हमीरपुर में जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों और शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जनपद में फसल अवशेष (पराली), घास-फूस और कृषि अपशिष्ट जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लागू है। जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि खेतों में पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय गहरी जुताई कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं, जिससे भूमि में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार होता है। जिलाधिकारी ने आगे बताया कि फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से उपयोगी सूक्ष्म जीवाणुओं का संरक्षण होता है, मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने में भी सहायता मिलती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए किसानों की सहभागिता को अत्यंत आवश्यक बताया। शासनादेश के अनुसार, प्रत्येक राजस्व ग्राम में संबंधित लेखपाल की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की गई है कि उसके क्षेत्र में पराली जलाने की कोई घटना न हो। यदि किसी क्षेत्र में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित लेखपाल के विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। अभिषेक गोयल ने जानकारी दी कि भारत के राजपत्र 6 नवंबर 2024 और माननीय एनजीटी के निर्देशों के अंतर्गत पराली जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति अर्थदंड अधिरोपित किया जाएगा। इसके तहत, 2 एकड़ से कम क्षेत्र होने पर प्रति घटना 5 हजार रुपये, 2 से 5 एकड़ तक क्षेत्र होने पर प्रति घटना 10 हजार रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र होने पर प्रति घटना 30 हजार रुपये की दर से जुर्माना वसूला जाएगा। उन्होंने बताया कि जनपद में अब तक कुल 350 घटनाएं पराली अथवा अवशेष जलने की चिन्हित की गई हैं। सैटेलाइट एवं स्थलीय सत्यापन के उपरांत 87 घटनाएं मेढ़ों पर कूड़ा जलाने की, 7 घटनाएं अन्य जनपदों से संबंधित तथा 70 घटनाएं अपुष्ट पाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, 174 घटनाएं अज्ञात कारणों, जैसे विद्युत शॉर्ट सर्किट आदि से संबंधित पाई गईं, जबकि केवल 12 घटनाओं में ही किसानों द्वारा पराली जलाने की पुष्टि हुई है। इन सभी पुष्ट मामलों में संबंधित कृषकों के विरुद्ध तहसील स्तर पर अर्थदंड अधिरोपित किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। जिलाधिकारी ने कृषकों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा आर्थिक दंड से बचने के लिए खेतों में पराली या फसल अवशेष बिल्कुल न जलाएं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया, ताकि स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण के साथ सतत कृषि व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।
हमीरपुर में जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों और शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जनपद में फसल अवशेष (पराली), घास-फूस और कृषि अपशिष्ट जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लागू है। जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि खेतों में पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय गहरी जुताई कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं, जिससे भूमि में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार होता है। जिलाधिकारी ने आगे बताया कि फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से उपयोगी सूक्ष्म जीवाणुओं का संरक्षण होता है, मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने में भी सहायता मिलती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए किसानों की सहभागिता को अत्यंत आवश्यक बताया। शासनादेश के अनुसार, प्रत्येक राजस्व ग्राम में संबंधित लेखपाल की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की गई है कि उसके क्षेत्र में पराली जलाने की कोई घटना न हो। यदि किसी क्षेत्र में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित लेखपाल के विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। अभिषेक गोयल ने जानकारी दी कि भारत के राजपत्र 6 नवंबर 2024 और माननीय एनजीटी के निर्देशों के अंतर्गत पराली जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति अर्थदंड अधिरोपित किया जाएगा। इसके तहत, 2 एकड़ से कम क्षेत्र होने पर प्रति घटना 5 हजार रुपये, 2 से 5 एकड़ तक क्षेत्र होने पर प्रति घटना 10 हजार रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र होने पर प्रति घटना 30 हजार रुपये की दर से जुर्माना वसूला जाएगा। उन्होंने बताया कि जनपद में अब तक कुल 350 घटनाएं पराली अथवा अवशेष जलने की चिन्हित की गई हैं। सैटेलाइट एवं स्थलीय सत्यापन के उपरांत 87 घटनाएं मेढ़ों पर कूड़ा जलाने की, 7 घटनाएं अन्य जनपदों से संबंधित तथा 70 घटनाएं अपुष्ट पाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, 174 घटनाएं अज्ञात कारणों, जैसे विद्युत शॉर्ट सर्किट आदि से संबंधित पाई गईं, जबकि केवल 12 घटनाओं में ही किसानों द्वारा पराली जलाने की पुष्टि हुई है। इन सभी पुष्ट मामलों में संबंधित कृषकों के विरुद्ध तहसील स्तर पर अर्थदंड अधिरोपित किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। जिलाधिकारी ने कृषकों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा आर्थिक दंड से बचने के लिए खेतों में पराली या फसल अवशेष बिल्कुल न जलाएं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया, ताकि स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण के साथ सतत कृषि व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।
- हमीरपुर जिले के मौदहा कोतवाली इलाके के खंडेह गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ तालाब में नहाने गए तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। बच्चों के तालाब में डूबने की सूचना पर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और तीनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद ग्रामीणों ने बच्चों को डॉक्टर को दिखाया। मौदहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में चिकित्सकों की टीम ने प्राथमिक उपचार के बाद तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद बच्चों के परिजनों में गहरा हड़कंप मच गया है।4
- हमीरपुर में एक महिला ने अपने ससुरालियों पर अभद्रता करने, मारपीट कर घर से बाहर निकालने और उसके बेटे को जबरन छीनने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला ने इस संबंध में पुलिस थाना में तहरीर दी है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लौड़ी थाना क्षेत्र के सरवई गांव की निवासी सीमा पत्नी वीरेंद्र वर्मा का विवाह आठ साल पहले बिवांर थाना क्षेत्र के अतरार गांव में हुआ था। उनके आठ साल का पुत्र आयुष और पांच साल की पुत्री है। महिला का आरोप है कि उसका राजमिस्त्री पति वीरेंद्र वर्मा आए दिन शराब के नशे में उसके साथ अभद्रता और मारपीट कर प्रताड़ित करता रहा है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने एक बार मिट्टी का तेल डालकर उसे आग लगाने की कोशिश भी की थी। इसके अलावा, सास, जेठ और ससुर ने भी उसके साथ मारपीट कर उसे घर से बाहर निकाल दिया। घर से निकाले जाने के बाद, महिला ने अपने भाई को बुलाकर मायके में शरण ली। बाद में, पति ने जबरन उसके पुत्र आयुष को छीनकर अपने घर ले गया और फोन पर उसे तलाक लेने की धमकी भी दी। इन घटनाओं से आहत होकर, महिला अपने भाई, पिता और मां के साथ थाना पहुंची और ससुरालियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। थानाध्यक्ष नंदराम प्रजापति ने बताया कि महिला द्वारा मिली तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जाएगी और उसके ससुरालियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।1
- कानपुर नगर के नरवल तहसील क्षेत्र में स्थित बेहटा गम्भीरपुर गांव में सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में चौकी प्रभारी साढ़ को एक लिखित शिकायत दी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा गांव की सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ग्राम समाज की भूमि, जिसका गाटा संख्या 596 बताया गया है, पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा किया गया है। ग्रामीणों ने विकल यादव, छोटे यादव और मूलचंद यादव पर इस अवैध निर्माण को अंजाम देने का आरोप लगाया है। इस कब्जे के कारण गांव की सामान्य सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं और ग्राम समाज की भूमि का मौलिक स्वरूप भी बिगड़ रहा है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि इस अवैध कब्जे को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और जो लोग इसमें दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।2
- हमीरपुर जिले के मौदहा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम छिरका में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। इस कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग और समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जिससे आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सका। भंडारे के दौरान सिंह साहब, यादव जी, शर्मा जी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने मुख्य भूमिका निभाई। बाबा जी यादव और नरेंद्र शर्मा की उपस्थिति विशेष चर्चा का विषय रही। ग्रामीणों ने ऐसे आयोजनों को समाज में भाईचारा और आपसी प्रेम मजबूत करने वाला बताया। कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी मौदहा, कोतवाली प्रभारी और एसडीएम मौदहा की कार्यशैली की भी सराहना की गई। आयोजकों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्षेत्र में आपसी सौहार्द और भाईचारा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर मानव अधिकार तहसील अध्यक्ष समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन 'सबका साथ, सबका विकास' और 'जय संग विजय संग, जय मानव अधिकार' के नारों के साथ हुआ।2
- जालौन जनपद के कदौरा विकास खंड कार्यालय में सोमवार को एक कर्मचारी विवाद के दौरान मारपीट की घटना सामने आई, जिसमें मनरेगा पटल पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर और एक रोजगार सेवक के बीच कहासुनी के बाद रोजगार सेवक घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान कुर्सी और कंप्यूटर मॉनिटर से हमला किया गया था। घटना के बाद कुछ समय के लिए ब्लॉक कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल रहा और घायल कर्मचारी को उपचार व मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया। घायल पक्ष ने आरोप लगाया है कि यह विवाद फाइल संबंधी कार्य और प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चला आ रहा था। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से भी अपना पक्ष रखा जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों से जानकारी जुटा चुकी है। घटना के बाद कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों को लेकर भी चर्चा हुई; कर्मचारियों का मानना है कि घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई होगी, जबकि संबंधित अधिकारियों ने कैमरों की स्थिति की जांच कराए जाने की बात कही है। कुछ कर्मचारियों और स्थानीय लोगों द्वारा मनरेगा कार्यों में कथित कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने बताया है कि जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- कानपुर देहात में मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में गौशालाओं के संचालन एवं उनकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद की गौशालाओं में निराश्रित एवं बेसहारा गौवंशों के संरक्षण, भरण-पोषण और उपचार की व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा करना था। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद की समस्त गौशालाओं में गौवंशों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि प्रत्येक गौशाला में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल, हरा और सूखा चारा उपलब्ध रहना चाहिए, जिसकी दैनिक उपलब्धता का रजिस्टर नियमित रूप से संधारित किया जाए। पशु चिकित्साधिकारियों को गौशालाओं में निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण, सभी गौवंशों की अनिवार्य ईयर टैगिंग और समय-समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बीमार पशुओं के लिए संक्रमण फैलने से रोकने हेतु पृथक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, शेड, बाउंड्रीवाल, फर्श और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर भी बल दिया गया। साथ ही, हीटवेव के दृष्टिगत गौवंशों के संरक्षण हेतु आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। गौ आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरे न लगवाए जाने के संबंध में कड़ा रुख अपनाते हुए, मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुबोध कुमार का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने पशु चिकित्साधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी 02 दिवस के भीतर गौ आश्रय स्थलों में कैमरे लगाने का कार्य पूर्ण नहीं होता है, तो संबंधित के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। इसके अतिरिक्त, खंड विकास अधिकारियों को गौशालाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर मांग प्रेषित करने तथा केयर टेकरों का भुगतान समय पर सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। नोडल अधिकारियों को भी निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित निरीक्षण करने और अपनी निरीक्षण आख्या समयबद्ध रूप से प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। मुख्य विकास अधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों को गौशालाओं का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन करने और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए गौशालाओं को एक आदर्श स्वरूप प्रदान करने की बात कही और स्पष्ट किया कि गौशालाओं की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर उपायुक्त श्रम रोजगार अशोक कुमार, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. सुबोध कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी विकास पटेल और समस्त खंड विकास अधिकारी उपस्थित थे, जबकि सभी ग्राम पंचायत अधिकारी एवं नोडल अधिकारी ज़ूम मीटिंग के माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।1
- अकबरपुर थाना क्षेत्र के अकबरपुर तहसील परिसर में एसडीएम सदर तहसील के पेशकार पंकज की खड़ी कार में अचानक आग लग गई। इस घटना को देखकर वहाँ मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुँची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, आग बुझने तक कार पूरी तरह से जलकर खाक हो चुकी थी।1
- हमीरपुर जिले के बिवांर थाना क्षेत्र के भुगैचा गांव में एक युवक पर उसके घर के बाहर चबूतरे में बैठे होने के दौरान तीन नशे में धुत युवकों ने लाठी-डंडों से हमला कर उसे घायल कर दिया। पीड़ित युवक अनिल कुमार रात करीब 11 बजे अपने घर के बाहर बैठा था, तभी गांव के उमेश (चिरंगी श्रीवास का पुत्र) और लाला (फक्कड़ का पुत्र) शराब के नशे में वहाँ आकर अभद्रता करने लगे और हंगामा मचाया। जब अनिल कुमार ने उन्हें रोका, तो शोर सुनकर रामकिशन (सुखलाल का पुत्र) भी आ गया, और तीनों ने मिलकर उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमलावर युवक अनिल कुमार को जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। इस मामले में पीड़ित की मां ज्ञान देवी (जगराम प्रजापति की पत्नी) ने थाना बिवांर में तीनों हमलावर युवकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने घायल अनिल कुमार को छानी सीएचसी ले जाकर उसका डॉक्टरी परीक्षण कराया और उपचार दिलवाया। थानाध्यक्ष नंदराम प्रजापति ने बताया कि घायल युवक की मां की तहरीर के आधार पर धारा 115(2), 352, 351(3) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब तीनों आरोपियों की तलाश कर रही है और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।1