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राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानसून से पहले 375 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। इन केंद्रों के खस्ताहाल होने के कारण मासूम बच्चों की जान को खतरा बताया जा रहा है, और इन्हें खंडहर में तब्दील हो चुके भवनों के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग इन वर्षों पुराने खतरनाक भवनों को गिराएगा। इसमें कुशलगढ़ ब्लॉक के 43 आंगनबाड़ी भवन भी शामिल हैं। ध्वस्तिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उपखंड अधिकारी करेंगे और सीडीपीओ तथा पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। ध्वस्त करते समय जन-धन हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, इसी जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुपगढ़ में स्थित सातलिया की टोडी का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसे पूर्व सरपंच द्वारा पूरा बनाया जाना था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह केंद्र अधूरा ही है। इस पर जिला प्रशासन, एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन सात सालों में यह अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन उनकी नज़र में क्यों नहीं आया। अब देखना यह होगा कि इस बार सातलिया की टोडी के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र को पूरा करने और उस पर जिला प्रशासन ध्यान देगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।

10 hrs ago
user_Dharmendra Soni
Dharmendra Soni
कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
10 hrs ago

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानसून से पहले 375 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। इन केंद्रों के खस्ताहाल होने के कारण मासूम बच्चों की जान को खतरा बताया जा रहा है, और इन्हें खंडहर में तब्दील हो चुके भवनों के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग इन वर्षों पुराने खतरनाक

भवनों को गिराएगा। इसमें कुशलगढ़ ब्लॉक के 43 आंगनबाड़ी भवन भी शामिल हैं। ध्वस्तिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उपखंड अधिकारी करेंगे और सीडीपीओ तथा पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। ध्वस्त करते समय जन-धन हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, इसी जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुपगढ़ में स्थित सातलिया की टोडी का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसे

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पूर्व सरपंच द्वारा पूरा बनाया जाना था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह केंद्र अधूरा ही है। इस पर जिला प्रशासन, एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन सात सालों में यह अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन उनकी नज़र में क्यों नहीं आया। अब देखना यह होगा कि इस बार सातलिया की टोडी के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र को पूरा करने और उस पर जिला प्रशासन ध्यान देगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।

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  • राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानसून से पहले 375 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। इन केंद्रों के खस्ताहाल होने के कारण मासूम बच्चों की जान को खतरा बताया जा रहा है, और इन्हें खंडहर में तब्दील हो चुके भवनों के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग इन वर्षों पुराने खतरनाक भवनों को गिराएगा। इसमें कुशलगढ़ ब्लॉक के 43 आंगनबाड़ी भवन भी शामिल हैं। ध्वस्तिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उपखंड अधिकारी करेंगे और सीडीपीओ तथा पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। ध्वस्त करते समय जन-धन हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। हालांकि, इसी जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुपगढ़ में स्थित सातलिया की टोडी का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसे पूर्व सरपंच द्वारा पूरा बनाया जाना था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह केंद्र अधूरा ही है। इस पर जिला प्रशासन, एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन सात सालों में यह अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन उनकी नज़र में क्यों नहीं आया। अब देखना यह होगा कि इस बार सातलिया की टोडी के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र को पूरा करने और उस पर जिला प्रशासन ध्यान देगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।
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    राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानसून से पहले 375 जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है। इन केंद्रों के खस्ताहाल होने के कारण मासूम बच्चों की जान को खतरा बताया जा रहा है, और इन्हें खंडहर में तब्दील हो चुके भवनों के रूप में चिन्हित किया गया था। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को इन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग इन वर्षों पुराने खतरनाक भवनों को गिराएगा। इसमें कुशलगढ़ ब्लॉक के 43 आंगनबाड़ी भवन भी शामिल हैं। ध्वस्तिकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उपखंड अधिकारी करेंगे और सीडीपीओ तथा पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। ध्वस्त करते समय जन-धन हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।

हालांकि, इसी जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुपगढ़ में स्थित सातलिया की टोडी का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसे पूर्व सरपंच द्वारा पूरा बनाया जाना था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यह केंद्र अधूरा ही है। इस पर जिला प्रशासन, एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन सात सालों में यह अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन उनकी नज़र में क्यों नहीं आया। अब देखना यह होगा कि इस बार सातलिया की टोडी के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र को पूरा करने और उस पर जिला प्रशासन ध्यान देगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना से जुड़े करोड़ों परिवारों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है, जिसके तहत अब सहायता वाले गैस सिलेंडरों की संख्या घटाकर प्रति वर्ष 4 कर दी गई है। यह फैसला उन लाभार्थियों के लिए एक झटका है, जिन्हें पहले सालाना 9 सिलेंडरों पर सहायता मिलती थी, जबकि योजना की शुरुआत में यह संख्या 12 थी। सरकार ने इस कटौती के पीछे लाभार्थियों की औसत गैस खपत को मुख्य कारण बताया है। गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण गैस की लागत बढ़ी है। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को सहायता जारी रहेगी।
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    केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना से जुड़े करोड़ों परिवारों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है, जिसके तहत अब सहायता वाले गैस सिलेंडरों की संख्या घटाकर प्रति वर्ष 4 कर दी गई है। यह फैसला उन लाभार्थियों के लिए एक झटका है, जिन्हें पहले सालाना 9 सिलेंडरों पर सहायता मिलती थी, जबकि योजना की शुरुआत में यह संख्या 12 थी।

सरकार ने इस कटौती के पीछे लाभार्थियों की औसत गैस खपत को मुख्य कारण बताया है। गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण गैस की लागत बढ़ी है।

इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को सहायता जारी रहेगी।
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    OFFICIAL NEWS EXPLAINER
    News Anchor बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    46 min ago
  • ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुशलगढ़ एवं सज्जनगढ़ की एक संयुक्त बैठक मंगलवार को कुशलगढ़ स्थित विधायक निवास पर आयोजित की गई। इस बैठक में महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्रीय जनसमस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें राजस्थान की पूर्व कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत और क्षेत्रीय विधायक रमीला खड़िया प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। पूर्व मंत्री शकुंतला रावत ने इस दौरान बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से आमजन के प्रभावित होने तथा कांग्रेस की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव कम होने की बात कही। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया। वहीं, विधायक रमीला खड़िया ने मनरेगा में रोजगार और भुगतान में देरी, पलायन की समस्या और आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संघर्ष जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या, सज्जनगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष भरतभाई मेरावत, जनपद सदस्य एवं युवा नेता विजयसिंह खड़िया और युवा नेता विजयभाई मइड़ा ने भी संगठन के सुदृढ़ीकरण, युवाओं की सक्रिय भागीदारी और जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस की भूमिका को सशक्त बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर कालूसिंह गरासिया, निलेश मेरावत, नारजी सिंघाड़ा, राजेंद्र कलाल, रोहित खड़िया, भीमा मइड़ा, शांतिलाल, राजेश, हितेश रावत, लालसिंह, भरत, कमजीभाई, हुरमल, मोगजी राणा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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    ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कुशलगढ़ एवं सज्जनगढ़ की एक संयुक्त बैठक मंगलवार को कुशलगढ़ स्थित विधायक निवास पर आयोजित की गई। इस बैठक में महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्रीय जनसमस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें राजस्थान की पूर्व कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत और क्षेत्रीय विधायक रमीला खड़िया प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।

पूर्व मंत्री शकुंतला रावत ने इस दौरान बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से आमजन के प्रभावित होने तथा कांग्रेस की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव कम होने की बात कही। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया। वहीं, विधायक रमीला खड़िया ने मनरेगा में रोजगार और भुगतान में देरी, पलायन की समस्या और आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संघर्ष जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या, सज्जनगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष भरतभाई मेरावत, जनपद सदस्य एवं युवा नेता विजयसिंह खड़िया और युवा नेता विजयभाई मइड़ा ने भी संगठन के सुदृढ़ीकरण, युवाओं की सक्रिय भागीदारी और जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस की भूमिका को सशक्त बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर कालूसिंह गरासिया, निलेश मेरावत, नारजी सिंघाड़ा, राजेंद्र कलाल, रोहित खड़िया, भीमा मइड़ा, शांतिलाल, राजेश, हितेश रावत, लालसिंह, भरत, कमजीभाई, हुरमल, मोगजी राणा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • जेठाना में मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत स्वीकृत बस स्टैंड से सीताराम आश्रम वाया पाडाकला सड़क निर्माण कार्य के मार्ग में हुए अतिक्रमण को प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर हटा दिया है। यह कार्रवाई अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, सागवाड़ा के निवेदन पर तथा उपखंड अधिकारी, सागवाड़ा के आदेशों की पालना में की गई। दरअसल, मौजा जेठाना में प्रस्तावित 5.50 मीटर चौड़ी सड़क के रास्ते पर ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर, तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और पुलिस जाप्ते की एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान राजस्व टीम से भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त जेठाना यशपाल सिंह पंवार और पटवारी हल्का जेठाना पूनम सेवक उपस्थित रहे। सार्वजनिक निर्माण विभाग, सागवाड़ा से अधिशासी अभियंता माधव जोरवाल और कनिष्ठ अभियंता कीर्तेश पाटीदार भी मौजूद थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था। तहसीलदार डॉ. रमेश चन्द्र वडेरा ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत स्वीकृत परियोजना समय पर पूरी हो सके, इसी उद्देश्य से यह अतिक्रमण हटाया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे सार्वजनिक विकास कार्यों में सहयोग करें।
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    जेठाना में मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2026-27 के अंतर्गत स्वीकृत बस स्टैंड से सीताराम आश्रम वाया पाडाकला सड़क निर्माण कार्य के मार्ग में हुए अतिक्रमण को प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई कर हटा दिया है। यह कार्रवाई अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, सागवाड़ा के निवेदन पर तथा उपखंड अधिकारी, सागवाड़ा के आदेशों की पालना में की गई। दरअसल, मौजा जेठाना में प्रस्तावित 5.50 मीटर चौड़ी सड़क के रास्ते पर ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी।

शिकायत के आधार पर, तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और पुलिस जाप्ते की एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान राजस्व टीम से भू-अभिलेख निरीक्षक वृत्त जेठाना यशपाल सिंह पंवार और पटवारी हल्का जेठाना पूनम सेवक उपस्थित रहे। सार्वजनिक निर्माण विभाग, सागवाड़ा से अधिशासी अभियंता माधव जोरवाल और कनिष्ठ अभियंता कीर्तेश पाटीदार भी मौजूद थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

तहसीलदार डॉ. रमेश चन्द्र वडेरा ने बताया कि सड़क निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत स्वीकृत परियोजना समय पर पूरी हो सके, इसी उद्देश्य से यह अतिक्रमण हटाया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे सार्वजनिक विकास कार्यों में सहयोग करें।
    user_Sagwara live news
    Sagwara live news
    Local News Reporter सागवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • राजस्थान जिला राज 35 प्रतापगढ़ तहसील उदयपुर पुलिस थाना देवगढ़ मेरा गांव का नाम लोहारिया डूंगरपुर बांसवाड़ा
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    राजस्थान जिला राज 35 प्रतापगढ़ तहसील उदयपुर पुलिस थाना देवगढ़ मेरा गांव का नाम लोहारिया डूंगरपुर बांसवाड़ा
    user_Vikram Singh
    Vikram Singh
    घाटोल, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा। रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा। रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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    राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) ने शिक्षा विभाग में व्याप्त प्रशासनिक विसंगतियों, पदोन्नति के सीमित अवसरों और शिक्षकों-प्रधानाचार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। परिषद के आह्वान पर, बुधवार को सीमलवाड़ा ब्लॉक इकाई ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर का शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

रेसा पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में समय के अनुकूल सुधार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण विद्यालयों और शिक्षा अधिकारियों को अनेक प्रशासनिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था शिक्षा प्रशासन को कमजोर कर रही है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से प्रधानाचार्यों के पदोन्नति अवसरों का मुद्दा उठाया गया है। परिषद ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि उनके ऊपर के प्रशासनिक पदों की संख्या अत्यंत सीमित है, जैसे जिला शिक्षा अधिकारी के मात्र 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 और अतिरिक्त निदेशक के केवल तीन पद स्वीकृत हैं। ऐसे में, अधिकांश प्रधानाचार्य पूरी सेवा अवधि में पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं। परिषद ने मांग की कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के बीच एक नया पदोन्नति पद तत्काल सृजित किया जाए। संगठन का कहना है कि एसीबीईओ, एडीईओ, सहायक निदेशक, एपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता तथा नोडल एवं संकुल विद्यालयों में कार्यरत पदों का उन्नयन कर नए पदों का सृजन किया जा सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा।

रेसा ने वर्ष 2026-27 की लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठकों को शीघ्र आयोजित करने की मांग की है। इसके साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन और कैडर पुनर्गठन की आवश्यकता बताई गई, क्योंकि संगठन का मानना है कि वर्तमान प्रशासनिक ढाँचा विभाग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के नवगठित आठ जिलों के गठन को लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन वहां अभी तक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी) तथा डाइट कार्यालयों की स्थापना नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षा प्रशासन प्रभावित हो रहा है। परिषद ने इन कार्यालयों की तत्काल स्वीकृति और पदस्थापन की मांग की। वहीं, परिषद ने कहा कि एक-एक प्रधानाचार्य को पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में पाँच से तीस विद्यालयों तक के प्रशासनिक कार्यों, वेतन भुगतान और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, लेकिन इतने अतिरिक्त कार्य के बावजूद कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। संगठन ने इस अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था का बहिष्कार किया जाएगा।

रेसा ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को शिक्षा के अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि जनगणना और चुनाव जैसे आवश्यक कार्यों को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाना चाहिए। साथ ही, बार-बार आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंस, रैलियों, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताओं के नाम पर जारी आदेशों पर भी रोक लगाने की मांग की गई। परिषद ने विद्यालयों में निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश तथा भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी तकनीकी जिम्मेदारियां प्रधानाचार्यों से हटाकर एडीपीसी कार्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपने की मांग की, क्योंकि संगठन का कहना है कि इन कार्यों के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। ज्ञापन में बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों को एपीओ अथवा निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने मांग की कि किसी भी शिकायत पर उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए, ताकि अधिकारियों का मनोबल बना रहे। अंत में, रेसा ने शिक्षा विभाग सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के भविष्य से जुड़ा होने के कारण विभागीय नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में अनुभवी शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, यह मानते हुए कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बन सकेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान रेसा ब्लॉक समन्वयक प्राचार्य धनपाल भोई, विनोद पाटीदार, अभिनंदन सिंह, नागेंद्र सिंह झाला, महेंद्र कुमार लबाना, नरवरलाल लबाना, मोहम्मद इशाक, राजेंद्र सिंह चौहान, हरिशचंद्र सिंह सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
    user_Gunwant kalal
    Gunwant kalal
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • लालगढ़ में किसानों के बीच मक्का मिनी किट का वितरण किया गया है। इस पहल के तहत, किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया और उन्हें इसी से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया।
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    लालगढ़ में किसानों के बीच मक्का मिनी किट का वितरण किया गया है। इस पहल के तहत, किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया और उन्हें इसी से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया।
    user_Baba
    Baba
    अरनोद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • बांसवाड़ा जिले के दानपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2021 में हुए एक दुष्कर्म के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए उसे 10 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार, कांकईडूंगरी निवासी दिनेश पुत्र जीवनलाल पर आरोप था कि उसने महिला के पति की आवाज लगाकर घर का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद आरोपी घर में घुस गया और दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। बताया गया कि आरोपी ने महिला को दोबारा अकेला पाकर दूसरी बार भी दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान, सरकारी वकील योगेश सोमपुरा ने अदालत के समक्ष 8 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 28 दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद, जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम सुरेश प्रसाद की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और यह सजा सुनाई।
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    बांसवाड़ा जिले के दानपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2021 में हुए एक दुष्कर्म के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए उसे 10 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

मामले के अनुसार, कांकईडूंगरी निवासी दिनेश पुत्र जीवनलाल पर आरोप था कि उसने महिला के पति की आवाज लगाकर घर का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद आरोपी घर में घुस गया और दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। बताया गया कि आरोपी ने महिला को दोबारा अकेला पाकर दूसरी बार भी दुष्कर्म किया।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान, सरकारी वकील योगेश सोमपुरा ने अदालत के समक्ष 8 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 28 दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद, जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम सुरेश प्रसाद की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और यह सजा सुनाई।
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    News Anchor बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    2 hrs ago
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