Shuru
Apke Nagar Ki App…
गढ़वा नगर परिषद के कारनामे पर बवाल गढ़वा शहर के रंका मोड़ स्थित घंटाघर की खूबसूरती दिखाने के लिए हरा भरा विशाल पीपल पेड़ कटवा दिया गया है। विपक्ष और जनता नाराज
Shital vishwakarma
गढ़वा नगर परिषद के कारनामे पर बवाल गढ़वा शहर के रंका मोड़ स्थित घंटाघर की खूबसूरती दिखाने के लिए हरा भरा विशाल पीपल पेड़ कटवा दिया गया है। विपक्ष और जनता नाराज
More news from झारखंड and nearby areas
- अगर आपका अकाउंट Bank of Baroda में है, तो सतर्क रहने का समय है। डेटा लीक के दावों के बीच बैंक ने कोर बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बताया है। फिर भी पासवर्ड बदलें, अकाउंट गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत जांच करें। #bankofbaroda #dataleak #cybersecurity ... अगर आपका अकाउंट Bank of Baroda में है, तो सतर्क रहने का समय है। डेटा लीक के दावों के बीच बैंक ने कोर बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बताया है। फिर भी पासवर्ड बदलें, अकाउंट गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत जांच करें। #bankofbaroda #dataleak #cybersecurity ...1
- नगर परिषद गढ़वा में मनमानी और भेदभाव का आरोप आय व्यय का ब्यौरा की मांग नगर परिषद गढ़वा में मनमानी और भेदभाव का आरोप आय व्यय का ब्यौरा की मांग साफ सफाई , स्ट्रीट लाइट की मरम्मत शौचालय और पेयजल की व्यवस्था पर वार्ड पार्षदों ने खोला मोर्चा कार्यपालक अधिकारी को सौंपा आवेदन 7 दिन में सुधारिए नहीं तो करेंगे उग्र आंदोलन लेंगे कठोर निर्णय1
- परम आदरणीय अति सम्मानित भारत जैसे विशाल देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं। जो भारत देश को विश्व गुरु बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं हमारी कामना है फिर 2029 में प्रधानमंत्री पद सुशोभित करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेंद्र मोदी) के लिए राजनीतिक मंचों और समर्थकों द्वारा 'तेजस्वी' (या प्रायः 'यशस्वी और तेजस्वी') विशेषण का प्रयोग उनके प्रभावशाली नेतृत्व, तेज-तर्रार भाषण शैली और ऊर्जावान कार्यशैली को दर्शाने के लिए किया जाता है। [1, 2] सम्मान और विशेषण के कारण ऊर्जावान नेतृत्व: उनकी कार्यशैली में देश और दुनिया के स्तर पर दिखने वाली सक्रियता और दृढ़ता। प्रभावी संवाद शैली: जनता को सीधे जोड़ने और प्रेरित करने की उनकी भाषण कला। सफलता और यश: राजनीतिक व प्रशासनिक मोर्चों पर मिलने वाली सफलताओं को सम्मान देने के लिए समर्थक इस प्रकार के विशेषणों का उपयोग करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक और बुनियादी ढांचे के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। इस कार्यकाल की सफलता और कमियों का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोणों से किया जाता है। [1, 2, 3] विकास और सकारात्मक पक्ष (Progress) बुनियादी ढांचा (Infrastructure): एक्सप्रेसवे, राजमार्गों (प्रतिदिन औसतन 36 किमी सड़क निर्माण), रेलवे और हवाई अड्डों के निर्माण में तेजी आई है। [1, 2] डिजिटलीकरण (Digitalization): UPI और डिजिटल इंडिया ने वित्तीय लेन-देन और सरकारी सेवाओं को आम आदमी तक आसान बनाया है। [1, 2] वैश्विक स्थिति (Global Standing): भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और वैश्विक मंचों पर देश का प्रभाव बढ़ा है। [1, 2, 3] कल्याणकारी योजनाएं (Welfare Schemes): आवास, मुफ्त राशन, शौचालय और स्वच्छ रसोई गैस (LPG) जैसी योजनाओं का लाभ करोड़ों लोगों तक सीधे पहुँचा है। [1, 2] चुनौतियाँ और आलोचनात्मक पक्ष (Challenges) बेरोजगारी और रोजगार (Employment): युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में बेहतर और स्थायी नौकरियों का सृजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। [1, 2] आर्थिक असमानता (Inequality): देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी है तथा धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में होने के आरोप लगते रहे हैं। [1, 2] विनिर्माण (Manufacturing): 'मेक इन इंडिया' के बावजूद कुल जीडीपी में विनिर्माण (manufacturing) का हिस्सा उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ पाया है। कांग्रेस के लंबे शासनकाल में देश की स्थिति मिश्रित रही, जिसमें बुनियादी ढांचे और शिक्षा का विकास हुआ, लेकिन गरीबी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक उथल-पुथल जैसी चुनौतियाँ भी रहीं।मुख्य उपलब्धियाँ और विकाससंस्थाओं की स्थापना: देश में आईआईटी (IIT), एम्स (AIIMS) और आईआईएम (IIM) जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की नींव रखी गई।कृषि और उद्योग: हरित क्रांति के जरिए देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया गया और भारी उद्योगों की स्थापना हुई।विज्ञान और अंतरिक्ष: इसरो (ISRO) और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों की शुरुआत हुई, जिससे तकनीकी क्षेत्र में प्रगति हुई।प्रमुख चुनौतियाँ और समस्याएंआर्थिक संकट: 1991 से पहले देश में कई बार आर्थिक और विदेशी मुद्रा भंडार का गंभीर संकट देखा गया।आपातकाल: वर्ष 1975 से 1977 के दौरान देश में आपातकाल (Emergency) लगा, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ा।आंतरिक अशांति: आतंकवाद, भाषाई और क्षेत्रीय विवाद तथा कई राज्यों में अलगाववादी आंदोलनों का सामना करना पड़ा।2
- असहाय परिवार के साथ खड़ी रहीं सोनदाग पंचायत की मुखिया रीमा देवी, दाह-संस्कार के लिए दी आर्थिक सहायता, हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत सोनदाग पंचायत में मानवीय संवेदनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। मंगलवार को पंचायत की मुखिया रीमा देवी सरजू सिंह के पुत्र चंद्रिका सिंह (उम्र लगभग 40 वर्ष) के निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पहुंचीं। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। मुखिया रीमा देवी ने अपने निजी निधि से दाह-संस्कार के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया, ताकि अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो। उन्होंने परिजनों से कहा कि दुख की इस घड़ी में पंचायत उनके साथ है और भविष्य में भी आवश्यकता पड़ने पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि चंद्रिका सिंह का असामयिक निधन पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत दुखद घटना है। मुखिया रीमा देवी का तुरंत मौके पर पहुंचकर संवेदना व्यक्त करना और आर्थिक सहयोग देना उनके संवेदनशील एवं जनसेवी व्यक्तित्व को दर्शाता है।1
- "मुझे प्रेग्नेंट करिए, 8 लाख रुपए लीजिए " अजब-गजब फेसबुक पर इस कैप्शन के साथ महिलाओं के खूब वीडियो आते हैं। कुछ में मेरी विधवा बेटी से शादी, मेरी बेटी को बच्चा, ऐसे तमाम वीडियो दिखते हैं। ये सब मजदूर टाइप व बुजुर्गों के फेसबुक फीड में ज्यादा आते हैं। क्योंकि इनका इंटरेस्ट ऐसे पोस्ट में दिख जाता है। उत्सुकता बस कई बार कमेंट बॉक्स खोलता हूं तो सैकड़ों लोग अपना नंबर दिए रहते हैं। ऐसे ही बिहार के ये भाई साहब थे। प्रेग्नेंट करके 8 लाख रुपये लेना चाहते थे। इसलिए नंबर दे दिया। इन्हें फोन आया और 800 रुपए देने को कहा। उसने कहा कि कागज बन जाए, ताकि फंसने वाली बात न हो। भाई ने 2 दिन की मजदूरी भेज दी। इसके बाद फंसते चले गए। वीडियो में देख लीजिए। आप लोग अपने आसपास के लोगों को बताया करिए कि ये सब फ्रॉड है। ऐसे ही प्रेग्नेंट करने की इच्छा न पाले, वरना कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।1
- पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे' पंडवा।पलामू।"कार्यालय समय से पहले चली गईं मनरेगा (जी राम जी )बीपीओ, फोन पर बोलीं—'बीडीओ साहब समझेंगे, कब आएंगे और कब जाएंगे'1
- जंगल से भटककर घर की जाली में फंसा दुर्लभ उदबिलाव, वन विभाग ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा जंगल से भटककर घर की जाली में फंसा दुर्लभ उदबिलाव, वन विभाग ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा महुली (सोनभद्र)। विंढमगंज वन रेंज के महुली गांव में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जंगल से भटककर आया एक दुर्लभ उदबिलाव एक घर के बाहर लगी लोहे की जाली में बुरी तरह फंस गया। जाली में तड़प रहे वन्यजीव को देखकर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई, लेकिन जागरूकता का परिचय देते हुए किसी ने भी उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं किया। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची। वन दरोगा विवेक कुमार मौर्य के नेतृत्व में वन कर्मी ओम सिंह, देव यादव और जगदीश ने अत्यंत सावधानी और कुशलता के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया। काफी मशक्कत के बाद उदबिलाव को सुरक्षित जाली से बाहर निकाला गया। प्राथमिक जांच के बाद उसे वन विभाग की निगरानी में उसके प्राकृतिक आवास जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बरसात के मौसम में भोजन और सुरक्षित रास्ते की तलाश में कई बार वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में लोगों को घबराने या वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए, ताकि उनका सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके। ग्रामीणों ने वन विभाग की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंची टीम के प्रयासों से एक दुर्लभ वन्यजीव की जान बच गई। वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत विभाग को सूचना दें, ताकि मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- गढ़वा नगर परिषद के कारनामे पर बवाल गढ़वा शहर के रंका मोड़ स्थित घंटाघर की खूबसूरती दिखाने के लिए हरा भरा विशाल पीपल पेड़ कटवा दिया गया है। विपक्ष और जनता नाराज1