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अंबेडकर प्रतिमा विवाद अब गहराता जा रहा है, दोनों पक्षों ने अलग-अलग दावा किया, आखिरकार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने का कौन जिम्मेदार, कब गिरफ्त में आएगा प्रतिमा तोड़ने वाला मनिका प्रखंड क्षेत्र के प्रखंड मुख्यालय से पीछे पश्चिम दिशा की ओर स्थापित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा को तोड़े जाने का मामला गहराता देख जमीन का मालिक अशोक प्रसाद और सर्वदलीय नेता श्री सुरेंद्र पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रतिमा विवाद पर सफाई दी|श्री सुरेंद्र पासवान ने कहा की जब कई वर्षों पूर्व से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की एक छोटी प्रतिमा पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुनेश्वर उरांव और मेरी सहयोग से स्थापित कराया गया था तो छोटी प्रतिमा से महज 40 मीटर की दूरी में एक बड़ी प्रतिमा लगाने का क्या मतलब हो सकता है|वह भी गुपचुप तरीके से , इस बात से साफ जाहिर होता है की बाबा साहब के आड़ में जमीन हड़पने की साजिश रची जा रही थी | जबकि दूसरा पक्ष के तरफ से भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष श्री जगजीवन राम ने दावा किया की डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा विवाद में जमीन हड़पने की कोई बात ही नहीं है क्योंकि जिस स्थल में बाबा साहब की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है, वहां पर पिछले कई वर्षों से अंबेडकर चेतना मंच और भीम आर्मी के द्वारा कार्यक्रम कराया जाता है और वह जमीन जिसमें अशोक प्रसाद का दावा है, वह जमीन ग्रामीण विकास विभाग का तो फिर जमीन हड़पने का मामला कहां से आया|उसे स्थल को पहले से ही अंबेडकरवादी लोग जानते थे की रैयती जमीन कहां तक है, वहीं पर बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित की गई|जबकि अंचल अधिकारी श्री अमन कुमार के द्वारा जब स्थल जांच किया गया तो पाया कि जिस जगह पर प्रतिमा लगाई गई है, वह जमीन ग्रामीण विकास विभाग का है|अंचलाधिकारी से नकल लेकर इस बात की तस्दीक की जा सकती है|बाबा साहब के प्रतिमा को तोड़कर कचरा में फेंकने का जो दु-साहस किया गया है वह बड़ा ही शर्मनाक है, इसकी बहुत निंदा की जानी चाहिए और मैं प्रशासन से इस मामले में जल्द कार्रवाई करने की मांग करता हूं

5 hrs ago
user_Shamsher Alam
Shamsher Alam
Local News Reporter मनिका, लातेहार, झारखंड•
5 hrs ago

अंबेडकर प्रतिमा विवाद अब गहराता जा रहा है, दोनों पक्षों ने अलग-अलग दावा किया, आखिरकार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने का कौन जिम्मेदार, कब गिरफ्त में आएगा प्रतिमा तोड़ने वाला मनिका प्रखंड क्षेत्र के प्रखंड मुख्यालय से पीछे पश्चिम दिशा की ओर स्थापित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा को तोड़े जाने का मामला गहराता देख जमीन का मालिक अशोक प्रसाद और सर्वदलीय नेता श्री सुरेंद्र पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रतिमा विवाद पर सफाई दी|श्री सुरेंद्र पासवान ने कहा की जब कई वर्षों पूर्व से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की एक छोटी प्रतिमा पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुनेश्वर उरांव और मेरी सहयोग से स्थापित कराया गया था तो छोटी प्रतिमा से महज 40 मीटर की दूरी में एक बड़ी प्रतिमा लगाने का क्या मतलब हो सकता है|वह भी गुपचुप तरीके से , इस बात से साफ जाहिर होता है की बाबा साहब के आड़ में जमीन हड़पने की साजिश रची जा रही थी | जबकि दूसरा पक्ष के तरफ से भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष श्री जगजीवन राम ने दावा किया की डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा विवाद में जमीन हड़पने की कोई बात ही नहीं है क्योंकि जिस स्थल में बाबा साहब की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है, वहां पर पिछले कई वर्षों से अंबेडकर चेतना मंच और भीम आर्मी के द्वारा कार्यक्रम कराया जाता है और वह जमीन जिसमें अशोक प्रसाद का दावा है, वह जमीन ग्रामीण विकास विभाग का तो फिर जमीन हड़पने का मामला कहां से आया|उसे स्थल को पहले से ही अंबेडकरवादी लोग जानते थे की रैयती जमीन कहां तक है, वहीं पर बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित की गई|जबकि अंचल अधिकारी श्री अमन कुमार के द्वारा जब स्थल जांच किया गया तो पाया कि जिस जगह पर प्रतिमा लगाई गई है, वह जमीन ग्रामीण विकास विभाग का है|अंचलाधिकारी से नकल लेकर इस बात की तस्दीक की जा सकती है|बाबा साहब के प्रतिमा को तोड़कर कचरा में फेंकने का जो दु-साहस किया गया है वह बड़ा ही शर्मनाक है, इसकी बहुत निंदा की जानी चाहिए और मैं प्रशासन से इस मामले में जल्द कार्रवाई करने की मांग करता हूं

  • user_Kanhai Kumar
    Kanhai Kumar
    लातेहार, लातेहार, झारखंड
    जेल तो तुम्हे जाना ही पड़ेगा
    5 hrs ago
More news from Latehar and nearby areas
  • सुबह वाली ट्रेन यात्रा सबसे सुहावना लगता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,way To Chandigarh सुबह वाली ट्रेन यात्रा सबसे सुहावना लगता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वे to Chandigarh
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    सुबह वाली ट्रेन यात्रा सबसे सुहावना लगता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,way To Chandigarh 
सुबह वाली ट्रेन यात्रा सबसे सुहावना लगता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वे to Chandigarh
    user_Ashish Chandravanshi
    Ashish Chandravanshi
    Local News Reporter Latehar•
    20 hrs ago
  • छात्रों ने हेमंत सोरेन सरकार पर लगाए बड़े आरोप.? #shorts #shortvideo #short #viral #viralvideo #news
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    छात्रों ने हेमंत सोरेन सरकार पर लगाए बड़े आरोप.? #shorts #shortvideo #short #viral #viralvideo #news
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • पप्पू यादव (राजेश रंजन) का समाज और राजनीति के बीच का इतिहास एक विवादास्पद और जन-समर्थक छवि का मिश्रण रहा है। उन्होंने 1990 में एक निर्दलीय विधायक के रूप में शुरुआत की और छह बार लोकसभा सांसद रहे, जहाँ उन्हें एक ओर गरीबों के मसीहा और संकटमोचक के रूप में देखा गया, वहीं दूसरी ओर उनके शुरुआती करियर पर आपराधिक मुकदमों के आरोप भी रहे। [1, 2, 3, 4, 5] राजनीतिक और सामाजिक सफर शुरुआत (1990 का दशक): 1990 में सिंगेश्वर से निर्दलीय विधायक बने और 1991 में पहली बार पूर्णिया से सांसद चुने गए। [1, 2] विवाद और कानूनी मामले: उनके शुरुआती राजनीतिक सफर में कई आपराधिक और हत्या के आरोप जुड़े, जिसमें 1998 में सीपीआई (एम) नेता अजीत सरकार की हत्या का चर्चित मामला भी शामिल था, हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। [1, 2] जनता के बीच छवि: बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र में आपदा, बाढ़, या कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जमीन पर उतरकर लोगों की मदद की, जिससे उन्हें "गरीबों का मसीहा" या "रॉबिनहुड" की छवि मिली। [1, 2, 3] दल-बदल और हालिया स्थिति: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़ने और निकाले जाने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और बाद में 2024 के आम चुनाव में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद के रूप में बड़ी जीत हासिल की। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर बिहार में संगठित अपराध के दर्जनों आरोप लगे. अभी भी उनके ऊपर 2024 के हलफनामे के मुताबिक 41 मामले पेंडिंग हैं. आज वो संसद भवन के अंदर भगवा कपड़े पहनकर अयोध्या में चढ़ावा चोरी की एक्टिंग कर रहे थे. जब उनके आपराधिक इतिहास के बारे में उनसे सवाल पूछा गया तो पप्पू यादव भड़क गए. इसे कहते हैं "उल्टा चोर कोतवाल को डांटे"...
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    पप्पू यादव (राजेश रंजन) का समाज और राजनीति के बीच का इतिहास एक विवादास्पद और जन-समर्थक छवि का मिश्रण रहा है। उन्होंने 1990 में एक निर्दलीय विधायक के रूप में शुरुआत की और छह बार लोकसभा सांसद रहे, जहाँ उन्हें एक ओर गरीबों के मसीहा और संकटमोचक के रूप में देखा गया, वहीं दूसरी ओर उनके शुरुआती करियर पर आपराधिक मुकदमों के आरोप भी रहे। [1, 2, 3, 4, 5]

राजनीतिक और सामाजिक सफर

शुरुआत (1990 का दशक): 1990 में सिंगेश्वर से निर्दलीय विधायक बने और 1991 में पहली बार पूर्णिया से सांसद चुने गए। [1, 2]

विवाद और कानूनी मामले: उनके शुरुआती राजनीतिक सफर में कई आपराधिक और हत्या के आरोप जुड़े, जिसमें 1998 में सीपीआई (एम) नेता अजीत सरकार की हत्या का चर्चित मामला भी शामिल था, हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। [1, 2]

जनता के बीच छवि: बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र में आपदा, बाढ़, या कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जमीन पर उतरकर लोगों की मदद की, जिससे उन्हें "गरीबों का मसीहा" या "रॉबिनहुड" की छवि मिली। [1, 2, 3]

दल-बदल और हालिया स्थिति: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़ने और निकाले जाने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और बाद में 2024 के आम चुनाव में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद के रूप में बड़ी जीत हासिल की।


निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर बिहार में संगठित अपराध के दर्जनों आरोप लगे. अभी भी उनके ऊपर 2024 के हलफनामे के मुताबिक 41 मामले पेंडिंग हैं. 
आज वो संसद भवन के अंदर भगवा कपड़े पहनकर अयोध्या में चढ़ावा चोरी की एक्टिंग कर रहे थे. जब उनके आपराधिक इतिहास के बारे में उनसे सवाल पूछा गया तो पप्पू यादव भड़क गए. इसे कहते हैं "उल्टा चोर कोतवाल को डांटे"...
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    5 hrs ago
  • गढ़वा के विधायक जी चुनाव जीत कर भाग जाते है? अब होगा खेला? गढ़वा की राजनीति में विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज है। चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच उनकी सक्रियता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। आखिर जनता क्या सोचती है, और क्या आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे? इसी मुद्दे पर होगी विस्तृत चर्चा।
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    गढ़वा के विधायक जी चुनाव जीत कर भाग जाते है? अब होगा खेला?
गढ़वा की राजनीति में विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज है। चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच उनकी सक्रियता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। आखिर जनता क्या सोचती है, और क्या आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे? इसी मुद्दे पर होगी विस्तृत चर्चा।
    user_Green Line News, Md Mostaque
    Green Line News, Md Mostaque
    पत्रकार गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • कंधे पर मगरमच्छ रख पहुंचे थाना बिहार के सुपौल जिला का मामला कंधे पर मगरमच्छ रख पहुंचे थाना बिहार के बेख़ौफ़ युवाओं ने कर दिया कुछ ऐसा हो रही है सब ओर चर्चा आपको बता दें कि बिहार के सुपौल जिला में धान रोपते समय खेत में मगरमच्छ दिखा। गौरतलब है कि सुपौल जिला कोसी नदी के किनारे स्थित है , ऐसे में बरसात में जलस्तर बढ़ने से कोसी नदी से बहता हुआ मगरमच्छ धान के खेत में आ गया होगा। मगरमच्छ को देखते ही आसपास के लोग अलर्ट हो गए और समझदारी और हिम्मत से काम लेते हुए कुछ युवाओं ने मिलकर मगरमच्छ को पकड़ लिया, उसके मुंह पर मोटा रस्सी बांध दिया और कंधे पर लाद कर जश्न मनाते हुए थाने में पहुंचकर मगरमच्छ को जमा कर दिया।
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    कंधे पर मगरमच्छ रख पहुंचे थाना
बिहार के सुपौल जिला का मामला
कंधे पर मगरमच्छ रख पहुंचे थाना
बिहार के बेख़ौफ़ युवाओं ने कर दिया 
कुछ ऐसा हो रही है सब ओर चर्चा 
आपको बता दें कि बिहार के सुपौल जिला में 
धान रोपते समय खेत में मगरमच्छ दिखा। गौरतलब है कि सुपौल जिला कोसी नदी के किनारे स्थित है , ऐसे में बरसात में जलस्तर बढ़ने से कोसी नदी से बहता हुआ मगरमच्छ धान के खेत में आ गया होगा।
मगरमच्छ को देखते ही आसपास के लोग अलर्ट हो गए और समझदारी और हिम्मत से काम लेते हुए कुछ युवाओं ने मिलकर मगरमच्छ को पकड़ लिया, उसके मुंह पर मोटा रस्सी बांध दिया और कंधे पर लाद कर जश्न मनाते हुए थाने में पहुंचकर मगरमच्छ को जमा कर दिया।
    user_Shital vishwakarma
    Shital vishwakarma
    पत्रकार बिश्नुनपुर, गढवा•
    17 hrs ago
  • लोहरदगा के जुरिया में ऑन रोड से सटा हुआ 20 डिसमिल का एक बेहद खूबसूरत और प्राइम लोकेशन वाला प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है। लोहरदगा के जुरिया में ऑन रोड से सटा हुआ 20 डिसमिल का एक बेहद खूबसूरत और प्राइम लोकेशन वाला प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है।
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    लोहरदगा के जुरिया में ऑन रोड से सटा हुआ 20 डिसमिल का एक बेहद खूबसूरत और प्राइम लोकेशन वाला प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है।


लोहरदगा के जुरिया में ऑन रोड से सटा हुआ 20 डिसमिल का एक बेहद खूबसूरत और प्राइम लोकेशन वाला प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है।
    user_Altamas king
    Altamas king
    Photographer भंडरा, लोहरदगा, झारखंड•
    5 hrs ago
  • JPSC अभ्यर्थी के समर्थन में भाजपा का जिला स्तरीय महाधरना सम्पन्न ,राजपाल को सौंपा ज्ञापन लातेहार:-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर शनिवार 01.08.2026 को समाहरणालय परिसर, लातेहार में JPSC अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों को लेकर जिला स्तरीय विशाल महाधरना* आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री राकेश दुबे और श्री अनिल सिंह ने किया। यह महाधरना जिला अध्यक्ष श्री बंशी यादव के मार्गदर्शन में हुआ। धरना के बाद भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल, झारखंड के नाम उपायुक्त श्री संदीप कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अभ्यर्थियों के हित में JPSC भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध करने की मांग की गई। इस अवसर पर प्रदेश कार्य समिति सदस्य *श्री राजधानी प्रसाद यादव*, जिला परिषद अध्यक्षा श्रीमती पूनम देवी, नगर पंचायत अध्यक्ष श्री महेश सिंह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता, जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र संयोजक, बूथ अध्यक्ष और बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी सदैव युवाओं के अधिकार और न्यायपूर्ण व्यवस्था के पक्ष में है और आगे भी आवाज़ उठाती रहेगी।
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    JPSC अभ्यर्थी के समर्थन में भाजपा का जिला स्तरीय महाधरना सम्पन्न ,राजपाल को सौंपा ज्ञापन 
लातेहार:-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर  शनिवार 01.08.2026 को समाहरणालय परिसर, लातेहार में JPSC अभ्यर्थियों की न्यायपूर्ण मांगों को लेकर जिला स्तरीय विशाल महाधरना* आयोजित किया गया। 
कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री राकेश दुबे और श्री अनिल सिंह ने किया। यह महाधरना जिला अध्यक्ष श्री बंशी यादव के मार्गदर्शन में हुआ।
धरना के बाद भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल, झारखंड के नाम उपायुक्त श्री संदीप कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अभ्यर्थियों के हित में JPSC भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध करने की मांग की गई।
इस अवसर पर प्रदेश कार्य समिति सदस्य *श्री राजधानी प्रसाद यादव*, जिला परिषद अध्यक्षा श्रीमती पूनम देवी, नगर पंचायत अध्यक्ष श्री महेश सिंह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता, जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, शक्ति केंद्र संयोजक, बूथ अध्यक्ष और बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी सदैव युवाओं के अधिकार और न्यायपूर्ण व्यवस्था के पक्ष में है और आगे भी आवाज़ उठाती रहेगी।
    user_Shamsher Alam
    Shamsher Alam
    Local News Reporter मनिका, लातेहार, झारखंड•
    20 hrs ago
  • छात्र आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब.😱 #shorts #shortvideo #youtubeshorts #road
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    छात्र आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब.😱 #shorts #shortvideo #youtubeshorts #road
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    16 hrs ago
  • झारखंड में नोकरी चाहिए तो, पैशा लाओ नोकरी पांव , सभी नोकरी का अलग-अलग भाव l मोलाई का गुंजाईश नहीं है, सरकार घाटे में चल रही है l झारखंड में सरकारी नौकरियों और नीतियों को लेकर यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है। इसका मुख्य कारण संवैधानिक प्रावधान (कानून), अदालती फैसले, और खुली भर्ती नीतियां हैं, जिनके तहत किसी भी राज्य का कानून देश के अन्य नागरिकों को पूरी तरह बाहर नहीं कर सकता। [1] संवैधानिक और कानूनी कारण समानता का अधिकार: भारत के संविधान का अनुच्छेद 16 देश के सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर देता है। इसके अनुसार, केवल निवास स्थान (Domicile) के आधार पर देश के नागरिकों को सभी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। अदालती फैसले (कोर्ट के आदेश): झारखंड सरकार ने पहले स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में 100% या भारी मात्रा में आरक्षण (जैसे स्थानीय नीति या 75% निजी क्षेत्र का कानून) लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताकर रद्द कर दिया। [1, 2, 3] खुली श्रेणी (Open Category): सरकार की मौजूदा भर्ती नियमावली (जैसे 60:40 का अनुपात या सामान्य श्रेणियां) के तहत एक निश्चित प्रतिशत सीटें अन्य राज्यों या गैर-स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए खुली रखनी पड़ती हैं, ताकि कानूनी बाधाओं से बचा जा सके। [1, 2] तकनीकी और योग्यता आधारित पहलू योग्यता और चयन: खुली प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षाओं में जो अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता, कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया को पार करते हैं, उन्हें मेरिट के आधार पर नौकरी मिलती है, चाहे वे राज्य के भीतर के हों या बाहर के। विशेष और तकनीकी पद: उच्च शिक्षा (जैसे आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल संस्थान) या विशेष तकनीकी क्षेत्रों में कई बार राज्य के भीतर योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की कमी के कारण खुले बाजार से चयन किया जाता है।
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    झारखंड में नोकरी चाहिए तो, पैशा लाओ नोकरी पांव , सभी नोकरी का अलग-अलग भाव l मोलाई का गुंजाईश नहीं है, सरकार घाटे में चल रही है l
झारखंड में सरकारी नौकरियों और नीतियों को लेकर यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है। इसका मुख्य कारण संवैधानिक प्रावधान (कानून), अदालती फैसले, और खुली भर्ती नीतियां हैं, जिनके तहत किसी भी राज्य का कानून देश के अन्य नागरिकों को पूरी तरह बाहर नहीं कर सकता। [1]
संवैधानिक और कानूनी कारण
समानता का अधिकार: भारत के संविधान का अनुच्छेद 16 देश के सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर देता है। इसके अनुसार, केवल निवास स्थान (Domicile) के आधार पर देश के नागरिकों को सभी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालती फैसले (कोर्ट के आदेश): झारखंड सरकार ने पहले स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में 100% या भारी मात्रा में आरक्षण (जैसे स्थानीय नीति या 75% निजी क्षेत्र का कानून) लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताकर रद्द कर दिया। [1, 2, 3]
खुली श्रेणी (Open Category): सरकार की मौजूदा भर्ती नियमावली (जैसे 60:40 का अनुपात या सामान्य श्रेणियां) के तहत एक निश्चित प्रतिशत सीटें अन्य राज्यों या गैर-स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए खुली रखनी पड़ती हैं, ताकि कानूनी बाधाओं से बचा जा सके। [1, 2]
तकनीकी और योग्यता आधारित पहलू
योग्यता और चयन: खुली प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षाओं में जो अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता, कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया को पार करते हैं, उन्हें मेरिट के आधार पर नौकरी मिलती है, चाहे वे राज्य के भीतर के हों या बाहर के।
विशेष और तकनीकी पद: उच्च शिक्षा (जैसे आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल संस्थान) या विशेष तकनीकी क्षेत्रों में कई बार राज्य के भीतर योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की कमी के कारण खुले बाजार से चयन किया जाता है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    6 hrs ago
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