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मध्यप्रदेश पटवारी संवर्ग ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण में हो रही लगातार देरी, पदोन्नति से वंचित रखने और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान न होने के विरोध में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया है। हरदा सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसमें शासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे, जिसके बाद चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। पटवारी संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विकास जोशी और प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि संगठन कई वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को शासन के समक्ष उठा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर पटवारी महाधिवेशन में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 में समय देने और तिथि तय करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आज तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया, जिससे पूरा पटवारी संवर्ग स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहा है। पटवारी संवर्ग पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा गया कि अन्य विभागों में पदोन्नतियां जारी हैं, जबकि पटवारियों को वंचित रखा गया है। संघ ने ज्ञापन में प्रमुख तौर पर 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं। पहली मांग कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति और समयमान वेतनमान की है, क्योंकि यह प्रस्ताव वर्षों से लंबित है, जबकि अन्य विभागों को लाभ मिल रहा है। दूसरी मांग नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करने की है, जो विगत 25 वर्षों में केवल एक बार 2018 में हुई थी। तीसरी मांग पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट में शामिल करने की है, क्योंकि राजस्व न्यायालयीन मामलों में केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। चौथी मांग वर्षों से लंबित वित्तीय भुगतान से संबंधित है; पटवारियों ने स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना और फार्मर आईडी शिविर सहित कई योजनाओं में निजी संसाधनों से कार्य किया, लेकिन उनका मानदेय भुगतान आज तक नहीं हुआ है। लंबित भुगतान न होने पर भविष्य की योजनाओं के कार्यों का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी गई है। पांचवीं मांग पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त करने की है, जिन पर आरोप है कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने के लिए उन्हें प्रताड़ित करने की मंशा से स्थानांतरण नीति के विपरीत स्थानांतरित किया गया है। संघ ने ऐसे सभी स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने और नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित करने की भी मांग की है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों का समाधान है। संगठन को उम्मीद है कि शासन संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत प्रदान करेगा। इस दौरान अनुराग कारोलिया, सुनील शर्मा, शिवनारायण बघेल, संतोष गौर, फूलसिंह उईके, सुभाष मर्सकोले, राज नारायण बट्टी, मूरत चौहान, सुशील दुबे, राघवेंद्र परमार, विजय कौशल, सुनील गौर, हर्षिता कौशल, अलकनंदा ठाकुर और उमा चंदेरी सहित कई पटवारी उपस्थित रहे।

9 hrs ago
user_संदीप अग्रवाल Agrawal
संदीप अग्रवाल Agrawal
Journalist हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
9 hrs ago
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मध्यप्रदेश पटवारी संवर्ग ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण में हो रही लगातार देरी, पदोन्नति से वंचित रखने और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान न होने के विरोध में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया है। हरदा सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसमें शासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे, जिसके बाद चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। पटवारी संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विकास जोशी और प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि संगठन कई वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को शासन के समक्ष उठा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर पटवारी महाधिवेशन में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 में समय देने और तिथि तय करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आज

तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया, जिससे पूरा पटवारी संवर्ग स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहा है। पटवारी संवर्ग पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा गया कि अन्य विभागों में पदोन्नतियां जारी हैं, जबकि पटवारियों को वंचित रखा गया है। संघ ने ज्ञापन में प्रमुख तौर पर 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं। पहली मांग कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति और समयमान वेतनमान की है, क्योंकि यह प्रस्ताव वर्षों से लंबित है, जबकि अन्य विभागों को लाभ मिल रहा है। दूसरी मांग नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करने की है, जो विगत 25 वर्षों में केवल एक बार 2018 में हुई थी। तीसरी मांग पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट में शामिल करने की है, क्योंकि राजस्व न्यायालयीन मामलों में केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। चौथी मांग वर्षों से लंबित वित्तीय भुगतान से संबंधित है; पटवारियों ने स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना और फार्मर आईडी शिविर सहित कई योजनाओं

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में निजी संसाधनों से कार्य किया, लेकिन उनका मानदेय भुगतान आज तक नहीं हुआ है। लंबित भुगतान न होने पर भविष्य की योजनाओं के कार्यों का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी गई है। पांचवीं मांग पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त करने की है, जिन पर आरोप है कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने के लिए उन्हें प्रताड़ित करने की मंशा से स्थानांतरण नीति के विपरीत स्थानांतरित किया गया है। संघ ने ऐसे सभी स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने और नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित करने की भी मांग की है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों का समाधान है। संगठन को उम्मीद है कि शासन संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत प्रदान करेगा। इस दौरान अनुराग कारोलिया, सुनील शर्मा, शिवनारायण बघेल, संतोष गौर, फूलसिंह उईके, सुभाष मर्सकोले, राज नारायण बट्टी, मूरत चौहान, सुशील दुबे, राघवेंद्र परमार, विजय कौशल, सुनील गौर, हर्षिता कौशल, अलकनंदा ठाकुर और उमा चंदेरी सहित कई पटवारी उपस्थित रहे।

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  • हरदा कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को छिदगांव स्थित गंजाल नदी के पुल सहित करना से गोदड़ी और गोदड़ी से नयागांव के बीच के रपटों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बरसात के मौसम में आवागमन की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कलेक्टर ने निरीक्षण के बाद पुल-पुलियाओं पर आवश्यक सूचना बोर्ड और बेरीकेड लगाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जलमग्न होने की स्थिति में पैदल और वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोका जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने करताना से गोदड़ी और गोदड़ी से नयागांव के बीच स्थित रपटों के उन्नयन के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए। निरीक्षण के दौरान, ग्राम काथड़ी और गोदड़ी में बिजली आपूर्ति न होने की शिकायतें सामने आईं, जिस पर विभागीय कर्मचारी को तत्काल ग्रामीणों की बिजली संबंधी समस्या का निराकरण करने का निर्देश दिया गया। कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारी को छिदगांव-टेमागांव मार्ग पर मौजूद गड्ढों को भरने के लिए भी निर्देशित किया। इस निरीक्षण में एसडीएम टिमरनी श्री संजीव नागू, सीईओ जनपद पंचायत सुश्री चेतना पाटिल और संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे।
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    हरदा कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को छिदगांव स्थित गंजाल नदी के पुल सहित करना से गोदड़ी और गोदड़ी से नयागांव के बीच के रपटों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बरसात के मौसम में आवागमन की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

कलेक्टर ने निरीक्षण के बाद पुल-पुलियाओं पर आवश्यक सूचना बोर्ड और बेरीकेड लगाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जलमग्न होने की स्थिति में पैदल और वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोका जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने करताना से गोदड़ी और गोदड़ी से नयागांव के बीच स्थित रपटों के उन्नयन के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए।

निरीक्षण के दौरान, ग्राम काथड़ी और गोदड़ी में बिजली आपूर्ति न होने की शिकायतें सामने आईं, जिस पर विभागीय कर्मचारी को तत्काल ग्रामीणों की बिजली संबंधी समस्या का निराकरण करने का निर्देश दिया गया। कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारी को छिदगांव-टेमागांव मार्ग पर मौजूद गड्ढों को भरने के लिए भी निर्देशित किया। इस निरीक्षण में एसडीएम टिमरनी श्री संजीव नागू, सीईओ जनपद पंचायत सुश्री चेतना पाटिल और संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे।
    user_Mohanlal Nagle
    Mohanlal Nagle
    संवाददाता वर्ल्ड स्वराज न्यूज़ हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मध्यप्रदेश पटवारी संवर्ग ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण में हो रही लगातार देरी, पदोन्नति से वंचित रखने और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान न होने के विरोध में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया है। हरदा सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसमें शासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे, जिसके बाद चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। पटवारी संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विकास जोशी और प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि संगठन कई वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को शासन के समक्ष उठा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर पटवारी महाधिवेशन में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 में समय देने और तिथि तय करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आज तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया, जिससे पूरा पटवारी संवर्ग स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहा है। पटवारी संवर्ग पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा गया कि अन्य विभागों में पदोन्नतियां जारी हैं, जबकि पटवारियों को वंचित रखा गया है। संघ ने ज्ञापन में प्रमुख तौर पर 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं। पहली मांग कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति और समयमान वेतनमान की है, क्योंकि यह प्रस्ताव वर्षों से लंबित है, जबकि अन्य विभागों को लाभ मिल रहा है। दूसरी मांग नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करने की है, जो विगत 25 वर्षों में केवल एक बार 2018 में हुई थी। तीसरी मांग पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट में शामिल करने की है, क्योंकि राजस्व न्यायालयीन मामलों में केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। चौथी मांग वर्षों से लंबित वित्तीय भुगतान से संबंधित है; पटवारियों ने स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना और फार्मर आईडी शिविर सहित कई योजनाओं में निजी संसाधनों से कार्य किया, लेकिन उनका मानदेय भुगतान आज तक नहीं हुआ है। लंबित भुगतान न होने पर भविष्य की योजनाओं के कार्यों का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी गई है। पांचवीं मांग पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त करने की है, जिन पर आरोप है कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने के लिए उन्हें प्रताड़ित करने की मंशा से स्थानांतरण नीति के विपरीत स्थानांतरित किया गया है। संघ ने ऐसे सभी स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने और नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित करने की भी मांग की है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों का समाधान है। संगठन को उम्मीद है कि शासन संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत प्रदान करेगा। इस दौरान अनुराग कारोलिया, सुनील शर्मा, शिवनारायण बघेल, संतोष गौर, फूलसिंह उईके, सुभाष मर्सकोले, राज नारायण बट्टी, मूरत चौहान, सुशील दुबे, राघवेंद्र परमार, विजय कौशल, सुनील गौर, हर्षिता कौशल, अलकनंदा ठाकुर और उमा चंदेरी सहित कई पटवारी उपस्थित रहे।
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    मध्यप्रदेश पटवारी संवर्ग ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण में हो रही लगातार देरी, पदोन्नति से वंचित रखने और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान न होने के विरोध में प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया है। हरदा सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसमें शासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे, जिसके बाद चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

पटवारी संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विकास जोशी और प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि संगठन कई वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को शासन के समक्ष उठा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर पटवारी महाधिवेशन में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 में समय देने और तिथि तय करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आज तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया, जिससे पूरा पटवारी संवर्ग स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहा है। पटवारी संवर्ग पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा गया कि अन्य विभागों में पदोन्नतियां जारी हैं, जबकि पटवारियों को वंचित रखा गया है।

संघ ने ज्ञापन में प्रमुख तौर पर 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं। पहली मांग कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति और समयमान वेतनमान की है, क्योंकि यह प्रस्ताव वर्षों से लंबित है, जबकि अन्य विभागों को लाभ मिल रहा है। दूसरी मांग नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करने की है, जो विगत 25 वर्षों में केवल एक बार 2018 में हुई थी। तीसरी मांग पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट में शामिल करने की है, क्योंकि राजस्व न्यायालयीन मामलों में केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। चौथी मांग वर्षों से लंबित वित्तीय भुगतान से संबंधित है; पटवारियों ने स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना और फार्मर आईडी शिविर सहित कई योजनाओं में निजी संसाधनों से कार्य किया, लेकिन उनका मानदेय भुगतान आज तक नहीं हुआ है। लंबित भुगतान न होने पर भविष्य की योजनाओं के कार्यों का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी गई है। पांचवीं मांग पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त करने की है, जिन पर आरोप है कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने के लिए उन्हें प्रताड़ित करने की मंशा से स्थानांतरण नीति के विपरीत स्थानांतरित किया गया है। संघ ने ऐसे सभी स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने और नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित करने की भी मांग की है।

पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों का समाधान है। संगठन को उम्मीद है कि शासन संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत प्रदान करेगा। इस दौरान अनुराग कारोलिया, सुनील शर्मा, शिवनारायण बघेल, संतोष गौर, फूलसिंह उईके, सुभाष मर्सकोले, राज नारायण बट्टी, मूरत चौहान, सुशील दुबे, राघवेंद्र परमार, विजय कौशल, सुनील गौर, हर्षिता कौशल, अलकनंदा ठाकुर और उमा चंदेरी सहित कई पटवारी उपस्थित रहे।
    user_संदीप अग्रवाल Agrawal
    संदीप अग्रवाल Agrawal
    Journalist हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • इंदौर-बैतूल हाईवे स्थित बरवाई खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक गौमाता की मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों, विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और गोरक्षा कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया है। करीब एक घंटे से लगे इस भीषण जाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिसमें यात्री वाहन, मालवाहक ट्रक, रेत डम्फर, तेल टैंकर और यहाँ तक कि आपातकालीन सेवाएँ भी फंसी हुई हैं। लोग जाम खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही खातेगांव तहसीलदार मौके पर पहुँच गए हैं और वे आक्रोशित प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर जाम खुलवाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।
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    इंदौर-बैतूल हाईवे स्थित बरवाई खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक गौमाता की मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों, विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और गोरक्षा कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया है।

करीब एक घंटे से लगे इस भीषण जाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिसमें यात्री वाहन, मालवाहक ट्रक, रेत डम्फर, तेल टैंकर और यहाँ तक कि आपातकालीन सेवाएँ भी फंसी हुई हैं। लोग जाम खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही खातेगांव तहसीलदार मौके पर पहुँच गए हैं और वे आक्रोशित प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर जाम खुलवाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।
    user_Dharmendra Yogi
    Dharmendra Yogi
    Video Creator खातेगांव, देवास, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • मध्य प्रदेश पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आम नागरिकों को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में 'Safe Click 2.0' नामक एक साइबर जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत, लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के नवीनतम तरीकों से सावधान रहने और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट, फेक कॉल, QR कोड स्कैम, OTP फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया जैसे विभिन्न माध्यमों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इन खतरों से बचाव के लिए, अभियान लोगों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करने, OTP, बैंक PIN या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करने की सलाह देता है। 'Safe Click 2.0' अभियान के तहत, स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय, बैंक और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नागरिकों को यह भी बताया जा रहा है कि यदि वे किसी साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो वे तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्य के नागरिकों से सतर्क रहने, सुरक्षित रहने और दूसरों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने की अपील की है। पुलिस का स्पष्ट मानना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर बड़ी आर्थिक और व्यक्तिगत हानि से बचा जा सकता है।
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    मध्य प्रदेश पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आम नागरिकों को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में 'Safe Click 2.0' नामक एक साइबर जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत, लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के नवीनतम तरीकों से सावधान रहने और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट, फेक कॉल, QR कोड स्कैम, OTP फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया जैसे विभिन्न माध्यमों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इन खतरों से बचाव के लिए, अभियान लोगों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करने, OTP, बैंक PIN या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करने की सलाह देता है।

'Safe Click 2.0' अभियान के तहत, स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय, बैंक और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नागरिकों को यह भी बताया जा रहा है कि यदि वे किसी साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो वे तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्य के नागरिकों से सतर्क रहने, सुरक्षित रहने और दूसरों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने की अपील की है। पुलिस का स्पष्ट मानना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर बड़ी आर्थिक और व्यक्तिगत हानि से बचा जा सकता है।
    user_Journalist shubham
    Journalist shubham
    खातेगांव, देवास, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मध्य प्रदेश पुलिस, जिसमें राज्य साइबर सेल और इंदौर/भोपाल पुलिस कमिश्नरेट शामिल हैं, ने 'सेफ क्लिक 2.0' नामक एक सतत साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को टास्क स्कैम, फर्जी केवाईसी और "डिजिटल गिरफ्तारी" के नाम पर होने वाली जबरन वसूली जैसी विभिन्न डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना है। अभियान के तहत प्रमुख सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इनमें "डिजिटल गिरफ्तारी" के दौरान घबराने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि भारत में किसी भी कानूनी प्राधिकरण या पुलिस अधिकारी के पास वीडियो कॉल के माध्यम से किसी को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार नहीं है। साथ ही, नागरिकों को अपने ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और सीवीवी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी को कभी भी किसी के साथ साझा न करने और गोपनीय रखने के लिए कहा गया है। लोगों को अज्ञात वेब लिंक पर क्लिक करने या बिना मांगे APK फाइलें डाउनलोड करने से भी बचने की चेतावनी दी गई है।
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    मध्य प्रदेश पुलिस, जिसमें राज्य साइबर सेल और इंदौर/भोपाल पुलिस कमिश्नरेट शामिल हैं, ने 'सेफ क्लिक 2.0' नामक एक सतत साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को टास्क स्कैम, फर्जी केवाईसी और "डिजिटल गिरफ्तारी" के नाम पर होने वाली जबरन वसूली जैसी विभिन्न डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना है।

अभियान के तहत प्रमुख सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इनमें "डिजिटल गिरफ्तारी" के दौरान घबराने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि भारत में किसी भी कानूनी प्राधिकरण या पुलिस अधिकारी के पास वीडियो कॉल के माध्यम से किसी को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार नहीं है। साथ ही, नागरिकों को अपने ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और सीवीवी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी को कभी भी किसी के साथ साझा न करने और गोपनीय रखने के लिए कहा गया है। लोगों को अज्ञात वेब लिंक पर क्लिक करने या बिना मांगे APK फाइलें डाउनलोड करने से भी बचने की चेतावनी दी गई है।
    user_The harsud news
    The harsud news
    Court reporter हरसूद, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सिवनी मालवा के शासकीय कुसुम महाविद्यालय में बुधवार शाम करीब 4 बजे, छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने प्रभारी प्राचार्य ए.के. यादव को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। इन ज्ञापनों के माध्यम से महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई। दोनों छात्र संगठनों ने महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की। उनका तर्क था कि हर वर्ष बड़ी संख्या में योग्य विद्यार्थी सीमित सीटों के कारण प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, इसलिए छात्र हित में सीटों में वृद्धि आवश्यक है। इसके अलावा, लंबे समय से बंद पड़े महाविद्यालय के मुख्य जनरेटर को शीघ्र चालू कराने की भी मांग की गई। छात्र संगठनों ने बताया कि जनरेटर बंद होने से बिजली कटौती होने पर कक्षाओं का संचालन, कंप्यूटर लैब और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है। ज्ञापन में परिसर में आने वाले अभिभावकों के लिए एक व्यवस्थित प्रतीक्षालय (वेटिंग एरिया) बनाने की भी मांग की गई। उनका कहना था कि वर्तमान में अभिभावकों के बैठने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। साथ ही, महाविद्यालय परिसर के बाहरी हिस्से में शौचालय की व्यवस्था किए जाने की मांग भी रखी गई, जिससे बाहरी आगंतुकों को सुविधा मिल सके और मुख्य भवन के अंदर अनावश्यक भीड़ कम हो। दोनों छात्र संगठनों ने प्रभारी प्राचार्य से अपील की कि वे इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करें और महाविद्यालय में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को बेहतर वातावरण एवं सुविधाएं मिल सकें।
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    सिवनी मालवा के शासकीय कुसुम महाविद्यालय में बुधवार शाम करीब 4 बजे, छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने प्रभारी प्राचार्य ए.के. यादव को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। इन ज्ञापनों के माध्यम से महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई।

दोनों छात्र संगठनों ने महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की। उनका तर्क था कि हर वर्ष बड़ी संख्या में योग्य विद्यार्थी सीमित सीटों के कारण प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, इसलिए छात्र हित में सीटों में वृद्धि आवश्यक है। इसके अलावा, लंबे समय से बंद पड़े महाविद्यालय के मुख्य जनरेटर को शीघ्र चालू कराने की भी मांग की गई। छात्र संगठनों ने बताया कि जनरेटर बंद होने से बिजली कटौती होने पर कक्षाओं का संचालन, कंप्यूटर लैब और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है।

ज्ञापन में परिसर में आने वाले अभिभावकों के लिए एक व्यवस्थित प्रतीक्षालय (वेटिंग एरिया) बनाने की भी मांग की गई। उनका कहना था कि वर्तमान में अभिभावकों के बैठने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। साथ ही, महाविद्यालय परिसर के बाहरी हिस्से में शौचालय की व्यवस्था किए जाने की मांग भी रखी गई, जिससे बाहरी आगंतुकों को सुविधा मिल सके और मुख्य भवन के अंदर अनावश्यक भीड़ कम हो।

दोनों छात्र संगठनों ने प्रभारी प्राचार्य से अपील की कि वे इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करें और महाविद्यालय में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को बेहतर वातावरण एवं सुविधाएं मिल सकें।
    user_Shashank Mishra
    Shashank Mishra
    पत्रकार सिवनी-मालवा, नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी नगर के वार्ड क्रमांक एक और दो के निवासी पिछले कुछ दिनों से गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। बिजली बंद रहने के कारण इन वार्डों के लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है, खासकर बारिश के मौसम में, जहां जहरीले जीवों का खतरा बढ़ गया है और उन्हें अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिकों ने यह भी बताया कि खेतों के किनारे बनी झोपड़पट्टियों और कच्चे मकानों में खतरा और भी अधिक है, और ओवरब्रिज निर्माण के चलते मार्ग भी क्षतिग्रस्त है। इस समस्या को लेकर बिजली विभाग से कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन आरोप है कि विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। स्थानीय विधायक ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए विभाग के अधिकारियों को समस्या हल करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इससे आक्रोशित होकर, आज वार्ड वासियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या के समाधान की मांग की और एसडीएम के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे।
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    मध्य प्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी नगर के वार्ड क्रमांक एक और दो के निवासी पिछले कुछ दिनों से गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। बिजली बंद रहने के कारण इन वार्डों के लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है, खासकर बारिश के मौसम में, जहां जहरीले जीवों का खतरा बढ़ गया है और उन्हें अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। नागरिकों ने यह भी बताया कि खेतों के किनारे बनी झोपड़पट्टियों और कच्चे मकानों में खतरा और भी अधिक है, और ओवरब्रिज निर्माण के चलते मार्ग भी क्षतिग्रस्त है।

इस समस्या को लेकर बिजली विभाग से कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन आरोप है कि विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। स्थानीय विधायक ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए विभाग के अधिकारियों को समस्या हल करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

इससे आक्रोशित होकर, आज वार्ड वासियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या के समाधान की मांग की और एसडीएम के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे।
    user_संदीप अग्रवाल Agrawal
    संदीप अग्रवाल Agrawal
    Journalist हरदा, हरदा, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • मूंग खरीदी के मुद्दे पर कांग्रेस ने मोहन सरकार के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। इस उग्र विरोध के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोहन सरकार का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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    मूंग खरीदी के मुद्दे पर कांग्रेस ने मोहन सरकार के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। इस उग्र विरोध के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोहन सरकार का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
    user_Pramod patel
    Pramod patel
    Pharmacist सिवनी-मालवा, नर्मदापुरम, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
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