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संघर्ष से शिखर तक: डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन, विचार और विरासत ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ पत्रकार :- शशिकान्त व्हाट्सऐप :- 9621210326 ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ सण्डीला, हरदोई। भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता की अद्भुत मिसाल है। 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में जन्मे बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प से इतिहास रच दिया। बचपन में भेदभाव, लेकिन हौसले बुलंद :- डॉ. अंबेडकर का बचपन अत्यंत कठिनाइयों में बीता। दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें स्कूल से लेकर समाज तक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्हें कक्षा में अलग बैठाया जाता था और पानी तक छूने की अनुमति नहीं थी। लेकिन इन परिस्थितियों ने उनके इरादों को कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें और मजबूत बनाया। शिक्षा को बनाया हथियार :- अंबेडकर ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने मुंबई से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा हासिल की। वे देश के सबसे अधिक शिक्षित नेताओं में से एक बने और कानून, अर्थशास्त्र व राजनीति में गहरी पकड़ बनाई। समानता और अधिकारों की लड़ाई :- डॉ. अंबेडकर ने जीवनभर सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए कई आंदोलन चलाए। 1927 का महाड़ सत्याग्रह और 1930 का कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन उनके प्रमुख संघर्षों में शामिल हैं। संविधान निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका :- स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण में डॉ. अंबेडकर ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने संविधान में समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों को शामिल कर हर नागरिक को बराबरी का अधिकार दिलाया। उनका यह योगदान भारत के लोकतंत्र की मजबूत नींव बना। महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों के समर्थक :- डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों और श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति और विवाह संबंधी अधिकार दिलाने का प्रयास किया। धर्म परिवर्तन और अंतिम संदेश :- 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाकर सामाजिक समानता और मानवता का संदेश दिया। उसी वर्ष 6 दिसंबर को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों को दिशा दे रहे हैं। विरासत जो आज भी प्रेरित करती है :- डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा, संघर्ष और आत्मविश्वास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। आज भी उनके विचार सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई में मार्गदर्शक बने हुए हैं। 👉 बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

1 day ago
user_शशिकान्त मौर्या पत्रकार
शशिकान्त मौर्या पत्रकार
Journalist Sandila, Hardoi•
1 day ago

संघर्ष से शिखर तक: डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन, विचार और विरासत ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ पत्रकार :- शशिकान्त व्हाट्सऐप :- 9621210326 ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ सण्डीला, हरदोई। भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता की अद्भुत मिसाल है। 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में जन्मे बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प से इतिहास रच दिया। बचपन में भेदभाव, लेकिन हौसले बुलंद :- डॉ. अंबेडकर का बचपन अत्यंत कठिनाइयों में बीता। दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें स्कूल से लेकर समाज तक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्हें कक्षा में अलग बैठाया जाता था और पानी तक छूने की अनुमति नहीं थी। लेकिन इन परिस्थितियों ने उनके इरादों को कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें और मजबूत बनाया। शिक्षा को बनाया हथियार :- अंबेडकर ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने मुंबई से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा हासिल की। वे देश के सबसे अधिक शिक्षित नेताओं में से एक बने और कानून, अर्थशास्त्र व राजनीति में गहरी पकड़ बनाई। समानता और अधिकारों की लड़ाई :- डॉ. अंबेडकर ने जीवनभर सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए कई आंदोलन चलाए। 1927 का महाड़ सत्याग्रह और 1930 का कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन उनके प्रमुख संघर्षों में शामिल हैं। संविधान निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका :- स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण में डॉ. अंबेडकर ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने संविधान में समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों को शामिल कर हर नागरिक को बराबरी का अधिकार दिलाया। उनका यह योगदान भारत के लोकतंत्र की मजबूत नींव बना। महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों के समर्थक :- डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों और श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति और विवाह संबंधी अधिकार दिलाने का प्रयास किया। धर्म परिवर्तन और अंतिम संदेश :- 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाकर सामाजिक समानता और मानवता का संदेश दिया। उसी वर्ष 6 दिसंबर को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों को दिशा दे रहे हैं। विरासत जो आज भी प्रेरित करती है :- डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा, संघर्ष और आत्मविश्वास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। आज भी उनके विचार सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई में मार्गदर्शक बने हुए हैं। 👉 बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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  • ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ उत्तराखंड। प्रधानमंत्री ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन गरीबों, वंचितों और शोषितों को न्याय दिलाने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने देश को एक ऐसी व्यवस्था दी, जिसमें सभी को समान अधिकार और सम्मान मिले। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान सरकार भी उसी भावना के साथ काम कर रही है और समाज के हर वर्ग को सच्चा सामाजिक न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं और नीतियां विशेष रूप से गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं, ताकि समाज में समानता और अवसर सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे बाबासाहेब के आदर्शों को अपनाते हुए एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
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उत्तराखंड। प्रधानमंत्री ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन गरीबों, वंचितों और शोषितों को न्याय दिलाने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने देश को एक ऐसी व्यवस्था दी, जिसमें सभी को समान अधिकार और सम्मान मिले।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान सरकार भी उसी भावना के साथ काम कर रही है और समाज के हर वर्ग को सच्चा सामाजिक न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं और नीतियां विशेष रूप से गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं, ताकि समाज में समानता और अवसर सुनिश्चित हो सकें।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे बाबासाहेब के आदर्शों को अपनाते हुए एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
    user_शशिकान्त मौर्या पत्रकार
    शशिकान्त मौर्या पत्रकार
    Journalist Sandila, Hardoi•
    47 min ago
  • Post by Anoopshukla
    1
    Post by Anoopshukla
    user_Anoopshukla
    Anoopshukla
    Sandila, Hardoi•
    7 hrs ago
  • संविधान के रचियता डॉ0 भीमराव अंबेडकर जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गईं cp maurya मानवी समय न्यूज़ हरदोई जनपद के संडीला नगर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती के अवसर पर भव्य एवं विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा इमलियाबाग मैनचेस्टर मैदान से प्रारंभ होकर सदर बाजार होते हुए बेगमगंज में सम्पन्न हुई। शोभायात्रा के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। छोटा चौराहा पर हसन मक्की एवं समस्त सभासदों द्वारा स्वागत किया गया, वहीं किला मार्केट के पास पूर्व सभासद लताफत द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गल्ला मंडी के पास उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष दिनेश सिंह, शुभम गुप्ता एवं अनुराग त्रिपाठी के नेतृत्व में शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनोज कुमार गौतम (अध्यक्ष), बबलू कुमार (सभासद उपाध्यक्ष), मनोज कुमार बौद्ध (महामंत्री), सरोज कुमार गौतम (कोषाध्यक्ष) सहित अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा सतीश कार्यक्रम सफल बनाने के लिए संडीला कोतवाली प्रभारी विद्यासागर पाल के नेतृत्व में इस कार्यक्रम सफल बनाने में पुलिस महकमा नजर आया भारतीय संविधान के निर्माता, भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती (14 अप्रैल 2026) पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। सामाजिक समानता, ज्ञान और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबासाहेब के विचार हमें एक सशक्त व समतावेशी भारत बनाने के लिए सदैव प्रेरित करते रहें।शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो! बाबासाहेब के इन महान विचारों के साथ अंबेडकर। आइए उनके आदर्शों को अपनाएं। समता, स्वतंत्रता एवं न्याय बंधुत्ता के प्रबल समर्थक डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को कोटि-कोटि नमन। संविधान निर्माता को सलाम, जिन्होंने हमें समानता का अधिकार दिया।समाज में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है सभी एक समान है जैसा कि उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में लिखा है "We, the People of India" यानि कि हम सब पूरा समाज जिसमें हर वर्ग है सभी भारतीय है और एक समान है बाबासाहेब के विचारों का सार: सामाजिक समरसता और समानता। शिक्षा को नारी सशक्तिकरण का हथियार मानना। न्यायपूर्ण समाज का निर्माण । पुनः आप सभी को बाबा साहब डॉ.भीम राव अंबेडकर जयंती "जीवन लंबा नहीं, महान होना चाहिए।" - डॉ. भीमराव शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा
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    संविधान के रचियता डॉ0 भीमराव अंबेडकर जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई  गईं 
cp maurya मानवी समय न्यूज़ 
हरदोई जनपद के संडीला नगर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती के अवसर पर भव्य एवं विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा इमलियाबाग मैनचेस्टर मैदान से प्रारंभ होकर सदर बाजार होते हुए बेगमगंज में सम्पन्न हुई।
शोभायात्रा के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। छोटा चौराहा पर हसन मक्की एवं समस्त सभासदों द्वारा स्वागत किया गया, वहीं किला मार्केट के पास पूर्व सभासद लताफत द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गल्ला मंडी के पास उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष दिनेश सिंह, शुभम गुप्ता एवं अनुराग त्रिपाठी के नेतृत्व में शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनोज कुमार गौतम (अध्यक्ष), बबलू कुमार (सभासद उपाध्यक्ष), मनोज कुमार बौद्ध (महामंत्री), सरोज कुमार गौतम (कोषाध्यक्ष) सहित अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा सतीश कार्यक्रम सफल बनाने के लिए संडीला कोतवाली प्रभारी विद्यासागर पाल के नेतृत्व में इस कार्यक्रम सफल बनाने में पुलिस महकमा नजर आया 
भारतीय संविधान के निर्माता, भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती (14 अप्रैल 2026) पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। सामाजिक समानता, ज्ञान और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबासाहेब के विचार हमें एक सशक्त व समतावेशी भारत बनाने के लिए सदैव प्रेरित करते रहें।शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो! बाबासाहेब के इन महान विचारों के साथ 
अंबेडकर। आइए उनके आदर्शों को अपनाएं।
समता, स्वतंत्रता एवं न्याय बंधुत्ता के प्रबल समर्थक डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को कोटि-कोटि नमन।
संविधान निर्माता को सलाम, जिन्होंने हमें समानता का अधिकार दिया।समाज में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है सभी एक समान है जैसा कि उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में लिखा है  "We, the People of India" यानि कि हम सब पूरा समाज जिसमें हर वर्ग है सभी भारतीय है और एक समान है 
बाबासाहेब के विचारों का सार:
सामाजिक समरसता और समानता।
शिक्षा को नारी सशक्तिकरण का हथियार मानना।
न्यायपूर्ण समाज का निर्माण ।
पुनः आप सभी को बाबा साहब डॉ.भीम राव अंबेडकर जयंती
"जीवन लंबा नहीं, महान होना चाहिए।" - डॉ. भीमराव
शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा
    user_Cp Maurya
    Cp Maurya
    संडीला, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • Post by शुभम तिवारी भरावन हरदोई
    1
    Post by शुभम तिवारी भरावन हरदोई
    user_शुभम तिवारी भरावन हरदोई
    शुभम तिवारी भरावन हरदोई
    संडीला, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • बांगरमऊ में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर नगर में भव्य भीम शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें तहसील क्षेत्र से सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभायात्रा की शुरुआत बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। पूरे नगर को उत्सव के रंग में रंगा गया, जगह-जगह आकर्षक स्वागत द्वार बनाए गए और पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर एसडीएम बृजेंद्र मोहन शुक्ला, सीओ संतोष कुमार सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष राम जी गुप्ता, कोतवाल अखिलेश चंद्र पाण्डेय, पूर्व चेयरमैन इजहार खां 'गुड्डू' और सपा नेता मोफिश, मुन्ना अल्वी सहित कई गणमान्य व्यक्ति पहुंचे। उन्होंने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कोतवाल अखिलेश चंद्र पांडे ने बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने और समाज में समरसता बनाए रखने का संदेश दिया। यात्रा में शामिल झांकियों ने बाबा साहेब के जीवन, उनके संघर्ष, संविधान निर्माण में उनके योगदान और सामाजिक सुधारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और झांकियां दर्शकों का मन मोह रही थीं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते युवा, हाथों में झंडे और पोस्टर लिए लोग तथा 'जय भीम' और 'बाबा साहब अमर रहें' के नारों से पूरा नगर गूंज उठा। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए विभिन्न इलाकों में पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने पानी, शरबत और अन्य व्यवस्थाओं के साथ प्रतिभागियों का स्वागत किया। अध्यक्ष राम जी गुप्ता ने भंडारे का आयोजन भी किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सतत निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। अध्यक्ष रामजी गुप्ता ने कहा कि बाबा साहब केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि महान समाज सुधारक थे। उन्होंने जीवन भर समानता, शिक्षा और न्याय के लिए संघर्ष किया। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए।
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    बांगरमऊ में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर नगर में भव्य भीम शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें तहसील क्षेत्र से सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शोभायात्रा की शुरुआत बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। पूरे नगर को उत्सव के रंग में रंगा गया, जगह-जगह आकर्षक स्वागत द्वार बनाए गए और पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का जोरदार स्वागत किया गया।
इस अवसर पर एसडीएम बृजेंद्र मोहन शुक्ला, सीओ संतोष कुमार सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष राम जी गुप्ता, कोतवाल अखिलेश चंद्र पाण्डेय, पूर्व चेयरमैन इजहार खां 'गुड्डू' और सपा नेता मोफिश, मुन्ना अल्वी सहित कई गणमान्य व्यक्ति पहुंचे। उन्होंने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कोतवाल अखिलेश चंद्र पांडे ने बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने और समाज में समरसता बनाए रखने का संदेश दिया। यात्रा में शामिल झांकियों ने बाबा साहेब के जीवन, उनके संघर्ष, संविधान निर्माण में उनके योगदान और सामाजिक सुधारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और झांकियां दर्शकों का मन मोह रही थीं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते युवा, हाथों में झंडे और पोस्टर लिए लोग तथा 'जय भीम' और 'बाबा साहब अमर रहें' के नारों से पूरा नगर गूंज उठा।
शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए विभिन्न इलाकों में पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने पानी, शरबत और अन्य व्यवस्थाओं के साथ प्रतिभागियों का स्वागत किया। अध्यक्ष राम जी गुप्ता ने भंडारे का आयोजन भी किया।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सतत निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। अध्यक्ष रामजी गुप्ता ने कहा कि बाबा साहब केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि महान समाज सुधारक थे। उन्होंने जीवन भर समानता, शिक्षा और न्याय के लिए संघर्ष किया।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए।
    user_राजकुमार सोनी पत्रकार
    राजकुमार सोनी पत्रकार
    6265001700017450 बांगरमऊ, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • Post by Sandeep Pasi
    1
    Post by Sandeep Pasi
    user_Sandeep Pasi
    Sandeep Pasi
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by Shiva Gautam
    1
    Post by Shiva Gautam
    user_Shiva Gautam
    Shiva Gautam
    Engineer बिलग्राम, हरदोई, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ रिपोर्ट :- शशिकान्त व्हाट्सऐप :- 9621210326 ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ संडीला/हरदोई। देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। एक निजी कर्मचारी की दर्दभरी जुबानी हालात की गंभीरता को बयां करती है। वह कहता है, “हम अपने बच्चों को भूखा सुलाते हैं, सीने से लगाकर लोरी सुनाते हैं ताकि उन्हें भूख का एहसास न हो।” महज 10 हजार रुपये की मामूली सैलरी में परिवार चलाना उसके लिए रोज़ की जंग बन चुका है। वहीं, एक मजदूर महिला की आपबीती व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। महिला का आरोप है कि पुलिस की मारपीट से वह बुरी तरह घायल हो गई। रोते हुए वह कहती है, “अगर काम पर नहीं जाएंगे तो घर में खाना कौन खिलाएगा? मेरे पास दवाई के भी पैसे नहीं हैं।” यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रोने लगती है। ये घटनाएं समाज के उस तबके की सच्चाई उजागर करती हैं, जो हर दिन संघर्ष कर रहा है, लेकिन उसकी आवाज़ अक्सर दबकर रह जाती है। महंगाई का बोझ: अगर एक सामान्य परिवार (हम दो—हमारे दो) के मासिक खर्च पर नजर डालें, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है— दूध: ₹1800 नाश्ता (सुबह-शाम): ₹1200 गैस सिलेंडर: ₹950 बिजली बिल: ₹1000 स्कूल फीस: ₹800 बच्चों की कॉपी-पेंसिल व अन्य खर्च: ₹1000 हरी सब्जियां: ₹500 आलू, प्याज, लहसुन: ₹1000 राशन (तेल, मसाले, चावल, दाल): ₹3000 आने-जाने का खर्च: ₹700 सामान्य बीमारी: ₹300 कुल अनुमानित खर्च: ₹12,250 प्रति माह इन आंकड़ों से साफ है कि एक सामान्य परिवार का खर्च 10-12 हजार रुपये से कहीं अधिक है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की आय इससे भी कम है। बढ़ती खाई पर सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों और प्रभावशाली वर्ग के संरक्षण के चलते मजदूरों और गरीबों के अधिकारों का हनन हो रहा है। नतीजतन, अमीर और ज्यादा अमीर होता जा रहा है, जबकि गरीब और अधिक कमजोर होता जा रहा है। निष्कर्ष: देश की तरक्की के बड़े-बड़े दावों के बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि आम आदमी को उसका हक आखिर कब मिलेगा? क्या व्यवस्था इस बढ़ती असमानता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या फिर गरीब यूं ही दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता रहेगा? महंगाई की मार से जनता परेशान...? आखिर जवाब कौन देगा?
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    ★★★★★★★★★★★★★★★★★★
रिपोर्ट :- शशिकान्त
व्हाट्सऐप :- 9621210326
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संडीला/हरदोई। देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। एक निजी कर्मचारी की दर्दभरी जुबानी हालात की गंभीरता को बयां करती है। वह कहता है, “हम अपने बच्चों को भूखा सुलाते हैं, सीने से लगाकर लोरी सुनाते हैं ताकि उन्हें भूख का एहसास न हो।” महज 10 हजार रुपये की मामूली सैलरी में परिवार चलाना उसके लिए रोज़ की जंग बन चुका है।
वहीं, एक मजदूर महिला की आपबीती व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। महिला का आरोप है कि पुलिस की मारपीट से वह बुरी तरह घायल हो गई। रोते हुए वह कहती है, “अगर काम पर नहीं जाएंगे तो घर में खाना कौन खिलाएगा? मेरे पास दवाई के भी पैसे नहीं हैं।” यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रोने लगती है।
ये घटनाएं समाज के उस तबके की सच्चाई उजागर करती हैं, जो हर दिन संघर्ष कर रहा है, लेकिन उसकी आवाज़ अक्सर दबकर रह जाती है।
महंगाई का बोझ:
अगर एक सामान्य परिवार (हम दो—हमारे दो) के मासिक खर्च पर नजर डालें, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है—
दूध: ₹1800
नाश्ता (सुबह-शाम): ₹1200
गैस सिलेंडर: ₹950
बिजली बिल: ₹1000
स्कूल फीस: ₹800
बच्चों की कॉपी-पेंसिल व अन्य खर्च: ₹1000
हरी सब्जियां: ₹500
आलू, प्याज, लहसुन: ₹1000
राशन (तेल, मसाले, चावल, दाल): ₹3000
आने-जाने का खर्च: ₹700
सामान्य बीमारी: ₹300
कुल अनुमानित खर्च: ₹12,250 प्रति माह
इन आंकड़ों से साफ है कि एक सामान्य परिवार का खर्च 10-12 हजार रुपये से कहीं अधिक है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की आय इससे भी कम है।
बढ़ती खाई पर सवाल:
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों और प्रभावशाली वर्ग के संरक्षण के चलते मजदूरों और गरीबों के अधिकारों का हनन हो रहा है। नतीजतन, अमीर और ज्यादा अमीर होता जा रहा है, जबकि गरीब और अधिक कमजोर होता जा रहा है।
निष्कर्ष:
देश की तरक्की के बड़े-बड़े दावों के बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि आम आदमी को उसका हक आखिर कब मिलेगा? क्या व्यवस्था इस बढ़ती असमानता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगी, या फिर गरीब यूं ही दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता रहेगा?
महंगाई की मार से जनता परेशान...?
आखिर जवाब कौन देगा?
    user_शशिकान्त मौर्या पत्रकार
    शशिकान्त मौर्या पत्रकार
    Journalist Sandila, Hardoi•
    1 hr ago
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