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महुआडार-गारु पथ पर स्थित बारेसार बस स्टैंड पर शौचालय सुविधा न होने से यात्रियों को, विशेषकर महिलाओं को, गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने शुक्रवार शाम 7:00 बजे यह जानकारी देते हुए बताया कि पुरुष तो खुले में शौच कर लेते हैं, लेकिन महिला यात्रियों के लिए यह एक बड़ी परेशानी है। ग्रामीणों के अनुसार, यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से पूर्व में शौचालय और जल मीनार का निर्माण किया गया था, परंतु ये दोनों सुविधाएं वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी हैं।
Manoj dutt dev
महुआडार-गारु पथ पर स्थित बारेसार बस स्टैंड पर शौचालय सुविधा न होने से यात्रियों को, विशेषकर महिलाओं को, गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने शुक्रवार शाम 7:00 बजे यह जानकारी देते हुए बताया कि पुरुष तो खुले में शौच कर लेते हैं, लेकिन महिला यात्रियों के लिए यह एक बड़ी परेशानी है। ग्रामीणों के अनुसार, यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से पूर्व में शौचालय और जल मीनार का निर्माण किया गया था, परंतु ये दोनों सुविधाएं वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी हैं।
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- रांची पुलिस के कथित तानाशाही रवैये पर कड़ा एतराज़ जताया गया है। यह साफ तौर पर कहा गया है कि पुलिस का यह तानाशाही व्यवहार स्वीकार्य नहीं होगा। इसके साथ ही, इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है कि यहाँ आम जनता की कोई कीमत नहीं समझी जाती है।1
- महुआडार-गारु पथ पर स्थित बारेसार बस स्टैंड पर शौचालय सुविधा न होने से यात्रियों को, विशेषकर महिलाओं को, गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने शुक्रवार शाम 7:00 बजे यह जानकारी देते हुए बताया कि पुरुष तो खुले में शौच कर लेते हैं, लेकिन महिला यात्रियों के लिए यह एक बड़ी परेशानी है। ग्रामीणों के अनुसार, यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से पूर्व में शौचालय और जल मीनार का निर्माण किया गया था, परंतु ये दोनों सुविधाएं वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी हैं।1
- चंदवा के टोरी रेलवे फाटक पर बार-बार घंटों बंदी के कारण ग्रामीणों को भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बदहाली से जाम में फंसकर कई मरीजों की जान संकट में पड़ चुकी है और कुछ की मौत की खबरें भी सामने आई हैं। प्रसव अवस्था में कई महिलाओं को भी जाम में फंसने के कारण अत्यधिक दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गहरा असर पड़ा है, जिससे लोगों में न्याय की उम्मीद कम होती जा रही है। माकपा के वरिष्ठ नेता अयूब खान के अनुसार, फाटक की समस्या को दूर करने और एक ओवरब्रिज का निर्माण करवाने के लिए समय-समय पर कई मांगें रखी गई हैं। इन मांगों को लेकर सत्याग्रह भी किए गए और अधिकारियों से भी अनुरोध किया गया, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बढ़ती पीड़ा और प्रशासन की उदासीनता से आक्रोशित ग्रामीण अब सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने आगामी 15 जून को उदयपुरा से डीसी कार्यालय तक एक विशाल पैदल मार्च निकालने का निश्चय किया है। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द ओवरब्रिज निर्माण की मांग करेंगे। स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो उनका आंदोलन और अधिक तेज होगा।3
- लातेहार के हेरहंज थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ उन्होंने दो वर्षों से फरार चल रहे अपहरण कांड के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हेरहंज थाना कांड संख्या 26/24, दिनांक 31 जुलाई 2024 को अपहरण और मारपीट के मामले में दर्ज किया गया था। इस मामले का नामजद मुख्य आरोपी रंजन उर्फ रंजन कुमार उर्फ राजन, जो नन्कू साव उर्फ नकुल साव का पुत्र है और तेली टोला, बालूमाथ, थाना बालूमाथ, जिला लातेहार का निवासी है, लंबे समय से फरार चल रहा था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए हेरहंज थाना पुलिस लगातार छापेमारी अभियान चला रही थी। इसी क्रम में, 12 जून 2026 को थाना प्रभारी कृष्ण पाल सिंह पवैया के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा। पुलिस के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(2), 61(2) एवं 3(5) के तहत दर्ज है। गिरफ्तारी के उपरांत, सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। थाना प्रभारी कृष्ण पाल सिंह पवैया ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनका अभियान जारी रहेगा और कानून से बचने की कोशिश करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। इस छापेमारी अभियान में हेरहंज थाना के सशस्त्र बल के जवान भी शामिल थे।2
- 12 जून 2026 को मुरपा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आयोजित ग्राम सभा की बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस बैठक के दौरान ग्रामीणों ने आवास प्लस सर्वे और लाभार्थियों के चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए और अनियमितताओं के आरोप लगाए, जिससे कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजना की सूची में कई पात्र परिवारों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं, जबकि अपात्र व्यक्तियों के नाम जोड़ दिए गए हैं। उन्होंने चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सभी पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ प्रदान करने की पुरजोर मांग की। बैठक में मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्राप्त सभी आपत्तियों की गहन जांच की जाएगी और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करें। ग्राम सभा में प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा की गई और लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।1
- झारखंड के बालूमाथ स्थित मुरपा पंचायत के ग्राम मुरपा में 12 जून 2026 को आयोजित ग्राम सभा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत हुए 'आवास प्लस' सर्वे और सत्यापन को लेकर माहौल गरमा गया। इस बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने लाभार्थियों के चयन पर गंभीर सवाल खड़े किए। ग्राम सभा में पंचायत के मुखिया अजय टाना भगत, उपमुखिया सत्येंद्र यादव, पंचायत सचिव महेश मुंडा, ग्राम प्रधान युगल किशोर सिंह और पूर्व मुखिया हेमलाल नायक सहित कई पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में कई ऐसे लोगों को लाभ दिया गया है जिन्हें पहले भी आवास का लाभ मिल चुका है, जबकि अनेक गरीब और पात्र परिवार इस योजना से वंचित हैं। ग्रामीणों ने लाभार्थी सूची की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि योजना का मूल उद्देश्य जरूरतमंद एवं बेघर परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने प्रशासन से पंचायत स्तर पर सभी आवेदनों और लाभार्थियों की पुनः जांच कराने की मांग की, ताकि किसी भी अनियमितता का पता चल सके। इस मुद्दे पर ग्राम सभा में कई बार तीखी बहस हुई और कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी पैदा हो गई। हालांकि, उपस्थित जनप्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कराया और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और शिकायतों को संबंधित विभागीय अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा तथा नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जाएगी। वहीं, ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पात्र परिवारों को न्याय नहीं मिला और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनकी प्रमुख मांग है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए।1
- एक हालिया पोस्ट में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि लोगों के पैसों का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है। इस जानकारी ने समाज में गहरा आश्चर्य और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।1
- झारखंड जनाधिकार महासभा की लातेहार इकाई ने उपायुक्त को एक विस्तृत पत्र सौंपकर वन अधिकार कानून 2006 के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर किया है। महासभा के अनुसार, 2009 में प्रक्रिया शुरू होने के 16 साल बाद भी जिले के हजारों आदिवासी और वन निवासी अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इस पत्र में वन विभाग पर कानून की धारा 6(1) और विभिन्न नियमों की खुली अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है, जिसके चलते ग्राम सभाओं के अधिकार छीन लिए गए हैं और उनकी भूमिका 'रबर स्टैंप' बनकर रह गई है, जबकि कानून ग्राम सभा को वन अधिकार तय करने की सर्वोच्च अथॉरिटी मानता है। रिपोर्ट बताती है कि SDLC और DLC ग्राम सभा की कार्यवाही को देखे बिना केवल वन और राजस्व विभाग की रिपोर्टों पर भरोसा करते हैं, जबकि वन विभाग को दावों पर फैसला करने का कोई अधिकार नहीं है; इसके बावजूद DFO SDLC/DLC में फैसले करवा रहे हैं, जिसे कानून का मज़ाक बताया गया है। नियम 12A(6) का उल्लंघन करते हुए लातेहार में 50% से अधिक FRA दावे सीधे खारिज कर दिए गए हैं, और 90% मंजूर दावों का रकबा भी घटा दिया गया है। 2010 से लंबित दावों की सूचना दावेदारों को आज तक नहीं दी गई, जबकि नियम 12A(3) के तहत व्यक्तिगत रूप से कारण बताना अनिवार्य है ताकि अपील की जा सके। फील्ड वेरिफिकेशन में वन और राजस्व अधिकारियों के असहयोग का भी जिक्र है, जो धारा 12(1) और नियम 12A(1) के तहत FRC के साथ मौके पर जाकर रिपोर्ट पर साइन करने के लिए बाध्य हैं। अधिकारी नोटिस पर साइन करने से इनकार करते हैं, दो नोटिस के बाद भी वेरिफिकेशन पर नहीं आते, और दूसरे विभाग के अधिकारी की गैरहाजिरी का बहाना बनाते हैं। DFO पर आरोप है कि उन्होंने मौखिक आदेश दिया है कि कोई फील्ड अधिकारी वेरिफिकेशन रिपोर्ट पर साइन न करे, जिससे हजारों दावे लंबित हैं। DLC में भी DFO नियम 8 का उल्लंघन कर खुद फाइलों की जांच कर रहे हैं और दावों को खारिज करने की सिफारिश कर रहे हैं, यहां तक कि DLC द्वारा मंजूर किए गए 108 IFR दावों पर भी उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया क्योंकि वे खुद मौके पर नहीं गए थे। इन सब के बावजूद, रिपोर्ट ग्राम सभाओं के सकारात्मक योगदान को भी दर्शाती है, जिनकी सतर्कता से पिछले 10 साल में जंगल में आग लगने की घटनाओं में काफी कमी आई है, जिसमें पिछले हफ्ते की भीषण गर्मी में भी लातेहार के जंगलों में आग न लगना शामिल है। महासभा का आरोप है कि वन विभाग आदिवासियों को जंगल का दुश्मन मानता है, जबकि FRA 2006 उन्हें सबसे बड़ा हितधारक मानता है, और विभाग सुप्रीम कोर्ट के नियमगिरि फैसले के बावजूद 168 दावों को 2005 से पहले के कब्जे का हवाला देकर खारिज कर रहा है। महासभा ने उपायुक्त से मांग की है कि ग्राम सभा के अधिकार बहाल किए जाएं, लंबित दावों का 3 महीने में निपटारा हो और नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर FRA की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जाए। इस पत्र पर जॉर्ज मोनिप्पल्ली, जेम्स हेरेन्ज, नंद किशोर और प्रवेश राणा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं।1