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देखें कौन ग्राम पंचायत कमासिन खंड विकास मुख्यालय जहां संपूर्ण आस्था

2 hrs ago
user_राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

देखें कौन ग्राम पंचायत कमासिन खंड विकास मुख्यालय जहां संपूर्ण आस्था

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में गिरोह बनाकर चोरी, लूटपाट ,नकबजनी तथा हत्या का प्रयास आदि घटनायें कारित करने वाले गैंगस्टर एक्ट के 25 हजार के इनामिया वांछित अभियुक्त को थाना नरैनी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है । अभियुक्त गैंग बनाकर अपने अन्य साथियों के साथ, चोरी नकबजनी आदि की घटनाओं को अंजाम देता था जिसके सम्बन्ध में थाना नरैनी में गैंगस्टर एक्ट का अभियोग पंजीकृत किया गया था जिसमें अभियुक्त वांछित चल रहा था । पुलिस अधीक्षक बांदा द्वारा अभियुक्त की जल्द गिरफ्तारी हेतु 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था जिसे थाना नरैनी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर ग्राम प्रसिद्धपुर राजापुर पहाड़ी मार्ग चित्रकूट से गिरफ्तार किया गया । बता दे कि पूर्व में दिनांक 07.03.2026 को गैंग के एक अन्य सदस्य रवि पुत्र रामचन्द्र निवासी राजनगर थाना नरैनी जनपद बांदा को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है ।
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    पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में गिरोह बनाकर चोरी, लूटपाट ,नकबजनी तथा हत्या का प्रयास आदि घटनायें कारित करने वाले गैंगस्टर एक्ट के 25 हजार के इनामिया वांछित अभियुक्त को थाना नरैनी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है । अभियुक्त गैंग बनाकर अपने अन्य साथियों के साथ, चोरी नकबजनी आदि की घटनाओं को अंजाम देता था जिसके सम्बन्ध में थाना नरैनी में गैंगस्टर एक्ट का अभियोग पंजीकृत किया गया था जिसमें अभियुक्त वांछित चल रहा था । पुलिस अधीक्षक बांदा द्वारा अभियुक्त की जल्द गिरफ्तारी हेतु 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था जिसे थाना नरैनी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर ग्राम प्रसिद्धपुर राजापुर पहाड़ी मार्ग चित्रकूट से गिरफ्तार किया गया । बता दे कि पूर्व में दिनांक 07.03.2026 को गैंग के एक अन्य सदस्य रवि पुत्र रामचन्द्र निवासी राजनगर थाना नरैनी जनपद बांदा को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है ।
    user_JSB NEWS UP
    JSB NEWS UP
    पत्रकारिता बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
    1
    Post by राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
    user_राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
    राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
    बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बांदा के मटौंध थाना क्षेत्र में 16 अप्रैल को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस मामले में क्षेत्राधिकारी सदर राजवीर सिंह गौर ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
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    बांदा के मटौंध थाना क्षेत्र में 16 अप्रैल को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
इस मामले में क्षेत्राधिकारी सदर राजवीर सिंह गौर ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • *धोखाधड़ी करने वाले वांछित 02 अभियुक्त गिरफ्तार* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बाँदा।पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे। थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
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    *धोखाधड़ी करने वाले वांछित 02 अभियुक्त गिरफ्तार*
रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233
बाँदा।पुलिस अधीक्षक बांदा  पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे। थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बांदा न्यूज..... 🔥 बांदा में साइबर माफिया का भंडाफोड़! 9 शातिर गिरफ्तार, चोरी के मोबाइल बनते थे ठगी का हथियार बांदा पुलिस को मिली बड़ी सफलता… साइबर क्राइम थाना टीम ने एक संगठित अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है… यह गिरोह गांव-गांव घूमकर चोरी, खोए और खराब मोबाइल सस्ते में खरीदता था… फिर मदरबोर्ड बदलकर और IMEI छेड़छाड़ कर उन्हें दोबारा एक्टिव करता था… इन मोबाइल फोन को साइबर ठगों को सप्लाई किया जाता था… पुलिस ने मौके से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है… बरामदगी में 88 मोबाइल, 92 मदरबोर्ड, 66 बैटरी, फर्जी बिल, नकदी और 7 बाइक शामिल हैं… गिरोह के तार राजस्थान और हरियाणा तक जुड़े होने की बात सामने आई है… फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है… बाइट : शिवराज अपर पुलिस अधीक्षक बांदा #BandaPolice #CyberCrime #MobileFraud #CyberGangBusted #UPPolice #CrimeNews #BreakingNews #CyberAlert #IMEI #FraudNetwork
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    बांदा न्यूज.....
🔥 बांदा में साइबर माफिया का भंडाफोड़! 9 शातिर गिरफ्तार, चोरी के मोबाइल बनते थे ठगी का हथियार
बांदा पुलिस को मिली बड़ी सफलता…
साइबर क्राइम थाना टीम ने एक संगठित अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है…
यह गिरोह गांव-गांव घूमकर चोरी, खोए और खराब मोबाइल सस्ते में खरीदता था…
फिर मदरबोर्ड बदलकर और IMEI छेड़छाड़ कर उन्हें दोबारा एक्टिव करता था…
इन मोबाइल फोन को साइबर ठगों को सप्लाई किया जाता था…
पुलिस ने मौके से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है…
बरामदगी में 88 मोबाइल, 92 मदरबोर्ड, 66 बैटरी, फर्जी बिल, नकदी और 7 बाइक शामिल हैं…
गिरोह के तार राजस्थान और हरियाणा तक जुड़े होने की बात सामने आई है…
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है…
बाइट : शिवराज अपर पुलिस अधीक्षक बांदा
#BandaPolice #CyberCrime #MobileFraud #CyberGangBusted #UPPolice #CrimeNews #BreakingNews #CyberAlert #IMEI #FraudNetwork
    user_LK Tiwari Ram G
    LK Tiwari Ram G
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • #apkiawajdigital ​महिला पत्रकार से बदसलूकी और आरपीएफ की 'क्लीन चिट' पर भड़का आक्रोश; गंगा समग्र ने खोला मोर्चा ​बांदा। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और कानून की वर्दी पहनकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटा जाने लगे, तो समाज में न्याय की उम्मीद धुंधलाने लगती है। जनपद बांदा में आरपीएफ (RPF) कर्मियों द्वारा पत्रकारों और विशेषकर एक महिला पत्रकार के साथ की गई 'बर्बरता' ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। विभागीय जांच के नाम पर हुई 'खानापूर्ति' और दोषियों को दी गई 'क्लीन चिट' के विरोध में गंगा समग्र ने हुंकार भरते हुए महामहिम राष्ट्रपति के द्वार पर दस्तक दी है। ​घटना की भयावहता: सूचना मांगने पर मिली 'धमकियां और धक्का' ​22 मार्च की काली रात को आरपीएफ पोस्ट बांदा में जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। ​मर्यादा तार-तार: सूचना के अधिकार और कर्तव्य के तहत पहुंची महिला पत्रकार के साथ एएसआई संतोष कुमार ने न केवल अभद्रता की, बल्कि उनका मोबाइल छीनकर शारीरिक रूप से धक्का दिया गया। ​वर्दी का अहंकार: सरून राजभर और राजकुमार राजपूत जैसे कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों को अपनी जागीर समझते हुए बल प्रयोग किया और भद्दी गालियों का सहारा लिया। ​मुख्य मुद्दा: 'अंधा विभाग, गूंगा प्रशासन' ​सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि घटना के वीडियो साक्ष्य चिल्ला-चिल्लाकर सच्चाई बयां कर रहे हैं, लेकिन आरपीएफ के उच्चाधिकारियों को अपनी जांच में कुछ दिखाई नहीं दिया। दोषियों को पाक-साफ बताकर छोड़ देना यह सिद्ध करता है कि विभाग अपने भ्रष्ट और हिंसक कर्मियों को संरक्षण दे रहा है। ​न्याय की 'अंतिम' पुकार: ज्ञापन के प्रमुख अंश ​गंगा समग्र के जिला संयोजक महेश प्रजापति ने जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में सीधी चेतावनी दी है: ​दोषियों की बर्खास्तगी: एएसआई संतोष कुमार, सरून राजभर और सीसीआई राजकुमार राजपूत पर सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो। ​निष्पक्ष जांच का आदेश: स्थानीय रेल प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होकर किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए। ​पत्रकार सुरक्षा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर होने वाले इन हमलों को 'आतंक' की श्रेणी में रखकर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ​"क्या सच लिखना और पूछना अब अपराध है? एक महिला पत्रकार के साथ सरेआम बदसलूकी होती है और विभाग आंखें मूंद लेता है। यह लड़ाई अब केवल बांदा की नहीं, बल्कि देश के हर उस पत्रकार की है जो सच के लिए लड़ता है। हम चुप नहीं बैठेंगे!" — महेश प्रजापति, जिला संयोजक, गंगा समग्र ​निष्कर्ष: अब गेंद शासन के पाले में ​यह ज्ञापन केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए अल्टीमेटम है। यदि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों पर गाज नहीं गिरती, तो यह मान लिया जाएगा कि बांदा में कानून का नहीं, बल्कि 'वर्दी वाले गुंडों' का राज है। अब देखना होगा कि महामहिम के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में क्या मोड़ आता है।
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    #apkiawajdigital  
​महिला पत्रकार से बदसलूकी और आरपीएफ की 'क्लीन चिट' पर भड़का आक्रोश; गंगा समग्र ने खोला मोर्चा
​बांदा। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और कानून की वर्दी पहनकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटा जाने लगे, तो समाज में न्याय की उम्मीद धुंधलाने लगती है। जनपद बांदा में आरपीएफ (RPF) कर्मियों द्वारा पत्रकारों और विशेषकर एक महिला पत्रकार के साथ की गई 'बर्बरता' ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। विभागीय जांच के नाम पर हुई 'खानापूर्ति' और दोषियों को दी गई 'क्लीन चिट' के विरोध में गंगा समग्र ने हुंकार भरते हुए महामहिम राष्ट्रपति के द्वार पर दस्तक दी है।
​घटना की भयावहता: सूचना मांगने पर मिली 'धमकियां और धक्का'
​22 मार्च की काली रात को आरपीएफ पोस्ट बांदा में जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है।
​मर्यादा तार-तार: सूचना के अधिकार और कर्तव्य के तहत पहुंची महिला पत्रकार के साथ एएसआई संतोष कुमार ने न केवल अभद्रता की, बल्कि उनका मोबाइल छीनकर शारीरिक रूप से धक्का दिया गया।
​वर्दी का अहंकार: सरून राजभर और राजकुमार राजपूत जैसे कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों को अपनी जागीर समझते हुए बल प्रयोग किया और भद्दी गालियों का सहारा लिया।
​मुख्य मुद्दा: 'अंधा विभाग, गूंगा प्रशासन'
​सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि घटना के वीडियो साक्ष्य चिल्ला-चिल्लाकर सच्चाई बयां कर रहे हैं, लेकिन आरपीएफ के उच्चाधिकारियों को अपनी जांच में कुछ दिखाई नहीं दिया। दोषियों को पाक-साफ बताकर छोड़ देना यह सिद्ध करता है कि विभाग अपने भ्रष्ट और हिंसक कर्मियों को संरक्षण दे रहा है।
​न्याय की 'अंतिम' पुकार: ज्ञापन के प्रमुख अंश
​गंगा समग्र के जिला संयोजक महेश प्रजापति ने जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में सीधी चेतावनी दी है:
​दोषियों की बर्खास्तगी: एएसआई संतोष कुमार, सरून राजभर और सीसीआई राजकुमार राजपूत पर सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
​निष्पक्ष जांच का आदेश: स्थानीय रेल प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होकर किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए।
​पत्रकार सुरक्षा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर होने वाले इन हमलों को 'आतंक' की श्रेणी में रखकर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
​"क्या सच लिखना और पूछना अब अपराध है? एक महिला पत्रकार के साथ सरेआम बदसलूकी होती है और विभाग आंखें मूंद लेता है। यह लड़ाई अब केवल बांदा की नहीं, बल्कि देश के हर उस पत्रकार की है जो सच के लिए लड़ता है। हम चुप नहीं बैठेंगे!"
— महेश प्रजापति, जिला संयोजक, गंगा समग्र
​निष्कर्ष: अब गेंद शासन के पाले में
​यह ज्ञापन केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए अल्टीमेटम है। यदि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों पर गाज नहीं गिरती, तो यह मान लिया जाएगा कि बांदा में कानून का नहीं, बल्कि 'वर्दी वाले गुंडों' का राज है। अब देखना होगा कि महामहिम के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में क्या मोड़ आता है।
    user_ApkiAwajDigital
    ApkiAwajDigital
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • चिकित्सा सेवा या सामूहिक दबाव?—बाँदा मेडिकल कॉलेज की घटना पर सवाल बाँदा के मेडिकल कॉलेज में घटित हालिया घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक या कानूनी विवाद भर नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, जवाबदेही और नैतिकता पर गहरे प्रश्न खड़े करता है। एक ओर 5 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसकी चिकित्सा लापरवाही के कथित परिणामस्वरूप उसका पैर काटना पड़ा, और दूसरी ओर उसी आरोप के बाद चिकित्सकों का सामूहिक विरोध—इन दोनों के बीच फंसा है आम मरीज, जिसकी पीड़ा सबसे अधिक उपेक्षित रही।चिकित्सा, जिसे सेवा और संवेदना का पर्याय माना जाता है, जब विरोध और दबाव की भाषा में बदलने लगे तो यह चिंताजनक हो उठता है। डॉ विनीत सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने और तत्पश्चात उनकी बर्खास्तगी ने चिकित्सक समुदाय को आक्रोशित कर दिया। उनका यह आक्रोश समझा जा सकता है—क्योंकि हर पेशेवर को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। किंतु प्रश्न यह है कि क्या इस आक्रोश की अभिव्यक्ति का तरीका उचित था?मेडिकल कॉलेज के गेट बंद कर लगभग दो घंटे तक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना, मरीजों को इलाज से वंचित करना और उन्हें असहाय स्थिति में छोड़ देना—क्या यह चिकित्सा धर्म के अनुरूप है? क्या यह वही शपथ है, जो एक डॉक्टर अपने पेशे में प्रवेश करते समय लेता है? यदि न्याय की मांग के लिए मरीजों को कष्ट दिया जाए, तो यह न्याय की अवधारणा को ही संदिग्ध बना देता है।यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और निष्पक्षता हो। यदि बिना समुचित जांच के किसी चिकित्सक पर कठोर कार्रवाई होती है, तो यह भी व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। अतः यह आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष हो, बल्कि उसका स्वरूप ऐसा हो जिसमें सभी पक्षों को सुना जाए और न्याय होते हुए दिखे भी।इस पूरे घटनाक्रम ने दो महत्वपूर्ण पक्षों को उजागर किया है—एक, चिकित्सा सेवा की नैतिक जिम्मेदारी; और दूसरा, प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता। दोनों ही पक्षों में संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि अंततः स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्र बिंदु ‘मरीज’ ही है, न कि डॉक्टर या प्रशासन।समाज को यह अपेक्षा है कि डॉक्टर अपने पेशे की गरिमा बनाए रखें और प्रशासन न्याय के सिद्धांतों पर अडिग रहे। विरोध और प्रतिरोध लोकतांत्रिक अधिकार हैं, परंतु जब वे जनहित को बाधित करने लगें, तो आत्ममंथन आवश्यक हो जाता है।बाँदा की यह घटना केवल एक स्थान विशेष की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी है—कि सेवा और संवेदना की डोर कहीं कमजोर न पड़ जाए।
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    चिकित्सा सेवा या सामूहिक दबाव?—बाँदा मेडिकल कॉलेज की घटना पर सवाल बाँदा के मेडिकल कॉलेज में घटित हालिया घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक या कानूनी विवाद भर नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, जवाबदेही और नैतिकता पर गहरे प्रश्न खड़े करता है। एक ओर 5 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसकी चिकित्सा लापरवाही के कथित परिणामस्वरूप उसका पैर काटना पड़ा, और दूसरी ओर उसी आरोप के बाद चिकित्सकों का सामूहिक विरोध—इन दोनों के बीच फंसा है आम मरीज, जिसकी पीड़ा सबसे अधिक उपेक्षित रही।चिकित्सा, जिसे सेवा और संवेदना का पर्याय माना जाता है, जब विरोध और दबाव की भाषा में बदलने लगे तो यह चिंताजनक हो उठता है। डॉ विनीत सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने और तत्पश्चात उनकी बर्खास्तगी ने चिकित्सक समुदाय को आक्रोशित कर दिया। उनका यह आक्रोश समझा जा सकता है—क्योंकि हर पेशेवर को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। किंतु प्रश्न यह है कि क्या इस आक्रोश की अभिव्यक्ति का तरीका उचित था?मेडिकल कॉलेज के गेट बंद कर लगभग दो घंटे तक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना, मरीजों को इलाज से वंचित करना और उन्हें असहाय स्थिति में छोड़ देना—क्या यह चिकित्सा धर्म के अनुरूप है? क्या यह वही शपथ है, जो एक डॉक्टर अपने पेशे में प्रवेश करते समय लेता है? यदि न्याय की मांग के लिए मरीजों को कष्ट दिया जाए, तो यह न्याय की अवधारणा को ही संदिग्ध बना देता है।यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और निष्पक्षता हो। यदि बिना समुचित जांच के किसी चिकित्सक पर कठोर कार्रवाई होती है, तो यह भी व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। अतः यह आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष हो, बल्कि उसका स्वरूप ऐसा हो जिसमें सभी पक्षों को सुना जाए और न्याय होते हुए दिखे भी।इस पूरे घटनाक्रम ने दो महत्वपूर्ण पक्षों को उजागर किया है—एक, चिकित्सा सेवा की नैतिक जिम्मेदारी; और दूसरा, प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता। दोनों ही पक्षों में संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि अंततः स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्र बिंदु ‘मरीज’ ही है, न कि डॉक्टर या प्रशासन।समाज को यह अपेक्षा है कि डॉक्टर अपने पेशे की गरिमा बनाए रखें और प्रशासन न्याय के सिद्धांतों पर अडिग रहे। विरोध और प्रतिरोध लोकतांत्रिक अधिकार हैं, परंतु जब वे जनहित को बाधित करने लगें, तो आत्ममंथन आवश्यक हो जाता है।बाँदा की यह घटना केवल एक स्थान विशेष की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी है—कि सेवा और संवेदना की डोर कहीं कमजोर न पड़ जाए।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • पुलिस अधीक्षक बांदा श्री पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है । गौरतलब हो कि थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे । इसी क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर लिया गया ।
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    पुलिस अधीक्षक बांदा श्री पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है । गौरतलब हो कि थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे । इसी क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर लिया गया ।
    user_JSB NEWS UP
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    पत्रकारिता बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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