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छत्तीसगढ़ के शांतप्रिय चांगभाखार क्षेत्र में अब गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वाली घटनाएं बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। जनकपुर क्षेत्र के बहराशि गांव से सामने आई ऐसी ही तस्वीरों ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह स्थिति, जिसे अक्सर बंगाल या बिहार से जोड़ा जाता है, अब छत्तीसगढ़ में दिखने से स्थानीय लोग चिंतित हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियां गहरी चिंता का विषय बन चुकी हैं। इन घटनाओं को देखते हुए यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और क्या अपराधियों में कानून का डर अब खत्म हो चुका है? आम जनता खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। यदि समय रहते इन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सीधा असर पूरे क्षेत्र के सामाजिक माहौल और आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इस गंभीर स्थिति पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि "ये कैसा सुशासन है?", जो मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तीखा हमला है।

4 hrs ago
user_मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
Advertising Photographer सोनहत, कोरिया, छत्तीसगढ़•
4 hrs ago

छत्तीसगढ़ के शांतप्रिय चांगभाखार क्षेत्र में अब गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वाली घटनाएं बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। जनकपुर क्षेत्र के बहराशि गांव से सामने आई ऐसी ही तस्वीरों ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह स्थिति, जिसे अक्सर बंगाल या बिहार से जोड़ा जाता है, अब छत्तीसगढ़ में दिखने से स्थानीय लोग चिंतित हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियां गहरी चिंता का विषय बन चुकी हैं। इन घटनाओं को देखते हुए यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और क्या अपराधियों में कानून का डर अब खत्म हो चुका है? आम जनता खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। यदि समय रहते इन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सीधा असर पूरे क्षेत्र के सामाजिक माहौल और आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इस गंभीर स्थिति पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि "ये कैसा सुशासन है?", जो मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तीखा हमला है।

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  • छत्तीसगढ़ के शांतप्रिय चांगभाखार क्षेत्र में अब गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वाली घटनाएं बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। जनकपुर क्षेत्र के बहराशि गांव से सामने आई ऐसी ही तस्वीरों ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह स्थिति, जिसे अक्सर बंगाल या बिहार से जोड़ा जाता है, अब छत्तीसगढ़ में दिखने से स्थानीय लोग चिंतित हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियां गहरी चिंता का विषय बन चुकी हैं। इन घटनाओं को देखते हुए यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और क्या अपराधियों में कानून का डर अब खत्म हो चुका है? आम जनता खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। यदि समय रहते इन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सीधा असर पूरे क्षेत्र के सामाजिक माहौल और आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इस गंभीर स्थिति पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि "ये कैसा सुशासन है?", जो मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तीखा हमला है।
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    छत्तीसगढ़ के शांतप्रिय चांगभाखार क्षेत्र में अब गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वाली घटनाएं बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। जनकपुर क्षेत्र के बहराशि गांव से सामने आई ऐसी ही तस्वीरों ने पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह स्थिति, जिसे अक्सर बंगाल या बिहार से जोड़ा जाता है, अब छत्तीसगढ़ में दिखने से स्थानीय लोग चिंतित हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियां गहरी चिंता का विषय बन चुकी हैं। इन घटनाओं को देखते हुए यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और क्या अपराधियों में कानून का डर अब खत्म हो चुका है? आम जनता खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। यदि समय रहते इन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सीधा असर पूरे क्षेत्र के सामाजिक माहौल और आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

इस गंभीर स्थिति पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि "ये कैसा सुशासन है?", जो मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तीखा हमला है।
    user_मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    Advertising Photographer सोनहत, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के चिरमिरी प्रवास और श्रीराम कथा आयोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मनेन्द्रगढ़ पहुंचकर रामभद्राचार्य को भाजपा का प्रचारक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और वे उन्हें जगद्गुरु नहीं मानते। इस मामले पर सांसद ज्योत्सना महंत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनप्रतिनिधियों को सेवा भाव से कार्य करना चाहिए। दोनों प्रमुख नेताओं के इन बयानों के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं काफी गरमा गई हैं, विशेषकर मनेन्द्रगढ़ में रामभद्राचार्य के बयानों पर सियासत गरम है।
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    छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के चिरमिरी प्रवास और श्रीराम कथा आयोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मनेन्द्रगढ़ पहुंचकर रामभद्राचार्य को भाजपा का प्रचारक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और वे उन्हें जगद्गुरु नहीं मानते।

इस मामले पर सांसद ज्योत्सना महंत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनप्रतिनिधियों को सेवा भाव से कार्य करना चाहिए। दोनों प्रमुख नेताओं के इन बयानों के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं काफी गरमा गई हैं, विशेषकर मनेन्द्रगढ़ में रामभद्राचार्य के बयानों पर सियासत गरम है।
    user_Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Local News Reporter Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    18 min ago
  • एमसीबी जिले के जनकपुर स्थित बहरासी गांव में दबंगई का एक मामला सामने आया है, जहाँ 7 से 8 लोगों ने मिलकर दाना पानी होटल के सामने एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस खुलेआम मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद जनकपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मारपीट करने वाले कुछ युवक भरतपुर और जनकपुर क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। वीडियो के वायरल होने से इलाके की कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
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    एमसीबी जिले के जनकपुर स्थित बहरासी गांव में दबंगई का एक मामला सामने आया है, जहाँ 7 से 8 लोगों ने मिलकर दाना पानी होटल के सामने एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस खुलेआम मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

इस घटना के बाद जनकपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मारपीट करने वाले कुछ युवक भरतपुर और जनकपुर क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। वीडियो के वायरल होने से इलाके की कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
    user_SM NEWS LIVE
    SM NEWS LIVE
    पत्रकार Chirmiri, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    7 hrs ago
  • केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक बड़ा और दुखद हादसा हो गया है, जहाँ पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से पाँच लोगों की मौत हो गई है। इस भयावह घटना में तीन अन्य लोग घायल भी हुए हैं।
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    केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक बड़ा और दुखद हादसा हो गया है, जहाँ पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से पाँच लोगों की मौत हो गई है। इस भयावह घटना में तीन अन्य लोग घायल भी हुए हैं।
    user_New news
    New news
    Credit reporting agency कोटमा, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कोरंधा में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि योजना के तहत कई अधूरे पड़े आवासों को सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाकर राशि निकाल ली गई है। इन आरोपों ने पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, साथ ही ऑडिट प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी संदेह उत्पन्न किया है। ग्रामीणों के अनुसार, जिन गरीब परिवारों को पक्का मकान देने का वादा किया गया था, वे आज भी अधूरे निर्माण वाले घरों में रहने को मजबूर हैं, जहाँ छत अधूरी है, प्लास्टर नहीं हुआ है और दरवाजे-खिड़कियाँ तक नहीं लगी हैं। आरोप है कि कई मामलों में अधूरे आवासों को पूर्ण दिखाने के लिए दूसरे मकानों की तस्वीरें खींची गईं और इसी आधार पर भुगतान प्रक्रिया पूरी कर राशि का आहरण कर लिया गया। वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड के बीच भारी अंतर होने का दावा किया गया है, जहाँ कई हितग्राहियों के आवास अधूरे होने के बावजूद दस्तावेजों में उन्हें पूर्ण बताया गया। ग्रामीणों ने योजना की राशि में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और बंदरबाट का आरोप लगाते हुए कहा है कि सहायता राशि पारदर्शिता के साथ हितग्राहियों तक नहीं पहुँच रही है और बीच में ही दुरुपयोग किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों को किस्तों की सही जानकारी न देने और निर्माण कार्य पूरा किए बिना ही कागजों में प्रक्रिया आगे बढ़ाने के आरोप भी लगाए गए हैं। अधूरे मकानों को पूर्ण दिखाकर सरकार द्वारा मिलने वाली 90 दिनों की मजदूरी भुगतान राशि भी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई है, जहाँ एक सचिव को तीन-तीन ग्राम पंचायतों का प्रभार सौंपने से योजनाओं की निगरानी प्रभावित हो रही है। रोजगार सहायकों और आवास मित्रों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि आरोप है कि जिम्मेदार कर्मचारी नियमित रूप से गांवों में नहीं पहुंचते और कार्य केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह गया है। सबसे गंभीर आरोप ऑडिट और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर हैं, जिसमें कर्मचारियों पर बिना हितग्राहियों के घर पहुंचे और बिना भौतिक निरीक्षण किए कागजों में प्रक्रिया पूर्ण करने का आरोप लगाया गया है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कराए गए, जबकि ऑडिट कर्मचारी कभी उनके घर पहुंचे ही नहीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम कोरंधा सहित संबंधित पंचायतों में बने सभी प्रधानमंत्री आवासों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय भौतिक जांच कराई जाए, हितग्राहियों के बयान दर्ज किए जाएं तथा दोषी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, अन्यथा यह महत्वाकांक्षी योजना अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव कमला ठाकुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव न होने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
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    छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कोरंधा में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि योजना के तहत कई अधूरे पड़े आवासों को सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाकर राशि निकाल ली गई है। इन आरोपों ने पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, साथ ही ऑडिट प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी संदेह उत्पन्न किया है।

ग्रामीणों के अनुसार, जिन गरीब परिवारों को पक्का मकान देने का वादा किया गया था, वे आज भी अधूरे निर्माण वाले घरों में रहने को मजबूर हैं, जहाँ छत अधूरी है, प्लास्टर नहीं हुआ है और दरवाजे-खिड़कियाँ तक नहीं लगी हैं। आरोप है कि कई मामलों में अधूरे आवासों को पूर्ण दिखाने के लिए दूसरे मकानों की तस्वीरें खींची गईं और इसी आधार पर भुगतान प्रक्रिया पूरी कर राशि का आहरण कर लिया गया। वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड के बीच भारी अंतर होने का दावा किया गया है, जहाँ कई हितग्राहियों के आवास अधूरे होने के बावजूद दस्तावेजों में उन्हें पूर्ण बताया गया। ग्रामीणों ने योजना की राशि में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और बंदरबाट का आरोप लगाते हुए कहा है कि सहायता राशि पारदर्शिता के साथ हितग्राहियों तक नहीं पहुँच रही है और बीच में ही दुरुपयोग किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों को किस्तों की सही जानकारी न देने और निर्माण कार्य पूरा किए बिना ही कागजों में प्रक्रिया आगे बढ़ाने के आरोप भी लगाए गए हैं। अधूरे मकानों को पूर्ण दिखाकर सरकार द्वारा मिलने वाली 90 दिनों की मजदूरी भुगतान राशि भी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई है, जहाँ एक सचिव को तीन-तीन ग्राम पंचायतों का प्रभार सौंपने से योजनाओं की निगरानी प्रभावित हो रही है। रोजगार सहायकों और आवास मित्रों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि आरोप है कि जिम्मेदार कर्मचारी नियमित रूप से गांवों में नहीं पहुंचते और कार्य केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह गया है। सबसे गंभीर आरोप ऑडिट और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर हैं, जिसमें कर्मचारियों पर बिना हितग्राहियों के घर पहुंचे और बिना भौतिक निरीक्षण किए कागजों में प्रक्रिया पूर्ण करने का आरोप लगाया गया है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कराए गए, जबकि ऑडिट कर्मचारी कभी उनके घर पहुंचे ही नहीं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम कोरंधा सहित संबंधित पंचायतों में बने सभी प्रधानमंत्री आवासों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय भौतिक जांच कराई जाए, हितग्राहियों के बयान दर्ज किए जाएं तथा दोषी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, अन्यथा यह महत्वाकांक्षी योजना अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी।

इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव कमला ठाकुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव न होने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
    user_दैनिक छत्तीसगढ़ लाईव न्यूज
    दैनिक छत्तीसगढ़ लाईव न्यूज
    Press advisory सूरजपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
  • केसीआर कोढवाही जीपीएम सीजी इंडिया में भीमगे बिजनेस ग्रुप की स्थापना की गई है। इस ग्रुप के संस्थापक राज भीमगे हैं।
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    केसीआर कोढवाही जीपीएम सीजी इंडिया में भीमगे बिजनेस ग्रुप की स्थापना की गई है। इस ग्रुप के संस्थापक राज भीमगे हैं।
    user_BHIMGE BUSSINESS GROUP. KCR
    BHIMGE BUSSINESS GROUP. KCR
    Entrepreneur मरवाही, गौरेला पेंड्रा मरवाही, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड दौरे का मुख्य केंद्र भारतीय समुदाय से जुड़े कार्यक्रम और वैश्विक रिश्ते रहेंगे।
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    प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड दौरे का मुख्य केंद्र भारतीय समुदाय से जुड़े कार्यक्रम और वैश्विक रिश्ते रहेंगे।
    user_Pradesh Khabar
    Pradesh Khabar
    Media company अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत के ग्राम बरती खुर्द में चुनावी मौसम में बड़े-बड़े वादे लेकर पहुंच रहे नेताओं को अब ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सालों से जर्जर और कीचड़ से भरी सड़क से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा अब सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है, जहाँ वे स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि खोखले वादे करने वाले नेताओं की अब गाँव में खैर नहीं। गाँव के युवाओं और अन्य ग्रामीणों ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया है, जहाँ उन्होंने एक खास गाने के साथ अपने गाँव की बदहाल सड़क का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल कर दिया है। यह वीडियो उन नेताओं के लिए एक सीधा तमाचा है जो चुनाव आते ही गाँव के विकास का दावा करते हैं, और ग्रामीण इसके माध्यम से 'सड़क नहीं तो वोट नहीं!' का सीधा संदेश दे रहे हैं। ग्रामीणों की साफ मांग है कि नेताओं को भाषण देने से पहले गाँव की इस बदहाल सड़क पर चलकर दिखाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सड़क का निर्माण जल्द शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले समय में नेताओं को वोट की जगह केवल विरोध ही मिलेगा। अब देखना यह होगा कि इस बार क्या होता है।
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    बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत के ग्राम बरती खुर्द में चुनावी मौसम में बड़े-बड़े वादे लेकर पहुंच रहे नेताओं को अब ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सालों से जर्जर और कीचड़ से भरी सड़क से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा अब सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है, जहाँ वे स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि खोखले वादे करने वाले नेताओं की अब गाँव में खैर नहीं।

गाँव के युवाओं और अन्य ग्रामीणों ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया है, जहाँ उन्होंने एक खास गाने के साथ अपने गाँव की बदहाल सड़क का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल कर दिया है। यह वीडियो उन नेताओं के लिए एक सीधा तमाचा है जो चुनाव आते ही गाँव के विकास का दावा करते हैं, और ग्रामीण इसके माध्यम से 'सड़क नहीं तो वोट नहीं!' का सीधा संदेश दे रहे हैं।

ग्रामीणों की साफ मांग है कि नेताओं को भाषण देने से पहले गाँव की इस बदहाल सड़क पर चलकर दिखाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सड़क का निर्माण जल्द शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले समय में नेताओं को वोट की जगह केवल विरोध ही मिलेगा। अब देखना यह होगा कि इस बार क्या होता है।
    user_जनता की ख़बर
    जनता की ख़बर
    Local News Reporter वाड्रफनगर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
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