Shuru
Apke Nagar Ki App…
हरियाणा के कुर्बानपुर में किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए हैं। यह स्थिति कुर्बानपुर क्षेत्र से सामने आई है।
N R Rahul Jakhar
हरियाणा के कुर्बानपुर में किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए हैं। यह स्थिति कुर्बानपुर क्षेत्र से सामने आई है।
More news from हरियाणा and nearby areas
- Dekhi mahaul1
- बराड़ा में श्री संत द्वारा हरी मंदिर प्रबंधक कमेटी और साथ संगत द्वारा श्याम बाबा कीर्तन का बड़ी धूमधाम से आयोजन किया गया। इस भव्य कीर्तन में रघुवंशी ब्रदर्स ने श्याम बाबा का गुणगान किया, जिससे संगत बाबा के सुंदर भजनों पर झूमने पर मजबूर हो गई।1
- कांग्रेसनेत्री सुप्रिया ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर आखिर नागरिकता का असली प्रमाण क्या है। उन्होंने मोदी सरकार के इस बयान पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस संदर्भ में, सुप्रिया ने कई तीखे सवाल उठाए हैं, जिनमें पूछा गया है कि क्या हिंदुस्तान का पासपोर्ट ग़ैर-हिंदुस्तानियों को भी दिया जाता है और पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस किस तरह की जाँच करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार, पासपोर्ट, पैन और वोटर आईडी को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता है। इसके बाद व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा गया कि फिर क्या मोदी का चरणवंदन, बीजेपी का आईडी या आरएसएस की टोपी नागरिकता का प्रमाण है।1
- एचपीएससी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन नौवें दिन भी जारी है। इस दौरान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। हुड्डा ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से उनका आमरण अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।1
- आज सफीलपुर गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीण बृजपाल छप्पर के नेतृत्व में एकजुट हुए। यह एकजुटता सफीलपुर मुगलवाली मार्ग को पक्का करने की मांग को लेकर की गई थी।1
- आईकॉप जर्नलिस्ट और जनता की आवाज़ के हरियाणा अध्यक्ष विशाल शर्मा पत्रकार ने दिल्ली से लेकर हरियाणा के कुरुक्षेत्र धाम, लाडवा और कुरुक्षेत्र तक की सड़कों के बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मौजूदा बीजेपी सरकार के बावजूद इन क्षेत्रों, खासकर 'सीएम सिटी' के आसपास की सड़कों की 'दुर्गति' पर चिंता व्यक्त की है। शर्मा ने आरोप लगाया है कि सच लिखने या दिखाने पर उन्हें 'यातनाएं' दी जाती हैं और देश का युवा 'मिलीभक्ति की राजनीति' का शिकार है, जो एक 'कड़वा सच' है। प्रस्तुत चित्र में दिख रही सड़क पर लगे काले पैच, जिन्हें 'टांकियां' कहा गया है, को केवल मरम्मत नहीं बल्कि देश के विकास मॉडल, राजनीतिक प्राथमिकताओं और बुनियादी ज़रूरतों पर एक 'गहरा कटाक्ष' बताया गया है। एक नागरिक के अनुभव का हवाला देते हुए, यह दर्शाया गया है कि '1978 में भी यही स्थिति थी और आज भी यही है', जो 46 सालों बाद भी 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे दावों के बावजूद सड़कों पर 'टांकियों' के बने रहने पर सवाल खड़े करता है। यह तुलना एक अमेरिकी नागरिक द्वारा इराक में एक भारतीय नागरिक को उसकी देश की पहचान के आधार पर 'मार्क' करने की घटना से की गई है, जो दुनिया की नज़र में भारत के विकास की छवि को दर्शाता है। रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि ये 'टांकियां' हमारे राजनीतिक दृष्टिकोण की ही 'टांकियां' हैं, जो दर्शाती हैं कि राजनीति केवल समस्याओं पर अस्थायी 'पट्टियां' लगाने का काम कर रही है। इसमें वर्तमान सरकार के साथ-साथ पूर्ववर्ती सरकारों (जैसे 1984 के दंगों के संदर्भ में कांग्रेस का शासनकाल) की जवाबदेही पर भी प्रश्न उठाया गया है। यह सवाल किया गया है कि क्या 'दंगों की राजनीति' जैसे भावनात्मक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने से बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने का अवसर खो जाता है। अंत में, यह विश्लेषण करता है कि ये 'टांकियां' देश के व्यापारियों के 'कपड़ों की टांकियां' और 'संविधान पर टांकियां' भी हैं, जो आर्थिक प्रगति के असमान वितरण और संविधान द्वारा हर नागरिक को मिले सम्मानजनक जीवन के अधिकार के उल्लंघन का संकेत देती हैं। जनता का स्पष्ट सवाल है कि राजनीतिक दल 'असली, स्थायी बुनियादी सुविधाओं' पर ध्यान देंगे या केवल 'पुराने ज़ख्मों (दंगों) और पुरानी सड़कों पर 'टांकियां' लगाकर राजनीति करते रहेंगे, क्योंकि 'असली विकास वही है जो ज़मीन पर दिखे, न कि केवल नारों में'।1
- हरियाणा के कुर्बानपुर में किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए हैं। यह स्थिति कुर्बानपुर क्षेत्र से सामने आई है।1