लद्दाख में एलजी द्वारा शराब नीति लागू किए जाने के बाद से नई शराब की दुकानें खुलने लगी हैं। कई संस्थानों, लद्दाख में एलजी द्वारा शराब नीति लागू किए जाने के बाद से नई शराब की दुकानें खुलने लगी हैं। कई संस्थानों, धार्मिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन यूटी प्रशासन की बेशर्मी के कारण स्कालज़ंग्लिंग में भी एक नई शराब की दुकान खोल दी गई है। यह दुकान स्कालज़ंग्लिंग-अग्लिंग रोड पर मेडिकल स्टोर के नीचे खोली गई है, जहाँ शराब पीने वालों का आना-जाना शुरू हो गया है। जो लोग पहले शराब नहीं पीते थे, उनके घरों के सामने शराब की दुकानें खुलने से वे भी इसकी ओर आकर्षित होने लगे हैं और अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। यह बहुत दुख की बात है। अगर लद्दाख जैसी जगह पर 20–25 नई शराब की दुकानें खोल दी जाएँगी, तो यहाँ के युवाओं का भविष्य क्या होगा? शराब की दुकानें खोलने वालों को शर्म आनी चाहिए। वे अपना एक घर चलाने के लिए हजारों घरों को बर्बाद कर रहे हैं। एलजी साहब को भी लद्दाख के भविष्य के बारे में सोच-समझकर काम करना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता, तो आज लद्दाख की स्थिति ऐसी नहीं होती। शराब से यूटी प्रशासन को अच्छा-खासा राजस्व मिलता होगा, लेकिन फिर डीडीएसी सेंटर के कर्मचारियों को एक साल से वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा है? अगर यूटी प्रशासन को शराब से इतना पैसा मिल रहा है, तो दिव्यांगजनों द्वारा नई पेंशन के लिए किए गए आवेदनों का समय पर निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है? यह बेहद शर्म की बात है। हम सभी लद्दाखवासियों को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है। हमें दूसरे शहरों की तरह घरों से बाहर निकलकर शराब की इस गलत नीति के खिलाफ जोरदार आवाज उठानी चाहिए। मैं, त्सेवांग दोरजे, अध्यक्ष, लासमोन सोसाइटी, दिनांक 05/10/2026 को इस गलत नीति के खिलाफ भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा करता हूँ। यह ज्ञापन हम पहले भी एलजी साहब को सौंप चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
लद्दाख में एलजी द्वारा शराब नीति लागू किए जाने के बाद से नई शराब की दुकानें खुलने लगी हैं। कई संस्थानों, लद्दाख में एलजी द्वारा शराब नीति लागू किए जाने के बाद से नई शराब की दुकानें खुलने लगी हैं। कई संस्थानों, धार्मिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन यूटी प्रशासन की बेशर्मी के कारण स्कालज़ंग्लिंग में भी एक नई शराब की दुकान खोल दी गई है। यह दुकान स्कालज़ंग्लिंग-अग्लिंग रोड पर मेडिकल स्टोर के नीचे खोली गई है, जहाँ शराब पीने वालों का आना-जाना शुरू हो गया है। जो लोग पहले शराब नहीं पीते थे, उनके घरों के सामने शराब की दुकानें खुलने से वे भी इसकी ओर आकर्षित होने लगे हैं और अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। यह बहुत दुख की बात है। अगर लद्दाख जैसी जगह पर 20–25 नई शराब की दुकानें खोल दी जाएँगी, तो यहाँ के युवाओं का भविष्य क्या होगा? शराब की दुकानें खोलने वालों को शर्म आनी चाहिए। वे अपना एक घर चलाने के लिए हजारों घरों को बर्बाद कर रहे हैं। एलजी साहब को भी लद्दाख के भविष्य के बारे में सोच-समझकर काम करना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता, तो आज लद्दाख की स्थिति ऐसी नहीं होती। शराब से यूटी प्रशासन को अच्छा-खासा राजस्व मिलता होगा, लेकिन फिर डीडीएसी सेंटर के कर्मचारियों को एक साल से वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा है? अगर यूटी प्रशासन को शराब से इतना पैसा मिल रहा है, तो दिव्यांगजनों द्वारा नई पेंशन के लिए किए गए आवेदनों का समय पर निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है? यह बेहद शर्म की बात है। हम सभी लद्दाखवासियों को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है। हमें दूसरे शहरों की तरह घरों से बाहर निकलकर शराब की इस गलत नीति के खिलाफ जोरदार आवाज उठानी चाहिए। मैं, त्सेवांग दोरजे, अध्यक्ष, लासमोन सोसाइटी, दिनांक 05/10/2026 को इस गलत नीति के खिलाफ भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा करता हूँ। यह ज्ञापन हम पहले भी एलजी साहब को सौंप चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
- लद्दाख में एलजी द्वारा शराब नीति लागू किए जाने के बाद से नई शराब की दुकानें खुलने लगी हैं। कई संस्थानों, लद्दाख में एलजी द्वारा शराब नीति लागू किए जाने के बाद से नई शराब की दुकानें खुलने लगी हैं। कई संस्थानों, धार्मिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन यूटी प्रशासन की बेशर्मी के कारण स्कालज़ंग्लिंग में भी एक नई शराब की दुकान खोल दी गई है। यह दुकान स्कालज़ंग्लिंग-अग्लिंग रोड पर मेडिकल स्टोर के नीचे खोली गई है, जहाँ शराब पीने वालों का आना-जाना शुरू हो गया है। जो लोग पहले शराब नहीं पीते थे, उनके घरों के सामने शराब की दुकानें खुलने से वे भी इसकी ओर आकर्षित होने लगे हैं और अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। यह बहुत दुख की बात है। अगर लद्दाख जैसी जगह पर 20–25 नई शराब की दुकानें खोल दी जाएँगी, तो यहाँ के युवाओं का भविष्य क्या होगा? शराब की दुकानें खोलने वालों को शर्म आनी चाहिए। वे अपना एक घर चलाने के लिए हजारों घरों को बर्बाद कर रहे हैं। एलजी साहब को भी लद्दाख के भविष्य के बारे में सोच-समझकर काम करना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता, तो आज लद्दाख की स्थिति ऐसी नहीं होती। शराब से यूटी प्रशासन को अच्छा-खासा राजस्व मिलता होगा, लेकिन फिर डीडीएसी सेंटर के कर्मचारियों को एक साल से वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा है? अगर यूटी प्रशासन को शराब से इतना पैसा मिल रहा है, तो दिव्यांगजनों द्वारा नई पेंशन के लिए किए गए आवेदनों का समय पर निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है? यह बेहद शर्म की बात है। हम सभी लद्दाखवासियों को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचने की जरूरत है। हमें दूसरे शहरों की तरह घरों से बाहर निकलकर शराब की इस गलत नीति के खिलाफ जोरदार आवाज उठानी चाहिए। मैं, त्सेवांग दोरजे, अध्यक्ष, लासमोन सोसाइटी, दिनांक 05/10/2026 को इस गलत नीति के खिलाफ भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा करता हूँ। यह ज्ञापन हम पहले भी एलजी साहब को सौंप चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।1
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- भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के शुभ अवसर पर आज देशभर के साथ-साथ सरस्वती विद्या मंदिर भुंतर में एक बेहद भव्य और गौरवमयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ठीक सुबह 11:00 बजे पूरा विद्यालय परिसर 'वंदे मातरम' के ओजस्वी स्वर से गुंजायमान हो उठा। देश-विदेश में एक ही समय पर एक साथ गूंजे इस राष्ट्रभक्ति के गान ने हर किसी को देशभक्ति के भाव से सराबोर कर दिया। इस ऐतिहासिक और गरिमापूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सपना चौधरी जी, मुख्य वक्ता के रूप में संजीव शर्मा जी और प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सूद जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्थानीय पंचायत प्रधान, विद्यालय के प्रधानाचार्य, सभी आचार्य वृंद, बच्चों के माता-पिता तथा क्षेत्र के कई अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे। सभी ने एक साथ मिलकर पूरे सम्मान और गौरवमयी तरीके से वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया और राष्ट्रगीत के 150वें वर्ष के इस ऐतिहासिक पड़ाव को स्मरणीय बनाया। भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के शुभ अवसर पर आज देशभर के साथ-साथ सरस्वती विद्या मंदिर भुंतर में एक बेहद भव्य और गौरवमयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ठीक सुबह 11:00 बजे पूरा विद्यालय परिसर 'वंदे मातरम' के ओजस्वी स्वर से गुंजायमान हो उठा। देश-विदेश में एक ही समय पर एक साथ गूंजे इस राष्ट्रभक्ति के गान ने हर किसी को देशभक्ति के भाव से सराबोर कर दिया। इस ऐतिहासिक और गरिमापूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सपना चौधरी जी, मुख्य वक्ता के रूप में संजीव शर्मा जी और प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सूद जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्थानीय पंचायत प्रधान, विद्यालय के प्रधानाचार्य, सभी आचार्य वृंद, बच्चों के माता-पिता तथा क्षेत्र के कई अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे। सभी ने एक साथ मिलकर पूरे सम्मान और गौरवमयी तरीके से वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया और राष्ट्रगीत के 150वें वर्ष के इस ऐतिहासिक पड़ाव को स्मरणीय बनाया।1
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