बलरामपुर जिले के ऐतिहासिक तातापानी साप्ताहिक बाजार में अवैध कब्जों के कारण खरीदार और ग्रामीण गंभीर रूप से परेशान हैं, जबकि जिले में अवैध कब्जों पर प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है। रसूखदारों और भू-माफियाओं ने बाजार की बेशकीमती सरकारी जमीन और मुख्य रास्ते पर ऐसा अवैध कब्जा जमाया है, जिससे दूर-दूर से आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से बाजार जाने वाले मुख्य रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर अपना निवास बना लिया है। हद तो तब हो जाती है, जब बाजार आने वाले लोग उस रास्ते से अपनी गाड़ी पार करने की कोशिश करते हैं, तो कब्जाधारी सीधे मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सड़क किनारे की इस बेशकीमती बाजार भूमि पर न सिर्फ रहने के लिए घर बनाए गए हैं, बल्कि कई लोगों ने दुकानें खड़ी करके उन्हें भारी-भरकम किराए पर भी चढ़ा दिया है। परेशान खरीदारों के अनुसार, उनसे ₹30 बजरी बाजार टैक्स भी वसूला जाता है, लेकिन उन्हें पैदल चलने तक का रास्ता नहीं मिलता। अगर गलती से किसी कब्जाधारी की दुकान का त्रिपाल थोड़ा भी फट जाए या नुकसान हो जाए, तो वे तुरंत उनसे जबरन पैसे वसूलने लगते हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी कलेक्टर कार्यालय में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई थी और कई बार ज्ञापन भी सौंपे, आवाज उठाई गई, लेकिन जिला प्रशासन ने आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों को लगता है कि प्रशासन की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। शासन-प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब बेबस ग्रामीणों ने एक बार फिर मीडिया का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो लोग अवैध कब्जा करके, हौसले बुलंद कर वहां रह रहे हैं और दुकानें किराए पर चला रहे हैं, उन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। अब यह देखना होगा कि पूरे जिले में अवैध निर्माण को ढहाने वाला बलरामपुर प्रशासन का बुलडोजर तातापानी के इस सालों पुराने अवैध कब्जे पर कब चलता है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया जाएगा।
बलरामपुर जिले के ऐतिहासिक तातापानी साप्ताहिक बाजार में अवैध कब्जों के कारण खरीदार और ग्रामीण गंभीर रूप से परेशान हैं, जबकि जिले में अवैध कब्जों पर प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है। रसूखदारों और भू-माफियाओं ने बाजार की बेशकीमती सरकारी जमीन और मुख्य रास्ते पर ऐसा अवैध कब्जा जमाया है, जिससे दूर-दूर से आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से बाजार जाने वाले मुख्य रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर अपना निवास बना लिया है। हद तो तब हो जाती है, जब बाजार आने वाले लोग उस रास्ते से अपनी गाड़ी पार करने की कोशिश करते हैं, तो कब्जाधारी सीधे मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सड़क किनारे की इस बेशकीमती बाजार भूमि पर न सिर्फ रहने के लिए घर बनाए गए हैं, बल्कि कई लोगों ने दुकानें खड़ी करके उन्हें भारी-भरकम किराए पर भी चढ़ा दिया है। परेशान खरीदारों के अनुसार, उनसे ₹30 बजरी बाजार टैक्स भी वसूला जाता है, लेकिन उन्हें पैदल चलने तक का रास्ता नहीं मिलता। अगर गलती से किसी कब्जाधारी की दुकान का त्रिपाल थोड़ा भी फट जाए या नुकसान हो जाए, तो वे तुरंत उनसे जबरन पैसे वसूलने लगते हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी कलेक्टर कार्यालय में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई थी और कई बार ज्ञापन भी सौंपे, आवाज उठाई गई, लेकिन जिला प्रशासन ने आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों को लगता है कि प्रशासन की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। शासन-प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब बेबस ग्रामीणों ने एक बार फिर मीडिया का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो लोग अवैध कब्जा करके, हौसले बुलंद कर वहां रह रहे हैं और दुकानें किराए पर चला रहे हैं, उन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। अब यह देखना होगा कि पूरे जिले में अवैध निर्माण को ढहाने वाला बलरामपुर प्रशासन का बुलडोजर तातापानी के इस सालों पुराने अवैध कब्जे पर कब चलता है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया जाएगा।
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में स्थित पवन वाटिका इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है, जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य, घने शाल वन, डेम में नौका विहार और बच्चों के लिए विकसित चिल्ड्रन पार्क लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। प्रतिदिन यहाँ 500 से 1000 पर्यटक घूमने पहुँच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा कर पर्यटक इसकी खूबसूरती की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रामानुजगंज से सटे झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ आ रहे हैं, और छुट्टियों के दिनों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो जाती है। चारों ओर फैली हरियाली और शाल के लंबे वृक्ष यहाँ के प्राकृतिक वातावरण को और भी सुकूनभरा बनाते हैं। वाटिका के बीच बने डेम में नौका विहार पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है, जिसका संचालन महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। परिसर की साफ-सफाई और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे पर्यटकों को स्वच्छ और सुंदर माहौल मिलता है। सुबह 5 बजे से 7 बजे तक शहर के लोग मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम के लिए पवन वाटिका आते हैं, जबकि सुबह 8 बजे से बाहरी पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है और यह क्रम देर शाम तक जारी रहता है। बच्चों के मनोरंजन के लिए वाटिका में एक चिल्ड्रन पार्क भी बनाया गया है, जहाँ झूले और विभिन्न खेल गतिविधियाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परिसर में काजू सहित कई फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण पवन वाटिका अब क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहाँ और सुविधाओं का विस्तार किया जाए, तो यह स्थल आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।2
- गढ़वा जिले के रंका प्रखंड की कंचनपुर पंचायत अंतर्गत रबदा खुरा गाँव में आदिवासी सरना विकास परिषद, गढ़वा के तत्वावधान में मंगलवार को सरना ध्वज स्थापना और हुल दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए और “जय धर्मेश” के उद्घोष से पूरा गाँव गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत सरना स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना और सरना ध्वज की स्थापना के साथ हुई। हुल दिवस के अवसर पर, वर्ष 1855 के ऐतिहासिक संथाल हुल आंदोलन के महान शहीद सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू और भैरव मुर्मू सहित सभी वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इन महान क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनका यह बलिदान आज भी आदिवासी समाज को अपने अधिकार, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। आदिवासी सरना विकास परिषद के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र उरांव ने कहा कि रबदा खुरा गाँव में सरना ध्वज की स्थापना पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि हुल दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के संघर्ष, बलिदान और स्वाभिमान को याद करने का दिन है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक स्थलों की रक्षा करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न हुई और रंका अनुमंडल के विभिन्न गाँवों से आए आदिवासी समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर शहीदों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया, जिससे सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।1
- झारखंड के गढ़वा के जाने-माने और लोकप्रिय यूट्यूबर राजाराम प्रसाद की मेहनत आखिरकार रंग लाई है। सड़क पर ब्रेड बेचने से लेकर एक सफल डिजिटल क्रिएटर बनने तक के उनके संघर्षपूर्ण सफर के बाद, अब उन्होंने टाटा सियाराम कार खरीदी है, जो उनकी नई बुलंदी का प्रतीक है। राजाराम प्रसाद 'सिखे ऑल इन हिंदी' नामक एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिसके 37 लाख (3.7 मिलियन) से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। उनके चैनल पर मुख्य रूप से मोबाइल टिप्स, ट्रिक्स, इंटरनेट, सोशल मीडिया अपडेट्स और टेक्नोलॉजी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं। उनकी यह कहानी बेहद प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने सड़क पर ब्रेड बेचकर शुरुआत की थी और 15 साल की कड़ी मेहनत तथा हौसले के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। राजाराम प्रसाद की यह उपलब्धि कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और अथक प्रयास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।2
- रायपुर से एक वायरल पॉलिटिकल अपडेट में, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सत्ताधारी दल (भाजपा) पर सबसे बड़ा और तीखा सियासी हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया और ANI के सामने दिए गए अपने ताज़ा बयान में समान नागरिक संहिता (UCC) और राम मंदिर दानपात्र विवाद—इन दो संवेदनशील मुद्दों को लेकर सरकार और सिस्टम की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। बघेल ने छत्तीसगढ़ में UCC के लिए कमेटी बनाए जाने की टाइमिंग और औचित्य पर गंभीर सवाल उठाए। उनके तर्क के अनुसार, जब भाजपा शासित राज्यों में UCC बिल पहले ही पारित किए जा चुके हैं, तो छत्तीसगढ़ में कमेटी बनाने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यह कानून राज्य में निवास करने वाली 42 प्रकार की जनजातियों की प्राचीन परंपराओं को सीधा नुकसान पहुंचाएगा, और इसे महज़ 'वोट की राजनीति' करार दिया। इसके अलावा, बघेल ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बाद अब स्वयं राम मंदिर के दानपात्र विवाद को 'बंटवारे के झगड़े' और 'भ्रष्टाचार' से जोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला है, जो लंबे समय से चल रहा था। बघेल ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर परिसर के 'सीसीटीवी फुटेज गायब' कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि FIR केवल आठ छोटे कर्मचारियों पर की गई है, जबकि 'मुख्य कर्ता-धर्ता' (Masterminds) अभी भी आज़ाद हैं। बघेल ने इस पूरी घटना को सिस्टम द्वारा की जा रही एक 'बड़ी लीपापोती' बताया। अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के विश्लेषण के अनुसार, भूपेश बघेल ने इन बयानों से एक ही तीर से दो बड़े निशाने साधे हैं। एक तरफ उन्होंने UCC मुद्दे पर राज्य के विशाल आदिवासी वोटबैंक (42 जनजातियों) को साधा है, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर दान विवाद में सिस्टम की 'पारदर्शिता' को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्तर के नेता द्वारा 'CCTV गायब होने' और 'सैकड़ों करोड़ की लीपापोती' जैसे ऑन-रिकॉर्ड आरोप सत्ता पक्ष और मंदिर ट्रस्ट दोनों के लिए जवाबदेही का बड़ा संकट खड़ा करते हैं। इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक की सियासत में गरमाहट आना तय है।1
- चांदनी क्षेत्र के अंतर्गत विकासखंड ओडगी की ग्राम पंचायत पासल के जेल्हापारा में रहने वाले अनुसूचित जनजाति परिवार कई महीनों से स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। लगभग 30 से 35 घरों की इस बस्ती में पीने के पानी के लिए लगाया गया सोलर पंप और नल जल योजना कई महीनों से खराब पड़ी हुई है, जिससे ग्रामीणों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने खराब सोलर पंप की जानकारी कई बार जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और जनपद पंचायत सदस्यों को दी है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की है।2
- कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौगई में 16 जून की रात एक भाजपा नेता समेत तीन लोगों की कार में जलाकर व फरसे से वार कर नृशंस हत्या के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। राज्य सरकार ने इस बहुचर्चित हत्याकांड की सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी है, जिसकी मांग परिजनों और करणी सेना द्वारा लगातार की जा रही थी। इस संबंध में 30 जून को एक अधिसूचना भी जारी की गई है। यह वारदात रेत खनन और परिवहन पर वर्चस्व को लेकर ठाकुर गुट और त्रिपाठी गुट के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान का परिणाम थी। घटना से ठीक एक दिन पहले, 15 जून को भी मारपीट हुई थी। 16 जून की रात करीब 10:30 बजे भरत कुमार सिंह उर्फ लल्ला सिंह अपने साथियों योगेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, मयंक सिंह और नागेंद्र सिंह के साथ नौगई गांव पहुंचे थे। पुरानी रंजिश के चलते मनोज त्रिपाठी के घर के सामने विवाद बढ़ गया, जिसके बाद भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी और अन्य व्यक्तियों ने भरत सिंह की फॉर्च्यूनर कार में पेट्रोल डालकर आग लगा दी और धारदार हथियारों से हमला किया। इस घटना में भरत सिंह की कार में ही जलकर मौत हो गई, जबकि शिक्षक नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हमले में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने अब तक इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस नृशंस तिहरे हत्याकांड से पूरा कोरिया जिला और प्रदेश हिल गया था। पीड़ित परिवार ने आरोपियों को फांसी देने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत सहित अन्य नेताओं ने 29 जून को पीड़ित परिवार से मुलाकात कर राज्य सरकार और प्रशासन-पुलिस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने भी आरोपियों का एनकाउंटर करने और सीबीआई जांच की पुरजोर मांग की थी। सीबीआई जांच की बढ़ती मांगों के बीच, राज्य सरकार के गृह विभाग ने हत्याकांड की सीबीआई जांच को मंजूरी दी। जारी अधिसूचना में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनहत थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 126(2), 296, 351(3), 151(2), 3(5) तथा 190, 191(2), 191(3), 109, 324, 103(1), 326(जी) के तहत दर्ज अपराध के अनुसंधान के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों की शक्तियों और क्षेत्राधिकार का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में करने की सहमति प्रदान की गई है।1
- राजकुमारी विशाखा सिंह की स्मृति में आयोजित होने वाले प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारियां रंका में तेज हो गई हैं। इस संबंध में सोमवार को रंका सर्वैश्वरी समूह शाखा में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में समारोह की तैयारियों, मेधावी छात्र-छात्राओं के चयन की प्रक्रिया और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि इस सम्मान समारोह के माध्यम से रंका प्रखंड के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को उच्च पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और मेडल प्रदान किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन देना और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा प्रदान करना है। आयोजन समिति ने बताया कि छात्र-छात्राओं की सुविधा हेतु गूगल स्कैनर (QR कोड) उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी मदद से वे स्वयं ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। समिति ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की है कि वे 5 जुलाई तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन भर दें, ताकि विद्यार्थियों के आवागमन, पंजीकरण और सम्मान समारोह में भागीदारी का सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।1
- महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हरिश्चंद्रगढ़ किले के भीतर स्थित धनेश्वर गुफा मंदिर, जिसे केदारेश्वर गुफा मंदिर भी कहते हैं, एक बेहद रहस्यमयी और प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह शानदार गुफा मंदिर सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के बीच हरिश्चंद्रगढ़ के शिखर के पास एक गहरी प्राकृतिक गुफा में बसा है, जहाँ मुख्य बेस गाँव से ट्रेक करके पहुँचा जा सकता है। इस गुफा के केंद्र में लगभग 5 फीट ऊँचा एक शिवलिंग स्थापित है, जो पूरे साल बर्फ जैसे ठंडे पानी में डूबा रहता है। मंदिर की छत को मूल रूप से चार खंभों का सहारा था, जिन्हें सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग जैसे चारों युगों का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, वर्तमान में इनमें से तीन खंभे टूट चुके हैं और केवल एक ही शेष बचा है। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि जब यह आखिरी खंभा भी ढह जाएगा, तो कलयुग का अंत हो जाएगा और प्रलय आ जाएगी। यह मान्यता प्रचलित है कि मंदिर के ये चार खंभे ही चार युगों को दर्शाते हैं।3
- सूरजपुर जिले की बसदेई पुलिस चौकी, थाना सूरजपुर ने चोरी के एक मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह प्रकरण अपराध क्रमांक 276/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 305(क), 331(4) और 3(5) के अंतर्गत दर्ज किया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सोनपुर निवासी प्रार्थी रहमत उल्ला उर्फ जरीफ उल्ला ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उनके छोटे भाई अशराफ उल्ला की किराना दुकान में अज्ञात चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया। दुकान से नकदी सहित विभिन्न सामान चोरी हो गए थे, जिनकी कुल कीमत लगभग 64,000 रुपये आंकी गई है। प्रकरण की विवेचना के दौरान पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ की। जांच के क्रम में मरवाही निवासी 37 वर्षीय भीम सिंह, पिता हरिश्चंद्र सिंह, को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी से घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली और पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उसे दिनांक 29 जून 2026 को दोपहर 1:40 बजे विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और न्यायिक रिमांड के लिए आवेदन किया गया है। पुलिस द्वारा इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश और चोरी किए गए माल की बरामदगी के संबंध में आगे की विवेचना जारी है।2