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भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा क्षेत्र स्थित दुदला गांव में आबादी के बीचों-बीच 11 हजार (11 KV) की बिजली लाइन लाकर घरों के बिल्कुल बाहर ट्रांसफॉर्मर लगा दिया गया है। गांव के सभी घरों के बीच में ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर दिए जाने से खंभों के आसपास बिजली के छोटे-छोटे झटके लग रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में हर समय दुर्घटना का डर बना हुआ है। इस गंभीर समस्या के बावजूद न तो कोई अधिकारी सुनवाई कर रहा है और न ही समाधान की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है। जब इस संबंध में लाइनमैन से शिकायत की जाती है तो वह टका सा जवाब देते हुए कहता है कि यह ट्रांसफॉर्मर यहीं रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही के इस रवैये के बीच अगर कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

6 hrs ago
user_OM PRAKASH SAHU
OM PRAKASH SAHU
बनेड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
6 hrs ago
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भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा क्षेत्र स्थित दुदला गांव में आबादी के बीचों-बीच 11 हजार (11 KV) की बिजली लाइन लाकर घरों के बिल्कुल बाहर ट्रांसफॉर्मर लगा दिया गया है। गांव के सभी घरों के बीच में ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर दिए जाने से खंभों के आसपास बिजली के छोटे-छोटे झटके लग रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में हर समय दुर्घटना का डर बना हुआ है। इस गंभीर समस्या के बावजूद न तो कोई अधिकारी सुनवाई कर रहा है और न ही समाधान की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है। जब इस संबंध में लाइनमैन से शिकायत की जाती है तो वह टका सा जवाब देते हुए कहता है कि यह ट्रांसफॉर्मर यहीं रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही के इस रवैये के बीच अगर कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

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  • भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा क्षेत्र स्थित दुदला गांव में आबादी के बीचों-बीच 11 हजार (11 KV) की बिजली लाइन लाकर घरों के बिल्कुल बाहर ट्रांसफॉर्मर लगा दिया गया है। गांव के सभी घरों के बीच में ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर दिए जाने से खंभों के आसपास बिजली के छोटे-छोटे झटके लग रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में हर समय दुर्घटना का डर बना हुआ है। इस गंभीर समस्या के बावजूद न तो कोई अधिकारी सुनवाई कर रहा है और न ही समाधान की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है। जब इस संबंध में लाइनमैन से शिकायत की जाती है तो वह टका सा जवाब देते हुए कहता है कि यह ट्रांसफॉर्मर यहीं रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही के इस रवैये के बीच अगर कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
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    भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा क्षेत्र स्थित दुदला गांव में आबादी के बीचों-बीच 11 हजार (11 KV) की बिजली लाइन लाकर घरों के बिल्कुल बाहर ट्रांसफॉर्मर लगा दिया गया है। गांव के सभी घरों के बीच में ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर दिए जाने से खंभों के आसपास बिजली के छोटे-छोटे झटके लग रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में हर समय दुर्घटना का डर बना हुआ है।

इस गंभीर समस्या के बावजूद न तो कोई अधिकारी सुनवाई कर रहा है और न ही समाधान की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है। जब इस संबंध में लाइनमैन से शिकायत की जाती है तो वह टका सा जवाब देते हुए कहता है कि यह ट्रांसफॉर्मर यहीं रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही के इस रवैये के बीच अगर कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
    user_OM PRAKASH SAHU
    OM PRAKASH SAHU
    बनेड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • भीलवाड़ा जिले की मांडल तहसील के पीथास गांव में श्मशान घाट की कोई स्थायी व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। बारिश के कारण एक शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को करीब 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। आखिरकार ग्राम पंचायत प्रशासक छोटू सिंह चुंडावत ने अपनी निजी राशि से श्मशान घाट पर टीन शेड की व्यवस्था करवाई, जिसके बाद ही दाह संस्कार संभव हो सका। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नदी किनारे बना एकमात्र श्मशान घाट मेजा बांध भरने के बाद पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में परिजनों को मजबूरन अस्थाई इंतजामों के सहारे अंतिम संस्कार करना पड़ता है, जो मानव गरिमा के साथ खुला खिलवाड़ है। गांव में वैकल्पिक रूप से बनाया गया श्मशान घाट भी बदहाली का शिकार है। वहां न तो टीन शेड है और न ही चारदीवारी, जिसके चलते चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा रहता है और दुर्गंध फैलती है। ग्राम पंचायत प्रशासक छोटू सिंह चुंडावत के अनुसार, वर्तमान में जहां वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, वह भूमि पेटा काश्त में होने के कारण नियमानुसार पक्का निर्माण नहीं कराया जा सकता है। हालांकि श्मशान घाट की स्थायी व्यवस्था के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान कराने की जोरदार मांग की है।
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    भीलवाड़ा जिले की मांडल तहसील के पीथास गांव में श्मशान घाट की कोई स्थायी व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। बारिश के कारण एक शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को करीब 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। आखिरकार ग्राम पंचायत प्रशासक छोटू सिंह चुंडावत ने अपनी निजी राशि से श्मशान घाट पर टीन शेड की व्यवस्था करवाई, जिसके बाद ही दाह संस्कार संभव हो सका।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नदी किनारे बना एकमात्र श्मशान घाट मेजा बांध भरने के बाद पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में परिजनों को मजबूरन अस्थाई इंतजामों के सहारे अंतिम संस्कार करना पड़ता है, जो मानव गरिमा के साथ खुला खिलवाड़ है। गांव में वैकल्पिक रूप से बनाया गया श्मशान घाट भी बदहाली का शिकार है। वहां न तो टीन शेड है और न ही चारदीवारी, जिसके चलते चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा रहता है और दुर्गंध फैलती है।

ग्राम पंचायत प्रशासक छोटू सिंह चुंडावत के अनुसार, वर्तमान में जहां वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, वह भूमि पेटा काश्त में होने के कारण नियमानुसार पक्का निर्माण नहीं कराया जा सकता है। हालांकि श्मशान घाट की स्थायी व्यवस्था के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान कराने की जोरदार मांग की है।
    user_राजकुमार गोयल
    राजकुमार गोयल
    Local News Reporter Bhilwara, Rajasthan•
    1 hr ago
  • 301 किलो डोडा चूरा तस्करी मामले में दो दोषियों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। मादक पदार्थ डोडा चूरा की तस्करी के इस मामले में शामिल दोनों दोषियों को 20 साल की कड़ी सजा दी गई है।
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    301 किलो डोडा चूरा तस्करी मामले में दो दोषियों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। मादक पदार्थ डोडा चूरा की तस्करी के इस मामले में शामिल दोनों दोषियों को 20 साल की कड़ी सजा दी गई है।
    user_Dev karan Mali
    Dev karan Mali
    Local News Reporter Bhilwara, Rajasthan•
    2 hrs ago
  • भीलवाड़ा शहर के उपनगर सांगानेर स्थित एक वेस्टेज गोदाम में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वहाँ एक मादा कब्र बिज्जू अपने चार नवजात बच्चों के साथ दिखाई दी। सूचना मिलते ही वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने मादा कब्र बिज्जू और उसके चारों नवजात शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू के बाद पूरे परिवार को वन विभाग की अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, जिन्हें फिलहाल वन विभाग की नर्सरी में रखा जाएगा। डीएफओ के निर्देशानुसार उनकी निगरानी की जाएगी और बाद में सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत ने बताया कि यह पहला मामला है जब किसी कब्र बिज्जू ने आबादी क्षेत्र में बच्चों को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार घटते वन क्षेत्र और बढ़ती आबादी के कारण वन्यजीव अब आबादी वाले इलाकों की ओर आने लगे हैं। वन्यजीव टीम ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव या हिंसक जीव आबादी क्षेत्र में दिखाई दे तो उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस, वन विभाग या वन्यजीव रेस्क्यू टीम को दें, ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ा जा सके।
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    भीलवाड़ा शहर के उपनगर सांगानेर स्थित एक वेस्टेज गोदाम में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वहाँ एक मादा कब्र बिज्जू अपने चार नवजात बच्चों के साथ दिखाई दी। सूचना मिलते ही वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने मादा कब्र बिज्जू और उसके चारों नवजात शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

रेस्क्यू के बाद पूरे परिवार को वन विभाग की अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, जिन्हें फिलहाल वन विभाग की नर्सरी में रखा जाएगा। डीएफओ के निर्देशानुसार उनकी निगरानी की जाएगी और बाद में सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत ने बताया कि यह पहला मामला है जब किसी कब्र बिज्जू ने आबादी क्षेत्र में बच्चों को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार घटते वन क्षेत्र और बढ़ती आबादी के कारण वन्यजीव अब आबादी वाले इलाकों की ओर आने लगे हैं।

वन्यजीव टीम ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव या हिंसक जीव आबादी क्षेत्र में दिखाई दे तो उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस, वन विभाग या वन्यजीव रेस्क्यू टीम को दें, ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ा जा सके।
    user_Puneet jain
    Puneet jain
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • भीलवाड़ा के मेजा बांध पर जयपुर कमांडेंट के निर्देशानुसार ई कम्पनी की रेस्क्यू टीम ई-4 ने सिविल डिफेंस के साथ मिलकर बोट चालकों, मछुआरों और स्थानीय लोगों को जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं रेस्क्यू से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। 21 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आपात स्थिति से निपटने और सीपीआर देने की विधि के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। ट्रेनिंग के दौरान बोट चालकों को सख्त निर्देश दिए गए कि बोटिंग के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट पहनाई जाए और बिना लाइफ जैकेट किसी को भी बैठने की अनुमति न दी जाए। बोट के असंतुलित होने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाने तथा तेज हवाओं, लहरों व खराब मौसम में बोटिंग का संचालन तुरंत स्थगित रखने के निर्देश दिए गए। रेस्क्यू टीम ने पानी में डूब रहे व्यक्ति को बचाने के लिए घबराने के बजाय लाइफ बॉय, रस्सी और बांस का सही तरीके से उपयोग करने की प्रक्रिया समझाई। व्यक्ति को पानी से बाहर निकालने के बाद गंभीर स्थिति में सीपीआर देने का तरीका और उसका महत्व भी बताया गया। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत सही निर्णय लेने, उपलब्ध रेस्क्यू उपकरणों का इस्तेमाल करने और तत्काल प्रशासन व रेस्क्यू टीम को सूचित करने के निर्देश भी प्रदान किए गए।
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    भीलवाड़ा के मेजा बांध पर जयपुर कमांडेंट के निर्देशानुसार ई कम्पनी की रेस्क्यू टीम ई-4 ने सिविल डिफेंस के साथ मिलकर बोट चालकों, मछुआरों और स्थानीय लोगों को जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं रेस्क्यू से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। 21 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आपात स्थिति से निपटने और सीपीआर देने की विधि के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया।

ट्रेनिंग के दौरान बोट चालकों को सख्त निर्देश दिए गए कि बोटिंग के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट पहनाई जाए और बिना लाइफ जैकेट किसी को भी बैठने की अनुमति न दी जाए। बोट के असंतुलित होने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाने तथा तेज हवाओं, लहरों व खराब मौसम में बोटिंग का संचालन तुरंत स्थगित रखने के निर्देश दिए गए।

रेस्क्यू टीम ने पानी में डूब रहे व्यक्ति को बचाने के लिए घबराने के बजाय लाइफ बॉय, रस्सी और बांस का सही तरीके से उपयोग करने की प्रक्रिया समझाई। व्यक्ति को पानी से बाहर निकालने के बाद गंभीर स्थिति में सीपीआर देने का तरीका और उसका महत्व भी बताया गया। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत सही निर्णय लेने, उपलब्ध रेस्क्यू उपकरणों का इस्तेमाल करने और तत्काल प्रशासन व रेस्क्यू टीम को सूचित करने के निर्देश भी प्रदान किए गए।
    user_महेश पुरी
    महेश पुरी
    Bhilwara, Rajasthan•
    19 hrs ago
  • भीलवाड़ा के आसींद कस्बे में सुबह 7 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच कुल 150 मिमी यानी 5.90 इंच बारिश दर्ज की गई है। तहसील कार्यालय पर स्थित बारिश नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों द्वारा दी गई सीधी जानकारी के अनुसार, इस समयावधि में कस्बे में भारी बारिश का यह आंकड़ा दर्ज किया गया है।
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    भीलवाड़ा के आसींद कस्बे में सुबह 7 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच कुल 150 मिमी यानी 5.90 इंच बारिश दर्ज की गई है। तहसील कार्यालय पर स्थित बारिश नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों द्वारा दी गई सीधी जानकारी के अनुसार, इस समयावधि में कस्बे में भारी बारिश का यह आंकड़ा दर्ज किया गया है।
    user_आसींद मंजूर
    आसींद मंजूर
    Advertising Photographer आसींद, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • भीलवाड़ा स्थित हरणी महादेव रोड पर संचालित ऋषि श्रृंग संस्थान के वेद विद्यालय में वैदिक परंपरा के अनुसार सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। संस्थान के मीडिया प्रभारी विनोद सुखवाल के अनुसार, आचार्यों के निर्देशन में वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान 11 बटुकों ने पारंपरिक धोती, यज्ञोपवीत और शिखा धारण कर हाथ में दंड लेकर वैदिक शिक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया। माता-पिता और परिजनों की उपस्थिति में यह पूरा संस्कार वैदिक विधि-विधान से कराया गया। कार्यक्रम में संस्थान के आचार्य रामदेव, सौरभ, सचिव कैलाश चंद्र पांडिया, भेरूलाल पाडिया, भगवती पांडिया, त्रिलोक, मोहनलाल टोपी वाले, सत्यदेव व्यास, गोपाल जोशी, राम कुमार पांडिया, राजेंद्र उपाध्याय, कैलाश व्यास, राधेश्याम पुरोहित, नरेश ओझा, बालू लाल, लक्ष्मी नारायण पांडिया सहित कई सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संस्थान "विद्या दानं महादानं" के संकल्प के साथ सनातन परंपरा, संस्कार और शिक्षा को आगे बढ़ाने के कार्य में निरंतर जुटा हुआ है।
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    भीलवाड़ा स्थित हरणी महादेव रोड पर संचालित ऋषि श्रृंग संस्थान के वेद विद्यालय में वैदिक परंपरा के अनुसार सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। संस्थान के मीडिया प्रभारी विनोद सुखवाल के अनुसार, आचार्यों के निर्देशन में वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान 11 बटुकों ने पारंपरिक धोती, यज्ञोपवीत और शिखा धारण कर हाथ में दंड लेकर वैदिक शिक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया। माता-पिता और परिजनों की उपस्थिति में यह पूरा संस्कार वैदिक विधि-विधान से कराया गया।

कार्यक्रम में संस्थान के आचार्य रामदेव, सौरभ, सचिव कैलाश चंद्र पांडिया, भेरूलाल पाडिया, भगवती पांडिया, त्रिलोक, मोहनलाल टोपी वाले, सत्यदेव व्यास, गोपाल जोशी, राम कुमार पांडिया, राजेंद्र उपाध्याय, कैलाश व्यास, राधेश्याम पुरोहित, नरेश ओझा, बालू लाल, लक्ष्मी नारायण पांडिया सहित कई सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संस्थान "विद्या दानं महादानं" के संकल्प के साथ सनातन परंपरा, संस्कार और शिक्षा को आगे बढ़ाने के कार्य में निरंतर जुटा हुआ है।
    user_राजकुमार गोयल
    राजकुमार गोयल
    Local News Reporter Bhilwara, Rajasthan•
    1 hr ago
  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे सभी पार्टियों के आतंकी गुंडों ने एक गरीब आदमी की रोजी-रोटी यानी उसके टेम्पो को तोड़ दिया है। जंतर-मंतर पर सभी राजनीतिक दल नीट के मुद्दे की आड़ में केवल अपनी राजनीति साधने का काम कर रहे हैं और इसी दौरान एक गरीब व्यक्ति की आजीविका के साधन टेम्पो को निशाना बनाकर तोड़ दिया गया।
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    दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे सभी पार्टियों के आतंकी गुंडों ने एक गरीब आदमी की रोजी-रोटी यानी उसके टेम्पो को तोड़ दिया है। जंतर-मंतर पर सभी राजनीतिक दल नीट के मुद्दे की आड़ में केवल अपनी राजनीति साधने का काम कर रहे हैं और इसी दौरान एक गरीब व्यक्ति की आजीविका के साधन टेम्पो को निशाना बनाकर तोड़ दिया गया।
    user_SADAS LIVE NEWS
    SADAS LIVE NEWS
    Local News Reporter गंगरार, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    8 hrs ago
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