जांच के दौरान महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, लोहगढ़ किले पर हुई एक युवक की मृत्यु के मामले में पुलिस का दावा है कि इस घटना को एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। जांच के मुताबिक, युवक की मंगेतर पर आरोप है कि उसने इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस का मानना है कि मंगेतर ने जानबूझकर एक बहाना बनाया ताकि वह नीचे बैठ सके। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जब युवक गिरे तो बचाव के लिए उसे न पकड़ पाए। इसके बाद, कथित तौर पर युवक को गहरी खाई में धक्का दे दिया गया।
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- लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में आयोजित ऐतिहासिक ताजिया मेले में हर साल की तरह इस बार भी कुम्हारों ने मिट्टी के खिलौने, बर्तन और सजावटी सामान की दुकानें सजाईं। रंग-बिरंगे घोड़े, हाथी, गुड़िया, सीटी वाले खिलौने और मिट्टी के गुल्लक बच्चों को खूब लुभा रहे थे, लेकिन मेले में भारी भीड़ के बावजूद खरीददारों की कमी से कुम्हारों के चेहरे मायूस नजर आए। कुम्हार समाज के लोग इन खिलौनों को तैयार करने में महीनों पहले से जुट जाते हैं। उनका कहना है कि प्लास्टिक और चाइनीज खिलौनों के बढ़ते चलन से मिट्टी के खिलौनों की मांग लगातार घट रही है। बच्चों की प्राथमिकता भी अब मोबाइल गेम और प्लास्टिक के खिलौने बन गए हैं। मिट्टी के खिलौने बनाने वाले रामदीन प्रजापति ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि जहाँ पहले ताजिया मेले में सुबह से शाम तक अच्छी बिक्री होती थी, वहीं अब दुकान लगाए तीन दिन हो चुके हैं, पर लागत भी पूरी नहीं निकल पाई है। उनके अनुसार, मिट्टी का काम अब घाटे का सौदा बन गया है। कुछ खरीदारों ने मिट्टी के खिलौनों के टिकाऊ न होने और उनके टूटने के डर का हवाला दिया। वहीं, कुछ बुजुर्गों ने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि धीरे-धीरे यह पुरानी कला खत्म होती जा रही है। इस स्थिति से चिंतित कुम्हारों ने प्रशासन और आम लोगों से अपील की है कि इस लोक कला को बचाने के लिए वे मिट्टी के सामान खरीदें, ताकि यह परंपरा जीवित रह सके।1
- पुणे में एक हालिया आपराधिक मामले में, पुलिस जांच के दौरान महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, लोहगढ़ किले पर हुई एक युवक की मृत्यु के मामले में पुलिस का दावा है कि इस घटना को एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। जांच के मुताबिक, युवक की मंगेतर पर आरोप है कि उसने इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस का मानना है कि मंगेतर ने जानबूझकर एक बहाना बनाया ताकि वह नीचे बैठ सके। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जब युवक गिरे तो बचाव के लिए उसे न पकड़ पाए। इसके बाद, कथित तौर पर युवक को गहरी खाई में धक्का दे दिया गया।1
- ग्राम लक्ष्मीपुर कुरैया लोहरना में ऋषिकुमार और उनकी पत्नी नंदरानी अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए भट्ठे पर ईंट पाथकर गुज़ारा करते थे। परिवार पर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब एक सड़क हादसे में पति ऋषिकुमार की मौत हो गई। इस दुखद सूचना के मिलते ही, विधायक रोमी साहनी मृतक के घर पहुंचे और शोकाकुल पत्नी नंदरानी को 15,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। विधायक साहनी ने उन्हें सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया कि "जब भी किसी प्रकार की ज़रूरत पड़े, बिना किसी संकोच के मुझे याद कर लेना। मैं हर संभव मदद के लिए हमेशा आपके साथ खड़ा हूं।"1
- लखीमपुर खीरी के पलिया तहसील क्षेत्र स्थित लक्ष्मीपुर कुरैया लोहरना गाँव में ऋषिकुमार और उनकी पत्नी नंदरानी ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। हाल ही में एक सड़क हादसे में ऋषिकुमार की असामयिक मौत हो जाने से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस हृदय विदारक घटना की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक रोमी साहनी तत्काल मृतक के घर पहुंचे। विधायक साहनी ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और मृतक की पत्नी नंदरानी को तत्काल 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि भविष्य में किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर वे बिना किसी संकोच के उन्हें याद करें, विधायक हरसंभव मदद के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।1
- लखीमपुर खीरी के पलिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत मलिनियां में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली एवं खड़ंजा निर्माण कार्य में पुरानी ईंटों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, जिससे उनमें भारी नाराजगी व्याप्त है। उनका कहना है कि यह निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सरकारी धन से होने वाले कार्यों में नई और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग होना चाहिए, लेकिन यहाँ पुरानी ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण में गुणवत्ता संबंधी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है, जिससे कार्य की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि गुणवत्ता पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो निर्माण कार्य जल्द ही क्षतिग्रस्त हो जाएगा और सरकारी धन का दुरुपयोग होगा। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने और मानकों के अनुरूप निर्माण कार्य सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जांच कर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे और आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। इस घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।3
- एक व्यक्ति ने ट्रैफिक नियमों के पालन में कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए अपना अनुभव साझा किया है। पोस्ट में बताया गया है कि उन्हें बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने के लिए 3500 रुपये का भारी चालान भरना पड़ा, जबकि वे सिर्फ अपने गाँव से हाईवे पर सब्ज़ी लेने के लिए गए थे। इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए, उन्होंने पूछा है कि क्या सारे नियम केवल गरीब जनता के लिए ही बनाए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी खुद भी बिना हेलमेट के काफी दूर तक यात्रा करते हैं, और इसी संदर्भ में ट्रैफिक पुलिस से यह अनुरोध किया गया है कि क्या ऐसे पुलिसकर्मियों का भी चालान हो सकता है और इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।1
- 26 जून को रामापुर में अवैध खनन के दौरान मिट्टी दरकने से एक मजदूर पंकज की मौत हो गई, लेकिन इस गंभीर घटना के बाद भी प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है और उसने कोई सबक नहीं लिया है। अभी तक, उच्च अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, और इस बात की जवाबदेही भी तय नहीं की गई है कि आखिर 20 से 25 फीट तक गहरी खाई क्यों खोदी गई थी। आरोप है कि जिला प्रशासन लगातार खनन अधिकारी को 'अभय दान' दे रहा है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस खनन अधिकारी पर जिला प्रशासन इतनी मेहरबानी क्यों दिखा रहा है।1
- लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ नगर में मोहर्रम के पावन अवसर पर लगने वाले ऐतिहासिक ताजिया मेले में इस बार भी सेवा और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। ताजिया जुलूस के मार्ग और मेला क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और आम लोगों ने मिलकर ठंडा सरबत, नींबू पानी और पीने के पानी के स्टॉल लगाए। भीषण गर्मी के बीच मेले में आए श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए ये सेवा स्टॉल बड़ी राहत लेकर आए, जहाँ उन्हें गिलास भर-भर कर ठंडा सरबत और पानी पिलाया गया। सेवा प्रदान करते समय बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की ज़रूरतों का विशेष ध्यान रखा गया। स्थानीय व्यापारियों ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ताजिया मेला केवल एक जुलूस नहीं है, बल्कि यह इंसानियत का त्योहार है, और सेवा करने से दिल को गहरा सुकून मिलता है। ताजिया कमेटी के सदस्यों ने इस सेवा में लगे सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, और बताया कि गोला का यह मेला इसी "गंगा-जमुनी तहजीब" के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पुलिस प्रशासन और नगर पालिका ने भी मेला क्षेत्र में साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहयोग किया।1