सुल्तानपुर के अखंडनगर थाना क्षेत्र स्थित उमरी गांव में उच्च न्यायालय के निर्देश और जिला प्रशासन के आदेश पर राजस्व विभाग तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार को तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस अभियान के दौरान जेसीबी की मदद से तालाब क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। यह पूरी कार्रवाई शिकायतकर्ता सभापति सिंह की याचिका पर चलाई गई। इससे पहले 11 जुलाई को भी यहां आंशिक कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी को पुनः प्रार्थना पत्र दिए जाने पर यह अभियान दोबारा चलाया गया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार उमेश चंद्र यादव और नायब तहसीलदार प्रदीप कुमार मिश्र सहित राजस्व व पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। अभियान के बाद शिकायतकर्ता सभापति सिंह ने दावा किया है कि पूरी भूमि अभी भी अतिक्रमण मुक्त नहीं हुई है। वहीं, पवन सिंह सहित कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी वैध पशुशाला और बैठक को भी गिरा दिया है। इन आरोपों को निराधार बताते हुए तहसीलदार उमेश चंद्र यादव ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई उच्च न्यायालय और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में की गई है।
सुल्तानपुर के अखंडनगर थाना क्षेत्र स्थित उमरी गांव में उच्च न्यायालय के निर्देश और जिला प्रशासन के आदेश पर राजस्व विभाग तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार को तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस अभियान के दौरान जेसीबी की मदद से तालाब क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। यह पूरी कार्रवाई शिकायतकर्ता सभापति सिंह की याचिका पर चलाई गई। इससे पहले 11 जुलाई को भी यहां आंशिक कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी को पुनः प्रार्थना पत्र दिए जाने पर यह अभियान दोबारा चलाया गया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार उमेश चंद्र यादव और नायब तहसीलदार प्रदीप कुमार मिश्र सहित राजस्व व पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। अभियान के बाद शिकायतकर्ता सभापति सिंह ने दावा किया है कि पूरी भूमि अभी भी अतिक्रमण मुक्त नहीं हुई है। वहीं, पवन सिंह सहित कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी वैध पशुशाला और बैठक को भी गिरा दिया है। इन आरोपों को निराधार बताते हुए तहसीलदार उमेश चंद्र यादव ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई उच्च न्यायालय और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में की गई है।
- सुल्तानपुर के अखंडनगर थाना क्षेत्र स्थित उमरी गांव में उच्च न्यायालय के निर्देश और जिला प्रशासन के आदेश पर राजस्व विभाग तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार को तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस अभियान के दौरान जेसीबी की मदद से तालाब क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। यह पूरी कार्रवाई शिकायतकर्ता सभापति सिंह की याचिका पर चलाई गई। इससे पहले 11 जुलाई को भी यहां आंशिक कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी को पुनः प्रार्थना पत्र दिए जाने पर यह अभियान दोबारा चलाया गया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार उमेश चंद्र यादव और नायब तहसीलदार प्रदीप कुमार मिश्र सहित राजस्व व पुलिस टीम मौके पर मौजूद रही। अभियान के बाद शिकायतकर्ता सभापति सिंह ने दावा किया है कि पूरी भूमि अभी भी अतिक्रमण मुक्त नहीं हुई है। वहीं, पवन सिंह सहित कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी वैध पशुशाला और बैठक को भी गिरा दिया है। इन आरोपों को निराधार बताते हुए तहसीलदार उमेश चंद्र यादव ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई उच्च न्यायालय और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में की गई है।1
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- सुलतानपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने जनपद में शांति, सुरक्षा एवं आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए समस्त जनपद वासियों से विनम्र अपील की है। अपर पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर श्री बृजनारायण सिंह ने कहा है कि यदि किसी को अपनी बात या मांग रखनी है, तो उसे केवल शांतिपूर्ण और वैधानिक माध्यम से समुचित रूप से विधिक अनुमति प्राप्त करने के बाद ही रखें। कानून का पालन करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने में सभी से सहयोग का अनुरोध किया गया है। प्रशासन ने ताकीद की है कि व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम या अन्य किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ, भ्रामक, आपत्तिजनक अथवा समाज में वैमनस्य फैलाने वाली सामग्री को पोस्ट, शेयर या प्रसारित न करें। किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और न ही उसे आगे बढ़ाएं। जनपद सुलतानपुर में धारा-163 (BNSS) (पूर्व धारा-144 Cr PC) दिनांक 31 जुलाई 2026 तक प्रभावी है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आने से पिता और पुत्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे से पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और गांव में मातम पसर गया है। घटना के बाद से बिजली विभाग की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक केतकी सिंह तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को घटनास्थल पर तलब किया और उनके रवैये तथा लापरवाही पर जमकर फटकार लगाते हुए कड़ी नाराजगी जताई। विधायक ने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने भी बिजली विभाग की लापरवाही को ही इस हादसे का जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।1
- NEET और परीक्षा धांधली के साथ-साथ शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर CJP का विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस तथा सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और स्वतंत्र पत्रकारों ने पाया कि ड्यूटी पर तैनात कई सुरक्षाबल और RPF जवान बिना नेम-प्लेट के मुस्तैद थे। जब पत्रकारों ने जवानों से नेम-बैज न पहनने का कारण पूछा, तो उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई या धक्का-मुक्की के दौरान बैज गिर जाने का डर रहता है। हालांकि, इस जवाब से विवाद शांत होने के बजाय और गहरा गया है। 'हेडलाइन 24 न्यूज़' ने इस मामले में प्रशासन और अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के D.K. Basu Guidelines के सख्त आदेशों के बावजूद, जिसमें हर जवान का नाम और पद स्पष्ट दिखना अनिवार्य है, नियमों की धज्जियां किसके इशारे पर उड़ाई गईं? यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या जवानों की पहचान जानबूझकर छिपाई गई और अगर बल प्रयोग या कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी। इस पूरे मामले में आला अधिकारियों की चुप्पी और जवानों की तैनाती पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। साथ ही यह ध्यान दिलाया गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी देता है और अनुच्छेद 19(1)(b) बिना हथियार शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होकर विरोध दर्ज कराने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।1
- केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 24 घंटे में CJP को 4 बार बातचीत का निमंत्रण दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक CJP की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे छात्रों से बातचीत करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।1
- समाजवादी पार्टी के प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन को लेकर अमेठी में पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई और प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही कई सपा पदाधिकारियों को उनके घरों में हाउस अरेस्ट कर लिया गया। सपा महिला जिलाध्यक्ष गुंजन सिंह सहित कई पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने उनके घर पहुंचकर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि सरकार इस तरह की कार्रवाई करके विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। सपा महिला जिलाध्यक्ष गुंजन सिंह ने प्रदेश और केंद्र की शिक्षा व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 9 वर्षों में 152 बार भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने दिल्ली में छात्र-छात्राओं के साथ अभद्रता करने और सरकार के इशारे पर उन पर लाठियां बरसाने का भी गंभीर आरोप लगाया। गुंजन सिंह ने चेतावनी दी कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा नहीं लिया जाता और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो सपा का महिला संगठन धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा।4