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# रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था ### # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था ### अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की मांग तेज **आशुतोष त्रिपाठी-जनचिंगारी/उमरिया।** नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए नासूर बनता जा रहा है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख तिराहे-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। अव्यवस्थित यातायात के चलते राहगीरों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों और बाजार आने वाले ग्रामीणों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मानपुर की जनता को जाम से मुक्ति कब मिलेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब जागेगा? **50 गांवों का प्रमुख केंद्र, लेकिन यातायात व्यवस्था बेहाल** मानपुर केवल नगर परिषद मुख्यालय नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों के लिए प्रमुख बाजार और आवश्यक सुविधाओं का केंद्र है। यहां तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, बैंक, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक शासकीय कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक अपने कामकाज के लिए पहुंचते हैं। इसके चलते मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। बावजूद इसके, यातायात प्रबंधन की कोई प्रभावी और स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आती। **एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी खतरा** जाम की समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आपातकालीन सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। बाजार में जाम लगने पर एंबुलेंस, मरीजों को ले जाने वाले वाहनों और अन्य जरूरी सेवाओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। किसी आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की गंभीरता बेहद जरूरी है। **पुलिस के प्रयास नाकाफी, अतिरिक्त बल की जरूरत** मानपुर पुलिस समय-समय पर यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयास करती है, लेकिन सीमित पुलिस बल और कानून-व्यवस्था की अन्य जिम्मेदारियों के कारण प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी संभव नहीं हो पाती। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग उठ रही है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार के प्रमुख तिराहों एवं चौराहों पर व्यस्त समय के दौरान पुलिसकर्मियों की नियमित तैनाती की जाए, ताकि अव्यवस्थित पार्किंग और वाहनों की बेतरतीब आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जा सके। **स्थायी बस स्टैंड के बिना कैसे सुधरेगी व्यवस्था?** मानपुर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए स्थायी बस स्टैंड का निर्माण भी बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन और नगर परिषद को इस दिशा में तत्काल पहल करनी चाहिए। बसों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल, यात्रियों के बैठने की सुविधा और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होने से मुख्य बाजार में वाहनों का अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में पार्किंग स्थल निर्धारित करने और यातायात संचालन की स्थायी कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। **व्यापारी और नागरिक भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी** यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन और पुलिस की नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। व्यापारियों को दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान फैलाने से बचना चाहिए। ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग भी व्यवस्थित तरीके से कराई जानी चाहिए, ताकि सड़क पर आवागमन बाधित न हो। प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है। **क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा प्रशासन?** जब मानपुर लगभग 50 गांवों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तब यातायात व्यवस्था की बदहाली पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी समझ से परे है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस जनसमस्या को प्राथमिकता से लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम की परेशानी झेलती रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या जनता को अपनी जायज मांगों के लिए धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा? अब जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण, व्यवस्थित पार्किंग और बाजार क्षेत्र में प्रभावी यातायात प्रबंधन ही मानपुर को रोजाना लगने वाले जाम से राहत दिला सकते हैं।

21 hrs ago
user_Ashutosh tripathi
Ashutosh tripathi
Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
21 hrs ago

# रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था ### # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था ### अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की मांग तेज **आशुतोष त्रिपाठी-जनचिंगारी/उमरिया।** नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए नासूर बनता जा रहा है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख तिराहे-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। अव्यवस्थित यातायात के चलते राहगीरों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों और बाजार आने वाले ग्रामीणों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मानपुर की जनता को जाम से मुक्ति कब मिलेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब जागेगा? **50 गांवों का प्रमुख केंद्र, लेकिन यातायात व्यवस्था बेहाल** मानपुर केवल नगर परिषद मुख्यालय नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों के लिए प्रमुख बाजार और आवश्यक सुविधाओं का केंद्र है। यहां तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, बैंक, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक शासकीय कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक अपने कामकाज के लिए पहुंचते हैं। इसके चलते मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। बावजूद इसके, यातायात प्रबंधन की कोई प्रभावी और स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आती। **एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी खतरा** जाम की समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आपातकालीन सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। बाजार में जाम लगने पर एंबुलेंस, मरीजों को ले जाने वाले वाहनों और अन्य जरूरी सेवाओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। किसी आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की गंभीरता बेहद जरूरी है। **पुलिस के प्रयास नाकाफी, अतिरिक्त बल की जरूरत** मानपुर पुलिस समय-समय पर यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयास करती है, लेकिन सीमित पुलिस बल और कानून-व्यवस्था की अन्य जिम्मेदारियों के कारण प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी संभव नहीं हो पाती। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग उठ रही है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार के प्रमुख तिराहों एवं चौराहों पर व्यस्त समय के दौरान पुलिसकर्मियों की नियमित तैनाती की जाए, ताकि अव्यवस्थित पार्किंग और वाहनों की बेतरतीब आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जा सके। **स्थायी बस स्टैंड के बिना कैसे सुधरेगी व्यवस्था?** मानपुर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए स्थायी बस स्टैंड का निर्माण भी बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन और नगर परिषद को इस दिशा में तत्काल पहल करनी चाहिए। बसों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल, यात्रियों के बैठने की सुविधा और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होने से मुख्य बाजार में वाहनों का अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में पार्किंग स्थल निर्धारित करने और यातायात संचालन की स्थायी कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। **व्यापारी और नागरिक भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी** यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन और पुलिस की नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। व्यापारियों को दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान फैलाने से बचना चाहिए। ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग भी व्यवस्थित तरीके से कराई जानी चाहिए, ताकि सड़क पर आवागमन बाधित न हो। प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है। **क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा प्रशासन?** जब मानपुर लगभग 50 गांवों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तब यातायात व्यवस्था की बदहाली पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी समझ से परे है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस जनसमस्या को प्राथमिकता से लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम की परेशानी झेलती रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या जनता को अपनी जायज मांगों के लिए धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा? अब जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण, व्यवस्थित पार्किंग और बाजार क्षेत्र में प्रभावी यातायात प्रबंधन ही मानपुर को रोजाना लगने वाले जाम से राहत दिला सकते हैं।

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    # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
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# रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद यातायात व्यवस्था बदहाल
### अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की उठी मांग
**आशुतोष त्रिपाठी-जनचिंगारी/उमरिया।**
नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी बन चुका है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख तिराहे-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। अव्यवस्थित यातायात के कारण स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, राहगीरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक मानपुर की जनता इस समस्या से जूझती रहेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब स्थायी समाधान की पहल करेगा?
मानपुर केवल नगर परिषद क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों का प्रमुख व्यापारिक एवं बाजार केंद्र भी है। यहां बैंक, तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में अपने कामकाज के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक पहुंचते हैं। यही वजह है कि मुख्य बाजार और प्रमुख सड़कों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है।
### आपातकालीन सेवाओं के लिए भी बन सकता है खतरा
जाम की समस्या अब केवल आवागमन की परेशानी तक सीमित नहीं रह गई है। यातायात बाधित होने से अस्पताल की एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के दौरान जाम में फंसना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है। प्रशासन को इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए समय रहते प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए।
### पुलिस के प्रयासों के बावजूद अतिरिक्त बल की जरूरत
मानपुर पुलिस द्वारा समय-समय पर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन सीमित पुलिस बल और कानून-व्यवस्था की अन्य जिम्मेदारियों के चलते प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी कर पाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग की जा रही है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार सहित प्रमुख तिराहे-चौराहों पर नियमित पुलिसकर्मियों की तैनाती हो सके।
विशेषकर बाजार के व्यस्त समय में यातायात पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण, वाहनों की आवाजाही सुचारु करने और जाम की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी।
### स्थायी बस स्टैंड निर्माण के बिना कैसे सुधरेगी व्यवस्था?
जिला प्रशासन और नगर परिषद मानपुर को भी स्थायी बस स्टैंड निर्माण की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। बसों के खड़े होने के लिए निर्धारित स्थान, यात्रियों के बैठने की सुविधा, पार्किंग और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होने से मुख्य बाजार पर वाहनों का अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र के लिए स्थायी यातायात प्रबंधन योजना तैयार करना भी जरूरी है।
### व्यापारी भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी
यातायात व्यवस्था सुधारने में स्थानीय व्यापारियों का सहयोग भी बेहद आवश्यक है। व्यापारियों को अपनी दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान फैलाने से बचना चाहिए। ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग भी व्यवस्थित ढंग से कराने में सहयोग करना चाहिए, ताकि बाजार की सड़कों पर आवागमन बाधित न हो। प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
### क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा प्रशासन?
जब मानपुर आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तब भी यातायात व्यवस्था की बदहाली समझ से परे है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस समस्या के समाधान के लिए जवाबदेही तय करनी होगी।
आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम का दंश झेलती रहेगी? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी के बाद ही जागेंगे? क्या अपनी जायज मांगों के लिए नागरिकों को जनआंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?
अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। मानपुर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण, अव्यवस्थित पार्किंग पर नियंत्रण और बाजार क्षेत्र में प्रभावी यातायात प्रबंधन समय की मांग है। जनता को राहत देने के लिए जिम्मेदार विभागों को अब धरातल पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई दिनों से मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए और उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए। हमारे शहर में बुजुर्ग, बीमार और अस्पताल में भर्ती मरीज भी हैं। उनके स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण की जिम्मेदारी हम सभी की है। कृपया जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करें।
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    उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के
उमरिया मुख्यालय स्थित कचरा यार्ड में कचरे एवं पॉलिथीन जलाने से निकलता जहरीला धुआँ शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई दिनों से मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए और उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए। हमारे शहर में बुजुर्ग, बीमार और अस्पताल में भर्ती मरीज भी हैं। उनके स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण की जिम्मेदारी हम सभी की है।
कृपया जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करें।
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • उमरिया बाजार में रही भीड़भाड़ पुलिस प्रशासन की व्यवस्था में रही कड़ी नजर मध्य प्रदेश, उमरिया। दीपावली के पावन पर्व को लेकर उमरिया नगर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। त्योहार के अवसर पर खरीदारी करने के लिए बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के मुख्य बाजारों सहित कपड़ा, सराफा, बर्तन, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक और सजावट की दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की चहल-पहल बनी रही। दीपावली को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में बाजार पहुंचकर अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी करते नजर आए। दुकानों पर रंग-बिरंगी झालरें, दीपक, मोमबत्तियां, पूजा सामग्री, मिठाइयां, पटाखे और आकर्षक सजावटी सामान लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। त्योहार के चलते बाजारों में कई जगह खचाखच भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों के चेहरों पर भी अच्छी बिक्री की उम्मीद से खुशी नजर आई। वहीं, भीड़ के कारण मुख्य मार्गों और बाजार क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित होता रहा। दीपावली के इस उत्सवी माहौल में पूरा उमरिया नगर रोशनी और खुशियों के रंग में रंगा नजर आया। लोगों ने अपने परिवार के साथ खरीदारी कर दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। कुल मिलाकर दीपावली के अवसर पर उमरिया का बाजार देर रात तक रौनक से गुलजार रहा।
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    उमरिया बाजार में रही भीड़भाड़ पुलिस प्रशासन की व्यवस्था में रही कड़ी नजर
मध्य प्रदेश, उमरिया। दीपावली के पावन पर्व को लेकर उमरिया नगर के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है।
त्योहार के अवसर पर खरीदारी करने के लिए बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के मुख्य बाजारों सहित कपड़ा, सराफा, बर्तन, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक और सजावट की दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की चहल-पहल बनी रही।
दीपावली को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में बाजार पहुंचकर अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी करते नजर आए। दुकानों पर रंग-बिरंगी झालरें, दीपक, मोमबत्तियां, पूजा सामग्री, मिठाइयां, पटाखे और आकर्षक सजावटी सामान लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
त्योहार के चलते बाजारों में कई जगह खचाखच भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों के चेहरों पर भी अच्छी बिक्री की उम्मीद से खुशी नजर आई। वहीं, भीड़ के कारण मुख्य मार्गों और बाजार क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित होता रहा।
दीपावली के इस उत्सवी माहौल में पूरा उमरिया नगर रोशनी और खुशियों के रंग में रंगा नजर आया। लोगों ने अपने परिवार के साथ खरीदारी कर दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। कुल मिलाकर दीपावली के अवसर पर उमरिया का बाजार देर रात तक रौनक से गुलजार रहा।
    user_ब्यूरो चीफ/बाल्मीक यादव
    ब्यूरो चीफ/बाल्मीक यादव
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • तेज रफ्तार कार ने खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को मारी जोरदार टक्कर, क्षतिग्रस्त चंदिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, वाहन पर लिखा था वन विभाग (डिप्टी) तेज रफ्तार कार ने खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को मारी जोरदार टक्कर, क्षतिग्रस्त चंदिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, वाहन पर लिखा था वन विभाग (डिप्टी) उमरिया। जिले में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार चंदिया की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार कार mp54zb3719 ने रानी दुर्गावती चौक उमरिया में रात लगभग 2:00 बजे के आसपास सड़क किनारे खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद सामने आए वीडियो में दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की हालत साफ दिखाई दे रही है। जिस वाहन को टक्कर लगी है, उस पर वन विभाग (डिप्टी) लिखा हुआ नजर आ रहा है। वहीं टक्कर मारने वाली कार का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। फिलहाल दुर्घटना के कारणों और घटना के समय वाहन में मौजूद लोगों के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के बाद क्षेत्र में घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। अब यह जांच का विषय है कि तेज रफ्तार कार के चालक से वाहन अनियंत्रित कैसे हुआ और दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई
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    तेज रफ्तार कार ने खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को मारी जोरदार टक्कर,  क्षतिग्रस्त
चंदिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, वाहन पर लिखा था वन विभाग (डिप्टी)
तेज रफ्तार कार ने खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को मारी जोरदार टक्कर,  क्षतिग्रस्त
चंदिया की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, वाहन पर लिखा था वन विभाग (डिप्टी)
उमरिया। जिले में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार  चंदिया की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार कार mp54zb3719 ने रानी दुर्गावती चौक उमरिया में रात लगभग 2:00 बजे के आसपास सड़क किनारे खड़ी पेट्रोलिंग गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
घटना के बाद सामने आए वीडियो में दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की हालत साफ दिखाई दे रही है। जिस वाहन को टक्कर लगी है, उस पर वन विभाग (डिप्टी) लिखा हुआ नजर आ रहा है। वहीं टक्कर मारने वाली कार का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
फिलहाल दुर्घटना के कारणों और घटना के समय वाहन में मौजूद लोगों के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के बाद क्षेत्र में घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। अब यह जांच का विषय है कि तेज रफ्तार कार के चालक से वाहन अनियंत्रित कैसे हुआ और दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई
    user_अनुज सेन  राष्ट्रचंडिका अखबार
    अनुज सेन राष्ट्रचंडिका अखबार
    Lawyer Bandhogarh, Umaria•
    10 hrs ago
  • दीपावली पर्व पर शहर के भीतर भीड़ भाड़ में वाहन क्रमांक MP54ZC -9224 के चालक द्वारा रफ़ ड्राइविंग मुकेश कुमार दुबे मास्टर ऑफ जर्नलिस्ट संवाददाता जिला उमरिया मध्य प्रदेश l उमरिया- उमरिया जिला मुख्यालय अंतर्गत दीपावली का पर्व के अवसर पर शहर में काफी भीड़ चल रही है , जिसका ध्यान रखते हुए शहर के अंदर यातायात को व्यवस्थित करने हेतु यातयात थाना प्रभारी द्वारा वन वे व्यवस्था लागू की गई है1 इसी दौरान गांधी चौक से एक टू व्हीलर वाहन क्रमांक MP 54 ZC -9224 का चालक बिना हेलमेट के काफी तेज रफ्तार में रफ ड्राइविंग करते हुए जयस्तम्भ चौराहा की तरफ गया जिसकी सूचना वायरलेस सेट पर दी गई , तत्काल जयस्तंभ चौराहे पर तैनात पुलिस अधिकारी ASI Dharnendra सिंह द्वारा तत्परता दिखाते हुए तत्काल वाहन को रोक कर यातायात थाना को सूचित किया गया ,सूचना उपरांत यातायात थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर चंद्रभान महोबिया द्वारा जयस्तम चौराहे पर आकर वाहन को कानूनी कार्रवाई हेतु यात1यात थाना ले जाया गया, अब देखना यह है कि यातायात थाना प्रभारी द्वारा रफ एवं तेज ड्राइविंग पर क्या कार्रवाई की जाती है , या राजनीतिक दबाव में आकर वाहन को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया जाए गा 1 को छोड़ देती है
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    दीपावली पर्व पर शहर के भीतर भीड़ भाड़ में वाहन क्रमांक MP54ZC -9224 के चालक द्वारा रफ़ ड्राइविंग 
मुकेश कुमार दुबे मास्टर ऑफ जर्नलिस्ट संवाददाता जिला उमरिया मध्य प्रदेश l 
उमरिया- उमरिया जिला मुख्यालय अंतर्गत दीपावली का पर्व के अवसर पर  शहर में काफी भीड़ चल रही  है , जिसका ध्यान रखते हुए शहर के अंदर यातायात को व्यवस्थित करने हेतु यातयात थाना प्रभारी द्वारा वन वे व्यवस्था लागू की गई है1 इसी दौरान गांधी चौक से एक टू व्हीलर वाहन क्रमांक MP 54 ZC -9224 का चालक  बिना हेलमेट के काफी तेज रफ्तार में रफ ड्राइविंग करते हुए जयस्तम्भ चौराहा की तरफ   गया  जिसकी सूचना वायरलेस सेट पर दी गई , तत्काल जयस्तंभ  चौराहे पर तैनात पुलिस अधिकारी ASI Dharnendra सिंह द्वारा  तत्परता दिखाते हुए तत्काल वाहन को रोक कर यातायात थाना को सूचित किया गया ,सूचना उपरांत यातायात थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर चंद्रभान महोबिया द्वारा जयस्तम चौराहे पर आकर वाहन को कानूनी कार्रवाई हेतु यात1यात थाना ले जाया गया, अब देखना यह है कि यातायात थाना प्रभारी द्वारा रफ एवं तेज ड्राइविंग पर क्या कार्रवाई की जाती है , या राजनीतिक दबाव में आकर वाहन को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया जाए गा 1
को छोड़ देती है
    user_मुकेश कुमार दुबे (MJ *CC)
    मुकेश कुमार दुबे (MJ *CC)
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    1 day ago
  • दीप पर्व पर खरीदें स्वदेशी उत्पाद अध्यक्ष जनपद पंचायत ब्यौहारी श्रीमती आकांक्षी सिंह ने दीपावली की खरीदारी में लोकल फॉर वोकल को प्रोत्साहित करते हुए मिट्टी के दिये खरीदे। आइए, इस दीपावली स्थानीय कारीगरों के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएं। #shahdol #शहडोल दीप पर्व पर खरीदें स्वदेशी उत्पाद अध्यक्ष जनपद पंचायत ब्यौहारी श्रीमती आकांक्षी सिंह ने दीपावली की खरीदारी में लोकल फॉर वोकल को प्रोत्साहित करते हुए मिट्टी के दिये खरीदे। आइए, इस दीपावली स्थानीय कारीगरों के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएं। #shahdol #शहडोल
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    दीप पर्व पर खरीदें स्वदेशी उत्पाद 

 अध्यक्ष जनपद पंचायत ब्यौहारी श्रीमती आकांक्षी सिंह ने दीपावली की खरीदारी में लोकल फॉर वोकल को प्रोत्साहित करते हुए मिट्टी के दिये खरीदे।

आइए, इस दीपावली स्थानीय कारीगरों के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएं।

#shahdol #शहडोल
दीप पर्व पर खरीदें स्वदेशी उत्पाद 
अध्यक्ष जनपद पंचायत ब्यौहारी श्रीमती आकांक्षी सिंह ने दीपावली की खरीदारी में लोकल फॉर वोकल को प्रोत्साहित करते हुए मिट्टी के दिये खरीदे।
आइए, इस दीपावली स्थानीय कारीगरों के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएं।
#shahdol #शहडोल
    user_Durgesh Kumar Gupta
    Durgesh Kumar Gupta
    Electrician Beohari, Shahdol•
    4 hrs ago
  • उमरिया जिले के पाली में दीपावली के मद्देनजर देखते हुए जहां एक दिन का शुष्क दिवस में शराब दुकानों को बंद किया जाएगा वहीं शराब ठेकेदार आबकारी विभाग से सौ कदम आगे चले गए पहले ही पैकारी के माध्यम से ढावो और गांव गांव शराब पहुंचा दी गई है। शराब का खेल - दुकान बंद होने का दिखावा, दिन में गांव-गांव पहुंच गई शराब पाली क्षेत्र में दीपावली त्योहार पर शराब ठेकेदार की मनमानी, दुकान बंद होने के पहले खूब हुई पैकारी होटल-ढाबों में हो हुई खुलेआम सप्लाई बिरसिंहपुर- पाली क्षेत्र में दीपावली त्योहार के मौके पर शराब के अवैध कारोबार का बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि शराब ठेकेदार द्वारा दिन में पांच बजे लाइसेंसी दुकान बंद होने का सिर्फ दिखावा किया जा रहा है, लेकिन दुकान बंद होने से पहले ही गांव-गांव, होटल और ढाबों में शराब पहुंचा दी गई है। सूत्रों के अनुसार त्योहार के 2 दिन पहले से ही ठेकेदार के गुर्गे मोटर साइकिल में पेटियों में भरकर शराब गांवों में पहुंचा दी गई है सवाल यह है कि इस अवैध सप्लाई पर अंकुश कब लगेगा? *दुकान बंद, सप्लाई चालू* नियम के अनुसार दीपावली जैसे त्योहार पर प्रशासन द्वारा शराब दुकानों को बंद रखने के आदेश दिए जाते हैं, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। पाली में भी आदेश के बाद लाइसेंसी दुकान पर ताला लगा दिखा, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान के पीछे से ही शराब की सप्लाई हो रही थी। गांवों में रहने वाले लोगों ने बताया कि त्योहार के दिन शाम होते ही गांव के हर मोहल्ले में शराब आसानी से मिल रही थी। होटल और ढाबों पर तो खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। एक ग्रामीण ने कहा, "दुकान बंद है, यह तो सिर्फ कागजों में है। असली दुकान तो हमारे गांव के ढाबे पर चल रही है। 200 रुपये की बोतल 400 में मिल रही है।" *होटल-ढाबे बन गए अवैध अड्डे* पाली-उमरिया मार्ग, पाली-बिरसिंहपुर मार्ग और पाली-शहडोल मार्ग पाली बन्नैदा मार्ग पर बने कई होटल और ढाबे किराना दुकान पान के टपरे शराब के अवैध अड्डे बन गए हैं। यहां ट्रक ड्राइवरों से लेकर स्थानीय युवाओं तक को शराब पिलाई जा रही है। ढाबा मालिकों को ठेकेदार की ओर से पहले ही स्टॉक पहुंचा दिया जाता है और मुनाफा आपस में बांट लिया जाता है। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम इन ढाबों पर कभी जांच करने नहीं पहुंचती। *सागर हादसे से भी नहीं लिया सबक* कुछ दिन पहले सागर में शराब के नशे में हुए बड़े हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। उस हादसे में कई मासूम जानें गई थीं। लेकिन पाली क्षेत्र के प्रशासन ने उससे कोई सबक नहीं लिया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या पाली प्रशासन भी सागर जैसे हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी की जान जाने के बाद ही यहां कार्रवाई होगी? एक तरफ देश के गृह मंत्री अमित शाह जी नशामुक्ति को लेकर अभियान चलाने और शराबबंदी की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाली में खुलेआम शराब की अवैध बिक्री हो रही है। यह दोहरा रवैया जनता को समझ नहीं आ रहा। *युवाओं में बढ़ रहा नशा* दीपावली के त्योहार पर गांवों में युवाओं में शराब पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। नशे में मारपीट, झगड़े और सड़क हादसों की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। महिलाओं का कहना है कि त्योहार के दिन उनके घरों में शांति नहीं रहती, शराब पीकर लोग गाली-गलौज करते हैं। *जनता की मांग* पाली क्षेत्र में शराब ठेकेदार के स्टॉक की तत्काल जांच हो, दुकान बंद होने के बाद शराब कहां गई, इसका हिसाब लिया जाए। गांव-गांव में शराब पहुंचाने वाले होटल-ढाबों पर छापा मारकर कार्रवाई हो। आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर रात में गश्त बढ़ाई जाए। अवैध शराब बेचने वालों पर एफआईआर दर्ज हो, सिर्फ जुर्माना लगाकर न छोड़ा जाए। पाली की जनता अब पूछ रही है - *जब दुकान बंद है तो गांव में शराब कहां से आ रही है?* अगर प्रशासन ने समय रहते इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया तो दीपावली की खुशियां किसी परिवार के लिए मातम में बदल सकती हैं।
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    उमरिया जिले के पाली में दीपावली के मद्देनजर देखते हुए जहां एक दिन का शुष्क दिवस में शराब दुकानों को बंद किया जाएगा वहीं शराब ठेकेदार आबकारी विभाग से सौ कदम आगे चले गए पहले ही पैकारी के माध्यम से ढावो और गांव गांव शराब पहुंचा दी गई है।
शराब का खेल -  दुकान बंद होने  का दिखावा, दिन में गांव-गांव पहुंच गई शराब
पाली क्षेत्र में दीपावली त्योहार पर शराब ठेकेदार की मनमानी, दुकान बंद होने के पहले खूब हुई पैकारी होटल-ढाबों में हो हुई खुलेआम सप्लाई
बिरसिंहपुर- पाली क्षेत्र में दीपावली त्योहार के मौके पर शराब के अवैध कारोबार का बड़ा खेल सामने आया  है। आरोप है कि शराब ठेकेदार द्वारा दिन में पांच बजे लाइसेंसी दुकान बंद होने का सिर्फ दिखावा किया जा रहा है, लेकिन दुकान बंद होने से पहले ही गांव-गांव, होटल और ढाबों में शराब पहुंचा दी गई है। सूत्रों के अनुसार त्योहार के 2 दिन पहले से ही ठेकेदार के गुर्गे मोटर साइकिल में पेटियों में भरकर शराब गांवों में पहुंचा दी गई  है सवाल यह है कि इस अवैध सप्लाई पर अंकुश कब लगेगा?
*दुकान बंद, सप्लाई चालू*
नियम के अनुसार दीपावली जैसे त्योहार पर प्रशासन द्वारा शराब दुकानों को बंद रखने के आदेश दिए जाते हैं, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। पाली में भी आदेश के बाद लाइसेंसी दुकान पर ताला लगा दिखा, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान के पीछे से ही शराब की सप्लाई हो रही थी।
गांवों में रहने वाले लोगों ने बताया कि त्योहार के दिन शाम होते ही गांव के हर मोहल्ले में शराब आसानी से मिल रही थी। होटल और ढाबों पर तो खुलेआम शराब परोसी जा रही थी। एक ग्रामीण ने कहा, "दुकान बंद है, यह तो सिर्फ कागजों में है। असली दुकान तो हमारे गांव के ढाबे पर चल रही है। 200 रुपये की बोतल 400 में मिल रही है।"
*होटल-ढाबे बन गए अवैध अड्डे*
पाली-उमरिया मार्ग, पाली-बिरसिंहपुर मार्ग और पाली-शहडोल मार्ग पाली बन्नैदा मार्ग पर बने कई होटल और ढाबे किराना दुकान पान के टपरे शराब के अवैध अड्डे बन गए हैं। यहां ट्रक ड्राइवरों से लेकर स्थानीय युवाओं तक को शराब पिलाई जा रही है। ढाबा मालिकों को ठेकेदार की ओर से पहले ही स्टॉक पहुंचा दिया जाता है और मुनाफा आपस में बांट लिया जाता है। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम इन ढाबों पर कभी जांच करने नहीं पहुंचती।
*सागर हादसे से भी नहीं लिया सबक*
कुछ दिन पहले सागर में शराब के नशे में हुए बड़े हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। उस हादसे में कई मासूम जानें गई थीं। लेकिन पाली क्षेत्र के प्रशासन ने उससे कोई सबक नहीं लिया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या पाली प्रशासन भी सागर जैसे हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी की जान जाने के बाद ही यहां कार्रवाई होगी?
एक तरफ देश के गृह मंत्री अमित शाह जी नशामुक्ति को लेकर अभियान चलाने और शराबबंदी की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाली में खुलेआम शराब की अवैध बिक्री हो रही है। यह दोहरा रवैया जनता को समझ नहीं आ रहा।
*युवाओं में बढ़ रहा नशा*
दीपावली के त्योहार पर गांवों में युवाओं में शराब पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। नशे में मारपीट, झगड़े और सड़क हादसों की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। महिलाओं का कहना है कि त्योहार के दिन उनके घरों में शांति नहीं रहती, शराब पीकर लोग गाली-गलौज करते हैं।
*जनता की मांग*
पाली क्षेत्र में शराब ठेकेदार के स्टॉक की तत्काल जांच हो, दुकान बंद होने के बाद शराब कहां गई, इसका हिसाब लिया जाए।
गांव-गांव में शराब पहुंचाने वाले होटल-ढाबों पर छापा मारकर कार्रवाई हो।
आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर रात में गश्त बढ़ाई जाए।
अवैध शराब बेचने वालों पर एफआईआर दर्ज हो, सिर्फ जुर्माना लगाकर न छोड़ा जाए।
पाली की जनता अब पूछ रही है - *जब दुकान बंद है तो गांव में शराब कहां से आ रही है?* अगर प्रशासन ने समय रहते इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया तो दीपावली की खुशियां किसी परिवार के लिए मातम में बदल सकती हैं।
    user_Om Agrawal
    Om Agrawal
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    42 min ago
  • # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था ### # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन? ### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था ### अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की मांग तेज **आशुतोष त्रिपाठी-जनचिंगारी/उमरिया।** नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए नासूर बनता जा रहा है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख तिराहे-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। अव्यवस्थित यातायात के चलते राहगीरों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों और बाजार आने वाले ग्रामीणों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मानपुर की जनता को जाम से मुक्ति कब मिलेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब जागेगा? **50 गांवों का प्रमुख केंद्र, लेकिन यातायात व्यवस्था बेहाल** मानपुर केवल नगर परिषद मुख्यालय नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों के लिए प्रमुख बाजार और आवश्यक सुविधाओं का केंद्र है। यहां तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, बैंक, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक शासकीय कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक अपने कामकाज के लिए पहुंचते हैं। इसके चलते मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। बावजूद इसके, यातायात प्रबंधन की कोई प्रभावी और स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आती। **एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी खतरा** जाम की समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आपातकालीन सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। बाजार में जाम लगने पर एंबुलेंस, मरीजों को ले जाने वाले वाहनों और अन्य जरूरी सेवाओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। किसी आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की गंभीरता बेहद जरूरी है। **पुलिस के प्रयास नाकाफी, अतिरिक्त बल की जरूरत** मानपुर पुलिस समय-समय पर यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयास करती है, लेकिन सीमित पुलिस बल और कानून-व्यवस्था की अन्य जिम्मेदारियों के कारण प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी संभव नहीं हो पाती। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग उठ रही है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार के प्रमुख तिराहों एवं चौराहों पर व्यस्त समय के दौरान पुलिसकर्मियों की नियमित तैनाती की जाए, ताकि अव्यवस्थित पार्किंग और वाहनों की बेतरतीब आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जा सके। **स्थायी बस स्टैंड के बिना कैसे सुधरेगी व्यवस्था?** मानपुर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए स्थायी बस स्टैंड का निर्माण भी बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन और नगर परिषद को इस दिशा में तत्काल पहल करनी चाहिए। बसों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल, यात्रियों के बैठने की सुविधा और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होने से मुख्य बाजार में वाहनों का अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में पार्किंग स्थल निर्धारित करने और यातायात संचालन की स्थायी कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। **व्यापारी और नागरिक भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी** यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन और पुलिस की नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। व्यापारियों को दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान फैलाने से बचना चाहिए। ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग भी व्यवस्थित तरीके से कराई जानी चाहिए, ताकि सड़क पर आवागमन बाधित न हो। प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है। **क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा प्रशासन?** जब मानपुर लगभग 50 गांवों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तब यातायात व्यवस्था की बदहाली पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी समझ से परे है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस जनसमस्या को प्राथमिकता से लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम की परेशानी झेलती रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या जनता को अपनी जायज मांगों के लिए धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा? अब जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण, व्यवस्थित पार्किंग और बाजार क्षेत्र में प्रभावी यातायात प्रबंधन ही मानपुर को रोजाना लगने वाले जाम से राहत दिला सकते हैं।
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    # रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था
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# रोजाना जाम से जूझ रहा मानपुर, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
### 50 गांवों का प्रमुख बाजार और शासकीय कार्यालयों का केंद्र होने के बावजूद बदहाल यातायात व्यवस्था
### अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और स्थायी बस स्टैंड निर्माण की मांग तेज
**आशुतोष त्रिपाठी-जनचिंगारी/उमरिया।**
नगर परिषद मानपुर में रोजाना लगने वाला जाम अब आम नागरिकों के लिए नासूर बनता जा रहा है। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख तिराहे-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। अव्यवस्थित यातायात के चलते राहगीरों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों और बाजार आने वाले ग्रामीणों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मानपुर की जनता को जाम से मुक्ति कब मिलेगी और जिम्मेदार प्रशासन कब जागेगा?
**50 गांवों का प्रमुख केंद्र, लेकिन यातायात व्यवस्था बेहाल**
मानपुर केवल नगर परिषद मुख्यालय नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों के लिए प्रमुख बाजार और आवश्यक सुविधाओं का केंद्र है। यहां तहसील, सिविल कोर्ट, जनपद पंचायत, बैंक, महिला एवं बाल विकास परियोजना, कृषि विभाग सहित अनेक शासकीय कार्यालय संचालित हैं। इन कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, व्यापारी और आम नागरिक अपने कामकाज के लिए पहुंचते हैं। इसके चलते मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों पर दिनभर वाहनों का दबाव बना रहता है। बावजूद इसके, यातायात प्रबंधन की कोई प्रभावी और स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आती।
**एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी खतरा**
जाम की समस्या अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आपातकालीन सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है। बाजार में जाम लगने पर एंबुलेंस, मरीजों को ले जाने वाले वाहनों और अन्य जरूरी सेवाओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। किसी आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की गंभीरता बेहद जरूरी है।
**पुलिस के प्रयास नाकाफी, अतिरिक्त बल की जरूरत**
मानपुर पुलिस समय-समय पर यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयास करती है, लेकिन सीमित पुलिस बल और कानून-व्यवस्था की अन्य जिम्मेदारियों के कारण प्रत्येक व्यस्त स्थान पर नियमित निगरानी संभव नहीं हो पाती। ऐसे में पुलिस अधीक्षक उमरिया से मांग उठ रही है कि मानपुर थाने को अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। मुख्य बाजार, बस स्टैंड और मुक्त बाजार के प्रमुख तिराहों एवं चौराहों पर व्यस्त समय के दौरान पुलिसकर्मियों की नियमित तैनाती की जाए, ताकि अव्यवस्थित पार्किंग और वाहनों की बेतरतीब आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जा सके।
**स्थायी बस स्टैंड के बिना कैसे सुधरेगी व्यवस्था?**
मानपुर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए स्थायी बस स्टैंड का निर्माण भी बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन और नगर परिषद को इस दिशा में तत्काल पहल करनी चाहिए। बसों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल, यात्रियों के बैठने की सुविधा और व्यवस्थित आवागमन की व्यवस्था होने से मुख्य बाजार में वाहनों का अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र में पार्किंग स्थल निर्धारित करने और यातायात संचालन की स्थायी कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है।
**व्यापारी और नागरिक भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी**
यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन और पुलिस की नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। व्यापारियों को दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान फैलाने से बचना चाहिए। ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग भी व्यवस्थित तरीके से कराई जानी चाहिए, ताकि सड़क पर आवागमन बाधित न हो। प्रशासन, पुलिस, नगर परिषद, व्यापारियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है।
**क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा प्रशासन?**
जब मानपुर लगभग 50 गांवों की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है और यहां इतने महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हैं, तब यातायात व्यवस्था की बदहाली पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी समझ से परे है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इस जनसमस्या को प्राथमिकता से लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।
आखिर कब तक मानपुर की जनता रोजाना जाम की परेशानी झेलती रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या जनता को अपनी जायज मांगों के लिए धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा?
अब जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, स्थायी बस स्टैंड का निर्माण, व्यवस्थित पार्किंग और बाजार क्षेत्र में प्रभावी यातायात प्रबंधन ही मानपुर को रोजाना लगने वाले जाम से राहत दिला सकते हैं।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
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