13 साल का इंतजार खत्म: मधेपुरा में खुला केंद्रीय विद्यालय, नामांकन शुरू; साहूगढ़ में बनेगा 5.5 एकड़ का स्थायी कैंपस मधेपुरा के हजारों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जिले में केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत हो गई है। अब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण सीबीएसई शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए केंद्रीय विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल विद्यालय का संचालन शहर के सुभाष चौक स्थित एसएनपीएम प्लस-टू विद्यालय के अस्थायी परिसर से किया जाएगा। शुरुआती चरण में बालवाटिका-1, बालवाटिका-2, बालवाटिका-3 और कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। बाइट ---कुमार ठाकुर, केंद्रीय विद्यालय प्रधानाचार्य मधेपुरा विद्यालय प्रशासन के मुताबिक, ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 10 अगस्त तक चलेगी। प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अभिभावक आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इधर, केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने मधेपुरा अंचल के मौजा साहूगढ़ में 5 एकड़ 50 डिसमिल 156 वर्ग कड़ी सरकारी जमीन 30 वर्षों की लीज पर केंद्रीय विद्यालय संगठन को उपलब्ध करा दी है। इसी जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस केंद्रीय विद्यालय का स्थायी भवन बनाया जाएगा। आने वाले समय में यहां स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और अन्य आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि प्रवेश पूरी तरह केंद्रीय विद्यालय संगठन की प्रवेश मार्गदर्शिका 2026-27 के अनुसार होगा। आवेदन पत्र में गलत या भ्रामक जानकारी मिलने पर किसी भी स्तर पर आवेदन रद्द किया जा सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल पंजीकरण करा देने से प्रवेश की गारंटी नहीं होगी। अंतिम चयन उपलब्ध सीटों और केंद्रीय विद्यालय संगठन के निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाएगा। केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत मधेपुरा जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब जिले और आसपास के हजारों बच्चों को सीबीएसई पैटर्न की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने ही शहर में मिल सकेगी। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा, क्योंकि अब बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों या बड़े शहरों में भेजने की मजबूरी काफी हद तक खत्म होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय विद्यालय खुलने से जिले में शैक्षणिक माहौल और प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगे। साथ ही छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, बेहतर अनुशासन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। कुल मिलाकर, केंद्रीय विद्यालय का आगाज मधेपुरा के लिए सिर्फ एक नए स्कूल की शुरुआत नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद और नए अध्याय की शुरुआत है। अब निगाहें साहूगढ़ में बनने वाले स्थायी परिसर पर टिकी हैं, जहां आने वाले वर्षों में आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित केंद्रीय विद्यालय जिले की नई पहचान बन सकता है।
13 साल का इंतजार खत्म: मधेपुरा में खुला केंद्रीय विद्यालय, नामांकन शुरू; साहूगढ़ में बनेगा 5.5 एकड़ का स्थायी कैंपस मधेपुरा के हजारों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जिले में केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत हो गई है। अब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण सीबीएसई शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए केंद्रीय विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल विद्यालय का संचालन शहर के सुभाष चौक स्थित एसएनपीएम प्लस-टू विद्यालय के अस्थायी परिसर से किया जाएगा। शुरुआती चरण में बालवाटिका-1, बालवाटिका-2, बालवाटिका-3 और कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। बाइट ---कुमार ठाकुर, केंद्रीय विद्यालय प्रधानाचार्य मधेपुरा विद्यालय प्रशासन के मुताबिक, ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 10 अगस्त तक चलेगी। प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अभिभावक आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के
साथ सभी जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इधर, केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने मधेपुरा अंचल के मौजा साहूगढ़ में 5 एकड़ 50 डिसमिल 156 वर्ग कड़ी सरकारी जमीन 30 वर्षों की लीज पर केंद्रीय विद्यालय संगठन को उपलब्ध करा दी है। इसी जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस केंद्रीय विद्यालय का स्थायी भवन बनाया जाएगा। आने वाले समय में यहां स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और अन्य आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि प्रवेश पूरी तरह केंद्रीय विद्यालय संगठन की प्रवेश मार्गदर्शिका 2026-27 के अनुसार होगा। आवेदन पत्र में गलत या भ्रामक जानकारी मिलने पर किसी भी स्तर पर आवेदन रद्द किया जा सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल पंजीकरण करा देने से प्रवेश की गारंटी नहीं होगी। अंतिम चयन उपलब्ध सीटों और केंद्रीय विद्यालय संगठन के निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाएगा। केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत
मधेपुरा जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब जिले और आसपास के हजारों बच्चों को सीबीएसई पैटर्न की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने ही शहर में मिल सकेगी। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा, क्योंकि अब बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों या बड़े शहरों में भेजने की मजबूरी काफी हद तक खत्म होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय विद्यालय खुलने से जिले में शैक्षणिक माहौल और प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगे। साथ ही छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, बेहतर अनुशासन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। कुल मिलाकर, केंद्रीय विद्यालय का आगाज मधेपुरा के लिए सिर्फ एक नए स्कूल की शुरुआत नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद और नए अध्याय की शुरुआत है। अब निगाहें साहूगढ़ में बनने वाले स्थायी परिसर पर टिकी हैं, जहां आने वाले वर्षों में आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित केंद्रीय विद्यालय जिले की नई पहचान बन सकता है।
- 13 साल का इंतजार खत्म: मधेपुरा में खुला केंद्रीय विद्यालय, नामांकन शुरू; साहूगढ़ में बनेगा 5.5 एकड़ का स्थायी कैंपस मधेपुरा के हजारों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जिले में केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत हो गई है। अब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण सीबीएसई शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए केंद्रीय विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। फिलहाल विद्यालय का संचालन शहर के सुभाष चौक स्थित एसएनपीएम प्लस-टू विद्यालय के अस्थायी परिसर से किया जाएगा। शुरुआती चरण में बालवाटिका-1, बालवाटिका-2, बालवाटिका-3 और कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। बाइट ---कुमार ठाकुर, केंद्रीय विद्यालय प्रधानाचार्य मधेपुरा विद्यालय प्रशासन के मुताबिक, ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 10 अगस्त तक चलेगी। प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अभिभावक आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इधर, केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने मधेपुरा अंचल के मौजा साहूगढ़ में 5 एकड़ 50 डिसमिल 156 वर्ग कड़ी सरकारी जमीन 30 वर्षों की लीज पर केंद्रीय विद्यालय संगठन को उपलब्ध करा दी है। इसी जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस केंद्रीय विद्यालय का स्थायी भवन बनाया जाएगा। आने वाले समय में यहां स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और अन्य आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि प्रवेश पूरी तरह केंद्रीय विद्यालय संगठन की प्रवेश मार्गदर्शिका 2026-27 के अनुसार होगा। आवेदन पत्र में गलत या भ्रामक जानकारी मिलने पर किसी भी स्तर पर आवेदन रद्द किया जा सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल पंजीकरण करा देने से प्रवेश की गारंटी नहीं होगी। अंतिम चयन उपलब्ध सीटों और केंद्रीय विद्यालय संगठन के निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाएगा। केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत मधेपुरा जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अब जिले और आसपास के हजारों बच्चों को सीबीएसई पैटर्न की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने ही शहर में मिल सकेगी। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा, क्योंकि अब बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों या बड़े शहरों में भेजने की मजबूरी काफी हद तक खत्म होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय विद्यालय खुलने से जिले में शैक्षणिक माहौल और प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगे। साथ ही छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, बेहतर अनुशासन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। कुल मिलाकर, केंद्रीय विद्यालय का आगाज मधेपुरा के लिए सिर्फ एक नए स्कूल की शुरुआत नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद और नए अध्याय की शुरुआत है। अब निगाहें साहूगढ़ में बनने वाले स्थायी परिसर पर टिकी हैं, जहां आने वाले वर्षों में आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित केंद्रीय विद्यालय जिले की नई पहचान बन सकता है।3
- विद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहने से मवेशी द्वारा कर दिया जाता है गंदगी नगर पंचायत सौर बाजार के सौतारी भरना स्थित प्राथमिक विद्यालय में मुख्य गेट नहीं रहने से विद्यालय के बच्चे एवं शिक्षक को कई परेशानी झेलनी पड़ती है। इसको लेकर विद्यालय के शिक्षक ने बताया की विद्यालय में मुख्य गेट नहीं रहने से विद्यालय बंद होने के बाद मवेशी घुस आते हैं जिससे विद्यालय परिसर गंदा हो जाता है जिससे साफ सफाई करने में भारी परेशानी होती है इसके अलावा विद्यालय में चोरी की घटना की भय भी बढ़ जाती है। विद्यालय परिसर में पीने के शुद्ध पानी को लेकर बोरिंग किया गया था जो अब तक अधूरा पड़ा है जिससे विद्यालय के बच्चे एवं शिक्षक आयरन युक्त पानी पीने पर मजबूर है। विद्यालय परिसर में मात्र एक हेडपंप लगा हुआ है जिससे आयरन युक्त पानी निकलता है जो पीने लायक नहीं रहता है जिससे बाहर से पानी लाना पड़ता है।1
- सोनबरसा प्रखंड अंतर्गत महुआ उत्तरवारी से आस्था और श्रद्धा से जुड़ी एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। सहरसा जिले के सोनबरसा प्रखंड अंतर्गत से आस्था और श्रद्धा से जुड़ी एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। महुआ उत्तरवारी पंचायत स्थित बजरंगबली मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नर्मदेश्वर शिवलिंग और भगवान शिव परिवार की प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस धार्मिक आयोजन में उस समय श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ गई, जब प्रतिमा झांकी की पालकी पर एक नाग दिखाई देने की चर्चा फैल गई। महुआ उत्तरवारी पंचायत स्थित बजरंगबली मंदिर परिसर में बुधवार को भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नर्मदेश्वर शिवलिंग एवं भगवान शिव परिवार की प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर 251 कुंवारी कन्याओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा मंदिर परिसर से सुरसर नदी पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरकर यज्ञ स्थल पर कलश स्थापित किए। पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान के बाद 48 घंटे के अखंड रामधुनी का शुभारंभ हुआ। इस दौरान प्रतिमा झांकी की पालकी पर एक नाग दिखाई देने की बात सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर विशेष चर्चा रही। कई श्रद्धालुओं ने इसे नाग देवता का आशीर्वाद मानते हुए अपनी धार्मिक आस्था से जोड़ा। हालांकि, इस घटना को श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था के अनुसार देख रहे हैं। मंदिर के पुजारी पूज्य बाबा विनोद जी के मार्गदर्शन में युवा कला परिषद एवं आयोजन समिति ने पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सोनू सरकार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु और युवा कार्यकर्ता इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोष से गूंजता रहा। आस्था, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया।1
- पोखर में डूबने से 13 वर्षीय किशोर की मौत, एनडीआरएफ ने किया रेस्क्यू, सदर अस्पताल में तोड़ा दम पिपरा (सुपौल): पिपरा थाना क्षेत्र के पोखर में डूबने से 13 वर्षीय किशोर की मौत, एनडीआरएफ ने किया रेस्क्यू, सदर अस्पताल में तोड़ा दम पिपरा (सुपौल): पिपरा थाना क्षेत्र के तुम्हा पंचायत वार्ड संख्या-12 में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय किशोर पीयूष राज की पोखर में डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान अरुण शाह के इकलौते पुत्र पीयूष राज के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार पीयूष राज किसी कार्य से घर के पास स्थित पोखर की ओर गया था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में डूब गया। कुछ देर बाद वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति की नजर पानी में डूब रहे पीयूष पर पड़ी। उसने तत्काल इसकी सूचना परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और तत्काल एनडीआरएफ टीम तथा स्थानीय प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान चलाकर पीयूष को पोखर से बाहर निकाला। गंभीर अवस्था में उसे एंबुलेंस से इलाज के लिए सुपौल सदर अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में चिकित्सकीय उपचार भी जारी रहा, लेकिन सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जाता है कि पीयूष अपने परिवार का इकलौता पुत्र था। उसकी तीन बड़ी बहनें हैं—चंचल कुमारी (24 वर्ष), चांदनी कुमारी (20 वर्ष) और सरस्वती कुमारी (16 वर्ष)। चार भाई-बहनों में पीयूष सबसे छोटा और परिवार की उम्मीदों का केंद्र था। उसकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई। गांव में शोक का माहौल है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है तथा पूरे क्षेत्र में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।3
- ##### Hamare dada g ke jamane ka Bahut hi badhiya nuska ghar ka nuska #### Dosto aap bhi ghar bethe ese bana sakte hai our use bhi kar sakte hai1
- ज्वेलरी दुकानदार के घर 30 लाख से अधिक की संपत्ति हुई चोरी मौके पर पहुंची श्रीनगर पुलिस ने की मामले की जांच कुमारखंड। श्रीनगर थाना क्षेत्र के रामनगर महेश पंचायत के वार्ड 14 में बुधवार को दिनदहाड़े चोरों ने एक ज्वेलरी व्यवसायी के घर खिड़की की ग्रिल तोड़कर करीब 30 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति चोरी कर लिया गया । चोरों ने घर से करीब 25 लाख रुपये मूल्य के स्वर्णाभूषण और पांच लाख रुपये नगद लेकर फरार हो गया। मामले में सूचना मिलते ही पुलिस पदाधिकारी पहुंच कर जांच किया। ज्वेलरी व्यवसायी श्यामसुंदर साह बुधवार सुबह करीब 11 बजे में घर में ताला लगाकर रामनगर बाजार स्थित अपने ज्वेलरी दुकान चले गये थे। घर में किरायेदार थे। कुछ देर बाद किरायेदार ने खिड़की की ग्रिल खुला रहने को लेकर उन्हें सूचना दी। सूचना मिलते ही व्यवसायी दुकान छोड़कर घर पहुंचे। घर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि सभी कमरों के दरवाजे अंदर से बंद थे। संदेह होने पर किसी तरह एक बच्ची को खिड़की के रास्ते अंदर घर में भेजकर ग्रिल खुलवाया। इसके बाद कमरे खोलने पर घर का सामान बिखरा हुआ मिला। चोरों ने गोदरेज लॉकर और पलंग के नीचे बने बॉक्स का ताला तोड़कर उसमें रखे करीब 25 लाख रुपये के स्वर्णाभूषण व आधा किलो चांदी और पांच लाख रुपये नगद चोरी कर फरार हो गया। पीड़ित गृहस्वामी ने चोरी की घटना का शीघ्र खुलासा करने के लिए स्वान दस्ता और फॉरेंसिक टीम से जांच कराने की मांग पुलिस से की है। घटना की सूचना मिलते ही श्रीनगर थाना पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने गृहस्वामी से आवेदन देने की बात कही। थानाध्यक्ष कृष्णा कुमार ने बताया कि आवेदन मिलने पर तकनीकी जांच के माध्यम से चोरों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।1
- खबर-आज दिनांक 31.07.2026 को समाहरणालय, सुपौल में लहटन चौधरी सभागार में आयोजित जिला जनता दरबार में जिलाधिकारी, सुपौल श्री सावन कुमार, भा0प्र0से0 ने आवेदकों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं तथा संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने हेतु निदेशित किया गया। जिला जनता दरबार में आज कुल 70 आवेदन लिए गए। उक्त अवसर पर श्री इन्द्रवीर कुमार, उप विकास आयुक्त, सुपौल, श्री अनित कुमार, निदेशक, NEP डी0आर0डी0ए0, सुपौल, श्री विकास कुमार कर्ण, विशेष कार्य पदाधिकारी, गोपनीय शाखा, सुपौल, श्री मुकेश कुमार, वरीय उप समाहर्ता, सुपौल एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।1
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरा में शौचालय का अभाव, एक्स-रे कक्ष के बाहर जलजमाव से मरीज परेशान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरा में शौचालय का अभाव, एक्स-रे कक्ष के बाहर जलजमाव से मरीज परेशान पिपरा (सुपौल): पिपरा प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बुनियादी सुविधाओं की कमी मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। अस्पताल परिसर में समुचित शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों एवं दूर-दराज से आने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए घंटों अस्पताल में रुकने वाले मरीजों को शौचालय के अभाव में असुविधा झेलनी पड़ रही है। वहीं अस्पताल के एक्स-रे कक्ष के बाहर बारिश का पानी जमा रहने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जलजमाव के कारण मरीजों, दिव्यांगों और बुजुर्गों को एक्स-रे कराने के लिए आने-जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मरीजों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने के बजाय बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों एवं मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल परिसर में स्थायी जल निकासी की व्यवस्था कराने तथा पर्याप्त शौचालय का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्था में ऐसी समस्याएं स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधक रतीश झा से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने केवल इतना कहा, "हम अभी कहीं बाहर हैं," और इसके बाद फोन काट दिया। अस्पताल प्रशासन की ओर से समस्याओं के समाधान को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। मरीजों ने जिला स्वास्थ्य प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।2