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बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली! ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की। मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है। लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके। यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है? एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है। ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है? जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है। दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी। निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है। ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है। उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है। अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है। अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या? जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते। जांच के घेरे में ये सवाल— वायरल वीडियो आखिर कहां का है? वीडियो कब बनाया गया था? उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं? क्या दवाएं एक्सपायरी थीं? यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया? वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है? यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है? स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है? स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है? वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं— पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है? दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं? अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा। अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली! ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की। मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है। लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके। यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है? एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है। ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है? जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है। दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी। निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है। ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है। उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है। अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है। अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या? जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते। जांच के घेरे में ये सवाल— वायरल वीडियो आखिर कहां का है? वीडियो कब बनाया गया था? उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं? क्या दवाएं एक्सपायरी थीं? यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया? वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है? यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है? स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है? स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है? वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं— पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है? दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं? अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा। अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी

10 hrs ago
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भितरवार, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
10 hrs ago

बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली! ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की। मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है। लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके। यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है? एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है। ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है? जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है। दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी। निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है। ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है। उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है। अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है। अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या? जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते। जांच के घेरे में ये सवाल— वायरल वीडियो आखिर कहां का है? वीडियो कब बनाया गया था? उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं? क्या दवाएं एक्सपायरी थीं? यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया? वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है? यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है? स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है? स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है? वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं— पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है? दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं? अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा। अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली! ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की। मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है। लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके। यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है? एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है। ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है? जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है। दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी। निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है। ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है। उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है। अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है। अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या? जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते। जांच के घेरे में ये सवाल— वायरल वीडियो आखिर कहां का है? वीडियो कब बनाया गया था? उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं? क्या दवाएं एक्सपायरी थीं? यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया? वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है? यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है? स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है? स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है? वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं— पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है? दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं? अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा। अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी

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  • बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली! ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की। मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है। लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके। यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है? एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है। ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है? जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है। दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी। निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है। ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है। उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है। अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है। अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या? जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते। जांच के घेरे में ये सवाल— वायरल वीडियो आखिर कहां का है? वीडियो कब बनाया गया था? उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं? क्या दवाएं एक्सपायरी थीं? यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया? वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है? यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है? स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है? स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है? वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं— पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है? दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं? अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा। अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली! ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की। मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है। लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके। यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है? एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है। ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है? जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है। दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी। निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है। ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है। उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है। अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है। अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या? जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते। जांच के घेरे में ये सवाल— वायरल वीडियो आखिर कहां का है? वीडियो कब बनाया गया था? उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं? क्या दवाएं एक्सपायरी थीं? यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया? वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है? यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है? स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है? स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है? वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं— पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है? दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं? अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा। अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी
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    बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली!

 ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस
ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर
ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की।
मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है।
लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके।
यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है?
एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है।
उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है।
ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है?
जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल
वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।
निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है।
दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल
जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी।
निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है।
ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है।
उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी
बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है।
वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है।
अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है।
अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या?
जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते।
जांच के घेरे में ये सवाल—
वायरल वीडियो आखिर कहां का है?
वीडियो कब बनाया गया था?
उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं?
क्या दवाएं एक्सपायरी थीं?
यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया?
वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है?
यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है?
स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है?
स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है?
वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का
बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं—
पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है?
दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं?
अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा।
 अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी
बंधोली में सरकारी दवाएं जलाने का वायरल वीडियो: मौके पर राख तक नहीं मिली!
ग्वालियर मुरार वीडियो करीब एक साल पुराना होने का दावा, स्वास्थ्य विभाग की जांच में दवा या मेडिकल वेस्ट जलाने का प्रमाण नहीं; कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस
ग्वालियर अपडेट संवाददाता | ग्वालियर
ग्वालियर। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाओं की खरीद पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। एक्सपायरी या अनुपयोगी दवाओं के निस्तारण के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया है। ऐसे में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र से जोड़कर सरकारी दवाएं जलाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो में कथित तौर पर दवाओं को आग के हवाले करते हुए दिखाया गया है। मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद विभागीय टीम ने बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के संभावित स्थानों पर पहुंचकर जांच की।
मौके पर दवा नहीं, मेडिकल वेस्ट नहीं और राख भी नहीं मिली
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर के अलावा आसपास के खेतों और अन्य संभावित स्थानों को भी देखा। ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई कि क्या हाल के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र के आसपास एक्सपायरी दवाएं या मेडिकल वेस्ट जलाया गया है।
लेकिन जांच के दौरान जली हुई दवाओं, मेडिकल वेस्ट या राख का कोई ऐसा अवशेष नहीं मिला, जिससे वायरल वीडियो में दिखाई जा रही घटना की वर्तमान समय में पुष्टि हो सके।
यहीं से पूरा मामला और गंभीर सवाल खड़ा करता है—अगर मौके पर कोई अवशेष नहीं मिला तो वीडियो कब का है और वास्तव में कहां का है?
एक साल पुराना बताया जा रहा वीडियो
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है। बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र की सीएचओ साधना कुशवाहा ने भी वीडियो को पुराना बताया है।
उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना का वर्तमान समय से संबंध नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वास्तव में बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र का ही है।
ऐसे में अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि वीडियो की वास्तविक लोकेशन और तारीख क्या है?
जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल
वायरल वीडियो के बीच जनपद पंचायत मुरार अध्यक्ष दिलराज किरार ने हस्तिनापुर स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।
निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्टाफ मौजूद मिला, जबकि श्रीनिवास नामक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। सीबीएमओ डॉ. सुनील पाराशर ने अनुपस्थित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
सीबीएमओ के अनुसार उन्होंने स्वयं जनपद अध्यक्ष के साथ स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। मामले की जानकारी सीएमएचओ डॉ. एम.एस. सागर के संज्ञान में भी है।
दवा जलाने का प्रमाण नहीं, लेकिन गंदगी ने जरूर खड़े किए सवाल
जांच में भले ही सरकारी दवाओं को जलाने का कोई ताजा प्रमाण नहीं मिला, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर की सफाई व्यवस्था ने जरूर चिंता बढ़ा दी।
निरीक्षण के दौरान परिसर में जगह-जगह गोबर और गंदगी दिखाई दी। खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र के आसपास शासकीय विद्यालय और नल-जल योजना से जुड़ा कुआं भी मौजूद है।
ऐसे सार्वजनिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थान के आसपास सफाई व्यवस्था का संतोषजनक नहीं होना अपने आप में गंभीर सवाल है।
उपसरपंच का आरोप—गांव में नियमित नहीं आता सफाई कर्मचारी
बंधोली के उपसरपंच ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित रूप से सफाई कर्मचारी नहीं आते। उनका कहना है कि स्कूल, सार्वजनिक स्थानों और गांव के कई हिस्सों में लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित है।
वहीं सीएचओ साधना कुशवाहा के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ नियमित रूप से ड्यूटी पर आता है, लेकिन नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं होने से सफाई प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें स्वयं स्वास्थ्य केंद्र की सफाई करनी पड़ती है।
अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी की व्यवस्था नहीं है, तो यह भी स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग जांच का विषय बन सकता है।
अब वायरल वीडियो की असली कहानी क्या?
जांच में मौके से जली हुई दवाएं या मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने के बाद फिलहाल वायरल वीडियो को वर्तमान घटना मानने का आधार सामने नहीं आया है। लेकिन इससे वीडियो से जुड़े मूल सवाल खत्म नहीं होते।
जांच के घेरे में ये सवाल—
वायरल वीडियो आखिर कहां का है?
वीडियो कब बनाया गया था?
उसमें दिखाई दे रही दवाएं किस सरकारी स्वास्थ्य संस्था की थीं?
क्या दवाएं एक्सपायरी थीं?
यदि एक्सपायरी थीं तो उनका निस्तारण किस निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया?
वीडियो करीब एक साल पुराना है तो अब इसे वायरल करने की वजह क्या है?
यदि वीडियो बंधोली का नहीं है तो इसकी वास्तविक लोकेशन क्या है?
स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई कर्मचारी क्यों नहीं है?
स्वास्थ्य संस्थाओं में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की नियमित निगरानी कौन करता है?
वीडियो से बड़ा सवाल अब उसकी सच्चाई का
बंधोली उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जली हुई सरकारी दवाएं, मेडिकल वेस्ट या राख नहीं मिली। इसलिए वायरल वीडियो को वर्तमान घटना बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
लेकिन मामला सरकारी दवाओं के निस्तारण से जुड़ा होने के कारण वीडियो की तारीख, लोकेशन, उसमें दिखाई दे रही दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य संस्था की पहचान की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
फिलहाल बंधोली में दवा जलाने का ताजा प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो ने दो बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं—
पहला—वीडियो की असली सच्चाई क्या है?
दूसरा—स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं आखिर इतनी बदहाल क्यों हैं?
अब इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और वीडियो की वास्तविकता सामने आने के बाद ही साफ होगा।
अगली खबर अगले अंक में आपको पढ़ने को मिलेगी
    user_मीडिया लाइन
    मीडिया लाइन
    भितरवार, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • 🚨 गाइज देखो! हमारी VIP रोड बनकर तैयार 😂😂 गाइज देखो 😎🔥 आखिरकार हमारी रोड का VIP वाला काम शुरू हो गया है! 😂 बस थोड़ी सी मिट्टी डली है और रोड का रुतबा देखो… पूरा VIP! 🤣 अब इस रोड पर चलना भी आम आदमी के बस की बात नहीं है! 😂🚧 आपके यहाँ भी ऐसी VIP रोड बनी है क्या? 😂👇 कमेंट में बताओ! #FunnyVideo #Comedy #VIPRoad #DesiComedy #FunnyReels . yah comedy video hai kripya Dil per na len
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    🚨 गाइज देखो! हमारी VIP रोड बनकर तैयार 😂😂
गाइज देखो 😎🔥 आखिरकार हमारी रोड का VIP वाला काम शुरू हो गया है! 😂
बस थोड़ी सी मिट्टी डली है और रोड का रुतबा देखो… पूरा VIP! 🤣
अब इस रोड पर चलना भी आम आदमी के बस की बात नहीं है! 😂🚧
आपके यहाँ भी ऐसी VIP रोड बनी है क्या? 😂👇
कमेंट में बताओ!
#FunnyVideo #Comedy #VIPRoad #DesiComedy #FunnyReels
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yah comedy video hai kripya Dil per na len
    user_Rohan Gaur
    Rohan Gaur
    Video Creator गिर्द, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भौंती थाना परिसर में पीएम श्री विद्यालय भौंती के छात्र-छात्राओं ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस। 🇮🇳 इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया। 🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 | जय भारत 🇮🇳 भौंती थाना परिसर में पीएम श्री विद्यालय भौंती के छात्र-छात्राओं ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस। 🇮🇳 इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया। 🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 | जय भारत 🇮🇳
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    भौंती थाना परिसर में पीएम श्री विद्यालय भौंती के छात्र-छात्राओं ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस। 🇮🇳

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया। 🇮🇳

जय हिन्द 🇮🇳 | जय भारत 🇮🇳


भौंती थाना परिसर में पीएम श्री विद्यालय भौंती के छात्र-छात्राओं ने मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस। 🇮🇳
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया। 🇮🇳
जय हिन्द 🇮🇳 | जय भारत 🇮🇳
    user_Ram Manohar Mishra
    Ram Manohar Mishra
    करेरा, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • राज कुशवाहा की मौत के विरोध में NH-44 पर चक्काजाम, कैबिनेट मंत्री ने समझाकर खुलवाया जाम राज कुशवाहा की मौत के विरोध में NH-44 पर चक्काजाम, कैबिनेट मंत्री ने समझाकर खुलवाया जाम दतिया। लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र राज कुशवाहा (16) की करंट लगने से हुई मौत के मामले में शनिवार को परिजनों और समर्थकों ने NH-44 पर चक्काजाम कर दिया। जिला मुख्यालय के सामने हुए चक्काजाम के कारण हाईवे के दोनों ओर करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। करीब 40 मिनट तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। चक्काजाम की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, दतिया पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनजीत सिंह चावला मौके पर पहुंचे। मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने आक्रोशित परिजनों और प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उन्हें मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। समझाइश के बाद परिजनों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और हाईवे पर यातायात बहाल हो सका। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनजीत सिंह चावला ने बताया कि मामले में पुलिस की कार्रवाई चल रही है। मृतक छात्र का पोस्टमार्टम कराया जा चुका था, लेकिन इसके बाद अचानक पीड़ित परिवार शव को हाईवे पर लेकर आ गया और चक्काजाम कर दिया। गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के दौरान लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में छात्र राज कुशवाहा की 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। जिला मुख्यालय के सामने NH-44 जैसे महत्वपूर्ण हाईवे पर अचानक हुए चक्काजाम से करीब 5 किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने से प्रशासन की व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति सामान्य कर ली गई। बाइट _नारायण सिंह कुशवाहा मंत्री
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    राज कुशवाहा की मौत के विरोध में NH-44 पर चक्काजाम, कैबिनेट मंत्री ने समझाकर खुलवाया जाम

राज कुशवाहा की मौत के विरोध में NH-44 पर चक्काजाम, कैबिनेट मंत्री ने समझाकर खुलवाया जाम
दतिया। लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र राज कुशवाहा (16) की करंट लगने से हुई मौत के मामले में शनिवार को परिजनों और समर्थकों ने NH-44 पर चक्काजाम कर दिया। जिला मुख्यालय के सामने हुए चक्काजाम के कारण हाईवे के दोनों ओर करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। करीब 40 मिनट तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।
चक्काजाम की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, दतिया पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनजीत सिंह चावला मौके पर पहुंचे।
मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने आक्रोशित परिजनों और प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उन्हें मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। समझाइश के बाद परिजनों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और हाईवे पर यातायात बहाल हो सका।
वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनजीत सिंह चावला ने बताया कि मामले में पुलिस की कार्रवाई चल रही है। मृतक छात्र का पोस्टमार्टम कराया जा चुका था, लेकिन इसके बाद अचानक पीड़ित परिवार शव को हाईवे पर लेकर आ गया और चक्काजाम कर दिया।
गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के दौरान लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में छात्र राज कुशवाहा की 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
जिला मुख्यालय के सामने NH-44 जैसे महत्वपूर्ण हाईवे पर अचानक हुए चक्काजाम से करीब 5 किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने से प्रशासन की व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति सामान्य कर ली गई।
बाइट _नारायण सिंह कुशवाहा मंत्री
    user_RAVIDEEP LITORIYA
    RAVIDEEP LITORIYA
    दतिया नगर, दतिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • दतिया में आन-बान-शान से लहराया तिरंगा, मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने किया ध्वजारोहण दतिया। जिले में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, धूमधाम और गरिमामय माहौल में मनाया गया। पुलिस लाइन ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह में उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण एवं सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वतंत्रता दिवस संदेश का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे समारोह में मौजूद लोगों ने सुना और देखा। मुख्य अतिथि मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के साथ परेड का निरीक्षण किया। परेड में शामिल जवानों ने तीन बार हर्ष फायर कर स्वतंत्रता दिवस के उत्साह को और बढ़ाया। समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देशभक्ति और लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिली। इस दौरान मंत्री ने जिलेवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए दतिया के विकास और जनकल्याण के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।
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    दतिया में आन-बान-शान से लहराया तिरंगा, मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने किया ध्वजारोहण
दतिया। जिले में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, धूमधाम और गरिमामय माहौल में मनाया गया। पुलिस लाइन ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह में उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण एवं सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।
ध्वजारोहण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वतंत्रता दिवस संदेश का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे समारोह में मौजूद लोगों ने सुना और देखा।
मुख्य अतिथि मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के साथ परेड का निरीक्षण किया। परेड में शामिल जवानों ने तीन बार हर्ष फायर कर स्वतंत्रता दिवस के उत्साह को और बढ़ाया।
समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देशभक्ति और लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिली। इस दौरान मंत्री ने जिलेवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए दतिया के विकास और जनकल्याण के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।
    user_Vikas Sen
    Vikas Sen
    Photographer दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जल संसाधन विभाग अनु०विभागीय कार्यलय बना जुआरी,शराबी,नशे व आवारा तत्वों का मुख्यलय जिम्मेदार रहते हैं नदारद , *रिपोर्टर हेमंत भार्गव* **जल संसाधन विभाग का कार्यालय बना उपेक्षा का शिकार! **कभी अधिकारियों की मौजूदगी से गुलजार रहने वाला परिसर आज आवारा तत्वों का ठिकाना बनने के आरोपों से घिरा—साल में दो बार ही साफ-सफाई और व्यवस्थाओं की सुध लेने का दावा करैरा। नगर के बीचों-बीच स्थित जल संसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय की मौजूदा स्थिति जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कभी अधिकारियों की सक्रियता और विभागीय गतिविधियों का केंद्र रहा यह कार्यालय अब लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहा है। आलम यह है कि कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में गंदगी, अव्यवस्था तथा असामाजिक तत्वों की कथित आवाजाही आम बात बन गई है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक कार्यालय कभी-कभार ही खुला दिखाई देता है। उनका आरोप है कि वर्ष में महज दो अवसरों पर ही कार्यालय एवं उसके आसपास साफ-सफाई, प्रकाश और पानी जैसी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कवायद दिखाई देती है, जबकि शेष दिनों में परिसर की स्थिति बदहाल बनी रहती है। कहीं जुआ, कहीं नशे का आरोप, तो कहीं खुले में गंदगी स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय परिसर के आसपास कथित तौर पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां लोगों को जुआ खेलते, नशे का सेवन करते और खुले में पेशाब करते हुए देखे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यही नहीं, परिसर के आसपास गंदगी पसरी रहने से वातावरण भी दूषित बना हुआ है। नागरिकों का कहना है कि जिस स्थान पर कभी जल संसाधन विभाग के अधिकारी बैठकर विभागीय कार्यों की निगरानी किया करते थे, वही परिसर अब विभागीय उपेक्षा के चलते अपनी पुरानी गरिमा खोता नजर आ रहा है। अधिकारियों के क्वार्टरों के सामने गैर-विभागीय गतिविधियों के भी आरोप मामला केवल कार्यालय परिसर की बदहाली तक सीमित नहीं बताया जा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों के लिए बनाए गए क्वार्टरों के आसपास भी अव्यवस्था का आलम है। आरोप है कि कुछ क्वार्टरों में शिक्षा विभाग के शिक्षक निवास कर रहे हैं, जबकि कुछ आवासों में राजस्व विभाग के कर्मचारी भी रह रहे हैं। वहीं, क्वार्टरों के आसपास मिस्त्रियों द्वारा बड़े वाहनों की मरम्मत का कार्य किए जाने की बात भी सामने आ रही है। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस भवन और परिसर का निर्माण जल संसाधन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए किया गया था, वहां वर्तमान में किन लोगों को रहने और अन्य गतिविधियां संचालित करने की अनुमति है? कभी दो मुख्य द्वार और स्वच्छ वातावरण, अब बदहाली का आलम स्थानीय लोगों की मानें तो कुछ समय पहले तक कार्यालय की बाउंड्री व्यवस्थित थी और दो मुख्य द्वारों के साथ परिसर साफ-सुथरा एवं सुव्यवस्थित नजर आता था। लेकिन समय के साथ रखरखाव के अभाव में व्यवस्था बिखरती चली गई। आज कार्यालय के आसपास गंदगी, अव्यवस्थित वातावरण और कथित असामाजिक गतिविधियों के चलते यहां आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर के बीचों-बीच कार्यालय, फिर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कार्यालय नगर के बीचों-बीच स्थित है। यहां से आए दिन जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों का आवागमन होता रहता है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से बताई जा रही समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी समय-समय पर कार्यालय का निरीक्षण करें, परिसर की साफ-सफाई कराएं, प्रकाश एवं पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगाएं, तो कार्यालय की पुरानी गरिमा वापस लौट सकती है। अब देखना यह है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस बदहाल परिसर की सुध कब लेते हैं और वर्षों से उपेक्षित नजर आ रहे कार्यालय को फिर से विभागीय गतिविधियों का केंद्र कब बनाया जाता है।
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    जल संसाधन विभाग अनु०विभागीय कार्यलय बना जुआरी,शराबी,नशे व आवारा तत्वों का मुख्यलय जिम्मेदार रहते हैं नदारद ,

*रिपोर्टर हेमंत भार्गव* 
**जल संसाधन विभाग का कार्यालय बना उपेक्षा का शिकार!
**कभी अधिकारियों की मौजूदगी से गुलजार रहने वाला परिसर आज आवारा तत्वों का ठिकाना बनने के आरोपों से घिरा—साल में दो बार ही साफ-सफाई और व्यवस्थाओं की सुध लेने का दावा
करैरा। नगर के बीचों-बीच स्थित जल संसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय की मौजूदा स्थिति जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कभी अधिकारियों की सक्रियता और विभागीय गतिविधियों का केंद्र रहा यह कार्यालय अब लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहा है। आलम यह है कि कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में गंदगी, अव्यवस्था तथा असामाजिक तत्वों की कथित आवाजाही आम बात बन गई है।
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक कार्यालय कभी-कभार ही खुला दिखाई देता है। उनका आरोप है कि वर्ष में महज दो अवसरों पर ही कार्यालय एवं उसके आसपास साफ-सफाई, प्रकाश और पानी जैसी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कवायद दिखाई देती है, जबकि शेष दिनों में परिसर की स्थिति बदहाल बनी रहती है।
कहीं जुआ, कहीं नशे का आरोप, तो कहीं खुले में गंदगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय परिसर के आसपास कथित तौर पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां लोगों को जुआ खेलते, नशे का सेवन करते और खुले में पेशाब करते हुए देखे जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यही नहीं, परिसर के आसपास गंदगी पसरी रहने से वातावरण भी दूषित बना हुआ है।
नागरिकों का कहना है कि जिस स्थान पर कभी जल संसाधन विभाग के अधिकारी बैठकर विभागीय कार्यों की निगरानी किया करते थे, वही परिसर अब विभागीय उपेक्षा के चलते अपनी पुरानी गरिमा खोता नजर आ रहा है।
अधिकारियों के क्वार्टरों के सामने गैर-विभागीय गतिविधियों के भी आरोप
मामला केवल कार्यालय परिसर की बदहाली तक सीमित नहीं बताया जा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों के लिए बनाए गए क्वार्टरों के आसपास भी अव्यवस्था का आलम है। आरोप है कि कुछ क्वार्टरों में शिक्षा विभाग के शिक्षक निवास कर रहे हैं, जबकि कुछ आवासों में राजस्व विभाग के कर्मचारी भी रह रहे हैं।
वहीं, क्वार्टरों के आसपास मिस्त्रियों द्वारा बड़े वाहनों की मरम्मत का कार्य किए जाने की बात भी सामने आ रही है। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस भवन और परिसर का निर्माण जल संसाधन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए किया गया था, वहां वर्तमान में किन लोगों को रहने और अन्य गतिविधियां संचालित करने की अनुमति है?
कभी दो मुख्य द्वार और स्वच्छ वातावरण, अब बदहाली का आलम
स्थानीय लोगों की मानें तो कुछ समय पहले तक कार्यालय की बाउंड्री व्यवस्थित थी और दो मुख्य द्वारों के साथ परिसर साफ-सुथरा एवं सुव्यवस्थित नजर आता था। लेकिन समय के साथ रखरखाव के अभाव में व्यवस्था बिखरती चली गई।
आज कार्यालय के आसपास गंदगी, अव्यवस्थित वातावरण और कथित असामाजिक गतिविधियों के चलते यहां आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नगर के बीचों-बीच कार्यालय, फिर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कार्यालय नगर के बीचों-बीच स्थित है। यहां से आए दिन जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों का आवागमन होता रहता है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से बताई जा रही समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी समय-समय पर कार्यालय का निरीक्षण करें, परिसर की साफ-सफाई कराएं, प्रकाश एवं पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगाएं, तो कार्यालय की पुरानी गरिमा वापस लौट सकती है।
अब देखना यह है कि जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस बदहाल परिसर की सुध कब लेते हैं और वर्षों से उपेक्षित नजर आ रहे कार्यालय को फिर से विभागीय गतिविधियों का केंद्र कब बनाया जाता है।
    user_Hemant Kumar bhargav
    Hemant Kumar bhargav
    Karera, Shivpuri•
    5 hrs ago
  • स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनपद अध्यक्ष प्रवेश मेहताब सिंह गुर्जर और एसडीएम जूही गर्ग ने किया डबरा के स्टेडियम ग्राउंड में ध्वजारोहण डबरा ( ग्वालियर)मध्य प्रदेश स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनपद अध्यक्ष प्रवेश मेहताब सिंह गुर्जर और एसडीएम जूही गर्ग ने किया डबरा के स्टेडियम ग्राउंड में ध्वजारोहण, इस अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व मंत्री इमरती देवी , डबरा एसडीओपी सौरभ कुमार ,नगर पालिका सीएमओ साक्षी वाजपेई, रहे मौजूद , जनपद अध्यक्ष और एसडीम ने ली परेड की सलामी , स्टेडियम ग्राउंड में किया गया स्कूल के छात्रों द्वारा मनमोहक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन ।
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    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनपद अध्यक्ष प्रवेश मेहताब सिंह गुर्जर और एसडीएम जूही गर्ग ने किया डबरा के स्टेडियम ग्राउंड में ध्वजारोहण
डबरा ( ग्वालियर)मध्य प्रदेश 
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनपद अध्यक्ष प्रवेश मेहताब सिंह गुर्जर और एसडीएम जूही गर्ग ने किया डबरा के स्टेडियम ग्राउंड में ध्वजारोहण, इस अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व मंत्री इमरती देवी , डबरा एसडीओपी सौरभ कुमार ,नगर पालिका सीएमओ साक्षी वाजपेई, रहे मौजूद , जनपद अध्यक्ष और एसडीम ने ली परेड की सलामी , स्टेडियम ग्राउंड में किया गया स्कूल के छात्रों द्वारा मनमोहक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन ।
    user_Rajesh kumar soni
    Rajesh kumar soni
    Local News Reporter पिछोर (डबरा), ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • 🇮🇳 ग्वालियर अपडेट हिंदी समाचार पत्र 🇮🇳 🌹 सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा, हम बुलबुले हैं इसकी, ये गुलसितां हमारा। 🌹 देश की आन, बान और शान का पर्व 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 🇮🇳 आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लें। जय हिंद! 🇮🇳 वंदे मातरम्! 🇮🇳 शुभकामनाएं डॉ. श्री सुनील पाराशर सीबीएमओ एवं स्वास्थ्य अधिकारी, ग्रामीण मुरार
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    🇮🇳 ग्वालियर अपडेट हिंदी समाचार पत्र 🇮🇳
🌹 सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा,
हम बुलबुले हैं इसकी, ये गुलसितां हमारा। 🌹
देश की आन, बान और शान का पर्व 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 🇮🇳
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लें।
जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्! 🇮🇳
शुभकामनाएं
डॉ. श्री सुनील पाराशर
सीबीएमओ एवं स्वास्थ्य अधिकारी, ग्रामीण मुरार
    user_मीडिया लाइन
    मीडिया लाइन
    भितरवार, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
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