जोधपुर के एक युवक कुंदन वाल्मीकि ने आपसी रंजिश और विवाद के चलते हुए एक मर्डर केस में अपनी जिंदगी के कीमती 14 साल और 5 महीने जेल की सलाखों के पीछे बिताए हैं। जेल से बाहर आने के बाद कुंदन ने समाज और विशेषकर युवाओं के लिए एक बेहद भावुक और आंखें खोलने वाली अपील जारी की है। उन्होंने युवाओं को अपराध की राह से दूर रहने की नसीहत देते हुए जेल के अपने कड़वे अनुभवों को साझा किया है। कुंदन वाल्मीकि ने जेल को एक जीता-जागता नरक बताते हुए कहा कि वहां न तो सांस लेने के लिए शुद्ध हवा मिलती है और न ही घर जैसी सुविधाएं। उनका कहना है कि लोग सोचते हैं कि जेल काटना आसान है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने युवाओं से हर प्रकार के नशे और लड़ाई-झगड़ों से दूर रहने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि नशा ही सभी अपराधों और झगड़ों की मुख्य जड़ है। इसके अलावा, उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण रखने की सीख दी और कहा कि भाई-बहनों, दोस्तों या पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी बातें और विवाद होना आम है, लेकिन इन बातों को दिल से लगाकर बड़ा विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए, अन्यथा जेल की हवा खानी पड़ सकती है। अपने संदेश के अंत में उन्होंने युवाओं को अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता कभी गलत नहीं होते और बच्चे जितना उनके कहने पर चलेंगे, उतना ही फायदे में और सुरक्षित रहेंगे। अपनी मर्जी से गलत रास्तों पर चलने वाले युवा सीधे बर्बादी की खाई में जा गिरते हैं। उन्होंने सभी से प्रेम और अच्छे बर्ताव के साथ एक सुरक्षित व खुशहाल जिंदगी जीने की अपील की है।
जोधपुर के एक युवक कुंदन वाल्मीकि ने आपसी रंजिश और विवाद के चलते हुए एक मर्डर केस में अपनी जिंदगी के कीमती 14 साल और 5 महीने जेल की सलाखों के पीछे बिताए हैं। जेल से बाहर आने के बाद कुंदन ने समाज और विशेषकर युवाओं के लिए एक बेहद भावुक और आंखें खोलने वाली अपील जारी की है। उन्होंने युवाओं को अपराध की राह से दूर रहने की नसीहत देते हुए जेल के अपने कड़वे अनुभवों को साझा किया है। कुंदन वाल्मीकि ने जेल को एक जीता-जागता नरक बताते हुए कहा कि वहां न तो सांस लेने के लिए शुद्ध हवा मिलती है और न ही घर जैसी सुविधाएं। उनका कहना है कि लोग सोचते हैं कि जेल काटना आसान है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने युवाओं से हर प्रकार के नशे और लड़ाई-झगड़ों से दूर रहने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि नशा ही सभी अपराधों और झगड़ों की मुख्य जड़ है। इसके अलावा, उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण रखने की सीख दी और कहा कि भाई-बहनों, दोस्तों या पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी बातें और विवाद होना आम है, लेकिन इन बातों को दिल से लगाकर बड़ा विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए, अन्यथा जेल की हवा खानी पड़ सकती है। अपने संदेश के अंत में उन्होंने युवाओं को अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता कभी गलत नहीं होते और बच्चे जितना उनके कहने पर चलेंगे, उतना ही फायदे में और सुरक्षित रहेंगे। अपनी मर्जी से गलत रास्तों पर चलने वाले युवा सीधे बर्बादी की खाई में जा गिरते हैं। उन्होंने सभी से प्रेम और अच्छे बर्ताव के साथ एक सुरक्षित व खुशहाल जिंदगी जीने की अपील की है।
- जोधपुर के एक युवक कुंदन वाल्मीकि ने आपसी रंजिश और विवाद के चलते हुए एक मर्डर केस में अपनी जिंदगी के कीमती 14 साल और 5 महीने जेल की सलाखों के पीछे बिताए हैं। जेल से बाहर आने के बाद कुंदन ने समाज और विशेषकर युवाओं के लिए एक बेहद भावुक और आंखें खोलने वाली अपील जारी की है। उन्होंने युवाओं को अपराध की राह से दूर रहने की नसीहत देते हुए जेल के अपने कड़वे अनुभवों को साझा किया है। कुंदन वाल्मीकि ने जेल को एक जीता-जागता नरक बताते हुए कहा कि वहां न तो सांस लेने के लिए शुद्ध हवा मिलती है और न ही घर जैसी सुविधाएं। उनका कहना है कि लोग सोचते हैं कि जेल काटना आसान है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने युवाओं से हर प्रकार के नशे और लड़ाई-झगड़ों से दूर रहने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि नशा ही सभी अपराधों और झगड़ों की मुख्य जड़ है। इसके अलावा, उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण रखने की सीख दी और कहा कि भाई-बहनों, दोस्तों या पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी बातें और विवाद होना आम है, लेकिन इन बातों को दिल से लगाकर बड़ा विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए, अन्यथा जेल की हवा खानी पड़ सकती है। अपने संदेश के अंत में उन्होंने युवाओं को अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता कभी गलत नहीं होते और बच्चे जितना उनके कहने पर चलेंगे, उतना ही फायदे में और सुरक्षित रहेंगे। अपनी मर्जी से गलत रास्तों पर चलने वाले युवा सीधे बर्बादी की खाई में जा गिरते हैं। उन्होंने सभी से प्रेम और अच्छे बर्ताव के साथ एक सुरक्षित व खुशहाल जिंदगी जीने की अपील की है।1
- जोधपुर के सेंट्रल जेल में बंद कैदी विश्वास तेजी पर हमला हुआ है। इस हमले को लेकर थानाधिकारी (SHO) दिनेश लखावत ने अपनी बात रखी है। विश्वास तेजी वही कैदी है जो कुछ दिन पूर्व 12वीं रोड चौराहे पर हुई सन्नी हंस और विक्की फाइटर के मामले में जेल में बंद है।1
- नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में मोगास गाँव के एक ग्रामवासी ने शिकायत दर्ज कराई है कि करतासर से मोगास आने वाली सड़क पर कचरे का ढेर पड़ा हुआ है। ग्रामीण का आरोप है कि स्थानीय सरपंच इस कचरे को वहाँ से उठवा नहीं रहा है।3
- नागौर जिले के रियांबड़ी क्षेत्र की ग्राम पंचायत चावंडिया में ग्रामीण बुनियादी समस्याओं को लेकर बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य नाला क्षतिग्रस्त होने, तालाब के किनारे उगी बबूल की झाड़ियों और सीसी सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितताओं की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन को सूचित किए जाने के बावजूद अब तक इन जनसमस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव का मुख्य नाला लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ा है, जिससे आगामी बरसात के मौसम में जल निकासी बाधित होने और गांव की गलियों व आसपास के इलाकों में जलभराव होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा, तालाब के किनारे उगी घनी बबूल की झाड़ियों के कारण लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है और तालाब की सफाई व रखरखाव में भी बाधा आ रही है। सीसी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि नई सड़क बनाने से पहले पुरानी सड़क को हटाया ही नहीं गया, बल्कि उसके ऊपर ही सीधे कंक्रीट की नई परत बिछाई जा रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के निर्माण कार्य से भविष्य में सड़क की मजबूती और गुणवत्ता प्रभावित होगी। स्थानीय निवासी और अजमेर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीनाराम धोलिया ने बताया कि स्थानीय प्रशासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों को इन सभी समस्याओं की जानकारी कई बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से क्षतिग्रस्त नाले की मरम्मत कराने, तालाब किनारे की झाड़ियों को साफ करने और सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जनहित में इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।1
- अजमेर जिले के मांगलियावास और लामाना में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से मियावाकी तकनीक पर आधारित दो सघन वन वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भारत विकास परिषद् की मुख्य शाखा ब्यावर के तत्वावधान में रविवार को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के तहत दोनों स्थानों पर 600-600 देसी पौधे लगाए जाएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8:30 बजे लामाना के गोपालपुरा से होगी, जिसके बाद सुबह 10:00 बजे मांगलियावास स्थित बी.आर. केल्सियम प्राइवेट लिमिटेड के नसीराबाद रोड परिसर में दूसरा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के तहत नीम, कचनार, करंज, गूलर, पारस पीपल, सहजन, अर्जुन, हरसिंगार, सरस, केसिया श्यामा, चुरैल, अमरूद, अमलतास और पलाश जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। भाविप के दीपक झंवर के अनुसार, सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में मियावाकी तकनीक से पौधों का विकास काफी तेजी से होता है। इस तकनीक में मिट्टी की विशेष तैयारी के साथ गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, कोकोपिट और जैविक मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जिससे कम समय में घना वन तैयार हो जाता है। इन पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आदित्य ग्रुप द्वारा पूरे क्षेत्र की मजबूत तारबंदी करवाई गई है। इस पूरे आयोजन में मंगलम् ग्रुप, मांगलियावास भी सहयोगी की भूमिका निभा रहा है। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होकर पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को सफल बनाने की अपील की है।3
- नागौर के गांधी चौक में महावीर इंटरनेशनल के स्थापना दिवसोत्सव के अवसर पर 'कपड़े की थैली-मेरी सहेली' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। महावीर इंटरनेशनल नागौर और अहिछत्रपुर वीरा केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित यह कार्यक्रम 'सबकी सेवा सबको प्यार' के भाव से चल रहे सेवा पखवाड़े के तहत आयोजित हुआ। सचिव प्रीतम ललवानी छीमू और संयोजक रेखा सुराणा ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'प्लास्टिक मुक्त भारत स्वस्थ भारत' के मंत्र और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल के 'स्वस्थ राजस्थान स्वच्छ राजस्थान प्लास्टिक मुक्त बने राजस्थान' के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। समारोह के मुख्य अतिथि और पर्यावरण प्रेमी पद्मश्री हिम्मताराम भाम्भू ने प्लास्टिक के उपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग बंद नहीं किया गया, तो आने वाला कल इंसान विहीन हो जाएगा, क्योंकि प्लास्टिक खेतों को बंजर बना रहा है, जानवरों का निवाला बन रहा है और इंसानों के लिए जहरीला साबित हो रहा है। उन्होंने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा कि मजदूर और अन्य लोग अक्सर प्लास्टिक की थैली में गर्म चाय लेकर पीते हैं, जिससे वे केंसर और अन्य जानलेवा घातक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि बीमारी में लाखों रुपये खर्च करने की अपेक्षा 200 रुपये का थर्मस और कपड़े की थैली का उपयोग करना बहुत अधिक लाभकारी है। कार्यक्रम की अध्यक्ष नेहा संखलेचा ने भी सभी से अपील की कि वे जब भी घर से बाहर निकलें, अपने साथ कपड़े की थैली अवश्य रखें। इस जनजागृति अभियान के तहत राज बा उ मावि गिन्नानी की छात्राओं ने स्काउट गाइड प्रभारी इंद्रा विश्नोई के सानिध्य में गांधी चौक, सदर बाजार और पंसारी बाजार में गगनभेदी नारों के साथ एक रैली निकाली। पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र संखलेचा और अध्यक्ष प्रतिनिधि पंकज नाहटा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान लगभग 2250 कपड़े की थैलियों का वितरण किया गया, जिसके भामाशाह हैदराबाद के निहालचंद समदड़िया थे। इस अवसर पर गवर्निंग कौंसिल सदस्य गौतम कोठारी, अंतर्राष्ट्रीय निदेशक अनिल बांठिया, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन, राजकुमार मच्छी, महेश चोरड़िया, राजेंद्र चोरड़िया, और मोनिका जैन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। संस्था के नरेंद्र संखलेचा और मीडिया प्रभारी शिव शंकर व्यास ने कहा कि भविष्य में भी विभिन्न भामाशाहों के सहयोग से समय-समय पर थैलियों का वितरण कराने का प्रयास किया जाएगा।4
- बीकानेर के गजनेर ओवरब्रिज पर दिनदहाड़े हुई खूनी वारदात से पूरे शहर में सनसनी फैल गई है। यहाँ कैंपर गाड़ी में सवार होकर आए हथियारबंद बदमाशों ने एक कार को रुकवाया और उसमें सवार चार युवकों को बाहर निकालकर उन पर घातक हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में चारों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। घायलों में चेतन सिंह उर्फ चिंटू की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जिसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश के लिए शहरभर में नाकाबंदी शुरू कर दी है।1