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मध्य प्रदेश के दमोह जिले में 3 साल के मासूम अनिरुद्ध की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि पारिवारिक जमीन विवाद के चलते बच्चे की बड़ी मां राजकुमारी लोधी ने ही गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। पहचान छिपाने के लिए आरोपी महिला ने मासूम के सिर पर पत्थर भी पटका और शव को भूसे के ढेर पर फेंक दिया; पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है।
Narendra Ahirwar
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में 3 साल के मासूम अनिरुद्ध की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि पारिवारिक जमीन विवाद के चलते बच्चे की बड़ी मां राजकुमारी लोधी ने ही गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। पहचान छिपाने के लिए आरोपी महिला ने मासूम के सिर पर पत्थर भी पटका और शव को भूसे के ढेर पर फेंक दिया; पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है।
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- मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नरसिंहगढ़ में दो पक्षों के विवाद में एक पिता की मौत हो गई, जबकि उनकी बेटी और बेटा घायल हो गए। मृतक के परिजनों ने बताया कि यह विवाद पड़ोसी से हुआ था, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है। देहात थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।1
- दमोह जिला न्यायालय की लोक अदालत में एक दंपति का विवाद सुलझ गया। लाड़ली बहना योजना के पैसों और इलाज के खर्च को लेकर उपजा यह झगड़ा कोर्ट तक पहुँच गया था। न्यायाधीशों और वकीलों की समझाइश के बाद पति-पत्नी ने गिले-शिकवे भुलाकर साथ रहने का फैसला किया।1
- दमोह के ग्राम दुहाव पंचायत सुहाव में एक रास्ता बंद कर दिया गया है। पानी के निकास को भी रोके जाने से पूरे गाँव में जलभराव हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।2
- दमोह के हटा नगर में देर रात भयंकर आंधी-तूफान ने तबाही मचाई, जिससे कई जगह पेड़ और बिजली के पोल धराशायी हो गए। एक तरफ लोग रात भर दहशत में रहे, वहीं पीएम आवास न मिलने से एक परिवार जर्जर झुग्गी में जानलेवा पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर है।1
- दमोह जिले के पटेरा तहसील के भरथला गाँव में पानी की गंभीर किल्लत से ग्रामीण जूझ रहे हैं। यहाँ एक बाल्टी पानी भरने में करीब एक घंटा लग जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है। शिकायत के बावजूद सरपंच, सचिव या जल सप्लाई अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं।1
- स्लीमनाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों बिजली जाने से हो रही बेहद परेशानी कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में बिजली जाने से आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है स्थानीय रहवासियों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यहां पर विगत कई दिनों से सुबह बिजली कटौती से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह परेशानी इन दिनों बंधी, मटवारा सहित अन्य स्थानों में बन रही है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कब बिजली जाए कहा नहीं जा सकता है। इस वजह से लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है। बिजली जाने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। बिजली की ट्रिपिंग के से लोग बेहद परेशान हो रहे हैं। इससे कई कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। कई बार ऐसा होता कि कोई फेस गुल हो जाता है। इससे कई नागरिकों के घरों की बिजली भी बंद हो जाती है। घंटों के इंतजार करते रह जाते हैं। नागरिकों ने सुधार की मांग की है। लोगों ने बताया कि मोबाइल चार्जिंग, आटा पिसवाई सहित अन्य काम बिजली के भरोसे ही चलते हैं लेकिन बिजली जाने से इन पर असर हो रहा है।1
- मध्य प्रदेश के दमोह जिले में 3 साल के मासूम अनिरुद्ध की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि पारिवारिक जमीन विवाद के चलते बच्चे की बड़ी मां राजकुमारी लोधी ने ही गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। पहचान छिपाने के लिए आरोपी महिला ने मासूम के सिर पर पत्थर भी पटका और शव को भूसे के ढेर पर फेंक दिया; पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है।1
- मध्य प्रदेश के दमोह जिले में लापता 3 साल के बच्चे का शव गांव के बाहर मिला है। हत्या की आशंका जताई जा रही है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- “लाखों की नल-जल योजना बनी शोपीस : बरहटा पंचायत में टंकी सूखी, सिस्टम जंग खा रहा ” ग्राम पंचायत बरहटा में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाई गई नल-जल योजना आज बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। जिस योजना से हर घर तक पानी पहुंचना था, वहां अब टंकी वीरान खड़ी है, मोटर कचरे और झाड़ियों में दब चुकी है और नया ट्रांसफार्मर कबाड़ में तब्दील होता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ चुकी है। सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना के तहत ग्राम पंचायत बरहटा में पानी सप्लाई के लिए बोरवेल खनन कराया गया था। इसके साथ हाई क्वालिटी की मोटर भी लगाई गई थी ताकि गांव के लोगों को नियमित पानी मिल सके। लेकिन आज हालात यह हैं कि मोटर खुले में पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। आसपास झाड़ियां और कचरा जमा हो चुका है, जिससे साफ दिखाई देता है कि लंबे समय से इसकी कोई देखरेख नहीं हुई। योजना के संचालन के लिए नया बिजली ट्रांसफार्मर भी लगाया गया था, लेकिन अब उसकी हालत भी कबाड़ जैसी हो गई है। रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था जर्जर होती जा रही है। ग्रामीणों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिला। पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में योजना पूरी दिखा रहे हैं। “सरकार ने टंकी तो बनवा दी, लेकिन आज तक पानी नहीं मिला। मोटर और ट्रांसफार्मर खराब हालत में पड़े हैं, कोई देखने वाला नहीं है।” गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते योजना की मरम्मत और संचालन शुरू नहीं किया गया, तो लाखों रुपये की यह परियोजना पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर जनता के पैसे से बनी इस योजना की जिम्मेदारी कौन लेगा… और कब बरहटा के ग्रामीणों को नल-जल योजना का वास्तविक लाभ मिल पाएगा?1