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पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे' पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे'

16 hrs ago
user_Bharat sharma
Bharat sharma
पडवा, पलामू, झारखंड•
16 hrs ago

पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे' पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे'

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  • पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे' पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे'
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    पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, 

फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे'
पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, 
फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे'
    user_Bharat sharma
    Bharat sharma
    पडवा, पलामू, झारखंड•
    16 hrs ago
  • गढ़वा नगर परिषद के कारनामे पर बवाल गढ़वा शहर के रंका मोड़ स्थित घंटाघर की खूबसूरती दिखाने के लिए हरा भरा विशाल पीपल पेड़ कटवा दिया गया है। विपक्ष और जनता नाराज
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    गढ़वा नगर परिषद के कारनामे पर बवाल
गढ़वा शहर के रंका मोड़ स्थित 
घंटाघर की खूबसूरती दिखाने के लिए हरा भरा विशाल पीपल पेड़ कटवा दिया गया है।
विपक्ष और जनता नाराज
    user_Shital vishwakarma
    Shital vishwakarma
    पत्रकार बिश्नुनपुर, गढवा•
    38 min ago
  • परम आदरणीय अति सम्मानित भारत जैसे विशाल देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं। जो भारत देश को विश्व गुरु बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं हमारी कामना है फिर 2029 में प्रधानमंत्री पद सुशोभित करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेंद्र मोदी) के लिए राजनीतिक मंचों और समर्थकों द्वारा 'तेजस्वी' (या प्रायः 'यशस्वी और तेजस्वी') विशेषण का प्रयोग उनके प्रभावशाली नेतृत्व, तेज-तर्रार भाषण शैली और ऊर्जावान कार्यशैली को दर्शाने के लिए किया जाता है। [1, 2] सम्मान और विशेषण के कारण ऊर्जावान नेतृत्व: उनकी कार्यशैली में देश और दुनिया के स्तर पर दिखने वाली सक्रियता और दृढ़ता। प्रभावी संवाद शैली: जनता को सीधे जोड़ने और प्रेरित करने की उनकी भाषण कला। सफलता और यश: राजनीतिक व प्रशासनिक मोर्चों पर मिलने वाली सफलताओं को सम्मान देने के लिए समर्थक इस प्रकार के विशेषणों का उपयोग करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक और बुनियादी ढांचे के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। इस कार्यकाल की सफलता और कमियों का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोणों से किया जाता है। [1, 2, 3] विकास और सकारात्मक पक्ष (Progress) बुनियादी ढांचा (Infrastructure): एक्सप्रेसवे, राजमार्गों (प्रतिदिन औसतन 36 किमी सड़क निर्माण), रेलवे और हवाई अड्डों के निर्माण में तेजी आई है। [1, 2] डिजिटलीकरण (Digitalization): UPI और डिजिटल इंडिया ने वित्तीय लेन-देन और सरकारी सेवाओं को आम आदमी तक आसान बनाया है। [1, 2] वैश्विक स्थिति (Global Standing): भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और वैश्विक मंचों पर देश का प्रभाव बढ़ा है। [1, 2, 3] कल्याणकारी योजनाएं (Welfare Schemes): आवास, मुफ्त राशन, शौचालय और स्वच्छ रसोई गैस (LPG) जैसी योजनाओं का लाभ करोड़ों लोगों तक सीधे पहुँचा है। [1, 2] चुनौतियाँ और आलोचनात्मक पक्ष (Challenges) बेरोजगारी और रोजगार (Employment): युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में बेहतर और स्थायी नौकरियों का सृजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। [1, 2] आर्थिक असमानता (Inequality): देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी है तथा धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में होने के आरोप लगते रहे हैं। [1, 2] विनिर्माण (Manufacturing): 'मेक इन इंडिया' के बावजूद कुल जीडीपी में विनिर्माण (manufacturing) का हिस्सा उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ पाया है। कांग्रेस के लंबे शासनकाल में देश की स्थिति मिश्रित रही, जिसमें बुनियादी ढांचे और शिक्षा का विकास हुआ, लेकिन गरीबी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक उथल-पुथल जैसी चुनौतियाँ भी रहीं।मुख्य उपलब्धियाँ और विकाससंस्थाओं की स्थापना: देश में आईआईटी (IIT), एम्स (AIIMS) और आईआईएम (IIM) जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की नींव रखी गई।कृषि और उद्योग: हरित क्रांति के जरिए देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया गया और भारी उद्योगों की स्थापना हुई।विज्ञान और अंतरिक्ष: इसरो (ISRO) और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों की शुरुआत हुई, जिससे तकनीकी क्षेत्र में प्रगति हुई।प्रमुख चुनौतियाँ और समस्याएंआर्थिक संकट: 1991 से पहले देश में कई बार आर्थिक और विदेशी मुद्रा भंडार का गंभीर संकट देखा गया।आपातकाल: वर्ष 1975 से 1977 के दौरान देश में आपातकाल (Emergency) लगा, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ा।आंतरिक अशांति: आतंकवाद, भाषाई और क्षेत्रीय विवाद तथा कई राज्यों में अलगाववादी आंदोलनों का सामना करना पड़ा।
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    परम आदरणीय अति सम्मानित भारत जैसे विशाल देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं। जो भारत देश को विश्व गुरु बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं हमारी कामना है फिर 2029 में प्रधानमंत्री पद सुशोभित करेंगे।
भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेंद्र मोदी) के लिए राजनीतिक मंचों और समर्थकों द्वारा 'तेजस्वी' (या प्रायः 'यशस्वी और तेजस्वी') विशेषण का प्रयोग उनके प्रभावशाली नेतृत्व, तेज-तर्रार भाषण शैली और ऊर्जावान कार्यशैली को दर्शाने के लिए किया जाता है। [1, 2]
सम्मान और विशेषण के कारण
ऊर्जावान नेतृत्व: उनकी कार्यशैली में देश और दुनिया के स्तर पर दिखने वाली सक्रियता और दृढ़ता।
प्रभावी संवाद शैली: जनता को सीधे जोड़ने और प्रेरित करने की उनकी भाषण कला।
सफलता और यश: राजनीतिक व प्रशासनिक मोर्चों पर मिलने वाली सफलताओं को सम्मान देने के लिए समर्थक इस प्रकार के विशेषणों का उपयोग करते हैं। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक और बुनियादी ढांचे के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। इस कार्यकाल की सफलता और कमियों का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोणों से किया जाता है। [1, 2, 3]
विकास और सकारात्मक पक्ष (Progress)
बुनियादी ढांचा (Infrastructure): एक्सप्रेसवे, राजमार्गों (प्रतिदिन औसतन 36 किमी सड़क निर्माण), रेलवे और हवाई अड्डों के निर्माण में तेजी आई है। [1, 2]
डिजिटलीकरण (Digitalization): UPI और डिजिटल इंडिया ने वित्तीय लेन-देन और सरकारी सेवाओं को आम आदमी तक आसान बनाया है। [1, 2]
वैश्विक स्थिति (Global Standing): भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और वैश्विक मंचों पर देश का प्रभाव बढ़ा है। [1, 2, 3]
कल्याणकारी योजनाएं (Welfare Schemes): आवास, मुफ्त राशन, शौचालय और स्वच्छ रसोई गैस (LPG) जैसी योजनाओं का लाभ करोड़ों लोगों तक सीधे पहुँचा है। [1, 2]
चुनौतियाँ और आलोचनात्मक पक्ष (Challenges)
बेरोजगारी और रोजगार (Employment): युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में बेहतर और स्थायी नौकरियों का सृजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। [1, 2]
आर्थिक असमानता (Inequality): देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी है तथा धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में होने के आरोप लगते रहे हैं। [1, 2]
विनिर्माण (Manufacturing): 'मेक इन इंडिया' के बावजूद कुल जीडीपी में विनिर्माण (manufacturing) का हिस्सा उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ पाया है।
कांग्रेस के लंबे शासनकाल में देश की स्थिति मिश्रित रही, जिसमें बुनियादी ढांचे और शिक्षा का विकास हुआ, लेकिन गरीबी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक उथल-पुथल जैसी चुनौतियाँ भी रहीं।मुख्य उपलब्धियाँ और विकाससंस्थाओं की स्थापना: देश में आईआईटी (IIT), एम्स (AIIMS) और आईआईएम (IIM) जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की नींव रखी गई।कृषि और उद्योग: हरित क्रांति के जरिए देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया गया और भारी उद्योगों की स्थापना हुई।विज्ञान और अंतरिक्ष: इसरो (ISRO) और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों की शुरुआत हुई, जिससे तकनीकी क्षेत्र में प्रगति हुई।प्रमुख चुनौतियाँ और समस्याएंआर्थिक संकट: 1991 से पहले देश में कई बार आर्थिक और विदेशी मुद्रा भंडार का गंभीर संकट देखा गया।आपातकाल: वर्ष 1975 से 1977 के दौरान देश में आपातकाल (Emergency) लगा, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ा।आंतरिक अशांति: आतंकवाद, भाषाई और क्षेत्रीय विवाद तथा कई राज्यों में अलगाववादी आंदोलनों का सामना करना पड़ा।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • "मुझे प्रेग्नेंट करिए, 8 लाख रुपए लीजिए " अजब-गजब फेसबुक पर इस कैप्शन के साथ महिलाओं के खूब वीडियो आते हैं। कुछ में मेरी विधवा बेटी से शादी, मेरी बेटी को बच्चा, ऐसे तमाम वीडियो दिखते हैं। ये सब मजदूर टाइप व बुजुर्गों के फेसबुक फीड में ज्यादा आते हैं। क्योंकि इनका इंटरेस्ट ऐसे पोस्ट में दिख जाता है। उत्सुकता बस कई बार कमेंट बॉक्स खोलता हूं तो सैकड़ों लोग अपना नंबर दिए रहते हैं। ऐसे ही बिहार के ये भाई साहब थे। प्रेग्नेंट करके 8 लाख रुपये लेना चाहते थे। इसलिए नंबर दे दिया। इन्हें फोन आया और 800 रुपए देने को कहा। उसने कहा कि कागज बन जाए, ताकि फंसने वाली बात न हो। भाई ने 2 दिन की मजदूरी भेज दी। इसके बाद फंसते चले गए। वीडियो में देख लीजिए। आप लोग अपने आसपास के लोगों को बताया करिए कि ये सब फ्रॉड है। ऐसे ही प्रेग्नेंट करने की इच्छा न पाले, वरना कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।
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    "मुझे प्रेग्नेंट करिए, 8 लाख रुपए लीजिए " अजब-गजब 

फेसबुक पर इस कैप्शन के साथ महिलाओं के खूब वीडियो आते हैं। कुछ में मेरी विधवा बेटी से शादी, मेरी बेटी को बच्चा, ऐसे तमाम वीडियो दिखते हैं। ये सब मजदूर टाइप व बुजुर्गों के फेसबुक फीड में ज्यादा आते हैं। क्योंकि इनका इंटरेस्ट ऐसे पोस्ट में दिख जाता है। 

उत्सुकता बस कई बार कमेंट बॉक्स खोलता हूं तो सैकड़ों लोग अपना नंबर दिए रहते हैं। ऐसे ही बिहार के ये भाई साहब थे। प्रेग्नेंट करके 8 लाख रुपये लेना चाहते थे। इसलिए नंबर दे दिया। 

इन्हें फोन आया और 800 रुपए देने को कहा। उसने कहा कि कागज बन जाए, ताकि फंसने वाली बात न हो। भाई ने 2 दिन की मजदूरी भेज दी। इसके बाद फंसते चले गए। वीडियो में देख लीजिए। 

आप लोग अपने आसपास के लोगों को बताया करिए कि ये सब फ्रॉड है। ऐसे ही प्रेग्नेंट करने की इच्छा न पाले, वरना कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।
    user_Local News
    Local News
    Aadhar center विश्रामपुर, पलामू, झारखंड•
    21 hrs ago
  • असहाय परिवार के साथ खड़ी रहीं सोनदाग पंचायत की मुखिया रीमा देवी, दाह-संस्कार के लिए दी आर्थिक सहायता, हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत सोनदाग पंचायत में मानवीय संवेदनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। मंगलवार को पंचायत की मुखिया रीमा देवी सरजू सिंह के पुत्र चंद्रिका सिंह (उम्र लगभग 40 वर्ष) के निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पहुंचीं। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। मुखिया रीमा देवी ने अपने निजी निधि से दाह-संस्कार के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया, ताकि अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो। उन्होंने परिजनों से कहा कि दुख की इस घड़ी में पंचायत उनके साथ है और भविष्य में भी आवश्यकता पड़ने पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि चंद्रिका सिंह का असामयिक निधन पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत दुखद घटना है। मुखिया रीमा देवी का तुरंत मौके पर पहुंचकर संवेदना व्यक्त करना और आर्थिक सहयोग देना उनके संवेदनशील एवं जनसेवी व्यक्तित्व को दर्शाता है।
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    असहाय परिवार के साथ खड़ी रहीं सोनदाग पंचायत की मुखिया रीमा देवी, दाह-संस्कार के लिए दी आर्थिक सहायता, हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा


गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत सोनदाग पंचायत में मानवीय संवेदनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। मंगलवार को पंचायत की मुखिया रीमा देवी सरजू सिंह के पुत्र  चंद्रिका सिंह (उम्र लगभग 40 वर्ष) के निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पहुंचीं। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
मुखिया रीमा देवी ने अपने निजी निधि से दाह-संस्कार के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया, ताकि अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो। उन्होंने परिजनों से कहा कि दुख की इस घड़ी में पंचायत उनके साथ है और भविष्य में भी आवश्यकता पड़ने पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया कि चंद्रिका सिंह का असामयिक निधन पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत दुखद घटना है। मुखिया रीमा देवी का तुरंत मौके पर पहुंचकर संवेदना व्यक्त करना और आर्थिक सहयोग देना उनके संवेदनशील एवं जनसेवी व्यक्तित्व को दर्शाता है।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    20 hrs ago
  • सभी को सचेत हो जाइए कितने अधिकारी पदाधिकारी सत्ता पर बैठे उन सभी दलालों को कहना चाहता हूं की जल्दी-जल्दी अपना कार्य पूरा कर लीजिए
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    सभी को सचेत हो जाइए कितने अधिकारी पदाधिकारी सत्ता पर बैठे उन सभी दलालों को कहना चाहता हूं की जल्दी-जल्दी अपना कार्य पूरा कर लीजिए
    user_News,hamr lawalong
    News,hamr lawalong
    Local Politician लवालांग, चतरा, झारखंड•
    6 hrs ago
  • एसके झा सर (SK Jha Sir) का 'बगीचा' (बगीचा रेस्टोरेंट एंड रिसॉर्ट) बिहार के हाजीपुर (Hajipur) में NH-22 पर इकारा गुमटी (Ekara Gumti) / कुतुबपुर इकारा के पास स्थित है, जो पटना से लगभग 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। एसके झा सर के इस लोकप्रिय 'बगीचा' रेस्टोरेंट के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं: पता और मुख्य विशेषताएं पूरा पता: BAGICHA RESORT & RESTAURANT, NH-22, इकारा गुमटी (Ekara Gumti), हाजीपुर, वैशाली जिला, बिहार। [1] माहौल: यह एक बड़े हरे-भरे आम के बगीचे और प्राकृतिक वातावरण के बीच बना हुआ अनोखा रेस्टोरेंट व रिसॉर्ट है। [1, 2] खान-पान: यहाँ मिट्टी के चूल्हे पर बना पारंपरिक ग्रामीण शैली का खाना, देसी लिट्टी-चोखा, और लाइव तालाब से ताज़ा मछली निकालकर बनाई जाने वाली डिशेज मिलती हैं। [1, 2, 3]
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    एसके झा सर (SK Jha Sir) का 'बगीचा' (बगीचा रेस्टोरेंट एंड रिसॉर्ट) बिहार के हाजीपुर (Hajipur) में NH-22 पर इकारा गुमटी (Ekara Gumti) / कुतुबपुर इकारा के पास स्थित है, जो पटना से लगभग 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। 
एसके झा सर के इस लोकप्रिय 'बगीचा' रेस्टोरेंट के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
पता और मुख्य विशेषताएं
पूरा पता: BAGICHA RESORT & RESTAURANT, NH-22, इकारा गुमटी (Ekara Gumti), हाजीपुर, वैशाली जिला, बिहार। [1]
माहौल: यह एक बड़े हरे-भरे आम के बगीचे और प्राकृतिक वातावरण के बीच बना हुआ अनोखा रेस्टोरेंट व रिसॉर्ट है। [1, 2]
खान-पान: यहाँ मिट्टी के चूल्हे पर बना पारंपरिक ग्रामीण शैली का खाना, देसी लिट्टी-चोखा, और लाइव तालाब से ताज़ा मछली निकालकर बनाई जाने वाली डिशेज मिलती हैं। [1, 2, 3]
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ? Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ?
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    Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ? 
Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ?
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    5 hrs ago
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