रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। चिंताजनक: रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व पातालकोट (छिंदवाड़ा)। अपनी अनूठी संस्कृति, जड़ी-बूटियों के खजाने और गहरी घाटियों के लिए दुनिया भर में मशहूर पातालकोट अंचल के मूल निवासी आज एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। अंचल के विभिन्न ढानों में रहने वाले आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। हर साल बड़ी संख्या में यहाँ के परिवार अपनी जड़ों को छोड़कर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों और बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पातालकोट की पारंपरिक संस्कृति और जनसांख्यिकी पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर काम का अभाव बनी मुख्य वजह पातालकोट के ग्रामीणों का कहना है कि कृषि और वनोपज (Forest Produce) पर निर्भरता अब उनके जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। मानसून के बाद अंचल में कृषि कार्य लगभग ठप हो जाता है। मनरेगा (MGNREGA) जैसी सरकारी योजनाओं के तहत भी नियमित और पर्याप्त काम न मिलने के कारण युवाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का पेट पालने के लिए उनके पास पलायन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। होम स्टे और पर्यटन जैसी पहलों से जगी उम्मीदें, लेकिन बड़े स्तर पर प्रयास जरूरी प्रशासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई 'होम स्टे' (Home Stay) जैसी योजनाएं ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय रोजगार पैदा करने की दिशा में एक अच्छी पहल मानी जा रही हैं। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि इन पहलों का लाभ सीमित परिवारों तक ही पहुँच पाता है। पातालकोट से पलायन की इस बड़ी समस्या को पूरी तरह रोकने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय कुटीर उद्योगों, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण केंद्रों (Herb Processing Units) और साल भर चलने वाले रोजगार मूलक कार्यों की सख्त आवश्यकता है। संस्कृति और अस्तित्व पर संकट सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों का कहना है कि भारिया और आदिवासी समाज का इस तरह सामूहिक पलायन करना बेहद चिंताजनक है। यदि युवा पीढ़ी रोजगार के लिए लगातार बाहर जाती रही, तो पातालकोट की वह पारंपरिक जीवनशैली और अनूठा ज्ञान (विशेषकर पारंपरिक चिकित्सा और जड़ी-बूटी का ज्ञान) धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगा, जिसके लिए यह क्षेत्र जाना जाता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ठोस और दीर्घकालिक रोजगार नीतियां बनाने की जरूरत है, ताकि पातालकोट के बेटे-बेटियों को अपने ही घर में सम्मानजनक आजीविका मिल सके।
रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। चिंताजनक: रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व पातालकोट (छिंदवाड़ा)। अपनी अनूठी संस्कृति, जड़ी-बूटियों के खजाने और गहरी घाटियों के लिए दुनिया भर में मशहूर पातालकोट अंचल के मूल निवासी आज एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। अंचल के विभिन्न ढानों में रहने वाले आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण
लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। हर साल बड़ी संख्या में यहाँ के परिवार अपनी जड़ों को छोड़कर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों और बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पातालकोट की पारंपरिक संस्कृति और जनसांख्यिकी पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर काम का अभाव बनी मुख्य वजह पातालकोट के ग्रामीणों का कहना है कि कृषि और वनोपज (Forest Produce) पर निर्भरता अब उनके जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। मानसून के बाद अंचल में कृषि कार्य लगभग ठप हो जाता है। मनरेगा (MGNREGA) जैसी सरकारी योजनाओं के तहत भी नियमित और पर्याप्त काम न मिलने के कारण युवाओं के सामने
आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का पेट पालने के लिए उनके पास पलायन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। होम स्टे और पर्यटन जैसी पहलों से जगी उम्मीदें, लेकिन बड़े स्तर पर प्रयास जरूरी प्रशासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई 'होम स्टे' (Home Stay) जैसी योजनाएं ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय रोजगार पैदा करने की दिशा में एक अच्छी पहल मानी जा रही हैं। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि इन पहलों का लाभ सीमित परिवारों तक ही पहुँच पाता है। पातालकोट से पलायन की इस बड़ी समस्या को पूरी तरह रोकने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय कुटीर उद्योगों, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण
केंद्रों (Herb Processing Units) और साल भर चलने वाले रोजगार मूलक कार्यों की सख्त आवश्यकता है। संस्कृति और अस्तित्व पर संकट सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों का कहना है कि भारिया और आदिवासी समाज का इस तरह सामूहिक पलायन करना बेहद चिंताजनक है। यदि युवा पीढ़ी रोजगार के लिए लगातार बाहर जाती रही, तो पातालकोट की वह पारंपरिक जीवनशैली और अनूठा ज्ञान (विशेषकर पारंपरिक चिकित्सा और जड़ी-बूटी का ज्ञान) धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगा, जिसके लिए यह क्षेत्र जाना जाता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ठोस और दीर्घकालिक रोजगार नीतियां बनाने की जरूरत है, ताकि पातालकोट के बेटे-बेटियों को अपने ही घर में सम्मानजनक आजीविका मिल सके।
- रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। चिंताजनक: रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व पातालकोट (छिंदवाड़ा)। अपनी अनूठी संस्कृति, जड़ी-बूटियों के खजाने और गहरी घाटियों के लिए दुनिया भर में मशहूर पातालकोट अंचल के मूल निवासी आज एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। अंचल के विभिन्न ढानों में रहने वाले आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। हर साल बड़ी संख्या में यहाँ के परिवार अपनी जड़ों को छोड़कर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों और बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पातालकोट की पारंपरिक संस्कृति और जनसांख्यिकी पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर काम का अभाव बनी मुख्य वजह पातालकोट के ग्रामीणों का कहना है कि कृषि और वनोपज (Forest Produce) पर निर्भरता अब उनके जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। मानसून के बाद अंचल में कृषि कार्य लगभग ठप हो जाता है। मनरेगा (MGNREGA) जैसी सरकारी योजनाओं के तहत भी नियमित और पर्याप्त काम न मिलने के कारण युवाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का पेट पालने के लिए उनके पास पलायन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। होम स्टे और पर्यटन जैसी पहलों से जगी उम्मीदें, लेकिन बड़े स्तर पर प्रयास जरूरी प्रशासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई 'होम स्टे' (Home Stay) जैसी योजनाएं ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय रोजगार पैदा करने की दिशा में एक अच्छी पहल मानी जा रही हैं। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि इन पहलों का लाभ सीमित परिवारों तक ही पहुँच पाता है। पातालकोट से पलायन की इस बड़ी समस्या को पूरी तरह रोकने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय कुटीर उद्योगों, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण केंद्रों (Herb Processing Units) और साल भर चलने वाले रोजगार मूलक कार्यों की सख्त आवश्यकता है। संस्कृति और अस्तित्व पर संकट सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों का कहना है कि भारिया और आदिवासी समाज का इस तरह सामूहिक पलायन करना बेहद चिंताजनक है। यदि युवा पीढ़ी रोजगार के लिए लगातार बाहर जाती रही, तो पातालकोट की वह पारंपरिक जीवनशैली और अनूठा ज्ञान (विशेषकर पारंपरिक चिकित्सा और जड़ी-बूटी का ज्ञान) धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगा, जिसके लिए यह क्षेत्र जाना जाता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ठोस और दीर्घकालिक रोजगार नीतियां बनाने की जरूरत है, ताकि पातालकोट के बेटे-बेटियों को अपने ही घर में सम्मानजनक आजीविका मिल सके।4
- सेवा, संस्कृति और समरसता का संगम: सिंगोड़ी में कलश यात्रा का भव्य स्वागत, बड़नगर से वाराणसी तक निकली है सेवा संकल्प यात्रा सिंगोड़ी:- सेवा, संस्कृति और सामाजिक समरसता के पुनीत उद्देश्य को लेकर गुजरात के बड़नगर से वाराणसी तक निकाली जा रही ऐतिहासिक सेवा संकल्प यात्रा के अंतर्गत कलश यात्रा का शनिवार को सिंगोड़ी बस स्टैंड पर भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया।यात्रा के सिंगोड़ी पहुंचते ही पूरा बस स्टैंड "भारत माता की जय" जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। ग्राम पंचायत सिंगोड़ी और भाजपा मंडल सिंगोड़ी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अतिशबाजी और फूल-मालाओं से यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। इस संबंध में जानकारी देते हुए सोनू सरस्वार ने बताया कि यह यात्रा गुजरात के बड़नगर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक संचालित की जा रही है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में सेवा भावना,सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का संदेश घर-घर तक पहुंचाना है।इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष,सोनु सरसवार , जनपद प्रतिनिधि योगेश यादव, प्रसादी पटेल,सहित मंडल के सभी पदाधिकारी, बूथ अध्यक्ष, कार्यकर्ता, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कलश यात्रा के स्वागत के बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गई। सेवा, संस्कृति और समरसता का संगम: सिंगोड़ी में कलश यात्रा का भव्य स्वागत, बड़नगर से वाराणसी तक निकली है सेवा संकल्प यात्रा सिंगोड़ी:- सेवा, संस्कृति और सामाजिक समरसता के पुनीत उद्देश्य को लेकर गुजरात के बड़नगर से वाराणसी तक निकाली जा रही ऐतिहासिक सेवा संकल्प यात्रा के अंतर्गत कलश यात्रा का शनिवार को सिंगोड़ी बस स्टैंड पर भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया।यात्रा के सिंगोड़ी पहुंचते ही पूरा बस स्टैंड "भारत माता की जय" जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। ग्राम पंचायत सिंगोड़ी और भाजपा मंडल सिंगोड़ी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अतिशबाजी और फूल-मालाओं से यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। इस संबंध में जानकारी देते हुए सोनू सरस्वार ने बताया कि यह यात्रा गुजरात के बड़नगर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक संचालित की जा रही है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में सेवा भावना,सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का संदेश घर-घर तक पहुंचाना है।इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष,सोनु सरसवार , जनपद प्रतिनिधि योगेश यादव, प्रसादी पटेल,सहित मंडल के सभी पदाधिकारी, बूथ अध्यक्ष, कार्यकर्ता, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कलश यात्रा के स्वागत के बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गई।1
- अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस पर जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित छिंदवाड़ा। कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायण के मार्गदर्शन तथा डीन डॉ. अभय सिन्हा सर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्चना कैथवास मैम एवं सिविल सर्जन डॉ. कंचन दुबे मैम के मार्गदर्शन में जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. यू.सी. जैन मैम (सदस्य, DLC), डॉ. मनन गोगिया (प्रेसिडेंट, नर्सिंग होम), डॉ. अल्पना शुक्ला (प्रेसिडेंट, IMA), डॉ. सिरपुरकर मैम (HOD, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग) एवं डॉ. दीपि महाजन (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में जिला पंचायत, महिला एवं बाल विकास विभाग, प्रशिक्षित CAC अधिकारी एवं कर्मचारी, पुलिस विभाग के अधिकारीगण, समस्त मैट्रन, नर्सिंग इंचार्ज एवं सभी नर्सिंग ऑफिसर भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षित गर्भपात के महत्व, असुरक्षित गर्भपात से होने वाली जटिलताओं, गर्भपात से जुड़ी भ्रांतियों एवं कुप्रथाओं के संबंध में जानकारी दी गई। महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्था में पहुंचकर प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में सुरक्षित गर्भपात सेवाएं प्राप्त करने के लिए जागरूक किया गया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा जागरूकता आधारित रोल प्ले कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सुरक्षित गर्भपात विषय पर प्रस्तुत किया गया प्रभावशाली रोल प्ले रहा। रोल प्ले के माध्यम से असुरक्षित गर्भपात से होने वाली परेशानियों, सामाजिक भ्रांतियों एवं कुप्रथाओं तथा सुरक्षित गर्भपात के महत्व को सरल, रोचक एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। रोल प्ले में श्रीमती भावना मोहड़, सी.के. पटवा, ललिता, रजनी, प्रियंका, मंगला एवं अरिमा ने अपनी उत्कृष्ट कलाकारी एवं प्रभावशाली प्रस्तुति से उपस्थितजनों को जागरूक किया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थितजनों द्वारा सराहा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना, असुरक्षित गर्भपात से होने वाली मातृ जटिलताओं को कम करना तथा महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम का आयोजन DPHNO श्रीमती वंदना परिहार द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम की एंकरिंग श्रीमती भावना मोहड़ राय द्वारा की गई।2
- आनंद बाग में गूंज रहा रामायण का मंचन, रामलीला देखने उमड़ रहे श्रद्धालु पिपरिया। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और भगवान श्रीराम की लीलाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आनंद बाग में इन दिनों भव्य रामलीला का मंचन किया जा रहा है। सनातन धर्म प्रचारक रामायण रामलीला मंडल के तत्वावधान में आयोजित रामलीला का आयोजन 20 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा। रामलीला के मंचन के लिए विंध्याचल धाम, मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) से करीब 20 सदस्यीय कलाकारों की टीम पिपरिया पहुंची है। कलाकारों द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन किया जा रहा है। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और रामायण से जुड़े प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। रामलीला में भगवान श्रीराम के चित्रण और कलाकारों की प्रस्तुति श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आनंद बाग पहुंचकर रामलीला का आनंद ले रहे हैं। धार्मिक वातावरण के बीच रामायण के प्रसंगों का मंचन दर्शकों को आध्यात्मिकता से जोड़ रहा है।3
- *पितृपक्ष में बरमान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, 4 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा; पोलखोल से संत रघुनाथदास और छोटे सरकार ने क्या कहा? देखिए पूरी खबर!* नरसिंहपुर। 28 सितम्बर 2026 पितृपक्ष के पावन अवसर पर बरमान में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का आयोजन 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक नवीन विद्या भवन ग्राउंड, पुराने बस स्टैंड के पास, बरमान में होगा। कथा व्यास महंत श्री 108 पंडित विपिन बिहारी दास जी महाराज के मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया जाएगा। आयोजन को लेकर संत रघुनाथ दास राम जानकी मंदिर एवं छोटे सरकार सहित आयोजन से जुड़े संतों और सदस्यों ने दादा महाराज मंदिर परिसर में प्रेस वार्ता कर पत्रकारों को कार्यक्रम एवं व्यवस्थाओं की जानकारी दी। आयोजकों ने बताया कि कथा का आयोजन समस्त पितरों को समर्पित है। पितृपक्ष के दौरान होने वाली इस कथा में श्रद्धालुओं के लिए तर्पण एवं धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व रहेगा। आयोजकों के अनुसार कथा स्थल पर करीब 15 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। 4 अक्टूबर को कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ होगा। कलश यात्रा बरमान स्थित शारदा मठ मंदिर से प्रारंभ होकर नर्मदा तट तक जाएगी। इसके बाद कथा का नियमित आयोजन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। कथा का कथाविश्राम 10 अक्टूबर को होगा और इसी दिन भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजन समस्त ग्रामवासी बरमान, जिला नरसिंहपुर द्वारा कराया जा रहा है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का आग्रह किया है। प्रेस वार्ता में आप सभी की उपस्थिति रही! संत रघुनाथ दास, राम जानकी मंदिर छोटे सरकार ब्रजेश तिवारी शुभम पटेल बलराम प्रजापति अल्लू महाराज शैलेश शर्मा1
- जब भूखों का पेट भरता है तभी पितर तृप्त होते हैं -श्राद्ध नहीं यह श्रद्धा है- सोहागपुर (होशंगाबाद) !! "पितृ देवो भव:" !! आज पितृपक्ष के इस पावन काल में राम रहीम रोटी बैंक का आंगन एक बार फिर भावुक पलों का साक्षी बना। जब पाँच परिवारों ने अपने-अपने घर के दीये, अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि को भूखे, जरूरतमंदों को भोजन कराकर मनाया। इससे बड़ा तर्पण और क्या हो सकता है? आज जिन पुण्यात्माओं की स्मृति में स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ - 1. ग्राम लखनपुर निवासी श्री रोहित पुरी, राहुल पुरी एवं ऋषभ पुरी ने अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री राधेपुरी जी गोस्वामी की श्राद्ध तिथि पर। 2. ग्राम करनपुर निवासी श्री मनोज पुरविया ने अपनी अर्धांगिनी स्वर्गीय श्रीमती कौशल्या देवी की श्राद्ध तिथि पर। 3. रामगंज वार्ड निवासी कुमारी मेनका भावसार ने अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री जगदीश भावसार (पंडा भैया) की श्राद्ध तिथि पर। 4. शोभापुर निवासी श्री रीतेश पाराशर एवं राहुल पाराशर ने अपनी पूज्यनीय माताजी स्वर्गीय श्रीमती राजा बाई पाराशर की श्राद्ध तिथि पर। 5. ग्राम करनपुर निवासी श्री अवधेश कुमार, वल्द मुल्लू सिंह जी की पुण्य स्मृति में। कहते हैं पितर तभी तृप्त होते हैं, जब उनके नाम पर किसी भूखे का पेट भरता है। आज आप पाँचों परिवारों ने सिर्फ भोजन नहीं कराया, आपने अपने पितरों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है, उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया है। राम रहीम रोटी बैंक परिवार की ओर से सभी दिवंगत पुण्यात्माओं को शत्-शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि! ईश्वर उन सभी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। और उन सभी दानदाता परिवारों को हृदय की गहराइयों से धन्यवाद, साधुवाद, जो इस पितृपक्ष में श्राद्ध को एक उत्सव नहीं, सेवा बना रहे हैं। आप सभी के पितरों का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहे। ॐ पितृभ्यो नमः 🙏1
- प्रभात पट्टन चौकी का एसपी वीरेन्द्र जैन ने किया आकस्मिक निरीक्षण मुलताई। पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेन्द्र जैन ने 28 सितंबर को थाना मुलताई अंतर्गत चौकी प्रभात पट्टन का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान एसडीओपी मुलताई श्री शिवकुमार सिंह एवं चौकी प्रभारी दिनेश कुमरे उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान एसपी ने कार्यालयीन अभिलेख, लंबित अपराध व शिकायतें, मालखाना, साफ-सफाई एवं पुलिसकर्मियों की ड्यूटी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण, अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। एसपी ने पुलिस कर्मचारियों से संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा आमजन की शिकायतों पर संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन, तत्परता और जवाबदेही के साथ बेहतर पुलिसिंग एवं आमजन से समन्वय पुलिस की प्राथमिकता है।1
- स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के छात्रों को AI टूल्स की दी जानकारी छिंदवाड़ा के ई-दक्ष केंद्र में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के करीब 35 से 36 विद्यार्थियों का विजिट प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस दौरान जिला प्रशिक्षक अनुराग नेमा ने छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स की जानकारी दी। लेक्चर के दौरान छात्रों को पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों को आसान बनाने, अलग-अलग डेटा स्रोतों से जानकारी जुटाने और अपनी स्टडी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में AI टूल्स के उपयोग के बारे में बताया गया।4