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सीतापुर मिर्जापुर के चुनार में बाढ़ का पानी सड़क तक पहुंचा, दरोगा और एक सिपाही स्थानीय ठेला पर बाइक पार कर रहे हैँ बाढ़ का पानी क्रॉस करने का गजब तरीका निकाल लिया। सीतापुर मिर्जापुर के चुनार में बाढ़ का पानी सड़क तक पहुंचा, दरोगा और एक सिपाही स्थानीय ठेला पर बाइक पार कर रहे हैँ बाढ़ का पानी क्रॉस करने का गजब तरीका निकाल लिया।
Akhil Maurya Press
सीतापुर मिर्जापुर के चुनार में बाढ़ का पानी सड़क तक पहुंचा, दरोगा और एक सिपाही स्थानीय ठेला पर बाइक पार कर रहे हैँ बाढ़ का पानी क्रॉस करने का गजब तरीका निकाल लिया। सीतापुर मिर्जापुर के चुनार में बाढ़ का पानी सड़क तक पहुंचा, दरोगा और एक सिपाही स्थानीय ठेला पर बाइक पार कर रहे हैँ बाढ़ का पानी क्रॉस करने का गजब तरीका निकाल लिया।
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- पर्वतपुर चौराहे पर जच्चा-बच्चा की मौत से मचा हड़कंप, शव रखकर ग्रामीणों ने लगाया जाम पर्वतपुर चौराहे पर जच्चा-बच्चा की मौत से मचा हड़कंप, शव रखकर ग्रामीणों ने लगाया जाम मेडिकल स्टोर पर प्रसव कराने और इलाज में लापरवाही का आरोप, कार्रवाई की मांग पर सड़क पर उतरे परिजन संवाददाता ,नरेश गुप्ता सीतापुर। पर्वतपुर चौराहे पर जच्चा-बच्चा की मौत के बाद शुक्रवार को गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिजनों ने चौराहे स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक पर प्रसव और इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। जाम के चलते चौराहे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सूचना पर पुलिस बल और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि बसावनपुर निवासी सावित्री (पत्नी अशोक कुमार) 3 सितंबर को प्रसव के लिए पर्वतपुर चौराहे स्थित एक मेडिकल स्टोर पर पहुंची थीं। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल स्टोर के पीछे बने एक कमरे में प्रसव और इलाज किया जा रहा था। गर्भ में बच्चे की मौत के बाद भी इलाज जारी रखने का आरोप परिजनों के मुताबिक, प्रसव के दौरान गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बावजूद महिला का इलाज वहीं जारी रखा गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें महिला के ठीक होने का भरोसा दिलाया जाता रहा। बाद में सावित्री की हालत लगातार बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे महमूदाबाद ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार, लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही सावित्री की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही सड़क पर उतरे ग्रामीण सावित्री की मौत की सूचना के बाद शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण पर्वतपुर चौराहे पर पहुंच गए। उन्होंने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के कारण चौराहे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। मौके पर पहुंची पुलिस और विभागीय अधिकारियों ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। अधिकारी ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर जाम खुलवाने की कोशिश में जुटे रहे। दो मासूम बेटियों के सिर से उठा मां का साया सावित्री अपने पीछे पांच और तीन वर्ष की दो बेटियां अंजलि और मुस्कान छोड़ गई हैं। मां की मौत के बाद दोनों मासूम बेटियों के सिर से मां का साया उठ गया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मेडिकल स्टोर पर डिलीवरी कराने के भी आरोप परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित मेडिकल स्टोर पर जच्चा-बच्चा की डिलीवरी का काम भी किया जाता है। आरोप है कि स्टोर संचालक के परिवार की महिलाएं ही प्रसव कराती हैं। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर मेडिकल स्टोर की गतिविधियों और वहां प्रसव कराए जाने की व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।1
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- मौसम का यू-टर्न,'फूले कास अब छोड़ो वर्षा की आस'... कहावत पर पानी फेरती हरदोई की बारिश....बदला मौसम का मिजाज समय से पहले खिले कास के फूल, फिर भी बरस रहे बदरा,कास' ने दी विदाई की गवाही, पर मानसून ने हरदोई में मचाई तबाही....... रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा था—'फूले कास सकल महि छाई, जनु बरसा कृत प्रकट बुढ़ाई'। यानी जब खेतों और मैदानों में सफेद कास के फूल खिल जाएं, तो मान लीजिए कि मानसून बूढ़ा हो गया है और बारिश विदा होने वाली है। यूपी के ग्रामीण इलाकों में भी कहावत मशहूर है—'फूले कास अब छोड़ो वर्षा की आस'।लेकिन साल 2026 के इस मौसम ने सदियों पुरानी इस लोकोक्ति को सीधी चुनौती दे दी है! उत्तर प्रदेश के हरदोई में सफेद चांदी जैसे कास के फूल तो पूरी तरह खिल चुके हैं, लेकिन बारिश थमने का नाम नहीं ले रही। आसमान में काले बादल अभी भी डेरा जमाए हुए हैं और आने वाले दिनों में और भारी बारिश का अलर्ट है। क्या प्रकृति का चक्र बदल रहा है, या फिर इस बार कास वक्त से पहले ही बूढ़ा हो गया? देखिए हरदोई से हमारी यह खास ग्राउंड रिपोर्ट प्रकृति के नियम बदल रहे हैं या फिर मौसम का मिजाज? यह सवाल इस वक्त हरदोई के किसानों और बुजुर्गों के जेहन में घूम रहा है। जिस कास के फूल को देखकर लोग मान लेते थे कि अब छाता घर में रखने का वक्त आ गया है, वही कास आज खुद पानी-पानी हो रहा है। हरदोई के खेतों, रास्तों और नदियों के किनारे सफेद कास की चादर बिछ चुकी है, जो अमूमन मानसून के आखिरी दिनों का संकेत होती है। लेकिन आसमान का हाल देखिए, बादल गरज रहे हैं, नदियां उफान पर हैं और मौसम विभाग की मानें तो अभी राहत की कोई उम्मीद नहीं है।कहावत कहती है कि कास फूलने के बाद बारिश की आस छोड़ देनी चाहिए, लेकिन इस बार शायद कास वक्त से पहले ही खिल गया या फिर बादलों ने विदाई की इस चेतावनी को मानने से साफ इनकार कर दिया है। लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश ने इस पुरानी लोकोक्ति पर पानी फेर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो क्लाइमेट चेंज की वजह से मानसून का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है, यही वजह है कि पारंपरिक संकेत भी अब बेअसर साबित हो रहे हैं।हरदोई में आने वाले दिनों के लिए भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यानी सफेद कास अब सिर्फ शरद ऋतु के आगमन का दिखावा बनकर रह गया है, क्योंकि जमीन पर अभी भी सावन-भादों जैसा सैलाब उमड़ रहा है। प्रकृति की इस लुकाछिपी ने इंसान ही नहीं, बल्कि सदियों पुराने अनुभवों को भी हैरत में डाल दिया है।साफ है कि बदलते दौर में अब प्रकृति के पुराने पैमाने भी बदल रहे हैं। हरदोई के ये सफेद कास इस बात का सबूत हैं कि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम के बदलते मिजाज ने अब हमारी लोकोक्तियों और परंपराओं को भी पीछे छोड़ दिया है। हरदोई से हमारी इस रिपोर्ट में फिलहाल इतना ही,हरदोई की बाकी खबरों के लिए बने रहिए.. मेरे यानी मनोज तिवारी के साथ #Hardoi #HardoiNews #UPWeather #WeatherUpdate #Monsoon2026 #HeavyRain #UttarPradeshNews #ClimateChange #GlobalWarming #RainAlert #मौसम #यूपी_मौसम #हरदोई #BreakingNews1
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