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बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में स्थित पवन वाटिका इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है, जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य, घने शाल वन, डेम में नौका विहार और बच्चों के लिए विकसित चिल्ड्रन पार्क लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। प्रतिदिन यहाँ 500 से 1000 पर्यटक घूमने पहुँच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा कर पर्यटक इसकी खूबसूरती की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रामानुजगंज से सटे झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ आ रहे हैं, और छुट्टियों के दिनों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो जाती है। चारों ओर फैली हरियाली और शाल के लंबे वृक्ष यहाँ के प्राकृतिक वातावरण को और भी सुकूनभरा बनाते हैं। वाटिका के बीच बने डेम में नौका विहार पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है, जिसका संचालन महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। परिसर की साफ-सफाई और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे पर्यटकों को स्वच्छ और सुंदर माहौल मिलता है। सुबह 5 बजे से 7 बजे तक शहर के लोग मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम के लिए पवन वाटिका आते हैं, जबकि सुबह 8 बजे से बाहरी पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है और यह क्रम देर शाम तक जारी रहता है। बच्चों के मनोरंजन के लिए वाटिका में एक चिल्ड्रन पार्क भी बनाया गया है, जहाँ झूले और विभिन्न खेल गतिविधियाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परिसर में काजू सहित कई फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण पवन वाटिका अब क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहाँ और सुविधाओं का विस्तार किया जाए, तो यह स्थल आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

19 hrs ago
user_Balrampur
Balrampur
Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
19 hrs ago

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में स्थित पवन वाटिका इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है, जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य, घने शाल वन, डेम में नौका विहार और बच्चों के लिए विकसित चिल्ड्रन पार्क लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। प्रतिदिन यहाँ 500 से 1000 पर्यटक घूमने पहुँच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा कर पर्यटक इसकी खूबसूरती की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रामानुजगंज से सटे झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ आ रहे हैं, और छुट्टियों के दिनों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो जाती है। चारों ओर फैली हरियाली और शाल के लंबे वृक्ष यहाँ के प्राकृतिक वातावरण को और भी सुकूनभरा बनाते हैं। वाटिका के बीच बने डेम में नौका विहार पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है, जिसका संचालन महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। परिसर की साफ-सफाई और रखरखाव पर भी

विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे पर्यटकों को स्वच्छ और सुंदर माहौल मिलता है। सुबह 5 बजे से 7 बजे तक शहर के लोग मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम के लिए पवन वाटिका आते हैं, जबकि सुबह 8 बजे से बाहरी पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है और यह क्रम देर शाम तक जारी रहता है। बच्चों के मनोरंजन के लिए वाटिका में एक चिल्ड्रन पार्क भी बनाया गया है, जहाँ झूले और विभिन्न खेल गतिविधियाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परिसर में काजू सहित कई फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण पवन वाटिका अब क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहाँ और सुविधाओं का विस्तार किया जाए, तो यह स्थल आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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  • छत्तीसगढ़ राज्य के DGP अरुण देव गौतम, जो हर मंगलवार को पुलिस कर्मचारियों के परिजनों से मिलते और उनकी परेशानियाँ सुनते हैं, ने 30 जून 2026 को एक अनोखा फैसला लिया। इस दिन DGP से मिलने के लिए 200 से अधिक निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिवार पहुँचे थे, जो पिछले 8-10 वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। इन परिवारों ने DGP से मिलने के लिए चार दिन पहले ही लिखित सूचना दी थी, लेकिन DGP ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया, जबकि वे अन्य लोगों से मिलते रहे। इस घटना से यह संकेत मिलता है कि DGP फिलहाल लंबे समय से नक्सल क्षेत्र में तैनात इन कर्मचारियों का स्थानांतरण करने के पक्ष में नहीं हैं। निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिजनों, जिनमें उनके माता-पिता, पत्नियाँ, बच्चे और भाई-बहन शामिल थे, में इस बात को लेकर काफी रोष देखा गया। वे सभी DGP से यह जानने आए थे कि उनके स्थानांतरण कब किए जाएँगे, लेकिन DGP ने सीधे मिलने से इनकार करके जवाब देने से परहेज किया। इन सभी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों ने अपने स्थानांतरण के लिए कई बार आवेदन किया है, जिन पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर पुलिस विभाग ने जवाब दिया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों का मैदानी इलाकों में स्थानांतरण हर तीन साल में किया जाता है। ऐसे में यह समझ से परे है कि अगर यह नियम लागू है, तो फिर 200 से अधिक निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8-10 साल से नक्सल क्षेत्रों में कैसे फंसे हुए हैं। सँयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने DGP के इस रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि DGP चार घंटे का पॉडकास्ट कर सकते हैं, लेकिन चार दिन पहले से सूचना देने के बाद भी पुलिस परिवार के सदस्यों से एक मिनट भी मिलकर उनकी समस्या का समाधान नहीं कर सकते। दीवान ने यह भी कहा कि यदि DGP पर कोई दबाव है, तो वे उन्हें बताएँ ताकि संघ सीधे दबाव बनाने वाले व्यक्ति से बात कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि DGP ने पुलिस मुख्यालय को पुलिस बल से घेरकर छावनी बना दिया और परिवार के सदस्यों से मिलने से इनकार कर दिया, जिसका सीधा अर्थ है कि उनके पास सवालों के जवाब नहीं हैं। दीवान ने इसे एक निंदनीय कार्य बताया और कहा कि DGP ने पुलिस परिवार से मुलाकात न करके यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी मुद्दे पर स्वयं निर्णय लेने में हिचक रहे हैं और किसी और के निर्देश का पालन कर रहे हैं। उनके इस कृत्य से पूरे पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों और उनके परिजनों को निराशा हुई है, और पुलिस परिवार के बुजुर्ग माता-पिता, बच्चे और महिलाएँ इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।
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    छत्तीसगढ़ राज्य के DGP अरुण देव गौतम, जो हर मंगलवार को पुलिस कर्मचारियों के परिजनों से मिलते और उनकी परेशानियाँ सुनते हैं, ने 30 जून 2026 को एक अनोखा फैसला लिया। इस दिन DGP से मिलने के लिए 200 से अधिक निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिवार पहुँचे थे, जो पिछले 8-10 वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। इन परिवारों ने DGP से मिलने के लिए चार दिन पहले ही लिखित सूचना दी थी, लेकिन DGP ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया, जबकि वे अन्य लोगों से मिलते रहे। इस घटना से यह संकेत मिलता है कि DGP फिलहाल लंबे समय से नक्सल क्षेत्र में तैनात इन कर्मचारियों का स्थानांतरण करने के पक्ष में नहीं हैं।

निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिजनों, जिनमें उनके माता-पिता, पत्नियाँ, बच्चे और भाई-बहन शामिल थे, में इस बात को लेकर काफी रोष देखा गया। वे सभी DGP से यह जानने आए थे कि उनके स्थानांतरण कब किए जाएँगे, लेकिन DGP ने सीधे मिलने से इनकार करके जवाब देने से परहेज किया। इन सभी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों ने अपने स्थानांतरण के लिए कई बार आवेदन किया है, जिन पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर पुलिस विभाग ने जवाब दिया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों का मैदानी इलाकों में स्थानांतरण हर तीन साल में किया जाता है। ऐसे में यह समझ से परे है कि अगर यह नियम लागू है, तो फिर 200 से अधिक निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8-10 साल से नक्सल क्षेत्रों में कैसे फंसे हुए हैं।

सँयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने DGP के इस रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि DGP चार घंटे का पॉडकास्ट कर सकते हैं, लेकिन चार दिन पहले से सूचना देने के बाद भी पुलिस परिवार के सदस्यों से एक मिनट भी मिलकर उनकी समस्या का समाधान नहीं कर सकते। दीवान ने यह भी कहा कि यदि DGP पर कोई दबाव है, तो वे उन्हें बताएँ ताकि संघ सीधे दबाव बनाने वाले व्यक्ति से बात कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि DGP ने पुलिस मुख्यालय को पुलिस बल से घेरकर छावनी बना दिया और परिवार के सदस्यों से मिलने से इनकार कर दिया, जिसका सीधा अर्थ है कि उनके पास सवालों के जवाब नहीं हैं। दीवान ने इसे एक निंदनीय कार्य बताया और कहा कि DGP ने पुलिस परिवार से मुलाकात न करके यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी मुद्दे पर स्वयं निर्णय लेने में हिचक रहे हैं और किसी और के निर्देश का पालन कर रहे हैं। उनके इस कृत्य से पूरे पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों और उनके परिजनों को निराशा हुई है, और पुलिस परिवार के बुजुर्ग माता-पिता, बच्चे और महिलाएँ इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पुलिस द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशानुसार, यह अभियान जून से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इसके तहत जिले के सभी थाना एवं चौकी क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों, हाट-बाजारों और ग्रामीण इलाकों में 'चलित थाना' लगाकर लोगों को कानून के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के निर्देशन में चल रहे इस अभियान में नागरिकों को सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, राष्ट्र की एकता में उनके योगदान के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रमुख प्रावधानों, नए आपराधिक कानूनों और नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों पर भी विस्तार से समझाया जा रहा है।
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    बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पुलिस द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशानुसार, यह अभियान जून से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इसके तहत जिले के सभी थाना एवं चौकी क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों, हाट-बाजारों और ग्रामीण इलाकों में 'चलित थाना' लगाकर लोगों को कानून के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के निर्देशन में चल रहे इस अभियान में नागरिकों को सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, राष्ट्र की एकता में उनके योगदान के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रमुख प्रावधानों, नए आपराधिक कानूनों और नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों पर भी विस्तार से समझाया जा रहा है।
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड के 50 से अधिक किसानों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक सूत्रीय मांग का ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि समर्थन मूल्य पर बेची गई धान की बकाया राशि उन्हें अब तक नहीं मिली है, क्योंकि उनके नाम पर सहकारी बैंक से फर्जी तरीके से लोन निकाल लिया गया है, जिसके कारण उनके बैंक खाते होल्ड कर दिए गए हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अन्य किसानों की तरह धान बेची थी, लेकिन भुगतान उनके खातों में नहीं पहुंचा। लगातार सहकारी समिति और बैंक के चक्कर लगाने पर उन्हें पता चला कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम से ऋण स्वीकृत कर राशि निकाल ली गई है। किसानों ने दृढ़ता से कहा कि उन्होंने कभी कोई लोन नहीं लिया, फिर भी उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासनिक जांच के चलते उनके बैंक खाते होल्ड कर दिए गए हैं, जिससे धान भुगतान की राशि अटक गई है। किसानों ने एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण भी दिया जो संबंधित अवधि में जेल में था, फिर भी उसके नाम पर लोन निकाल लिया गया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से फर्जी लोन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और जल्द से जल्द धान का भुगतान कराने की मांग की। वहीं, अतिरिक्त तहसीलदार जितेंद्र डहरिया ने किसानों से ज्ञापन प्राप्त करते हुए बताया कि इसे नियमानुसार राज्य सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर के समक्ष भी अपनी बात रखेगा और मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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    बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड के 50 से अधिक किसानों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक सूत्रीय मांग का ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि समर्थन मूल्य पर बेची गई धान की बकाया राशि उन्हें अब तक नहीं मिली है, क्योंकि उनके नाम पर सहकारी बैंक से फर्जी तरीके से लोन निकाल लिया गया है, जिसके कारण उनके बैंक खाते होल्ड कर दिए गए हैं।

किसानों का कहना है कि उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अन्य किसानों की तरह धान बेची थी, लेकिन भुगतान उनके खातों में नहीं पहुंचा। लगातार सहकारी समिति और बैंक के चक्कर लगाने पर उन्हें पता चला कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम से ऋण स्वीकृत कर राशि निकाल ली गई है। किसानों ने दृढ़ता से कहा कि उन्होंने कभी कोई लोन नहीं लिया, फिर भी उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासनिक जांच के चलते उनके बैंक खाते होल्ड कर दिए गए हैं, जिससे धान भुगतान की राशि अटक गई है। किसानों ने एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण भी दिया जो संबंधित अवधि में जेल में था, फिर भी उसके नाम पर लोन निकाल लिया गया।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से फर्जी लोन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और जल्द से जल्द धान का भुगतान कराने की मांग की। वहीं, अतिरिक्त तहसीलदार जितेंद्र डहरिया ने किसानों से ज्ञापन प्राप्त करते हुए बताया कि इसे नियमानुसार राज्य सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर के समक्ष भी अपनी बात रखेगा और मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, रंका प्रखंड में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया है। सोमवार को रंका व्यापार मंडल परिसर स्थित बूथ संख्या-402 पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला तोपनो ने की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित बनाना है, जिसके लिए 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक पूरे प्रखंड में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत, प्रत्येक मतदान केंद्र क्षेत्र में बीएलओ एवं बीएलओ-2 घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस प्रक्रिया में पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, मृत अथवा स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, और नाम, पता या अन्य विवरणों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। बीडीओ ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव प्रक्रिया के लिए एक शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बीएलओ और बीएलओ-2 निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक प्रपत्र भरवाने, नए मतदाताओं का पंजीकरण कराने और त्रुटियों का सुधार करने का कार्य करेंगे। बीडीओ तोपनो ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब बीएलओ सत्यापन के लिए उनके घर पहुंचें तो वे पूरा सहयोग करें और आयु, पहचान तथा निवास से संबंधित आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए। उन्होंने उन लोगों से भी आवेदन करने का आग्रह किया है जिनकी आयु निर्धारित तिथि तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा लोगों को जागरूक करने की अपील की, और कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
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    भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, रंका प्रखंड में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया है। सोमवार को रंका व्यापार मंडल परिसर स्थित बूथ संख्या-402 पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला तोपनो ने की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित बनाना है, जिसके लिए 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक पूरे प्रखंड में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा।

अभियान के तहत, प्रत्येक मतदान केंद्र क्षेत्र में बीएलओ एवं बीएलओ-2 घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस प्रक्रिया में पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, मृत अथवा स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, और नाम, पता या अन्य विवरणों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। बीडीओ ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव प्रक्रिया के लिए एक शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बीएलओ और बीएलओ-2 निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक प्रपत्र भरवाने, नए मतदाताओं का पंजीकरण कराने और त्रुटियों का सुधार करने का कार्य करेंगे।

बीडीओ तोपनो ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब बीएलओ सत्यापन के लिए उनके घर पहुंचें तो वे पूरा सहयोग करें और आयु, पहचान तथा निवास से संबंधित आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए। उन्होंने उन लोगों से भी आवेदन करने का आग्रह किया है जिनकी आयु निर्धारित तिथि तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा लोगों को जागरूक करने की अपील की, और कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • गढ़वा जिले के चिनिया प्रखंड में सोमवार को 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का पल्स पोलियो अभियान जोर-शोर से शुरू किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को यह जीवनरक्षक दवा पिला रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा इससे वंचित न रहे। इस अभियान के दौरान, चिनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एमपीडब्ल्यू लाल मोहम्मद अंसारी और एएनएम बबीता कुमारी ने पंचायत के सभी सहिया साथियों के साथ मिलकर चिनिया मुख्यालय और रानीचेरी सहित कई गांवों का दौरा किया और बच्चों का टीकाकरण किया। स्वास्थ्यकर्मियों ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे 0 से 5 वर्ष के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं और इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। चिनिया में पल्स पोलियो अभियान ने अब गति पकड़ ली है।
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    गढ़वा जिले के चिनिया प्रखंड में सोमवार को 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का पल्स पोलियो अभियान जोर-शोर से शुरू किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को यह जीवनरक्षक दवा पिला रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा इससे वंचित न रहे।

इस अभियान के दौरान, चिनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एमपीडब्ल्यू लाल मोहम्मद अंसारी और एएनएम बबीता कुमारी ने पंचायत के सभी सहिया साथियों के साथ मिलकर चिनिया मुख्यालय और रानीचेरी सहित कई गांवों का दौरा किया और बच्चों का टीकाकरण किया। स्वास्थ्यकर्मियों ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे 0 से 5 वर्ष के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं और इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। चिनिया में पल्स पोलियो अभियान ने अब गति पकड़ ली है।
    user_Hemant Kumar
    Hemant Kumar
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    21 hrs ago
  • संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में दिनांक 23 जून 2026 से 30 जून 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान" के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं तथा स्थानीय समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर एक स्वस्थ, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना था। अभियान की शुरुआत 23 जून 2026 को गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम से हुई, जहाँ विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों पर आधारित जागरूकता वीडियो दिखाए गए। इस दौरान विद्यार्थियों ने "नशा मुक्ति मित्र" के रूप में Nasha Mukt Bharat Abhiyaan Portal पर स्वयं को पंजीकृत किया, साथ ही सिग्नेचर कैंपेन और प्रतिज्ञा ग्रहण समारोह भी आयोजित किए गए, जिसमें नशा मुक्त समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया। इसके अतिरिक्त, अभियान में नशा मुक्ति लोकगीत, जागरूकता सृजन कार्यक्रम, इंटरएक्टिव सत्र, Testimonial Sharing और Social Media Campaign जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी शामिल थे। दिनांक 25 जून 2026 को नशा मुक्ति के समर्थन में एक बाइक रैली, मानव श्रृंखला और सामूहिक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाइक रैली के माध्यम से महाविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने पूरे क्षेत्र में नशा विरोधी संदेश फैलाया, जबकि मानव श्रृंखला ने समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। सामूहिक चर्चा में विद्यार्थियों ने नशे के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श किया। 29 जून 2026 को एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें जनजातीय व कांग्रेस नेता अजीत पाल कुजूर और स्थानीय पत्रकार सूरज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने नशे की बुराइयों, उसके दुष्परिणामों तथा समाज व परिवार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। इस अवसर पर, प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने अपने संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को कमजोर करता है, और एक विकसित भारत तभी संभव है जब युवा नशामुक्त, शिक्षित, अनुशासित और जागरूक हों। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह करते हुए अभियान की सफलता के लिए सभी विभागों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। महाविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों, शिक्षकों के समर्पण और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान अत्यधिक सफल रहा, जिसने न केवल जागरूकता फैलाई बल्कि नशामुक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूत किया।
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    संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में दिनांक 23 जून 2026 से 30 जून 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान" के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं तथा स्थानीय समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर एक स्वस्थ, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।

अभियान की शुरुआत 23 जून 2026 को गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम से हुई, जहाँ विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों पर आधारित जागरूकता वीडियो दिखाए गए। इस दौरान विद्यार्थियों ने "नशा मुक्ति मित्र" के रूप में Nasha Mukt Bharat Abhiyaan Portal पर स्वयं को पंजीकृत किया, साथ ही सिग्नेचर कैंपेन और प्रतिज्ञा ग्रहण समारोह भी आयोजित किए गए, जिसमें नशा मुक्त समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया। इसके अतिरिक्त, अभियान में नशा मुक्ति लोकगीत, जागरूकता सृजन कार्यक्रम, इंटरएक्टिव सत्र, Testimonial Sharing और Social Media Campaign जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी शामिल थे।

दिनांक 25 जून 2026 को नशा मुक्ति के समर्थन में एक बाइक रैली, मानव श्रृंखला और सामूहिक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाइक रैली के माध्यम से महाविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने पूरे क्षेत्र में नशा विरोधी संदेश फैलाया, जबकि मानव श्रृंखला ने समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। सामूहिक चर्चा में विद्यार्थियों ने नशे के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श किया। 29 जून 2026 को एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें जनजातीय व कांग्रेस नेता अजीत पाल कुजूर और स्थानीय पत्रकार सूरज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने नशे की बुराइयों, उसके दुष्परिणामों तथा समाज व परिवार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने अपने संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को कमजोर करता है, और एक विकसित भारत तभी संभव है जब युवा नशामुक्त, शिक्षित, अनुशासित और जागरूक हों। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह करते हुए अभियान की सफलता के लिए सभी विभागों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। महाविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों, शिक्षकों के समर्पण और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान अत्यधिक सफल रहा, जिसने न केवल जागरूकता फैलाई बल्कि नशामुक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूत किया।
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    आदर्श मोबाइल एण्ड रेलवे टिकट
    Mobile Store महुआडांड़, लातेहार, झारखंड•
    12 hrs ago
  • बेतला नेशनल पार्क को आगामी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए बंद किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान कुल तीन महीनों के लिए बंद रहेगा।
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    बेतला नेशनल पार्क को आगामी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए बंद किया जाएगा। राष्ट्रीय उद्यान कुल तीन महीनों के लिए बंद रहेगा।
    user_Sonu Ram
    Sonu Ram
    Local News Reporter बरवाडीह, लातेहार, झारखंड•
    20 hrs ago
  • बलरामपुर जिले के ऐतिहासिक तातापानी साप्ताहिक बाजार में अवैध कब्जों के कारण खरीदार और ग्रामीण गंभीर रूप से परेशान हैं, जबकि जिले में अवैध कब्जों पर प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है। रसूखदारों और भू-माफियाओं ने बाजार की बेशकीमती सरकारी जमीन और मुख्य रास्ते पर ऐसा अवैध कब्जा जमाया है, जिससे दूर-दूर से आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से बाजार जाने वाले मुख्य रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर अपना निवास बना लिया है। हद तो तब हो जाती है, जब बाजार आने वाले लोग उस रास्ते से अपनी गाड़ी पार करने की कोशिश करते हैं, तो कब्जाधारी सीधे मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सड़क किनारे की इस बेशकीमती बाजार भूमि पर न सिर्फ रहने के लिए घर बनाए गए हैं, बल्कि कई लोगों ने दुकानें खड़ी करके उन्हें भारी-भरकम किराए पर भी चढ़ा दिया है। परेशान खरीदारों के अनुसार, उनसे ₹30 बजरी बाजार टैक्स भी वसूला जाता है, लेकिन उन्हें पैदल चलने तक का रास्ता नहीं मिलता। अगर गलती से किसी कब्जाधारी की दुकान का त्रिपाल थोड़ा भी फट जाए या नुकसान हो जाए, तो वे तुरंत उनसे जबरन पैसे वसूलने लगते हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी कलेक्टर कार्यालय में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई थी और कई बार ज्ञापन भी सौंपे, आवाज उठाई गई, लेकिन जिला प्रशासन ने आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों को लगता है कि प्रशासन की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। शासन-प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब बेबस ग्रामीणों ने एक बार फिर मीडिया का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो लोग अवैध कब्जा करके, हौसले बुलंद कर वहां रह रहे हैं और दुकानें किराए पर चला रहे हैं, उन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। अब यह देखना होगा कि पूरे जिले में अवैध निर्माण को ढहाने वाला बलरामपुर प्रशासन का बुलडोजर तातापानी के इस सालों पुराने अवैध कब्जे पर कब चलता है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया जाएगा।
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    बलरामपुर जिले के ऐतिहासिक तातापानी साप्ताहिक बाजार में अवैध कब्जों के कारण खरीदार और ग्रामीण गंभीर रूप से परेशान हैं, जबकि जिले में अवैध कब्जों पर प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है। रसूखदारों और भू-माफियाओं ने बाजार की बेशकीमती सरकारी जमीन और मुख्य रास्ते पर ऐसा अवैध कब्जा जमाया है, जिससे दूर-दूर से आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से बाजार जाने वाले मुख्य रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर अपना निवास बना लिया है। हद तो तब हो जाती है, जब बाजार आने वाले लोग उस रास्ते से अपनी गाड़ी पार करने की कोशिश करते हैं, तो कब्जाधारी सीधे मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सड़क किनारे की इस बेशकीमती बाजार भूमि पर न सिर्फ रहने के लिए घर बनाए गए हैं, बल्कि कई लोगों ने दुकानें खड़ी करके उन्हें भारी-भरकम किराए पर भी चढ़ा दिया है। परेशान खरीदारों के अनुसार, उनसे ₹30 बजरी बाजार टैक्स भी वसूला जाता है, लेकिन उन्हें पैदल चलने तक का रास्ता नहीं मिलता। अगर गलती से किसी कब्जाधारी की दुकान का त्रिपाल थोड़ा भी फट जाए या नुकसान हो जाए, तो वे तुरंत उनसे जबरन पैसे वसूलने लगते हैं।

इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी कलेक्टर कार्यालय में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई थी और कई बार ज्ञापन भी सौंपे, आवाज उठाई गई, लेकिन जिला प्रशासन ने आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों को लगता है कि प्रशासन की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। शासन-प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब बेबस ग्रामीणों ने एक बार फिर मीडिया का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो लोग अवैध कब्जा करके, हौसले बुलंद कर वहां रह रहे हैं और दुकानें किराए पर चला रहे हैं, उन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।

अब यह देखना होगा कि पूरे जिले में अवैध निर्माण को ढहाने वाला बलरामपुर प्रशासन का बुलडोजर तातापानी के इस सालों पुराने अवैध कब्जे पर कब चलता है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया जाएगा।
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
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