पुराने केसीसी ऋण के बीच नया ऋण दर्ज होने से वृद्ध किसान ने उठाए सवाल, डीएम से जांच की घर पहुंचे बैंक अधिकारी, मोबाइल कब्जे में लेकर हस्ताक्षर कराने का आरोप पुराने केसीसी ऋण के बीच नया ऋण दर्ज होने से वृद्ध किसान ने उठाए सवाल, डीएम से जांच की मांग आलापुर (अंबेडकरनगर)। बैंक ऋण की वसूली के लिए ग्राहक के घर पहुंचना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यदि घर पर ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराकर नया ऋण दर्ज किए जाने का आरोप लगे और संबंधित ग्राहक को ऋण की पूरी जानकारी तक न दी जाए, तो मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा ही मामला रामनगर विकासखंड के अरमा गांव निवासी वृद्ध किसान प्रेम प्रकाश पांडे से जुड़ा सामने आया है। उन्होंने यूपी ग्रामीण बैंक ऑफ बड़ौदा की हुसेनपुर खुर्द शाखा के अधिकारियों पर घर पहुंचकर कथित रूप से दबाव बनाने, मोबाइल फोन अपने पास रखने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद उनके नाम पर नया ऋण दर्ज किए जाने का आरोप लगाया है। किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही सीपी ग्राम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है, जिसका पंजीकरण नंबर GOVUP/E/2026/0121998 है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, प्रेम प्रकाश पांडे का उक्त बैंक शाखा में वर्ष 2017 से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण चल रहा है। ऋण खाते की संख्या 58220500000312 बताई गई है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण वह पुराने ऋण की समय से अदायगी नहीं कर पा रहे थे। इसी बीच 18 सितंबर 2026 को शाखा प्रबंधक करीब तीन व्यक्तियों के साथ उनके घर पहुंचे। शिकायतकर्ता के अनुसार, साथ आए एक व्यक्ति को बैंक का डीसी/अधिकारी बताते हुए उसका नाम सर्वेश मिश्रा बताया गया। रिश्तेदार को फोन करने की कोशिश पर मोबाइल रखने का आरोप शिकायतकर्ता का आरोप है कि घर पर बैंक अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने रिश्तेदार से फोन पर संपर्क कर मामले की जानकारी देने का प्रयास किया। इसी दौरान कथित रूप से उनका मोबाइल फोन अपने पास रख लिया गया। उनका कहना है कि वह वृद्ध अवस्था में हैं और उस समय घर पर उनकी पत्नी के अलावा परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। आरोप है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं, जिनमें उन्हें कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने पड़े। यहीं से पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है कि यदि नया ऋण सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था तो उसके आवेदन, शर्तों और दस्तावेजों की जानकारी ग्राहक को स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दी गई? शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे घर पर हस्ताक्षर कराए जाने के समय यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और उनके नाम पर नया ऋण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। पुराने ऋण में रकम समायोजित करने की बताई गई बात प्रेम प्रकाश पांडे के अनुसार, हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर एक और ऋण किया जा रहा है और उसकी धनराशि पुराने ऋण खाते में जमा कर दी जाएगी। हालांकि, उन्हें नए ऋण की पूरी जानकारी, ऋण खाता संख्या और संबंधित दस्तावेजों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अगले दिन 19 सितंबर को जब वह बैंक में ऋण की किस्त जमा करने पहुंचे तो उन्हें अपने नाम पर एक अन्य ऋण स्वीकृत/दर्ज होने की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने नए ऋण की खाता संख्या और उससे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी, लेकिन शिकायत के मुताबिक उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बैंक परिसर में नहीं, घर पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का दावा शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में एक अहम बिंदु उठाया है। उनका कहना है कि नए ऋण से संबंधित दस्तावेजों पर उन्होंने बैंक शाखा में जाकर हस्ताक्षर नहीं किए, बल्कि उनके घर पर ही हस्ताक्षर कराए गए। ऐसे में वह जानना चाहते हैं कि उनके नाम पर नया ऋण किस आवेदन के आधार पर स्वीकृत हुआ, किस अधिकारी ने उसे मंजूरी दी, ऋण की रकम कितनी थी और उसे पुराने ऋण खाते में किस आधार पर समायोजित किया गया। उन्होंने जिलाधिकारी से नए ऋण से संबंधित आवेदन पत्र, ऋण खाता संख्या, केवाईसी दस्तावेज, स्वीकृति पत्र, भुगतान/समायोजन विवरण तथा उनके हस्ताक्षर वाले सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग मामले में शिकायतकर्ता ने बैंक के अभिलेखों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि बैंक परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में संबंधित समय की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उसे सुरक्षित कराकर जांच में शामिल किया जाए। इसके अलावा ऋण स्वीकृति से संबंधित बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आवेदन कब तैयार हुआ, किस स्तर से स्वीकृत हुआ और रकम किस खाते में तथा किस उद्देश्य से स्थानांतरित या समायोजित की गई। मोबाइल फोन रखने के आरोप की भी जांच की मांग प्रेम प्रकाश पांडे ने घर पर हस्ताक्षर कराने की परिस्थितियों के साथ ही अपना मोबाइल फोन बैंक अधिकारियों द्वारा अपने पास रखे जाने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में दबाव, अनुचित प्रभाव अथवा किसी अन्य अनियमित तरीके से हस्ताक्षर कराकर ऋण संबंधी कार्रवाई किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित नए ऋण के संबंध में जबरन वसूली या किसी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई न की जाए। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बैंक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, एक वृद्ध किसान के नाम पर पुराने ऋण के बीच नया ऋण दर्ज होने और उसके दस्तावेजों पर घर पर हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप ने बैंकिंग प्रक्रिया और ग्राहक की सहमति से जुड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासनिक जांच में दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड क्या तस्वीर सामने लाते हैं।
पुराने केसीसी ऋण के बीच नया ऋण दर्ज होने से वृद्ध किसान ने उठाए सवाल, डीएम से जांच की घर पहुंचे बैंक अधिकारी, मोबाइल कब्जे में लेकर हस्ताक्षर कराने का आरोप पुराने केसीसी ऋण के बीच नया ऋण दर्ज होने से वृद्ध किसान ने उठाए सवाल, डीएम से जांच की मांग आलापुर (अंबेडकरनगर)। बैंक ऋण की वसूली के लिए ग्राहक के घर पहुंचना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यदि घर पर ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराकर नया ऋण दर्ज किए जाने का आरोप लगे और संबंधित ग्राहक को ऋण की पूरी जानकारी तक न दी जाए, तो मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा ही मामला रामनगर विकासखंड के अरमा गांव निवासी वृद्ध किसान प्रेम प्रकाश पांडे से जुड़ा सामने आया है। उन्होंने यूपी ग्रामीण बैंक ऑफ बड़ौदा की हुसेनपुर खुर्द शाखा के अधिकारियों पर घर पहुंचकर कथित रूप से दबाव बनाने, मोबाइल फोन अपने पास रखने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद उनके नाम पर नया ऋण दर्ज किए जाने का आरोप लगाया है। किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही सीपी ग्राम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है, जिसका पंजीकरण नंबर GOVUP/E/2026/0121998 है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, प्रेम प्रकाश पांडे का उक्त बैंक शाखा में वर्ष 2017 से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण चल रहा है। ऋण खाते की संख्या 58220500000312 बताई गई है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण वह पुराने ऋण की समय से अदायगी नहीं कर पा रहे थे। इसी बीच 18 सितंबर 2026 को शाखा प्रबंधक करीब तीन व्यक्तियों के साथ उनके घर पहुंचे। शिकायतकर्ता के अनुसार, साथ आए एक व्यक्ति को बैंक का डीसी/अधिकारी बताते हुए उसका नाम सर्वेश मिश्रा बताया गया। रिश्तेदार को फोन करने की कोशिश पर मोबाइल रखने का आरोप शिकायतकर्ता का आरोप है कि घर पर बैंक अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने रिश्तेदार से फोन पर संपर्क कर मामले की जानकारी देने का प्रयास किया। इसी दौरान कथित रूप से उनका मोबाइल फोन अपने पास रख लिया गया। उनका कहना है कि वह वृद्ध अवस्था में हैं और उस समय घर पर उनकी पत्नी के अलावा परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। आरोप है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं, जिनमें उन्हें कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने पड़े। यहीं से पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है कि यदि नया ऋण सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था तो उसके आवेदन, शर्तों और दस्तावेजों की जानकारी ग्राहक को स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दी गई? शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे घर पर हस्ताक्षर कराए जाने के समय यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और उनके नाम पर नया ऋण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। पुराने ऋण में रकम समायोजित करने की बताई गई बात प्रेम प्रकाश पांडे के अनुसार, हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर एक और ऋण किया जा रहा है और उसकी धनराशि पुराने ऋण खाते में जमा कर दी जाएगी। हालांकि, उन्हें नए ऋण की पूरी जानकारी, ऋण खाता संख्या और संबंधित दस्तावेजों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अगले दिन 19 सितंबर को जब वह बैंक में ऋण की किस्त जमा करने पहुंचे तो उन्हें अपने नाम पर एक अन्य ऋण स्वीकृत/दर्ज होने की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने नए ऋण की खाता संख्या और उससे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी, लेकिन शिकायत के मुताबिक उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बैंक परिसर में नहीं, घर पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का दावा शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में एक अहम बिंदु उठाया है। उनका कहना है कि नए ऋण से संबंधित दस्तावेजों पर उन्होंने बैंक शाखा में जाकर हस्ताक्षर नहीं किए, बल्कि उनके घर पर ही हस्ताक्षर कराए गए। ऐसे में वह जानना चाहते हैं कि उनके नाम पर नया ऋण किस आवेदन के आधार पर स्वीकृत हुआ, किस अधिकारी ने उसे मंजूरी दी, ऋण की रकम कितनी थी और उसे पुराने ऋण खाते में किस आधार पर समायोजित किया गया। उन्होंने जिलाधिकारी से नए ऋण से संबंधित आवेदन पत्र, ऋण खाता संख्या, केवाईसी दस्तावेज, स्वीकृति पत्र, भुगतान/समायोजन विवरण तथा उनके हस्ताक्षर वाले सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग मामले में शिकायतकर्ता ने बैंक के अभिलेखों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि बैंक परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में संबंधित समय की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उसे सुरक्षित कराकर जांच में शामिल किया जाए। इसके अलावा ऋण स्वीकृति से संबंधित बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आवेदन कब तैयार हुआ, किस स्तर से स्वीकृत हुआ और रकम किस खाते में तथा किस उद्देश्य से स्थानांतरित या समायोजित की गई। मोबाइल फोन रखने के आरोप की भी जांच की मांग प्रेम प्रकाश पांडे ने घर पर हस्ताक्षर कराने की परिस्थितियों के साथ ही अपना मोबाइल फोन बैंक अधिकारियों द्वारा अपने पास रखे जाने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में दबाव, अनुचित प्रभाव अथवा किसी अन्य अनियमित तरीके से हस्ताक्षर कराकर ऋण संबंधी कार्रवाई किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित नए ऋण के संबंध में जबरन वसूली या किसी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई न की जाए। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बैंक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, एक वृद्ध किसान के नाम पर पुराने ऋण के बीच नया ऋण दर्ज होने और उसके दस्तावेजों पर घर पर हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप ने बैंकिंग प्रक्रिया और ग्राहक की सहमति से जुड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासनिक जांच में दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड क्या तस्वीर सामने लाते हैं।
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- दबंगो के हौसले बुलंद आधी रात को बुलडोजर से दबंगों ने गिराया दर्जनों मकान अंबेडकर नगर अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बरियावन बाजार के निकट रात्रि में दबंगों ने दर्जनों मकान पर बुलडोजर चलवा दिया, जांच पड़ताल में जुटी पुलिस1
- *विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना: सिलाई मशीन वितरण में दलालों की भूमिका और ट्रेनिंग शुल्क के सवाल* अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और महिलाओं को सिलाई मशीन समेत टूलकिट वितरित किए जा रहे हैं। योजना का मकसद कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, मानदेय और आधुनिक उपकरण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन जनपद में हालिया वितरण के बाद एक गंभीर सवाल पूरे परिसर में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गया है—क्या योजना का लाभ बिना दलालों के पकड़े संभव है, या इसमें विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता है?स्थानीय लोगों और कुछ लाभार्थियों के बीच यह बात आम चर्चा में है कि सिलाई मशीन पाने के लिए कई जगहों पर दलाल सक्रिय रहे। आरोप है कि सही पात्रता रखने वाले लोग भी दलालों के माध्यम से ही आवेदन या चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ पाए, जबकि सीधे विभाग से संपर्क करने वाले कई उम्मीदवारों को अड़चनें आईं। मीडिया के कैमरे और स्थानीय चर्चाओं में यह मुद्दा काफी हद तक दब गया, लेकिन जमीनी स्तर पर यह सवाल जिंदा है कि योजना के लाभ को पारदर्शी तरीके से आम आदमी तक पहुँचाने में दलालों की अहम भूमिका क्यों रही?जानकारी के अनुसार एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। योजना में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण अनिवार्य बताया जाता है, जिसके बाद ही टूलकिट (सिलाई मशीन) दी जाती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह जानकारी मिली है कि अगर कोई व्यक्ति ट्रेनिंग नहीं करना चाहता, तो उसे ट्रेनिंग सेंटर द्वारा तय किया गया अलग से शुल्क देना पड़ता है। यह शुल्क ट्रेनिंग सेंटर स्वयं निर्धारित करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आधिकारिक रूप से मुफ्त बताई गई योजना में यह अतिरिक्त शुल्क कैसे और किसके निर्देश पर वसूला जा रहा है? क्या यह भी दलालों या संबंधित अधिकारियों के सहयोग से चलने वाला अनौपचारिक सिस्टम है?योजना के प्रावधानों के अनुसार आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाते हैं। पात्रता में उत्तर प्रदेश का निवासी होना, न्यूनतम आयु 18 वर्ष और संबंधित ट्रेड (जैसे दर्जी/सिलाई) में अनुभव शामिल है। प्रशिक्षण के बाद टूलकिट निःशुल्क दी जाती है। आधिकारिक तौर पर प्रक्रिया पारदर्शी बताई जाती है। फिर भी अंबेडकर नगर में यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ अधिकारी या कर्मचारी दलालों के जरिए लाभ पहुँचा रहे होंगे। अगर यह सच है, तो पात्र गरीब कारीगर और महिलाएं योजना के वास्तविक लाभ से वंचित रह सकते हैं।यह मामला सिर्फ अफवाह या कौतूहल का विषय नहीं रहना चाहिए। जिला प्रशासन और उद्योग विभाग को चाहिए कि इस पर त्वरित और निष्पक्ष जांच करे। दलालों की भूमिका साबित होने पर सख्त कार्रवाई हो, और अगर अधिकारी संलिप्त पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी उचित कदम उठाए जाएं। ट्रेनिंग छोड़ने पर शुल्क वसूलने की प्रथा की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए और शिकायत तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि बिना किसी बिचौलिये के पात्र लोग आसानी से लाभ ले सकें।विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना कारीगरों को सशक्त बनाने का अच्छा माध्यम है। लेकिन अगर इसमें दलाल, अतिरिक्त शुल्क और भ्रष्टाचार घुस गए तो इसका उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। अंबेडकर नगर के लोग अब जवाब चाहते हैं—क्या बिना दलाल पकड़े और बिना अतिरिक्त शुल्क दिए योजना का लाभ मिलना सच में संभव है, या सिस्टम में कहीं गड़बड़ी है? प्रशासन को इन सवालों का संतोषजनक जवाब देना चाहिए, ताकि योजना का फायदा सही हकदारों तक पहुँचे। *विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना: सिलाई मशीन वितरण में दलालों की भूमिका और ट्रेनिंग शुल्क के सवाल* अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और महिलाओं को सिलाई मशीन समेत टूलकिट वितरित किए जा रहे हैं। योजना का मकसद कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, मानदेय और आधुनिक उपकरण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन जनपद में हालिया वितरण के बाद एक गंभीर सवाल पूरे परिसर में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गया है—क्या योजना का लाभ बिना दलालों के पकड़े संभव है, या इसमें विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता है?स्थानीय लोगों और कुछ लाभार्थियों के बीच यह बात आम चर्चा में है कि सिलाई मशीन पाने के लिए कई जगहों पर दलाल सक्रिय रहे। आरोप है कि सही पात्रता रखने वाले लोग भी दलालों के माध्यम से ही आवेदन या चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ पाए, जबकि सीधे विभाग से संपर्क करने वाले कई उम्मीदवारों को अड़चनें आईं। मीडिया के कैमरे और स्थानीय चर्चाओं में यह मुद्दा काफी हद तक दब गया, लेकिन जमीनी स्तर पर यह सवाल जिंदा है कि योजना के लाभ को पारदर्शी तरीके से आम आदमी तक पहुँचाने में दलालों की अहम भूमिका क्यों रही?जानकारी के अनुसार एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। योजना में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण अनिवार्य बताया जाता है, जिसके बाद ही टूलकिट (सिलाई मशीन) दी जाती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह जानकारी मिली है कि अगर कोई व्यक्ति ट्रेनिंग नहीं करना चाहता, तो उसे ट्रेनिंग सेंटर द्वारा तय किया गया अलग से शुल्क देना पड़ता है। यह शुल्क ट्रेनिंग सेंटर स्वयं निर्धारित करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आधिकारिक रूप से मुफ्त बताई गई योजना में यह अतिरिक्त शुल्क कैसे और किसके निर्देश पर वसूला जा रहा है? क्या यह भी दलालों या संबंधित अधिकारियों के सहयोग से चलने वाला अनौपचारिक सिस्टम है?योजना के प्रावधानों के अनुसार आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाते हैं। पात्रता में उत्तर प्रदेश का निवासी होना, न्यूनतम आयु 18 वर्ष और संबंधित ट्रेड (जैसे दर्जी/सिलाई) में अनुभव शामिल है। प्रशिक्षण के बाद टूलकिट निःशुल्क दी जाती है। आधिकारिक तौर पर प्रक्रिया पारदर्शी बताई जाती है। फिर भी अंबेडकर नगर में यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ अधिकारी या कर्मचारी दलालों के जरिए लाभ पहुँचा रहे होंगे। अगर यह सच है, तो पात्र गरीब कारीगर और महिलाएं योजना के वास्तविक लाभ से वंचित रह सकते हैं।यह मामला सिर्फ अफवाह या कौतूहल का विषय नहीं रहना चाहिए। जिला प्रशासन और उद्योग विभाग को चाहिए कि इस पर त्वरित और निष्पक्ष जांच करे। दलालों की भूमिका साबित होने पर सख्त कार्रवाई हो, और अगर अधिकारी संलिप्त पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी उचित कदम उठाए जाएं। ट्रेनिंग छोड़ने पर शुल्क वसूलने की प्रथा की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए और शिकायत तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि बिना किसी बिचौलिये के पात्र लोग आसानी से लाभ ले सकें।विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना कारीगरों को सशक्त बनाने का अच्छा माध्यम है। लेकिन अगर इसमें दलाल, अतिरिक्त शुल्क और भ्रष्टाचार घुस गए तो इसका उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। अंबेडकर नगर के लोग अब जवाब चाहते हैं—क्या बिना दलाल पकड़े और बिना अतिरिक्त शुल्क दिए योजना का लाभ मिलना सच में संभव है, या सिस्टम में कहीं गड़बड़ी है? प्रशासन को इन सवालों का संतोषजनक जवाब देना चाहिए, ताकि योजना का फायदा सही हकदारों तक पहुँचे।1
- नोकझोंक के बीच आखिरकार शुरू हुआ काम वर्षों से लंबित नाली और खड़ंजे का निर्माण शुरू, अतिक्रमण हटने के बाद ग्रामीणों को मिली राहत बूढनपुर विकासखंड अहरौला की ग्राम पंचायत मतलूबपुर में जल निकासी की समस्या को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और ग्रामीणों के विरोध के बाद आखिरकार सोमवार को नाली और खड़ंजे के निर्माण कार्य की शुरुआत हो गई। अतिक्रमण हटाने के दौरान मौके पर नोकझोंक की स्थिति भी बनी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई पूरी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। गांव में वर्षों से नाली और खड़ंजे का निर्माण अतिक्रमण के चलते बाधित था। जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर गंदा पानी जमा रहता था, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई न होने से उनका आक्रोश बढ़ता गया। बीते दिनों ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए कई मकानों पर ‘घर बिकाऊ है’ के पोस्टर चिपका दिए थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी थी कि यदि जल निकासी और सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव में जनप्रतिनिधियों के प्रवेश का विरोध किया जाएगा। मामले की खबर प्रमुखता से हिंदुस्तान में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। सोमवार को उपजिलाधिकारी बुढ़नपुर चंद्र प्रकाश सिंह, नायब तहसीलदार बुढ़नपुर विवेकानंद और खंड विकास अधिकारी अहरौला संतोष कुमार समेत राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की मौजूदगी में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। अतिक्रमण हटाने के दौरान कुछ लोगों से नोकझोंक की स्थिति भी बनी। स्थिति को देखते हुए थाना अध्यक्ष अहरौला के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। प्रशासनिक कार्रवाई पूरी होने के बाद वर्षों से बाधित पड़े नाली और खड़ंजे के निर्माण कार्य को शुरू करा दिया गया। निर्माण कार्य शुरू होते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीण आनंद गुप्ता ने कहा कि आखिरकार उनकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंची और प्रशासन ने नाली निर्माण का कार्य शुरू करा दिया। लंबे समय से ग्रामीण इस समस्या से परेशान थे। वहीं चंदू सोनकर ने कहा कि लगातार किए गए प्रयास आखिरकार रंग लाए हैं। प्रशासन द्वारा नाली का निर्माण शुरू कराए जाने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि नाली का निर्माण पूरा होने से वर्षों से चली आ रही जल निकासी की समस्या का समाधान होगा। वहीं खड़ंजे का निर्माण पूरा होने से आवागमन भी सुगम होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि निर्माण कार्य को जल्द और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जाए, ताकि भविष्य में जल निकासी और आवागमन की समस्या दोबारा न खड़ी हो। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी बुढ़नपुर चंद्र प्रकाश सिंह, नायब तहसीलदार बुढ़नपुर विवेकानंद, खंड विकास अधिकारी अहरौला संतोष कुमार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी पूजा यादव, थाना अध्यक्ष अहरौला सहित भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।1
- 12 घंटे में अपहरण कांड का खुलासा: विशाल कुमार सकुशल बरामद, चार आरोपी गिरफ्तार बखिरा पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से मचा हड़कंप, जितेंद्र, धर्मेंद्र, अशोक और विश्वकेतु यादव पुलिस के शिकंजे में संतकबीरनगर। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए विवाद से जुड़े मामले में सामने आए अपहरण प्रकरण का थाना बखिरा पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर सफल अनावरण कर दिया। पुलिस ने अपहृत विशाल कुमार को सकुशल बरामद करते हुए मामले में नामजद चार आरोपियों जितेंद्र, धर्मेंद्र, अशोक और विश्वकेतु यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मामले में नया मोड़ आ गया है।बताया गया कि पूर्व में गणेश विसर्जन के दौरान हुए विवाद को लेकर विशाल कुमार की तहरीर पर सांसद पप्पू निषाद, जिला पंचायत सदस्य विश्वकेतु यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ गाड़ी से कुचलने के प्रयास, गाली-गलौज, धमकी तथा एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद इसी प्रकरण में विशाल कुमार के लापता होने पर चार लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। 12 घंटे में पुलिस ने बरामद किया विशाल अपहरण की सूचना मिलते ही थाना बखिरा पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और संभावित स्थानों पर दबिश एवं सुरागरसी करते हुए 12 घंटे के भीतर विशाल कुमार को सकुशल बरामद कर लिया। इसके साथ ही पुलिस ने मामले में शामिल बताए जा रहे चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में जितेंद्र, धर्मेंद्र, अशोक और विश्वकेतु यादव शामिल हैं। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। विवाद से अपहरण तक पहुंचा मामला गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान शुरू हुआ विवाद बाद में मुकदमेबाजी तक पहुंचा और अब अपहरण के आरोप तथा गिरफ्तारी के बाद मामला और गंभीर हो गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती—लापता युवक की सकुशल बरामदगी—को पूरा कर दिया है।अब पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित है कि विशाल कुमार को किन परिस्थितियों में ले जाया गया, घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका क्या रही। एसपी ने पुलिस टीम की कार्रवाई को बताया अहम अपहरण की घटना का 12 घंटे में सफल अनावरण और अपहृत व्यक्ति की सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर द्वारा मामले में पुलिस की कार्रवाई के संबंध में बाइट दी गई। पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल विशाल कुमार की सकुशल बरामदगी और चार आरोपियों की गिरफ्तारी ने मामले की दिशा बदल दी है। अब पुलिस पूछताछ और जांच में सामने आने वाले तथ्यों से पूरे घटनाक्रम की असली तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।1
- जन्मदिन विशेष प्रेस वार्ता श्री सतपाल जी महाराज के जन्मदिन पर विशेष आयोजन विशेष संवाददाता। श्री सतपाल जी महाराज के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में उनके सामाजिक, आध्यात्मिक एवं जनसेवा से जुड़े कार्यों पर चर्चा की गई। इस दौरान उनके अनुयायियों एवं समर्थकों ने जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि श्री सतपाल जी महाराज का संदेश मानव सेवा, आध्यात्मिक जागरूकता और समाज में सद्भाव की भावना को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। जन्मदिन के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर सेवा एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने “श्री सतपाल जी महाराज को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं” देते हुए उनके विचारों और संदेश को समाज तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।1
- अंबेडकर नगर में बड़ा बुलडोजर एक्शन! 100 लोगों के साथ पहुंचे दबंग, दुकानें हुईं ध्वस्त1
- उच्चप्राथमिक विद्यालय मे सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ आयोजन बूढनपुर आज उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव मुबारकपुर के परिसर में VIRBAC संस्था द्वारा प्रदान किए गए 70 सेट डेस्क ब्रैच का उद्घाटन कार्यक्रम तथा राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह एवं ICT तथा निपुण लक्ष्य के लिए प्रदेश स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक श्री विनोद कुमार मौर्य का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में VIRBAC संस्था के ABM श्री रोशन कुमार तथा BO कृष्णकांत शुक्ला उपस्थित हुए। साथ ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी श्री पंकज कुमार मौर्य तथा राज्यपाल पुरस्कार से पुरस्कृत उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र प्रताप सिंह की गरिमा में उपस्थित थी। कार्यक्रम में ARP श्री निखिल कुमार सिंह,शैलेश सिंह पवन कुमार चौबे तथा वरिष्ठ शिक्षक श्री नागेंद्र दुबे,हरिराम तिवारी,सुनील सिंह,पवन सिंह,मनोज दुबे,सर्वेश सिंह नीरज सिंह,वीरेंद्र शुक्ला,अभिनव सिंह, संतोष यादव,आशुतोष सिंह , तनीषा सिंह सहित अनेको शिक्षक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री देवेंद्र कुमार सिंह द्वारा किया गया तथा प्रवीण कुमार मिश्र द्वारा सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया। इस मौके पर,रीता सिंह,तृप्ति रानी, सोना देवी तथा के द्वारा तैयार की गई बच्चियों द्वारा मनमोहक प्रस्तुति की गई। विद्यालय के स्टाफ श्री अकरम आजम श्री रामजतन मौर्य दिलीप कुमार तथा राम प्रकाश गुप्ता द्वारा आये हुए सभी आगंतुकों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया।पूरा कार्यक्रम ग्राम प्रधान श्री प्रमोद कुमार यादव के द्वारा संपन्न कराया गया।1