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संसद छोड़ने पर विपक्ष का तंज, सरकार से पूछा सवाल संसदीय क्षेत्र गोद लेने वाले संसद को अनाथ छोड़कर कहाँ चले गए?" संसद के मौजूदा सत्र के बीच विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है। विपक्ष की ओर से कहा गया कि "संसदीय क्षेत्र को गोद लेने की बात करने वाले संसद को ही अनाथ छोड़कर कहाँ चले गए?" इस बयान के जरिए विपक्ष ने प्रधानमंत्री की संसद में अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया और सरकार से सदन में आकर महत्वपूर्ण विषयों पर जवाब देने की मांग की।
फास्ट न्यूज इंडिया पीलीभीत
संसद छोड़ने पर विपक्ष का तंज, सरकार से पूछा सवाल संसदीय क्षेत्र गोद लेने वाले संसद को अनाथ छोड़कर कहाँ चले गए?" संसद के मौजूदा सत्र के बीच विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है। विपक्ष की ओर से कहा गया कि "संसदीय क्षेत्र को गोद लेने की बात करने वाले संसद को ही अनाथ छोड़कर कहाँ चले गए?" इस बयान के जरिए विपक्ष ने प्रधानमंत्री की संसद में अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया और सरकार से सदन में आकर महत्वपूर्ण विषयों पर जवाब देने की मांग की।
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- अमित शाह सदन में आओ, छात्रों पर हुई कार्रवाई का जवाब दो' संसद परिसर में विपक्ष ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा संसद परिसर, दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि यह केवल विपक्ष की नहीं, बल्कि पूरे देश की मांग है। नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कथित क्रूरता पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए और इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करानी चाहिए।1
- शारदा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया शारदा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया शारदा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया पीलीभीत जनपद की पूरनपुर तहसील के ट्रांस शारदा क्षेत्र में शारदा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। ग्राम हजारा में तेज भू-कटान से आधा दर्जन से अधिक किसानों की कृषि भूमि गन्ने की लहलहाती फसल समेत नदी में समा गई है । लगातार बढ़ रहे भू कटान से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं कराया गया तो हजारा, शास्त्रीनगर, सिद्धनगर, भरजूनियां फार्म, और भरतपुर समेत कई गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इतना ही नहीं, धनाराघाट पर शारदा नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन पुल पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।बड़ी संख्या में ग्रामीण शारदा नदी के किनारे एकत्र हुए और शासन-प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर तत्काल कटान रोकने के लिए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की। ग्रामीणों ने योगी सरकार से अपील करते हुए कहा कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हर साल किसानों की उपजाऊ जमीन और गांव नदी की भेंट चढ़ते रहेंगे।ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी शारदा नदी ने दर्जनों किसानों की कृषि भूमि और खड़ी फसल को अपनी आगोश में ले लिया था। उस समय क्षेत्रीय विधायक बाबूराम पासवान से मिलकर स्थायी समाधान की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।परिणामस्वरूप इस वर्ष फिर नदी का कटान शुरू हो गया है और किसानों की चिंता बढ़ गई है।वहीं विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर मुख्य रूप से राकेश यादव, ग्राम पंचायत सदस्य परमात्मा, रामचंद्र लाल, राधेश्याम, रामलखन, रामकिशोर, रजनीश कुशवाहा, लक्ष्मण, पुतूलाल, हरसुवरन लाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं पीड़ित किसान मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल तटबंध निर्माण, कटानरोधी कार्य और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।3
- असली जेन ज़ी कौन है और क्या होगा अगर असली जेन ज़ी सड़कों पर आ गया!! असली जेन ज़ी कौन है और क्या होगा अगर असली जेन ज़ी सड़कों पर आ गया!! #JantarMantar #GenZ #thevoiceofnation1
- 2027 की जंग की तैयारी में जुटी सपा: पूर्व विधायक अरशद खां पहुंचे यूसुफ कादरी के कैंप कार्यालय, 127 शहर सीट पर बनी जीत की रणनीति पीलीभीत। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में पूर्व विधायक अरशद खां ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता यूसुफ कादरी के कैंप कार्यालय पहुंचकर चुनावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में विशेष रूप से 127 शहर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, संगठन को और अधिक मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने तथा जनसंपर्क अभियान को तेज करने पर विस्तार से मंथन किया गया। दोनों नेताओं ने आगामी चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाने के लिए साझा रणनीति पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि "समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है। सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पूरी ताकत और समर्पण के साथ काम करना होगा। जनता के बीच लगातार पहुंचकर पार्टी की नीतियों और उपलब्धियों को बताएं तथा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करें।" बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव में पूरी मेहनत से जुटने का संकल्प लिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 127 शहर विधानसभा सीट पर सपा ने अभी से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।1
- कहानी: तीन मित्र और वह एक रात।अविश्वास और पराई बातों पर निर्भरता' राजा का लड़का, बनिए का लड़का और साहूकार का लड़का—तीनों घने जंगल और पगडंडियों को पार करते हुए राजा के ससुर के राज्य की सीमा पर पहुँचे। रास्ते में हंसी-मजाक हुआ, लेकिन जैसे-जैसे शाम ढलने लगी, वातावरण में एक अजीब सी खामोशी छा गई। जब वे उस नगर में पहुँचे, तो सूरज डूब चुका था। योजना के अनुसार, राजा का लड़का सीधे महल के मुख्य द्वार की ओर बढ़ा, जहाँ उसका भव्य स्वागत हुआ। वहीं, बनिए और साहूकार के लड़कों ने शहर के किनारे एक पुरानी, लेकिन सुरक्षित दिखने वाली सराय में डेरा डाला। सराय में रुकने के बाद, साहूकार के लड़के के मन में जिज्ञासा जागी। उसने कहा, "मित्र, राजा का लड़का तो महल के सुख में है, क्यों न हम नगर का भ्रमण करें और देखें कि यहाँ की शामें कैसी होती हैं?" घूमते-घूमते वे दोनों महल की बाहरी दीवार के पास पहुँचे। वहां उन्होंने देखा कि महल की एक ऊँची खिड़की पर एक सुंदर स्त्री खड़ी होकर बाहर की ओर देख रही है। वह राजा के लड़के की पत्नी नहीं थी, बल्कि कोई और थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। साहूकार के लड़के ने चुपके से उसे एक फूल फेंका। स्त्री ने खिड़की से नीचे झुककर देखा, मुस्कुराई, और अपनी उंगलियों से कुछ इशारा किया। अगले दिन सुबह, राजा का लड़का अपनी पत्नी को लेकर सराय पहुँचा। वह बहुत खुश था। लेकिन जैसे ही वे शहर से बाहर निकले, साहूकार का लड़का बीच-बीच में पीछे मुड़कर उसी खिड़की को देख रहा था। राजा का लड़का, जो अपने दोस्तों को बहुत मानता था, उसने पूछा, "क्या बात है मित्र, तुम इतने खामोश क्यों हो?" साहूकार के लड़के ने राजा के लड़के के कान में कहा, "मित्र, हमने कल रात सराय में जो देखा, उसे बताकर हम तुम्हारी खुशी कम नहीं करना चाहते।" राजा का लड़का गंभीर हो गया और उसने जिद्द की कि उसे सच जानना है। साहूकार का लड़का बोला, "हमने कल रात महल की खिड़की पर एक सुंदर स्त्री देखी, जो किसी के इंतज़ार में थी। हमें शक है कि तुम्हारे महल की सुरक्षा में कोई सेंध है।" राजा का लड़का क्रोधित हो गया। उसे लगा कि उसके ससुर के महल की मर्यादा को चुनौती दी गई है। उसने तुरंत अपने सैनिकों को आदेश दिया कि महल की हर उस जगह की तलाशी ली जाए जहाँ बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है। जब तलाशी हुई, तो पता चला कि वह स्त्री वास्तव में महल के खजांची की बेटी थी, जो किसी बाहरी व्यक्ति को गुप्त संदेश भेज रही थी। राजा का लड़का गर्व से अपने मित्रों की ओर मुड़ा, "देखा? मेरी सतर्कता ने एक बड़ा अनर्थ होने से बचा लिया।" परंतु कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई। जब वे अपने राज्य पहुँचे, तो बनिए का लड़का चुपके से राजा के लड़के की पत्नी के पास गया और फुसफुसाया, "तुम्हारे पति को लगता है कि वे बहुत बुद्धिमान हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि सराय की उस खिड़की पर मैंने जिसे देखा था, वह खजांची की बेटी नहीं, बल्कि तुम्हारी अपनी सखी थी, जो तुम्हारे पति के आने की खबर पाकर वहां से हटी थी।" अब मैना का तर्क: कहानी सुनाने के बाद तोता मैना की ओर देखता है। मैना शांत भाव से मुस्कुराती है और कहती है: "तोता जी, आपने कहानी तो बहुत चतुराई से सुनाई, लेकिन आप भूल गए कि गलती न लड़के की थी और न लड़की की। गलती थी 'अविश्वास और पराई बातों पर निर्भरता' की। राजा का लड़का अपनों पर शक कर बैठा, मित्रों ने सच को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया, और उस स्त्री ने अपनी मर्यादा को खतरे में डाला। स्वार्थ किसी लिंग (gender) का नहीं, बल्कि इंसान के चरित्र का होता है। जिस दिन इंसान दूसरों की बातों में आकर अपने विश्वास को खो देता है, उस दिन वह अपने आप ही स्वार्थी हो जाता है।" तोता कुछ देर चुप रहा, उसे समझ आ गया था कि मैना की दृष्टि उससे कहीं अधिक गहरी है।1
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