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करनाल के गांव दादूपुर में बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अलमारी से कपड़े निकालते वक्त करंट लगने से नेहा नाम की महिला की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम करवाया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि महिला सुबह अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थी और अलमारी से कपड़े निकाल रही थी। उसी समय अचानक इनवर्टर की तार से अलमारी में करंट आ गया, जिससे महिला की जान चली गई। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार बेहद सदमे में है।
KL MEDIA 24 - KARNAL LOCAL NEWS
करनाल के गांव दादूपुर में बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अलमारी से कपड़े निकालते वक्त करंट लगने से नेहा नाम की महिला की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम करवाया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि महिला सुबह अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थी और अलमारी से कपड़े निकाल रही थी। उसी समय अचानक इनवर्टर की तार से अलमारी में करंट आ गया, जिससे महिला की जान चली गई। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार बेहद सदमे में है।
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- करनाल के गांव दादूपुर में बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अलमारी से कपड़े निकालते वक्त करंट लगने से नेहा नाम की महिला की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम करवाया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि महिला सुबह अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थी और अलमारी से कपड़े निकाल रही थी। उसी समय अचानक इनवर्टर की तार से अलमारी में करंट आ गया, जिससे महिला की जान चली गई। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार बेहद सदमे में है।1
- सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के संबंध में दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत के इस कदम के बाद अब यह सवाल और चिंता खड़ी हो गई है कि आगे जनता का क्या हाल होगा।1
- सूफ़ीज़्म इस्लाम की वह आध्यात्मिक धारा है जो बाहरी रस्मों से ऊपर उठकर दिल की सच्चाई और इंसानियत को सबसे ऊँचा स्थान देती है। सूफ़ी दर्शन का मूल मंत्र "इंसानियत सबसे ऊपर" है। सूफ़ी संतों का मानना था कि ईश्वर की खोज नाम, रूप या धर्म की दीवारों में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानव सेवा में छिपी है। हज़रत रूमी के अनुसार जब मनुष्य अपने अंदर के झूठे अहंकार को तोड़ देता है, तब वह पूरे ब्रह्मांड से जुड़ जाता है। सूफ़ी सिलसिलों में ज़िक्र, ध्यान और समा (संगीत) के माध्यम से साधक स्वयं को भूलकर ईश्वर और सृष्टि में विलीन हो जाता है, जिससे हिंदू-मुस्लिम या ऊँच-नीच का भेद समाप्त होकर केवल इंसानियत रह जाती है। भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, बुल्ले शाह और शाह लतीफ़ जैसे महान सूफ़ियों ने मज़हब की संकीर्णता को तोड़कर लोगों को सिखाया कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत ही है। उनकी दरगाहें आज भी बिना किसी जात-पात या पूजा-पाठ के बंधन के हिंदू और मुस्लिम सभी के लिए शरणस्थली बनी हुई हैं। आज के विभाजित और तनावपूर्ण समय में सूफ़ी संतों की यह शिक्षा और भी प्रासंगिक हो जाती है कि अपने दिल को इतना चौड़ा करो कि सारी दुनिया उसमें समा जाए। सूफ़ीज़्म हमें याद दिलाता है कि धर्म का अंतिम लक्ष्य मनुष्य को मानव बनाना है, न कि उसे किसी खांचे में कैद करना।1
- यमुनानगर के वर्कशॉप रोड स्थित गिरी मंदिर गली में राजिन्द्र सैनी द्वारा पिछले 25 सालों से टूटी हड्डियों, मोच और सटिका का इलाज किया जा रहा है। इलाज के सिलसिले में संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर 9315152670 जारी किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के शामली जिले के थाना भवन में छात्रों का तिलक और कलावा हटवाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कॉलेज के मुस्लिम योगा टीचर द्वारा छात्र-छात्राओं का तिलक और कलावा हटवाने की घटना से नाराज एबीवीपी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा काटा। मामले के बढ़ते विरोध और हंगामे को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने तुरंत एक्शन लेते हुए मुस्लिम योगा टीचर को हटा दिया है।1
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