राजकुमारी विशाखा सिंह की स्मृति में आयोजित होने वाले प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारियां रंका में तेज हो गई हैं। इस संबंध में सोमवार को रंका सर्वैश्वरी समूह शाखा में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में समारोह की तैयारियों, मेधावी छात्र-छात्राओं के चयन की प्रक्रिया और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि इस सम्मान समारोह के माध्यम से रंका प्रखंड के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को उच्च पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और मेडल प्रदान किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन देना और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा प्रदान करना है। आयोजन समिति ने बताया कि छात्र-छात्राओं की सुविधा हेतु गूगल स्कैनर (QR कोड) उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी मदद से वे स्वयं ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। समिति ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की है कि वे 5 जुलाई तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन भर दें, ताकि विद्यार्थियों के आवागमन, पंजीकरण और सम्मान समारोह में भागीदारी का सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
राजकुमारी विशाखा सिंह की स्मृति में आयोजित होने वाले प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारियां रंका में तेज हो गई हैं। इस संबंध में सोमवार को रंका सर्वैश्वरी समूह शाखा में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में समारोह की तैयारियों, मेधावी छात्र-छात्राओं के चयन की प्रक्रिया और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि इस सम्मान समारोह के माध्यम से रंका प्रखंड के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को उच्च पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और मेडल प्रदान किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन देना और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा प्रदान करना है। आयोजन समिति ने बताया कि छात्र-छात्राओं की सुविधा हेतु गूगल स्कैनर (QR कोड) उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी मदद से वे स्वयं ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। समिति ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की है कि वे 5 जुलाई तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन भर दें, ताकि विद्यार्थियों के आवागमन, पंजीकरण और सम्मान समारोह में भागीदारी का सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
- महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हरिश्चंद्रगढ़ किले के भीतर स्थित धनेश्वर गुफा मंदिर, जिसे केदारेश्वर गुफा मंदिर भी कहते हैं, एक बेहद रहस्यमयी और प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह शानदार गुफा मंदिर सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के बीच हरिश्चंद्रगढ़ के शिखर के पास एक गहरी प्राकृतिक गुफा में बसा है, जहाँ मुख्य बेस गाँव से ट्रेक करके पहुँचा जा सकता है। इस गुफा के केंद्र में लगभग 5 फीट ऊँचा एक शिवलिंग स्थापित है, जो पूरे साल बर्फ जैसे ठंडे पानी में डूबा रहता है। मंदिर की छत को मूल रूप से चार खंभों का सहारा था, जिन्हें सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग जैसे चारों युगों का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, वर्तमान में इनमें से तीन खंभे टूट चुके हैं और केवल एक ही शेष बचा है। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि जब यह आखिरी खंभा भी ढह जाएगा, तो कलयुग का अंत हो जाएगा और प्रलय आ जाएगी। यह मान्यता प्रचलित है कि मंदिर के ये चार खंभे ही चार युगों को दर्शाते हैं।3
- बलरामपुर जिले के ऐतिहासिक तातापानी साप्ताहिक बाजार में अवैध कब्जों के कारण खरीदार और ग्रामीण गंभीर रूप से परेशान हैं, जबकि जिले में अवैध कब्जों पर प्रशासन का बुलडोजर गरज रहा है। रसूखदारों और भू-माफियाओं ने बाजार की बेशकीमती सरकारी जमीन और मुख्य रास्ते पर ऐसा अवैध कब्जा जमाया है, जिससे दूर-दूर से आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से बाजार जाने वाले मुख्य रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से पक्का निर्माण कर अपना निवास बना लिया है। हद तो तब हो जाती है, जब बाजार आने वाले लोग उस रास्ते से अपनी गाड़ी पार करने की कोशिश करते हैं, तो कब्जाधारी सीधे मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सड़क किनारे की इस बेशकीमती बाजार भूमि पर न सिर्फ रहने के लिए घर बनाए गए हैं, बल्कि कई लोगों ने दुकानें खड़ी करके उन्हें भारी-भरकम किराए पर भी चढ़ा दिया है। परेशान खरीदारों के अनुसार, उनसे ₹30 बजरी बाजार टैक्स भी वसूला जाता है, लेकिन उन्हें पैदल चलने तक का रास्ता नहीं मिलता। अगर गलती से किसी कब्जाधारी की दुकान का त्रिपाल थोड़ा भी फट जाए या नुकसान हो जाए, तो वे तुरंत उनसे जबरन पैसे वसूलने लगते हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पहले भी कलेक्टर कार्यालय में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई थी और कई बार ज्ञापन भी सौंपे, आवाज उठाई गई, लेकिन जिला प्रशासन ने आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों को लगता है कि प्रशासन की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। शासन-प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब बेबस ग्रामीणों ने एक बार फिर मीडिया का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो लोग अवैध कब्जा करके, हौसले बुलंद कर वहां रह रहे हैं और दुकानें किराए पर चला रहे हैं, उन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। अब यह देखना होगा कि पूरे जिले में अवैध निर्माण को ढहाने वाला बलरामपुर प्रशासन का बुलडोजर तातापानी के इस सालों पुराने अवैध कब्जे पर कब चलता है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया जाएगा।1
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में स्थित पवन वाटिका इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है, जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य, घने शाल वन, डेम में नौका विहार और बच्चों के लिए विकसित चिल्ड्रन पार्क लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। प्रतिदिन यहाँ 500 से 1000 पर्यटक घूमने पहुँच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा कर पर्यटक इसकी खूबसूरती की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रामानुजगंज से सटे झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ आ रहे हैं, और छुट्टियों के दिनों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो जाती है। चारों ओर फैली हरियाली और शाल के लंबे वृक्ष यहाँ के प्राकृतिक वातावरण को और भी सुकूनभरा बनाते हैं। वाटिका के बीच बने डेम में नौका विहार पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है, जिसका संचालन महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। परिसर की साफ-सफाई और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे पर्यटकों को स्वच्छ और सुंदर माहौल मिलता है। सुबह 5 बजे से 7 बजे तक शहर के लोग मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम के लिए पवन वाटिका आते हैं, जबकि सुबह 8 बजे से बाहरी पर्यटकों का आना शुरू हो जाता है और यह क्रम देर शाम तक जारी रहता है। बच्चों के मनोरंजन के लिए वाटिका में एक चिल्ड्रन पार्क भी बनाया गया है, जहाँ झूले और विभिन्न खेल गतिविधियाँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परिसर में काजू सहित कई फलदार और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण पवन वाटिका अब क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यहाँ और सुविधाओं का विस्तार किया जाए, तो यह स्थल आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।2
- सोनभद्र के मान्ची थाना क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण नाले में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह हो गया, जिससे तीन व्यक्ति बह गए। इस घटना में, एक व्यक्ति को सकुशल बचा लिया गया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है। फिलहाल, बह गए एक बालक की तलाश लगातार जारी है। उक्त संबंध में सीओ सदर ने जानकारी दी है।1
- राजकुमारी विशाखा सिंह की स्मृति में आयोजित होने वाले प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारियां रंका में तेज हो गई हैं। इस संबंध में सोमवार को रंका सर्वैश्वरी समूह शाखा में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में समारोह की तैयारियों, मेधावी छात्र-छात्राओं के चयन की प्रक्रिया और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि इस सम्मान समारोह के माध्यम से रंका प्रखंड के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को उच्च पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों के हाथों प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और मेडल प्रदान किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन देना और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा प्रदान करना है। आयोजन समिति ने बताया कि छात्र-छात्राओं की सुविधा हेतु गूगल स्कैनर (QR कोड) उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी मदद से वे स्वयं ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। समिति ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की है कि वे 5 जुलाई तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन भर दें, ताकि विद्यार्थियों के आवागमन, पंजीकरण और सम्मान समारोह में भागीदारी का सुचारु प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।1
- सोनभद्र के विंढमगंज–कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) में सोमवार, 29 जून 2026 की शाम लगभग 4:30 बजे हुई बारिश का पानी मंगलवार दोपहर तक भी जस का तस बना रहा। लगभग 12 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी जल निकासी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है। यह अंडरपास क्षेत्र के हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का एक प्रमुख मार्ग है, और जलभराव के कारण ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और मरीजों तक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन भी जोखिम उठाकर वहां से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, और यह भी कि जब समस्या की सूचना अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, तब भी राहत कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने, अंडरपास का तकनीकी निरीक्षण कराने और भविष्य के लिए एक स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर बना यह अंडरपास यदि हर बारिश में तालाब बन जाएगा, तो इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अब जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर इस गंभीर समस्या का समाधान कब होगा।1
- लोगों को गरज-चमक के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बताया गया है कि जब बादल गरजें, तो किसी भी व्यक्ति को पेड़ों के आसपास नहीं रहना चाहिए ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।1
- सोनभद्र के विंढमगंज-कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) एक ही बारिश से हुए जलभराव के कारण करीब 18 घंटे से अधिक समय से पानी में डूबा हुआ है। 29 जून की शाम लगभग 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी मंगलवार तक पानी नहीं निकल पाने से हजारों लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह अंडरपास क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहनों का यहां से गुजरना लगभग असंभव हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन चालक भी भारी जोखिम उठा कर निकल रहे हैं। इस स्थिति के चलते कई लोगों को मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या उत्पन्न होती है, बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने आज तक जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इस अंडरपास में कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल अंडरपास से पानी निकलवाने, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक होते हैं, जब वे जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानी।1