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प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र के पचखरा गांव में सोमवार सुबह एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका की पहचान 25 वर्षीय मुस्कान के रूप में हुई है, जिसका शव घर के अंदर फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही घूरपुर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल की जांच करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस घटना को लेकर मृतका के मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मायके वालों का कहना है कि ससुराल के लोगों ने ही मुस्कान की हत्या की और फिर शव को फंदे से लटका दिया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौके से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Rohit Sharma
प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र के पचखरा गांव में सोमवार सुबह एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका की पहचान 25 वर्षीय मुस्कान के रूप में हुई है, जिसका शव घर के अंदर फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही घूरपुर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल की जांच करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस घटना को लेकर मृतका के मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मायके वालों का कहना है कि ससुराल के लोगों ने ही मुस्कान की हत्या की और फिर शव को फंदे से लटका दिया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौके से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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- प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र के पचखरा गांव में सोमवार सुबह एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका की पहचान 25 वर्षीय मुस्कान के रूप में हुई है, जिसका शव घर के अंदर फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही घूरपुर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल की जांच करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस घटना को लेकर मृतका के मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मायके वालों का कहना है कि ससुराल के लोगों ने ही मुस्कान की हत्या की और फिर शव को फंदे से लटका दिया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौके से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- प्रयागराज के झूंसी थाने में पीड़ितों के साथ हो रहे अन्याय और वहां चल रहे 'सेटिंग के खेल' का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसकी गवाही खुद एफआईआर टाइप करने वाले हेड दीवान ने दी है। दीवान के अनुसार, गंभीर रूप से घायल एक पीड़ित, जिसका मुंह मारपीट में पूरी तरह फूटा हुआ है, तीन दिन से थाने के चक्कर लगा रहा है लेकिन उसकी एफआईआर नहीं लिखी जा रही है। अतीक के गुर्गे और भू-माफिया तुफैल अहमद ने पीड़ित पक्ष साहबे आलम और मोहम्मद फैसल के परिवार के साथ इसलिए दोबारा मारपीट की क्योंकि उन्होंने पुलिस से उसकी शिकायत की थी। इसके बावजूद झूंसी पुलिस दो दिनों तक पीड़ित पक्ष को टरकाती रही और कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल करती रही। जब स्थानीय पुलिस की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पुलिस के उच्चाधिकारियों को मारपीट का वीडियो भेजकर मामले की गंभीरता से अवगत कराया गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद ही झूंसी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन उसमें भी खेल कर दिया गया। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर से मोबाइल छीनने वाली लाइन को ही काट दिया। यह मोबाइल घटना का वीडियो बनाते समय अपराधी तुफैल अहमद के भाई-भतीजों द्वारा छीना गया था, जिसे अब तक वापस नहीं किया गया है। हद तो तब हो गई जब पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए अगले ही दिन रात में बिना किसी जांच, सबूत या वीडियो फुटेज के, हत्या, जालसाजी, जुआ अधिनियम, बिजली चोरी, दंगा और बलवा जैसे 9 मुकदमों के आरोपी अपराधी तुफैल अहमद को ही पीड़ित दर्शाते हुए चुपके से एक काउंटर एफआईआर भी दर्ज कर ली गई। इस पूरे मामले ने झूंसी पुलिस की कार्यप्रणाली को गंभीर कठघरे में खड़ा कर दिया है। खुद हेड दीवान ने लाचारी जताते हुए माना कि छोटे सिपाहियों के हाथ में कुछ नहीं है और थाने पर पीड़ितों के साथ गलत हो रहा है। इस स्थिति पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा गया है कि अगर आईपीएस अधिकारी न हों तो लोग न्याय भूल ही जाएं और अब तो झूंसी थाने का भगवान ही मालिक है।1
- प्रयागराज के शंकरगढ़ थाना पुलिस ने चेन स्नैचिंग की घटना का सफल खुलासा करते हुए दो वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई डिस्कवर मोटरसाइकिल (UP70BL4907), छीनी गई पीली धातु की एक जंजीर और ₹6,000 नकद बरामद किए हैं। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त प्रयागराज के निर्देशन, डीसीपी यमुनानगर एवं एसीपी बारा के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष शंकरगढ़ सुशील कुमार दुबे के नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम ने 11 जुलाई 2026 की रात करीब 10:45 बजे ग्राम लखनपुर के पास केशरी देवी बगिया के पीछे मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान 35 वर्षीय विपिन कुमार निषाद (निवासी मवैया, थाना औद्योगिक क्षेत्र) और 34 वर्षीय आनंद निषाद (निवासी बीकर, थाना धूपपुर) के रूप में हुई है। इस मामले को लेकर 26 जून 2026 को बड़ौढ़ी निवासी आरती तिवारी (पत्नी उमेश तिवारी) ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि टेम्पो में यात्रा के दौरान अज्ञात बाइक सवार बदमाश उनके गले से सोने की चेन छीनकर भाग गए थे। इस संबंध में शंकरगढ़ थाने में मुकदमा अपराध संख्या 151/2026 के तहत बीएनएस की धारा 309(4), 317(2) एवं 61(2) में मुकदमा दर्ज किया गया था। लगातार की गई विवेचना, मुखबिर तंत्र और पुलिस टीम के संयुक्त प्रयासों से इस घटना का खुलासा हुआ। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर दोनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर दिया है। इस पूरी कार्रवाई में थानाध्यक्ष सुशील कुमार दुबे, एसओजी प्रभारी नवीन सिंह, उपनिरीक्षक शिवकुमार यादव, राजकुमार राय, अजय सिंह, जयवीर सिंह, शशिकांत यादव, मनोज कुमार यादव, सतीश यादव, सुजीत यादव, दीपू और समित कुमार की मुख्य भूमिका रही।1
- प्रयागराज के कोरांव में कादीपुर सड़क पिछले 70 सालों में भी नहीं बन पाई है। बारिश के इस मौसम में यहाँ की जनता को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस कोरांव-कादीपुर सड़क के न बनने के पीछे सीधे तौर पर घोटाले का गंभीर आरोप लगाया गया है कि आखिर इतने दशकों बाद भी यह सड़क क्यों नहीं बन सकी।1
- प्रयागराज के जसरा ब्लॉक में गोवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी बजट की बंदरबांट और अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जसरा में गोवंश आश्रय केंद्र सिर्फ सरकारी फाइलों और कागजों में भरे पड़े हैं, जबकि असलियत में सैकड़ों आवारा गाय और बैल रेलवे स्टेशन, बाजारों, तहसील परिसरों और खेतों में घूमकर किसानों की मेहनत को बर्बाद कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक ही सीमित रखे हुए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जसरा ब्लॉक में कुल 4 गोवंश आश्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1000 से ज्यादा गोवंश को संरक्षित दिखाया जा रहा है। हालांकि, मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई। रेरा गौशाला में एक केंद्र पर ताला लटका मिला, जबकि दूसरे केंद्र में केवल 30-40 पशु बहुत खराब हालत में मिले, जिन्हें न चारा, न पानी और न ही डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध थी। इतना ही नहीं, वहां पांच मवेशी मृत भी पाए गए। दूसरी ओर, जसरा रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और गांवों के खेतों में 200 से अधिक आवारा गोवंश दिन-रात खुलेआम घूम रहे हैं। इस बदहाली से बबुरी, चिल्ला, जसरा, पचखरा और तातारगंज के किसान बेहद परेशान हैं। किसानों का कहना है कि रात के समय 10-15 गोवंश का झुंड खेतों में घुसकर धान और सब्जियों की खड़ी फसल को चट कर जाता है। पीड़ित किसान रामलाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद रात को गोवंश उनकी पूरी फसल खा जाते हैं। जब पुलिस से शिकायत की जाती है तो वे पशुओं को खुद पकड़वाने की बात कहते हैं, जबकि आश्रय केंद्र वाले जगह की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रखने से मना कर देते हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खेल कागजों पर खेला जा रहा है, जहां हर महीने "सभी गोवंश सुरक्षित और चारा-पानी उपलब्ध" होने की झूठी रिपोर्ट और पुरानी तस्वीरें अधिकारियों को भेज दी जाती हैं। पशु चिकित्साधिकारी के दौरे भी केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। एक गौ-पालक ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि केंद्रों पर स्टाफ ही नहीं है और बजट आने के बावजूद उसे पशुओं पर खर्च नहीं किया जाता है। जसरा में सरकार की अच्छी मंशा वाली यह योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे पीड़ित जनता अब बजट के उपयोग और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा रही है।1
- प्रयागराज जिले की मेजा तहसील के गांवों में प्रशासन के कर्मचारियों द्वारा घरौंनी बनाने का कार्य शुरू किया गया था, जो संभवतः पूरा भी हो चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश मकान मालिकों को उनकी घरौंनी नहीं मिल पाई है। हालांकि, कुछ लोगों को प्रशासन के माध्यम से या फिर वेबसाइट के जरिए इंटरनेट से यह मिल गई है, मगर पूरे गांव की घरौंनी बनकर तैयार हुई है या नहीं, यह स्थिति अभी तक साफ नहीं हो पाई है। जो घरौंनी बन भी चुकी हैं, वे भी अभी तक उनके मालिकों को नहीं सौंपी गई हैं, जिसे प्रशासनिक कार्य में बड़ी लापरवाही कहा जा रहा है। घरौंनी न मिलने की वजह से स्थानीय मकान मालिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।1
- फैजाबाद रोड स्थित बाटी चोखा रेस्टोरेंट में खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहां ₹20 की कैंपा कोल्ड्रिंक ग्राहकों को ₹30 में बेची जा रही है। इस ओवररेटिंग के खिलाफ जब आवाज उठाई गई, तो रेस्टोरेंट मालिक ने धमकी भरे लहजे में कहा, 'लेना है तो लो, वरना जाओ! वीडियो बनाकर क्या कर लोगे?' बात सिर्फ ओवररेटिंग की ही नहीं है, बल्कि इस रेस्टोरेंट में मासूम नाबालिग बच्चों से मजदूरी भी कराई जा रही है। बाल श्रम और ओवररेटिंग का यह अवैध कारोबार पुलिस की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है। अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इस रेस्टोरेंट पर एक्शन कब होगा और क्या ₹20 की चीज 30 में बेचना और बच्चों से काम कराना सही है?1
- प्रयागराज के झूंसी में पुलिस अतीक के गुर्गों और भू-माफिया को बचाने के लिए पीड़ित पक्ष पर ही दबाव बनाने में जुट गई है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए रात में चुपके से बिना किसी सबूत के क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली है। पीड़ित साहबे आलम और मोहम्मद फैसल का परिवार एक शांति प्रिय परिवार है, जिन पर आज तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं है। पीड़ितों की तरफ से एफआईआर दर्ज होने के बाद भी भू-माफिया और उसके लोग खुलेआम घूमते रहे और उन पर समझौते का दबाव बनाते रहे। जब समझौते की बात नहीं बनी, तो झूंसी पुलिस ने रात में धीरे से पीड़ित परिवार के ऊपर ही बिना किसी साक्ष्य के एफआईआर लिख डाली। पीड़ितों की एफआईआर लिखते समय पुलिस ने सबूत के तौर पर मारपीट का वीडियो और चोटें देखीं, लेकिन दबाव बनाकर पीड़ित की तहरीर से वह लाइन जबरन हटवा दी जिसमें दबंगों द्वारा मोबाइल छीने जाने की बात लिखी थी। इसके विपरीत, भू-माफिया की तरफ से क्रॉस एफआईआर लिखते समय पुलिस ने न तो कोई जांच की और न ही कोई सबूत या वीडियो मांगा। झूंसी पुलिस यक्ष ऐप पर दर्ज शातिर अपराधी तुफैल अहमद का बहुत अच्छे से ख्याल रख रही है ताकि उसे कोई तकलीफ न हो। इस अपराधी पर हत्या, धोखाधड़ी, जालसाजी, जुआ अधिनियम, बिजली चोरी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने जैसे 9 मुकदमे दर्ज हैं। अपराधी तुफैल अहमद के घर पर सीसीटीवी कैमरा भी लगा है, लेकिन खुद मारपीट करने वाला अपने ही कैमरे की फुटेज भला कैसे दिखाएगा। झूंसी पुलिस पहले भी दबाव बनाने के लिए क्रॉस एफआईआर लिखने के ऐसे कारनामे कर चुकी है। वर्ष 2025 में भी अधिवक्ता मो. आमीर पर दबाव बनाने के लिए बिना किसी साक्ष्य और सबूत के रंगदारी की धाराओं में क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन खबर चलने के बाद पुलिस को पीछे हटना पड़ा था। कुछ पुलिसवालों की इन्हीं करतूतों के कारण आज भी हर गली-मोहल्ले में अतीक के गुर्गे और भू-माफिया फल-फूल रहे हैं। एक शातिर अपराधी को बचाने के लिए पुलिस जिस हद तक उतरी है, उसे देखकर झूंसी पुलिस का यह योगदान इतिहास में दर्ज होगा।1