राजस्थान के झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी तहसील के गांव बागोरा स्थित ढाणी परसाला में एक उच्च स्वास्थ्य केंद्र के रास्ते पर अवैध अतिक्रमण हो गया है, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को हर महीने टीका लगवाने के लिए वहां तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह रास्ता पूरी तरह से सरकारी है और किसी की निजी खातेदारी की जमीन में से एक इंच भी नहीं गुजरता। दस्तावेज़ों में भी यह रास्ता 'कटान का रास्ता' दर्ज है। अतिक्रमण के चलते रास्ते पर पानी भर गया है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है, और किसी भी वाहन का पहुंचना असंभव है। ग्रामीणों ने इस सरकारी रास्ते पर कब्जा कर रखा है और प्रशासन के बार-बार आने के बावजूद भी अतिक्रमण हटाने का नाम नहीं ले रहे हैं, उनका कहना है कि "यह रास्ता नहीं खुलेगा।" सरकार से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे आमजन की इस गंभीर परेशानी को समझते हुए जल्द से जल्द इस रास्ते से अतिक्रमण हटवाने की कृपा करें, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
राजस्थान के झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी तहसील के गांव बागोरा स्थित ढाणी परसाला में एक उच्च स्वास्थ्य केंद्र के रास्ते पर अवैध अतिक्रमण हो गया है, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को हर महीने टीका लगवाने के लिए वहां तक पहुंचने में भारी परेशानी का
सामना करना पड़ रहा है। यह रास्ता पूरी तरह से सरकारी है और किसी की निजी खातेदारी की जमीन में से एक इंच भी नहीं गुजरता। दस्तावेज़ों में भी यह रास्ता 'कटान का रास्ता' दर्ज है। अतिक्रमण के चलते रास्ते पर पानी भर गया है,
जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है, और किसी भी वाहन का पहुंचना असंभव है। ग्रामीणों ने इस सरकारी रास्ते पर कब्जा कर रखा है और प्रशासन के बार-बार आने के बावजूद भी अतिक्रमण हटाने का नाम नहीं ले रहे हैं, उनका कहना है
कि "यह रास्ता नहीं खुलेगा।" सरकार से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे आमजन की इस गंभीर परेशानी को समझते हुए जल्द से जल्द इस रास्ते से अतिक्रमण हटवाने की कृपा करें, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
- राजस्थान के झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी तहसील के गांव बागोरा स्थित ढाणी परसाला में एक उच्च स्वास्थ्य केंद्र के रास्ते पर अवैध अतिक्रमण हो गया है, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को हर महीने टीका लगवाने के लिए वहां तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह रास्ता पूरी तरह से सरकारी है और किसी की निजी खातेदारी की जमीन में से एक इंच भी नहीं गुजरता। दस्तावेज़ों में भी यह रास्ता 'कटान का रास्ता' दर्ज है। अतिक्रमण के चलते रास्ते पर पानी भर गया है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है, और किसी भी वाहन का पहुंचना असंभव है। ग्रामीणों ने इस सरकारी रास्ते पर कब्जा कर रखा है और प्रशासन के बार-बार आने के बावजूद भी अतिक्रमण हटाने का नाम नहीं ले रहे हैं, उनका कहना है कि "यह रास्ता नहीं खुलेगा।" सरकार से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे आमजन की इस गंभीर परेशानी को समझते हुए जल्द से जल्द इस रास्ते से अतिक्रमण हटवाने की कृपा करें, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।4
- राजस्थान के कांग्रेस पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का पारा बेहद गर्म हो गया, जिसके बाद उन्होंने भाजपा को सीधे तौर पर चुनौती दे दी। डोटासरा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी को इतना भी नहीं छेड़ना चाहिए कि कहीं उनका बुढ़ापा ही खराब हो जाए।1
- बगड़ न्यूज़ ने अपने मॉर्निंग अपडेट में झुंझुनूं और राजस्थान से जुड़ी सुबह की प्रमुख खबरें पेश कीं। इस अपडेट में क्षेत्र के ताजा घटनाक्रम, ब्रेकिंग न्यूज और हर महत्वपूर्ण जानकारी सबसे पहले शामिल है।1
- राजस्थान में जल संकट से निपटने के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर और जल संरक्षण के प्रबल समर्थक के.के. गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए सुझावात्मक पत्र पर राजस्थान सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। इसके परिणामस्वरूप, राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण ने जल संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में गांवों के पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, जल आवक मार्गों से अतिक्रमण हटाना, तालाबों की सफाई, जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखना और शहरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रभावी बनाना शामिल है। के.के. गुप्ता ने अपने पूर्व कार्यकाल के दौरान डूंगरपुर नगर परिषद में बावड़ियों, कुओं और तालाबों का जीर्णोद्धार किया था, जिससे प्रतिदिन लगभग 8 लाख लीटर अतिरिक्त पानी उपलब्ध हुआ। इसके साथ ही, 100 सरकारी भवनों और 500 घरों को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में करीब 20 फीट की बढ़ोतरी हुई और पानी की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया। इस मॉडल की सराहना तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में भी की थी, इसे पूरे देश के लिए प्रेरणादायक बताया था। वहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रहे ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत डूंगरपुर जिले में 100 तालाबों का जीर्णोद्धार भी किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को पूरे राजस्थान में लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट पर बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि 'जल है तो कल है' के संकल्प के साथ राजस्थान अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।1
- मंगलवार रात को झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल के पालनागृह में एक नवजात बालिका मिलने से अस्पताल परिसर में हलचल मच गई। कपड़े में लिपटी इस बच्ची की सिसकियां सुनकर चिकित्साकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और उसे सुरक्षित अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना मिलते ही अस्पताल के पीएमओ और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र भाम्बू सहित अन्य चिकित्सा स्टाफ भी वहां पहुंचा। प्रारंभिक जांच में नवजात बालिका का वजन 1850 ग्राम पाया गया और उसका शारीरिक तापमान सामान्य से कम था। मिली जानकारी के अनुसार, बच्ची का जन्म लगभग 34 से 36 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद हुआ प्रतीत हो रहा है। सांस लेने में तकलीफ होने के कारण नवजात को तत्काल सीपैप (CPAP) मशीन पर रखा गया और आवश्यक दवाओं के साथ उपचार शुरू किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फिलहाल बच्ची की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और चिकित्सा टीम उसे बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है।1
- आज के दौर में स्वास्थ्य संबंधी खर्च आम आदमी के बजट पर भारी बोझ बन गए हैं, जहाँ गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा बीमारियों के इलाज और महंगी दवाओं पर चला जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभरी है। इस योजना के तहत देश भर में खुले जन औषधि केंद्रों पर दवाएं 50% से 90% तक कम दाम पर मिलती हैं। हालांकि, जागरूकता की कमी या अफवाहों के कारण कई बार लोग इन सस्ती दवाओं की गुणवत्ता पर शक करने लगते हैं। इन केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं जेनेरिक होती हैं, जिसका अर्थ है कि ये किसी ब्रांड नाम के बजाय दवा में मौजूद मूल सॉल्ट या रासायनिक नाम से बेची जाती हैं। ब्रांडेड दवाओं की ऊँची कीमत में कंपनियों के रिसर्च, पेटेंट, मार्केटिंग और विज्ञापनों का खर्च शामिल होता है, जबकि जेनेरिक दवाओं में ऐसे खर्च नहीं होते, जिससे वे बेहद कम दाम पर उपलब्ध होती हैं और उनका असर ब्रांडेड दवाओं जितना ही प्रभावी होता है। जन औषधि केंद्रों पर सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारियों के साथ-साथ कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं भी किफायती दरों पर उपलब्ध हैं। वर्तमान में यहाँ लगभग 1,759 प्रकार की दवाएं और 280 सर्जिकल उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें मार्च 2025 तक बढ़ाकर क्रमशः 2,000 दवाओं और 300 सर्जिकल उत्पादों तक पहुँचाने का लक्ष्य है। दवाओं के अलावा, यहाँ एंटी-डायबिटिक, कार्डियोवैस्कुलर ड्रग्स, एंटी-कैंसर, एनाल्जेसिक, प्रोटीन पाउडर, सैनिटाइजर, मास्क और ऑक्सीमीटर जैसे आधुनिक स्वास्थ्य उत्पाद भी मिलते हैं। इन दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता; ये आम जनता तक पहुँचने से पहले कंपनी स्तर पर और NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) द्वारा प्रमाणित स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में दो कड़े स्तरों की जाँच से गुजरती हैं, जिसमें लगभग एक हफ्ता लगता है। पूरी तरह खरी उतरने के बाद ही इन्हें बिक्री के लिए भेजा जाता है, जिससे ये 100% सुरक्षित और प्रभावी सुनिश्चित होती हैं। यह परियोजना देश की करोड़ों महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता में भी क्रांतिकारी भूमिका निभा रही है, जहाँ मात्र ₹1 प्रति पैड की दर से उच्च गुणवत्ता वाले सैनिट्री नैपकिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, और अब तक 31 करोड़ से अधिक पैड्स बेचे जा चुके हैं। इस योजना का मूल उद्देश्य केवल दवाएं बेचना नहीं, बल्कि देश के स्वास्थ्य ढांचे में सकारात्मक बदलाव लाना है; आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक चिकित्सा सेवाओं को पहुँचाना, उनकी बचत बढ़ाकर जीवन स्तर में सुधार लाना और स्थानीय युवाओं, फार्मासिस्टों तथा उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। देश के 764 जिलों में से 743 जिलों को कवर करते हुए, जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क बढ़कर 9,082 तक पहुँच चुका है। जेनेरिक दवाओं के फायदों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गुणवत्ता संबंधी भ्रांतियों को दूर करने के लिए फार्मास्यूटिकल्स विभाग हर साल 1 से 7 मार्च तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है, जिसका समापन 7 मार्च को 'औषधि दिवस' के रूप में होता है। कोरोना महामारी जैसी वैश्विक आपदाओं ने कई देशों के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को चुनौती दी थी, लेकिन भारत ने अपने नागरिकों को स्वास्थ्य और बेहतर इलाज की गारंटी दी, साथ ही जन औषधि केंद्रों के माध्यम से बेहद सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं हर घर तक पहुँचाईं। यदि आप अब तक बाजार से महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीद रहे थे, तो अपने पैसों की बचत करें और अगली बार डॉक्टर द्वारा लिखे गए सॉल्ट के अनुसार अपने नजदीकी जन औषधि केंद्र से ही दवाएं खरीदें।1
- जयपुर जिले के भैंसलाना ग्राम पंचायत में लाखों रुपये खर्च कर लगाई गईं सोलर रोड लाइटें आज तक एक दिन भी नहीं जली हैं, जिससे वे केवल शोपीस बनकर रह गई हैं। इन लाइटों के तार टूटे हैं, पैनल टेढ़े हैं और खुद लाइटें खराब पड़ी हैं। पंचायत द्वारा किए गए इस बड़े खर्च के बावजूद ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, बल्कि इससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं। लाइटें न जलने के कारण गर्मियों में रात को अनजान लोग गांव में घूमते हैं, जिनकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है। दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी अंधेरे के कारण स्पष्ट फुटेज नहीं दे पाते, जिससे चोरी की घटनाओं में अपराधियों को पकड़ना असंभव हो गया है। इसके अलावा, रात के समय बहन-बेटियों और महिलाओं का बाहर निकलना भी असुरक्षित हो गया है, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में है। ग्रामीणों ने इस संबंध में पंचायत को कई बार लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन पंचायत प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है और आंखें मूंदे हुए है। 'खबर भैंसलाना की' नामक मीडिया संगठन ने सरपंच और बीडीओ (BDO) साहब से सीधा सवाल किया है कि जब लाइटें जलनी ही नहीं थीं, तो जनता के लाखों रुपये क्यों खर्च किए गए और इसका जिम्मेदार कौन है। संगठन ने मांग की है कि अगले सात दिनों के भीतर इन सोलर लाइटों को चालू किया जाए, अन्यथा अगली रिपोर्ट सीधे कलेक्टर ऑफिस से जारी की जाएगी। यह मुद्दा अधिकारियों तक पहुंचाने और समस्या के समाधान के लिए लोगों से वीडियो साझा करने की अपील की गई है, क्योंकि उनका मानना है कि 'अंधेरा हटेगा, तभी विकास होगा'।1
- झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी तहसील के बागोरा परशाला की ढाणी गांव में उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक जाने वाले रास्ते पर अतिक्रमण की समस्या गंभीर हो गई है। यह रास्ता, जिसे कटान का रास्ता भी बताया गया है, दोनों तरफ से अतिक्रमित है। अतिक्रमण के कारण रास्ते में पानी भर गया है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने इस अतिक्रमण और जलभराव को तुरंत हटाने की मांग की है।4