विविधीकृत खेती ने बदली ग्राम भांडी निवासी सुरेंद्र जैतवार की खेती की तस्वीर बालाघाट। खेती में नवाचार और अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक साथ अपनाकर किसान अपनी आमदनी के नए रास्ते खोल सकते हैं। इसका उदाहरण वारासिवनी तहसील के ग्राम भांडी निवासी कृषक श्री सुरेंद्र जैतवार हैं, जिन्होंने कृषि विभाग की RAD (रेनफेड एरिया डेवलपमेंट) योजना का लाभ लेकर अपने खेत को विविधीकृत कृषि गतिविधियों के मॉडल के रूप में विकसित किया है। सुरेंद्र जैतवार ने खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रखते हुए अपने खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, वर्मी टांका, फलोद्यान और विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया है। इससे उनके खेत में कृषि के साथ-साथ पशुपालन एवं मत्स्यपालन को जोड़कर एक समन्वित कृषि प्रणाली विकसित हुई है। खेत में फलदार एवं उपयोगी पौधों की भरमार सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में सागौन, नीलगिरी (लिप्टन), काजू, हाथीफल, आम, केला, सेलवट और अमरूद सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। उनके खेत में इनकी संख्या 100 से अधिक है। फलदार पौधों के साथ विभिन्न उपयोगी प्रजातियों को शामिल करने से खेत की उपयोगिता और भविष्य की आय की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। इसके अलावा उन्होंने नींबू की विभिन्न किस्मों का भी रोपण किया है। खेत में अलग-अलग प्रजातियों को अपनाकर उन्होंने यह दिखाया है कि सीमित क्षेत्र में भी योजनाबद्ध तरीके से विविध कृषि गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। तालाब में मछलीपालन, मुर्गीपालन से भी जुड़ी आय सुरेंद्र जैतवार के खेत में मछलीपालन भी किया जा रहा है। उनके तालाब में रूपचंदा, जलगा, पित्ती सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। इससे उन्हें पारंपरिक कृषि के साथ मत्स्यपालन से भी आय का अवसर मिल रहा है। इसी तरह उन्होंने कड़कनाथ, बॉयलर और देसी किस्म के मुर्गे-मुर्गियों का पालन भी शुरू किया है। मुर्गीपालन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को कृषि के साथ जोड़कर उन्होंने खेत को बहुआयामी स्वरूप दिया है। हल्दी से लेकर सिंघाड़ा और जिमीकंद तक प्रयोग सुरेंद्र जैतवार खेती में नए प्रयोग करने के लिए भी जाने जाते हैं। उनके खेत में हल्दी की खेती की जा रही है। इस वर्ष उन्होंने खेती में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए सिंघाड़े और सूरन (जिमीकंद) की खेती की ओर भी रुझान दिखाया है। इस प्रकार एक ही किसान के खेत में अनाज एवं अन्य फसलों के साथ फलदार पौधे, औषधीय एवं उपयोगी फसलें, मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन और जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। योजना के सहयोग से मिला खेती को नया स्वरूप कृषि विभाग की RAD योजना के माध्यम से मिले सहयोग का लाभ उठाकर सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में विविधीकृत कृषि प्रणाली को विकसित किया है। उनका मानना है कि किसान यदि खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, फलोद्यान और अन्य गतिविधियों को जोड़ें, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। सुरेंद्र जैतवार ग्राम भांडी के उन किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने योजनाओं का लाभ लेकर उसे अपने खेत में व्यवहारिक रूप से अपनाया और कृषि गतिविधियों में विविधता लाने का प्रयास किया है। वे कृषि विभाग की योजनाओं से मिले सहयोग के लिए विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनकी खेती यह संदेश देती है कि कृषि में विविधता, नवाचार और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किसान को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
विविधीकृत खेती ने बदली ग्राम भांडी निवासी सुरेंद्र जैतवार की खेती की तस्वीर बालाघाट। खेती में नवाचार और अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक साथ अपनाकर किसान अपनी आमदनी के नए रास्ते खोल सकते हैं। इसका उदाहरण वारासिवनी तहसील के ग्राम भांडी निवासी कृषक श्री सुरेंद्र जैतवार हैं, जिन्होंने कृषि विभाग की RAD (रेनफेड एरिया डेवलपमेंट) योजना का लाभ लेकर अपने खेत को विविधीकृत कृषि गतिविधियों के मॉडल के रूप में विकसित किया है। सुरेंद्र जैतवार ने खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रखते हुए अपने खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, वर्मी टांका, फलोद्यान और विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया है। इससे उनके खेत में कृषि के साथ-साथ पशुपालन एवं मत्स्यपालन को जोड़कर एक समन्वित कृषि प्रणाली विकसित हुई है। खेत में फलदार एवं उपयोगी पौधों की भरमार सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में सागौन, नीलगिरी (लिप्टन), काजू, हाथीफल, आम, केला, सेलवट और अमरूद सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। उनके खेत में इनकी संख्या 100 से अधिक है। फलदार पौधों के साथ विभिन्न उपयोगी प्रजातियों को शामिल करने से खेत की उपयोगिता और
भविष्य की आय की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। इसके अलावा उन्होंने नींबू की विभिन्न किस्मों का भी रोपण किया है। खेत में अलग-अलग प्रजातियों को अपनाकर उन्होंने यह दिखाया है कि सीमित क्षेत्र में भी योजनाबद्ध तरीके से विविध कृषि गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। तालाब में मछलीपालन, मुर्गीपालन से भी जुड़ी आय सुरेंद्र जैतवार के खेत में मछलीपालन भी किया जा रहा है। उनके तालाब में रूपचंदा, जलगा, पित्ती सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। इससे उन्हें पारंपरिक कृषि के साथ मत्स्यपालन से भी आय का अवसर मिल रहा है। इसी तरह उन्होंने कड़कनाथ, बॉयलर और देसी किस्म के मुर्गे-मुर्गियों का पालन भी शुरू किया है। मुर्गीपालन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को कृषि के साथ जोड़कर उन्होंने खेत को बहुआयामी स्वरूप दिया है। हल्दी से लेकर सिंघाड़ा और जिमीकंद तक प्रयोग सुरेंद्र जैतवार खेती में नए प्रयोग करने के लिए भी जाने जाते हैं। उनके खेत में हल्दी की खेती की जा रही है। इस वर्ष उन्होंने खेती में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए सिंघाड़े और सूरन (जिमीकंद) की खेती की ओर
भी रुझान दिखाया है। इस प्रकार एक ही किसान के खेत में अनाज एवं अन्य फसलों के साथ फलदार पौधे, औषधीय एवं उपयोगी फसलें, मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन और जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। योजना के सहयोग से मिला खेती को नया स्वरूप कृषि विभाग की RAD योजना के माध्यम से मिले सहयोग का लाभ उठाकर सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में विविधीकृत कृषि प्रणाली को विकसित किया है। उनका मानना है कि किसान यदि खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, फलोद्यान और अन्य गतिविधियों को जोड़ें, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। सुरेंद्र जैतवार ग्राम भांडी के उन किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने योजनाओं का लाभ लेकर उसे अपने खेत में व्यवहारिक रूप से अपनाया और कृषि गतिविधियों में विविधता लाने का प्रयास किया है। वे कृषि विभाग की योजनाओं से मिले सहयोग के लिए विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनकी खेती यह संदेश देती है कि कृषि में विविधता, नवाचार और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किसान को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
- विविधीकृत खेती ने बदली ग्राम भांडी निवासी सुरेंद्र जैतवार की खेती की तस्वीर बालाघाट। खेती में नवाचार और अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक साथ अपनाकर किसान अपनी आमदनी के नए रास्ते खोल सकते हैं। इसका उदाहरण वारासिवनी तहसील के ग्राम भांडी निवासी कृषक श्री सुरेंद्र जैतवार हैं, जिन्होंने कृषि विभाग की RAD (रेनफेड एरिया डेवलपमेंट) योजना का लाभ लेकर अपने खेत को विविधीकृत कृषि गतिविधियों के मॉडल के रूप में विकसित किया है। सुरेंद्र जैतवार ने खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रखते हुए अपने खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, वर्मी टांका, फलोद्यान और विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण किया है। इससे उनके खेत में कृषि के साथ-साथ पशुपालन एवं मत्स्यपालन को जोड़कर एक समन्वित कृषि प्रणाली विकसित हुई है। खेत में फलदार एवं उपयोगी पौधों की भरमार सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में सागौन, नीलगिरी (लिप्टन), काजू, हाथीफल, आम, केला, सेलवट और अमरूद सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए हैं। उनके खेत में इनकी संख्या 100 से अधिक है। फलदार पौधों के साथ विभिन्न उपयोगी प्रजातियों को शामिल करने से खेत की उपयोगिता और भविष्य की आय की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। इसके अलावा उन्होंने नींबू की विभिन्न किस्मों का भी रोपण किया है। खेत में अलग-अलग प्रजातियों को अपनाकर उन्होंने यह दिखाया है कि सीमित क्षेत्र में भी योजनाबद्ध तरीके से विविध कृषि गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। तालाब में मछलीपालन, मुर्गीपालन से भी जुड़ी आय सुरेंद्र जैतवार के खेत में मछलीपालन भी किया जा रहा है। उनके तालाब में रूपचंदा, जलगा, पित्ती सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। इससे उन्हें पारंपरिक कृषि के साथ मत्स्यपालन से भी आय का अवसर मिल रहा है। इसी तरह उन्होंने कड़कनाथ, बॉयलर और देसी किस्म के मुर्गे-मुर्गियों का पालन भी शुरू किया है। मुर्गीपालन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को कृषि के साथ जोड़कर उन्होंने खेत को बहुआयामी स्वरूप दिया है। हल्दी से लेकर सिंघाड़ा और जिमीकंद तक प्रयोग सुरेंद्र जैतवार खेती में नए प्रयोग करने के लिए भी जाने जाते हैं। उनके खेत में हल्दी की खेती की जा रही है। इस वर्ष उन्होंने खेती में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए सिंघाड़े और सूरन (जिमीकंद) की खेती की ओर भी रुझान दिखाया है। इस प्रकार एक ही किसान के खेत में अनाज एवं अन्य फसलों के साथ फलदार पौधे, औषधीय एवं उपयोगी फसलें, मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन और जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। योजना के सहयोग से मिला खेती को नया स्वरूप कृषि विभाग की RAD योजना के माध्यम से मिले सहयोग का लाभ उठाकर सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में विविधीकृत कृषि प्रणाली को विकसित किया है। उनका मानना है कि किसान यदि खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, फलोद्यान और अन्य गतिविधियों को जोड़ें, तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। सुरेंद्र जैतवार ग्राम भांडी के उन किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने योजनाओं का लाभ लेकर उसे अपने खेत में व्यवहारिक रूप से अपनाया और कृषि गतिविधियों में विविधता लाने का प्रयास किया है। वे कृषि विभाग की योजनाओं से मिले सहयोग के लिए विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनकी खेती यह संदेश देती है कि कृषि में विविधता, नवाचार और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किसान को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।3
- बैंकों की देशव्यापी 3 दिवसीय हड़ताल स्थगित, बैंक उपभोक्ताओं को मिली राहत वारासिवनी। इंडियन बैंक एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बीच रविवार की देर रात्रि में हुई बैठक के बाद लिए गए फैसले में 28 सितम्बर, 29 सितम्बर व 30 सितम्बर को होने वाली देश व्यापी बैंक हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है। जिससे अब बैंक के आम उपभोक्ताओं को 3 दिनों तक होने वाली परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।बताया जाता है कि बैठक में छुट्टियों की मांग को लेकर कमेटी बनाने पर सहमति बनी है। विभिन्न सूत्रों, सोशल मीडिया व वेबसाइट से मिली जानकारी अनुसार इस बैठक में 3 मुद्दों पर सहमति बनने की बात सामने आई है। जिसमें आई बी ए और यू एफ बी यू की हाई लेबल कमेटी तुरंत बनाई जाएगी। यह बचे हुए शनिवारों को छुट्टी घोषित करने के मुद्दे पर चर्चा करेगी और सभी पक्षों, खासकर ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशेगी। स्केल 4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए पी एल आई स्कीम में बदलाव को लेकर आई बी ए और यूनियनों के बीच बातचीत होगी। आई बी ए सरकार के सामने यूनियनों की आपत्तियों को दूर करने के लिए संशोधन का प्रस्ताव रखेगा और अन्य लंबित मुद्दों में 8 मार्च 2024 की बैठक के मिनट्स में दर्ज बाकी मुद्दों पर भी दोनों पक्ष जल्द समाधान के लिए बातचीत करेंगे। जानकारी अनुसार इस देश व्यापी हड़ताल में देश की 7 बड़ी बैंक यूनियनें शामिल होनी थीं, जिनसे लगभग 90% से ज्यादा बैंक कर्मचारी जुड़े हैं।1
- विधायक गौरव सिंह पारधी ने किया आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान परियोजना कटंगी में पोषण माह कार्यक्रम के साथ-साथ सेवा से संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। परियोजना अंतर्गत 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है, साथ ही सेवा से संकल्प कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है।1
- *कोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियां नहीं हटा चारगांव की 18 एकड़ भूमि का कब्जा* कुरई। आदिवासी बाहुल्य कुरई विकासखंड की ग्राम पंचायत सारसडोल के ग्राम चारगांव अंतर्गत कोहकाखेड़ा में करीब 18 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खसरा नंबर 87 की उक्त भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज है, लेकिन पिछले करीब तीन वर्षों से ग्राम सिल्लौर निवासी सीताराम सनोडिया द्वारा यहां कृषि कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में तहसीलदार न्यायालय में शिकायत प्रस्तुत की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने तथा किसी प्रकार का नया कार्य नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा भूमि पर कृषि कार्य जारी रखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा वृक्षारोपण का प्रस्ताव भी रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाता है तो यहां सार्वजनिक हित में वृक्षारोपण सहित अन्य कार्य किए जा सकते हैं। अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा पूर्व में भी अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की जा चुकी हैं। आदेश की प्रति नहीं मिलने की बात मामले में आरआई राजीव सनोडिया से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि उन्हें तहसीलदार न्यायालय के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी और कब्जाधारी के बीच रिश्तेदारी होने के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। एक सप्ताह में हटेगा अतिक्रमण : तहसीलदार इस संबंध में तहसीलदार शनि पाल परतेती ने बताया कि आदेश की प्रति पटवारी एवं आरआई को प्राप्त हुई होगी। यदि प्रति नहीं मिली है तो उसे दोबारा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर शासकीय भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।2
- सेवा संकल्प यात्रा के दौरान जिले में हुए विभिन्न कार्यक्रम सिवनी। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मस्थली गुजरात के वडनगर से वाराणसी तक मोटरसाइकिल के माध्यम से निकाली जा रही सेवा यात्रा के दौरान सिवनी जिले में विभिन्न सेवा एवं जनसरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। यात्रा में शामिल सहभागियों एवं पार्टीजनों ने विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता की। यात्रा के दौरान शासकीय मेडिकल कॉलेज कंडीपार में कॉलेज भ्रमण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसके पश्चात ग्राम बंडोल स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों से आत्मीय संवाद कर उन्हें स्नेह परिधान वितरित किए गए। सेवा यात्रा के छपारा क्षेत्र में पहुंचने पर ग्राम गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की गई। वहीं छपारा स्थित राजघराना पैलेस में ‘लखपति दीदी’ एवं ‘जम्बो सीताफल’ संग्राहकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम हुआ, जिसमें स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों एवं किसानों की मेहनत, उपलब्धियों और संभावनाओं पर सार्थक चर्चा की गई। इस दौरान सेवा, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं समाज के अंतिम व्यक्ति तक जनसेवा के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।1
- 18 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण तीन साल से ग्रामीणों की शिकायत, कोर्ट के आदेश के पालन पर उठे सवाल; शासकीय जमीन पर अब भी खड़ी है फसल सिवनी/सरसडोल : आदिवासी बाहुल्य विकासखंड कुरई की ग्राम पंचायत सरसडोल अंतर्गत ग्राम चारगांव के कोहकाखेड़ा में करीब 18 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब तीन वर्षों से शिकायतें किए जाने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। वहीं, तहसीलदार न्यायालय से आदेश जारी होने के बाद भी शासकीय भूमि कब्जे से मुक्त नहीं हो सकी है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम कोहकाखेड़ा स्थित खसरा नंबर 87 की करीब 18 एकड़ भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज है। आरोप है कि ग्राम सिल्लोर निवासी सीताराम सनोडिया पिता सुखद द्वारा लंबे समय से उक्त भूमि पर कब्जा कर कृषि कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा वृक्षारोपण का प्रस्ताव भी रखा गया है। 24 फरवरी और 8 सितंबर को जारी हुए आदेश मामले में तहसीलदार न्यायालय द्वारा 24 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 8 सितंबर 2026 को पुनः आदेश जारी करते हुए आदेशित भूमि से अवैध कब्जा हटाकर शासकीय भूमि को रिक्त कराने तथा पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। आदेश में दिनांक से तीन दिवस के भीतर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई किए जाने का उल्लेख बताया जा रहा है। कार्रवाई के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें हल्का पटवारी ऋषि सनोडिया सहित राजस्व निरीक्षक एवं अन्य राजस्व अमले को शामिल किया गया है। बावजूद इसके ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी मौके से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और शासकीय भूमि पर फसल खड़ी है। आदेश की प्रति नहीं मिलने की बात मामले में राजस्व निरीक्षक राजीव सनोडिया से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें तहसीलदार के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई में देरी के कारण कब्जाधारी के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि हल्का पटवारी और कब्जाधारी के रिश्तेदारी संबंध होने के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। एक सप्ताह में कब्जा हटाने का दावा इस संबंध में तहसीलदार शनि पाल परतेती ने बताया कि आदेश की प्रति पटवारी और राजस्व निरीक्षक को मिली होगी। यदि प्रति नहीं मिली है तो उसे दोबारा उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर अवैध कब्जा हटाने की बात कही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि शासकीय भूमि को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराकर ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के अनुसार यहां वृक्षारोपण कराया जाए तथा पूर्व में जारी न्यायालयीन आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए4
- सेवा संकल्प अभियान यात्रा का बंडोल में स्वागत...!!(२८९२६),, सेवा संकल्प अभियान यात्रा का बंडोल में स्वागत बड़नगर से वाराणसी निकली यात्रा का हुआ स्वागत, नन्हे बच्चों को वितरित किए वस्त्र बंडोल/सिवनी। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत जन्मभूमि से कर्मभूमि तक की भावना के साथ बड़नगर से वाराणसी तक निकाली जा रही सेवा यात्रा का सिवनी जिले में आगमन हुआ। यात्रा के बंडोल पहुंचने पर आंगनवाड़ी भवन परिसर में कार्यक्रम आयोजित कर यात्रा में शामिल सदस्यों का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष मीना बिसेन, सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन, संतोष अग्रवाल सहित जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अतिथियों ने सेवा यात्रा का स्वागत करते हुए सेवा, समर्पण एवं सामाजिक सरोकारों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र के नन्हे-मुन्ने बच्चों को वस्त्रों का वितरण भी किया गया। वस्त्र पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने सेवा और सहयोग की भावना को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम के बाद जनप्रतिनिधियों ने आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, व्यवस्थाओं एवं गतिविधियों की जानकारी ली तथा केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सेवा संकल्प अभियान की यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए वाराणसी पहुंचेगी, जहां सेवा एवं सामाजिक समरसता का संदेश आगे बढ़ाया जाएगा।4
- कटेधरा-खवासा मार्ग पर हादसा: बाइक के सामने आया बारहसिंगा, बाइक सवार गंभीर घायल कटेधरा से खवासा मुख्य सड़क मार्ग पर सोमवार को वन्य प्राणी के अचानक सामने आ जाने से एक बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा बाघदेव मंदिर के पास हुआ। जानकारी के अनुसार बाइक क्रमांक एमपी 22 जेडडी 2115 पर सवार सत्येन्द्र पिता प्रेमलाल चौधरी निवासी गोपालगंज सिवनी कटंगी से तिरोड़ी की ओर जा रहे थे। तभी अचानक बाइक के सामने एक बारहसिंगा आ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम में बाइक अनियंत्रित हो गई और सवार सड़क पर गिर गया, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई।1