हमीरपुर :बारिश में तीन कच्चे मकान गिरे, परिवारों के सामने रहने का संकट एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर आवासीय मदद की लगाई गुहार मौदहा, हमीरपुर। लगातार हो रही बारिश के चलते मौदहा तहसील क्षेत्र के ग्राम खैर में तीन कच्चे मकान धराशायी हो गए। मकान गिरने से पीड़ित परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी कल्लू पुत्र रामआसरे ने उपजिलाधिकारी मौदहा को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि लगातार बारिश के कारण पहले उसके कच्चे मकान का कुछ हिस्सा गिर गया था। इसके बाद अधिक बारिश होने से पूरा मकान भी भरभराकर गिर गया। मकान गिरने के बाद परिवार के रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है और वह आसपास में रहकर किसी तरह जीवन गुजार रहा है। इसी तरह शत्रुघन पुत्र रामरतन और सुरेन्द्र पुत्र भवानीदीन, दोनों निवासी ग्राम खैर, के कच्चे मकान भी बारिश के चलते गिर गए हैं। मकान गिरने से तीनों परिवारों के सामने रहने और बरसात से बचाव की समस्या खड़ी हो गई है। पीड़ितों ने प्रशासन से जल्द मौके का निरीक्षण कर आवासीय सहायता एवं रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में मकान गिरने से परिवारों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
हमीरपुर :बारिश में तीन कच्चे मकान गिरे, परिवारों के सामने रहने का संकट एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर आवासीय मदद की लगाई गुहार मौदहा, हमीरपुर। लगातार हो रही बारिश के चलते मौदहा तहसील क्षेत्र के ग्राम खैर में तीन कच्चे मकान धराशायी हो गए। मकान गिरने से पीड़ित परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी कल्लू पुत्र रामआसरे ने उपजिलाधिकारी मौदहा को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि लगातार बारिश के कारण पहले उसके कच्चे मकान का कुछ हिस्सा गिर गया था। इसके बाद अधिक बारिश होने से पूरा मकान भी भरभराकर गिर गया। मकान गिरने के बाद
परिवार के रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है और वह आसपास में रहकर किसी तरह जीवन गुजार रहा है। इसी तरह शत्रुघन पुत्र रामरतन और सुरेन्द्र पुत्र भवानीदीन, दोनों निवासी ग्राम खैर, के कच्चे मकान भी बारिश के चलते गिर गए हैं। मकान गिरने से तीनों परिवारों के सामने रहने और बरसात से बचाव की समस्या खड़ी हो गई है। पीड़ितों ने प्रशासन से जल्द मौके का निरीक्षण कर आवासीय सहायता एवं रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में मकान गिरने से परिवारों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
- हमीरपुर :बारिश में तीन कच्चे मकान गिरे, परिवारों के सामने रहने का संकट एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर आवासीय मदद की लगाई गुहार मौदहा, हमीरपुर। लगातार हो रही बारिश के चलते मौदहा तहसील क्षेत्र के ग्राम खैर में तीन कच्चे मकान धराशायी हो गए। मकान गिरने से पीड़ित परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी कल्लू पुत्र रामआसरे ने उपजिलाधिकारी मौदहा को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि लगातार बारिश के कारण पहले उसके कच्चे मकान का कुछ हिस्सा गिर गया था। इसके बाद अधिक बारिश होने से पूरा मकान भी भरभराकर गिर गया। मकान गिरने के बाद परिवार के रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है और वह आसपास में रहकर किसी तरह जीवन गुजार रहा है। इसी तरह शत्रुघन पुत्र रामरतन और सुरेन्द्र पुत्र भवानीदीन, दोनों निवासी ग्राम खैर, के कच्चे मकान भी बारिश के चलते गिर गए हैं। मकान गिरने से तीनों परिवारों के सामने रहने और बरसात से बचाव की समस्या खड़ी हो गई है। पीड़ितों ने प्रशासन से जल्द मौके का निरीक्षण कर आवासीय सहायता एवं रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में मकान गिरने से परिवारों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।2
- हमीरपुर मानसून की भारी बारिश और संभावित बाल को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 36 चौकियां तैनात हमीरपुर। मानसून की भारी बारिश और संभावित बाढ़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। प्रभावित क्षेत्रों में समय से चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में 36 बाढ़ चौकियां स्थापित कर चिकित्सा टीमों की तैनाती की गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार आपदा की स्थिति में त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों का पूर्वाभ्यास और मॉकड्रिल कराया जा चुका है। सभी ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) सक्रिय कर दी गई हैं। चिकित्सा टीमों को जीवनरक्षक दवाओं के साथ ओआरएस, जिंक टैबलेट, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर और एंटी स्नेक वेनम (ASV) समेत जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में एएसवी, एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) और अन्य आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग बाढ़ और जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहा है। जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा दल भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील की है।1
- विद्युत उपकेंद्र की छत टपकी, कंट्रोल-रूम में पानी फैला:कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कर रहे काम, मरम्मत की मांग विद्युत उपकेंद्र की छत टपकी, कंट्रोल-रूम में पानी फैला:कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कर रहे काम, मरम्मत की मांग तिंदवारी पिछले एक सप्ताह से ज्यादा दोनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच तिंदवारी पपरेंदा मार्ग पर स्थित बिजली सब स्टेशन के परिसर पानी से भर गया। छत से पानी टपकने के कारण बिजली उपकरणों के पास नमी बढ़ गई है, जिससे शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने का खतरा पैदा हो गया है। इसके बावजूद संविदाकर्मी जोखिम उठाकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं। बारिश के चलते उपकेंद्र के कंट्रोल रूम की छत से लगातार पानी टपक रहा है। फर्श पर कई स्थानों पर पानी जमा हो गया है। स्विच, कंट्रोल पैनल और अन्य विद्युत उपकरणों के आसपास नमी बढ़ने से किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है।संविदा विद्युत कर्मियों का कहना है कि उपकेंद्र की हर बरसात में छत टपकती है। इस समस्या की कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें जान जोखिम में डालकर ऐसे माहौल में काम करना पड़ रहा है, जहां जरा सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। बिजली आपूर्ति पर भी मंडरा रहा खतरा स्थानीय लोगों ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि कंट्रोल रूम में शॉर्ट सर्किट हो गया तो पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। साथ ही ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।विद्युत कर्मियों ने उपकेंद्र भवन की तत्काल मरम्मत कराने और कंट्रोल रूम को सुरक्षित बनाने की मांग की है। उन्होंने बरसात के मौसम में वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी अपील की है, ताकि बिजली आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।1
- बांदा उ.प्र अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आवाह्न पर व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष माननीय अजय राय पूर्व मंत्री के निर्देशन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में भेदभाव के खिलाफ लड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ संघी ने जो FIR कराई है वह राजनैतिक द्वेष भाव से पूर्ण है, कांग्रेस पार्टी इसको अनैतिक व अनुचित मानते हुए इसका विरोध करती है। भाजपा-संघ को उखाड़े बिना भेदभाव, छुआछूत और अपमान से आजादी नहीं मिलेगी। इस विषय को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय से लेकर रेलवे स्टेशन तक विरोध प्रदर्शन किया गया। बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया से रूबरू होते हुए बतलाया कि "जननेता राहुल गांधी पर FIR हो गई है, पता है क्यूँ क्योंकि उन्होंने देश के सीनियर दलित नेता के साथ हुए जातिगत भेदभाव पर आरएसएस और भाजपा को नंगा किया था! उन्होंने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच के जातिगत आधार पर शुद्धिकरण का विरोध किया था। क्या अब संघियों–भाजपाइयों के राज में भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ना भी अपराध हो चुका है? ये संघी ये भूल रहे हैं कि आजादी से पहले जो गांधी जी व दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे, आज आजादी के 79 साल बाद उसी गांधी के वंशज राहुल गांधी को दलितों के सम्मान की लड़ाई लड़ने के बदले मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ये राहुल गांधी है, ये फ्लावर नहीं फायर है अगर इन्होंने ठान लिया है तो देश को संघी भेदभाव जातिगत छुआछूत से आजादी दिला कर ही रहेंगे। और यह आजादी कब मिलेगी जब इस देश से बीजेपी और आरएसएस जड़ से उखड़ जाएगा। क्योंकि जब तक इस देश में आरएसएस और भाजपा रहेगी, तब तक इस देश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं को इंसाफ किसी कीमत पर नहीं मिल सकता। अगर शोषितों और वंचितों को भेदभाव और छुआछूत से आजादी चाहिए, अगर समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार चाहिए तो सबसे पहले भाजपा औऱ संघ को उखाड़ना होगा। क्योंकि सारी बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड की जड़ संघी और भाजपाई हैं। आप खुद सोचिए कि जब इस देश में राज्यसभा के नेता विपक्ष भेदभाव और छुआछूत से सुरक्षित नहीं है तो आम गरीब जनता की बात क्या ही करें। दलितों के प्रति संघियों की घृणा का अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि बीते दिनांक 08 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी एक जनसभा को संबोधित करने के लिए उत्तराखंड के हल्द्वानी गए थे। यहां एक रामलीला मंच पर जनसभा को संबोधित करने के बाद खरगे जी जैसे ही मंच से उतरे, उसके महज कुछ ही घंटे बाद तमाम संघी स्वयंसेवक और भाजपाई कार्यकर्ताओं ने रामलीला मंच पर हवन करके उस मंच का शुद्धिकरण किया। पता है क्यों क्योंकि खरगे जी दलित हैं। इन संघियों की नजर में दलित इंसान नहीं होते है। ये वही संघी और भाजपाई हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बंगले में जाने से पहले उस बंगले को गंगाजल से धुलवाया था। क्योंकि इससे पहले उस बंगले में अखिलेश यादव के रूप में एक पिछड़ा मुख्यमंत्री रहता था। पिछड़ों और दलितों के प्रति भाजपा की सोच बहुत जहरीली है। ये लोग दलितों और पिछड़ों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। एक बात और कि खुद को ओबीसी बताकर वोट मांगने वाले नरेंद्र मोदी खुद दलितों-पिछड़ों की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। वो भले ही चीख-चीख कर खुद को पिछड़ों का मसीहा बताते हैं, मगर उनके कारनामों से साफ लगता है कि मोदी जी का मन और मस्तिष्क दलितों और पिछड़ों के प्रति भेदभाव और संकीर्णता से सना हुआ है। अगर मोदी जी का इरादा साफ रहा होता तो किस जाहिल संघी और भाजपाई की औकात थी, जो एक दलित नेता के साथ भेदभाव करता, जो पिछड़े मुख्यमंत्री को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की हिम्मत करता? इसलिए आपको समझना पड़ेगा कि संघियों की तरह मोदी का इरादा भी समाज के पिछड़ों, दलितों और शोषित वर्गों को न्याय दिलाना नहीं , बल्कि उनका चुनावी इस्तेमाल करना है। उनके नाम पर केवल वोट लेना है। बीते दिनों आपने देखा होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदाय को उनका हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, मगर प्रधानमंत्री खुलेआम जातिगत जनगणना का विरोध करते रहे हैं। वो चुनाव रैलियों में खुद को ओबीसी जरूर बताते हैं, मगर ओबीसी को न्याय देने की बात पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि इस देश में जाति है ही नहीं। क्या अब वो प्रधानमंत्री मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान के बाद बता सकते हैं कि देश में जाति है कि नहीं ? दरअसल, प्रधानमंत्री जिस संघ की जिस राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं, वो पाठशाला वंचित वर्गों के शोषण की प्रयोगशाला है। उनका चरित्र जिस विचारधारा की देन है, वो विचारधारा ही ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की बर्बर शोषक है। ये दिखावे के लिए इन वर्गों का हितैषी बनने का नाटक तो जरूर करते हैं, मगर असलियत में ये इन शोषित वर्गों के शत्रु हैं। अगर स्वतंत्रता, समता और सम्मान चाहिए तो सबसे पहले भाजपा और संघ को उखाड़ना होगा क्योंकि इनके रहते आपको भेदभाव, छुआछूत, अपमान और शोषण से आजादी नहीं मिल सकती है।"4
- baris se joojh rahe yah vyakti jo panee aana jana raj hamare gau ke pradhan dekh kar chale jate lekin kuchh kar nahi rahe aap logo se gujaris hai hamare gau moongus me bhi rad banawai jaay pradhan se gujaris hai jald se jald a kar dekhe1
- लोटन प्रसाद प्रेस रिपोर्टर भरुआसुमेरपुर ( हमीरपुर) नेशनल हाइवे चौतिस यानी खूनी हाइवे लाखों रुपए की प्रतिदिन टौल टैक्स वसुलने वाली कम्पनी की हिटलर शाही से नेशनल हाइवे चौतिस गड्ढों में तब्दील हो गया।जगह जगह मिनी तालाब का रुप धारण कर लिया है। जिससे आम दिन होने वाली दुर्घटनाओं में और बढ़ोतरी हो गई है आम जन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। लेकिन लाखों रुपए की प्रतिदिन टोल टैक्स वसूलने वाली कम्पनियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही।शायद किसी बड़े हादसे का इन्तजार कर रही है। लोटन प्रसाद प्रेस रिपोर्टर भरुआसुमेरपुर ( हमीरपुर) नेशनल हाइवे चौतिस यानी खूनी हाइवे लाखों रुपए की प्रतिदिन टौल टैक्स वसुलने वाली कम्पनी की हिटलर शाही से नेशनल हाइवे चौतिस गड्ढों में तब्दील हो गया।जगह जगह मिनी तालाब का रुप धारण कर लिया है। जिससे आम दिन होने वाली दुर्घटनाओं में और बढ़ोतरी हो गई है आम जन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। लेकिन लाखों रुपए की प्रतिदिन टोल टैक्स वसूलने वाली कम्पनियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही।शायद किसी बड़े हादसे का इन्तजार कर रही है।4
- गोखरही में बारिश नहीं, बदइंतजामी का सैलाब; चार घर ढहे, जिम्मेदारियों पर भी उठे सवाल बांदा/तिंदवारी। गोखरही में बारिश ने गांव को पानी में डुबो दिया, लेकिन सवाल सिर्फ आसमान से बरसे पानी का नहीं, जमीन पर पसरी व्यवस्था की नाकामी का भी है। कमर तक पानी, गलियों में तेज बहाव और घरों में कैद जिंदगी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।लगातार बारिश में राममूरत, बबलू सिंह, रवि यादव और रज्जू के कच्चे मकान ढह गए। राममूरत का घर रात दो बजे भरभराकर गिरा और गृहस्थी मलबे में दफन हो गई। कई परिवार सड़क और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं, जबकि सड़ा भूसा मवेशियों के लिए भी संकट बन गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि हर बरसात में यही त्रासदी दोहराती है, फिर भी स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में सचिव अजित पाल की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि सचिव का कहना है कि रात में ही जेसीबी लगाकर पानी निकासी शुरू करा दी गई थी।सवाल यह है कि राहत के लिए जेसीबी हर बार बारिश के बाद ही क्यों जागती है? अगर स्थायी नाला समय रहते बनता, तो क्या गांव को हर बरसात में पानी की कैद भुगतनी पड़ती? यह सिर्फ जलभराव नहीं, विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच पसरी खाई का आईना है।1
- हमीरपुर :बांध का पानी नाले में आया, ओवरफ्लो से गांव में घुसा पानी जलनिकासी की व्यवस्था न होने से ग्रामीण परेशान, आवागमन हुआ मुश्किल मौदहा, हमीरपुर। मौदहा विकासखंड क्षेत्र के पाटनपुर गांव में बांध का पानी मुख्य नाले में आने के बाद नाला ओवरफ्लो हो गया। नाले का पानी अब गांव की आबादी में घुसने लगा है, जिससे ग्रामीणों के घरों क़े सामने जलभराव की समस्या खड़ी हो गई है और लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, नाले के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पानी निकासी का रास्ता न होने के कारण लगातार बढ़ता पानी गांव की ओर फैल रहा है। इससे ग्रामीणों को घरों से निकलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था कराने और नाले के पानी को आबादी में घुसने से रोकने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते पानी की निकासी नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।2