CM ने 2 साल पहले की पुल बनाने की घोषणाः अब फिर डूबी पुलिया; दूसरा रास्ता नहीं होने से ग्रामीण पानी के बीच निकल रहे लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:- राकेश सेन बीना :-बीना भोपाल रोड पर रामनगर के पास सिलार नदी की पुलिया बारिश में डूब गई है। गढ़ा-पड़रिया गांव का मुख्य रास्ता पिछले दो दिनों से बंद है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 सितंबर 2024 को सिलार नदी पर 4.5 करोड़ रुपए से पुल बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। दूसरा रास्ता नहीं होने से ग्रामीण पानी के बीच से पुलिया पार कर रहे हैं। तीन से चार फीट ऊंची है पुलिया लगातार बारिश के कारण सिलार नदी का पानी पुलिया के ऊपर से बह रहा है। पानी का बहाव तेज होने पर यहां से निकलना खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में पुलिया कई बार पूरी तरह डूब जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन साल पहले एक युवक पुलिया पार करते समय पानी में बह गया था। अगले दिन उसका शव मिला था। इसके बाद भी पुलिया की जगह ऊंचा पुल बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। गांव तक पहुंचने का यही मुख्य रास्ता गढ़ा-पड़रिया जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है। पुलिया डूबने पर ग्रामीणों का शहर से संपर्क प्रभावित हो जाता है। जरूरी काम के लिए भी उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। पुल की घोषणा के बाद भी काम नहीं शुरू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 सितंबर 2024 को बीना कृषि उपज मंडी में आयोजित सभा में सिलार नदी पर पुल के लिए 4.5 करोड़ रुपए की स्वीकृति की घोषणा की थी। करीब दो साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। पुलिया पर सुरक्षा के इंतजाम की मांग उप सरपंच साहब सिंह समेत ग्रामीणों ने बताया कि पानी आने के बाद भी लोग मजबूरी में पुलिया पार करते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को पानी बढ़ने पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करने चाहिए। पहले भी चक्काजाम कर चुके हैं ग्रामीण विधायक निर्मला सप्रे गांव का दौरा कर समस्या देख चुकी हैं। ग्रामीण पुल निर्माण की मांग को लेकर पहले चक्काजाम भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि ऊंचा पुल बनने से ही हर साल बारिश में रास्ता बंद होने की समस्या खत्म होगी।
CM ने 2 साल पहले की पुल बनाने की घोषणाः अब फिर डूबी पुलिया; दूसरा रास्ता नहीं होने से ग्रामीण पानी के बीच निकल रहे लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:- राकेश सेन बीना :-बीना भोपाल रोड पर रामनगर के पास सिलार नदी की पुलिया बारिश में डूब गई है। गढ़ा-पड़रिया गांव का मुख्य रास्ता पिछले दो दिनों से बंद है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 सितंबर 2024 को सिलार नदी पर 4.5 करोड़ रुपए से पुल बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। दूसरा रास्ता नहीं होने से ग्रामीण पानी के बीच से पुलिया पार कर रहे हैं। तीन से चार फीट ऊंची है पुलिया लगातार बारिश के कारण सिलार नदी का पानी पुलिया के ऊपर से बह रहा है। पानी का बहाव तेज होने पर यहां से निकलना खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में पुलिया कई बार पूरी तरह डूब जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन साल पहले एक युवक पुलिया पार करते समय पानी में बह गया था। अगले दिन उसका शव मिला था। इसके बाद भी पुलिया की जगह ऊंचा पुल बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। गांव तक पहुंचने का यही मुख्य रास्ता गढ़ा-पड़रिया जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है। पुलिया डूबने पर ग्रामीणों का शहर से संपर्क प्रभावित हो जाता है। जरूरी काम के लिए भी उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। पुल की घोषणा के बाद भी काम नहीं शुरू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 सितंबर 2024 को बीना कृषि उपज मंडी में आयोजित सभा में सिलार नदी पर पुल के लिए 4.5 करोड़ रुपए की स्वीकृति की घोषणा की थी। करीब दो साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। पुलिया पर सुरक्षा के इंतजाम की मांग उप सरपंच साहब सिंह समेत ग्रामीणों ने बताया कि पानी आने के बाद भी लोग मजबूरी में पुलिया पार करते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को पानी बढ़ने पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करने चाहिए। पहले भी चक्काजाम कर चुके हैं ग्रामीण विधायक निर्मला सप्रे गांव का दौरा कर समस्या देख चुकी हैं। ग्रामीण पुल निर्माण की मांग को लेकर पहले चक्काजाम भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि ऊंचा पुल बनने से ही हर साल बारिश में रास्ता बंद होने की समस्या खत्म होगी।
- CM ने 2 साल पहले की पुल बनाने की घोषणाः अब फिर डूबी पुलिया; दूसरा रास्ता नहीं होने से ग्रामीण पानी के बीच निकल रहे लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:- राकेश सेन बीना :-बीना भोपाल रोड पर रामनगर के पास सिलार नदी की पुलिया बारिश में डूब गई है। गढ़ा-पड़रिया गांव का मुख्य रास्ता पिछले दो दिनों से बंद है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 सितंबर 2024 को सिलार नदी पर 4.5 करोड़ रुपए से पुल बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। दूसरा रास्ता नहीं होने से ग्रामीण पानी के बीच से पुलिया पार कर रहे हैं। तीन से चार फीट ऊंची है पुलिया लगातार बारिश के कारण सिलार नदी का पानी पुलिया के ऊपर से बह रहा है। पानी का बहाव तेज होने पर यहां से निकलना खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में पुलिया कई बार पूरी तरह डूब जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन साल पहले एक युवक पुलिया पार करते समय पानी में बह गया था। अगले दिन उसका शव मिला था। इसके बाद भी पुलिया की जगह ऊंचा पुल बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। गांव तक पहुंचने का यही मुख्य रास्ता गढ़ा-पड़रिया जाने के लिए यही मुख्य रास्ता है। पुलिया डूबने पर ग्रामीणों का शहर से संपर्क प्रभावित हो जाता है। जरूरी काम के लिए भी उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। पुल की घोषणा के बाद भी काम नहीं शुरू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 सितंबर 2024 को बीना कृषि उपज मंडी में आयोजित सभा में सिलार नदी पर पुल के लिए 4.5 करोड़ रुपए की स्वीकृति की घोषणा की थी। करीब दो साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। पुलिया पर सुरक्षा के इंतजाम की मांग उप सरपंच साहब सिंह समेत ग्रामीणों ने बताया कि पानी आने के बाद भी लोग मजबूरी में पुलिया पार करते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को पानी बढ़ने पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करने चाहिए। पहले भी चक्काजाम कर चुके हैं ग्रामीण विधायक निर्मला सप्रे गांव का दौरा कर समस्या देख चुकी हैं। ग्रामीण पुल निर्माण की मांग को लेकर पहले चक्काजाम भी कर चुके हैं। उनका कहना है कि ऊंचा पुल बनने से ही हर साल बारिश में रास्ता बंद होने की समस्या खत्म होगी।1
- बीना–आगासौद रोड बनी ‘तालाब’, गड्ढों में तैरकर हुआ अनोखा प्रदर्शन! सड़क है या स्विमिंग पूल? बीना–आगासौद रोड पर गहरे गड्ढों और उनमें भरे पानी ने राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बदहाल सड़क के खिलाफ पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर ने स्थानीय लोगों के साथ गड्ढों में उतरकर तैरते हुए अनोखा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के जरिए जिम्मेदारों को आईना दिखाते हुए सवाल उठाया गया कि जब सड़क पर चलना जान जोखिम में डालना बन जाए, तो आखिर जनता अपनी फरियाद लेकर जाए कहां?1
- पक्की सड़क के अभाव में गर्भ में जुड़वा बच्चों की मौत का दर्द, अब कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर मासूम बीना के ग्राम मलिया से बेलई तक करीब 2 किमी सड़क बरसात में बन जाती है दलदल, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई पक्की सड़क की गुहार लोकल न्यूज बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत पक्की सड़क के अभाव में गर्भ में जुड़वा बच्चों की मौत का दर्द, अब कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर मासूम बीना के ग्राम मलिया से बेलई तक करीब 2 किमी सड़क बरसात में बन जाती है दलदल, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई पक्की सड़क की गुहार बीना। सरकार गांव-गांव तक सड़क और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन बीना तहसील के ग्राम मलिया की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। मलिया से बेलई तक जाने वाला करीब दो किलोमीटर का रास्ता आज भी पक्की सड़क का इंतजार कर रहा है। बारिश के दौरान यही रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। पांच घंटे की मशक्कत के बाद अस्पताल पहुंची थी गर्भवती महिला ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में इसी बदहाल रास्ते के कारण कल्पना पत्नी नारायण पटेल को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी हुई थी। सड़क खराब होने और रास्ते में पुलिया टूटे होने के कारण महिला को पहले खटिया पर ले जाकर बेलई तक पहुंचाया गया, इसके बाद ट्रैक्टर से बीना अस्पताल ले जाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद महिला अस्पताल पहुंच सकी, जहां चिकित्सकों ने गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। यह घटना आज भी ग्रामीणों के लिए सड़क की बदहाली का दर्दनाक उदाहरण बनी हुई है। अब मासूम बच्चों की पढ़ाई भी सड़क की बदहाली से प्रभावित मलिया गांव के छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए रोजाना करीब दो किलोमीटर दूर बेलई जाना पड़ता है। बारिश में रास्ता कीचड़ से भर जाने के कारण बच्चों को इसी दलदल से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कीचड़ के कारण बच्चों के कपड़े, जूते और स्कूल बैग खराब हो जाते हैं। वहीं रास्ते में फिसलने और चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। एक तरफ सरकार “स्कूल चलें हम” अभियान के जरिए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का संदेश दे रही है, तो दूसरी तरफ मलिया के मासूम बच्चों के सामने स्कूल तक पहुंचना ही बड़ी चुनौती बना हुआ है। कांग्रेस शहर सेवादल अध्यक्ष ने सरकार पर साधा निशाना कांग्रेस शहर सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय ने कहा कि मलिया की सड़क की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि बीना क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं, जहां ग्रामीण आज भी पक्की सड़क की सुविधा से वंचित हैं। प्रमोद राय ने आरोप लगाया कि सरकार विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग दिखाई देती है। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या का तत्काल समाधान करने और पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों की प्रशासन से सीधी मांग ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि मलिया से बेलई तक पक्की सड़क का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचने का रास्ता मिल सके और गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों एवं बीमार लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। एक तरफ “स्कूल चलें हम” का अभियान, दूसरी तरफ कीचड़ में भविष्य तलाशते मासूम... सवाल बड़ा है—आखिर मलिया गांव की सड़क कब बनेगी?1
- दीपिका रावत बनीं अतिथि शिक्षक समन्वय समिति की जिला अध्यक्ष, बोलीं—मनमानी और शोषण के खिलाफ उठाएंगी आवाज लोकल न्यूज बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत दीपिका रावत बनीं अतिथि शिक्षक समन्वय समिति की जिला अध्यक्ष, बोलीं—मनमानी और शोषण के खिलाफ उठाएंगी आवाज अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर करेंगी प्रयास, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भेदभाव रोकना प्राथमिकता बीना। प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के विभिन्न संगठनों की समन्वयक संस्था अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्य प्रदेश, भोपाल ने दीपिका रावत को जिले की जिम्मेदारी सौंपी है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील परिहार ने संस्थापक पीडी खैरवार की अनुशंसा पर पीएम श्री शासकीय हाई स्कूल बिहरना में कार्यरत दीपिका रावत को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद दीपिका रावत ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित मनमानी और भेदभाव को रोकना होगी। उन्होंने कहा कि जिले में अतिथि शिक्षकों के साथ शोषण और मानसिक प्रताड़ना की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनके खिलाफ वे आवाज उठाएंगी। दीपिका रावत ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर प्रभारी प्राचार्य और नियमित स्टाफ द्वारा अपने चहेतों, परिचितों और रिश्तेदारों को अवसर देने के लिए पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो कानूनी कार्रवाई और कठोर कदम उठाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए भी संगठन के माध्यम से हर संभव प्रयास किया जाएगा और अतिथि शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।1
- लोकल न्यूज बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत दीपिका रावत बनीं अतिथि शिक्षक समन्वय समिति की जिला अध्यक्ष, बोलीं—मनमानी और शोषण के खिलाफ उठाएंगी आवाज अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर करेंगी प्रयास, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भेदभाव रोकना प्राथमिकता बीना। प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के विभिन्न संगठनों की समन्वयक संस्था अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्य प्रदेश, भोपाल ने दीपिका रावत को जिले की जिम्मेदारी सौंपी है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील परिहार ने संस्थापक पीडी खैरवार की अनुशंसा पर पीएम श्री शासकीय हाई स्कूल बिहरना में कार्यरत दीपिका रावत को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद दीपिका रावत ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित मनमानी और भेदभाव को रोकना होगी। उन्होंने कहा कि जिले में अतिथि शिक्षकों के साथ शोषण और मानसिक प्रताड़ना की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनके खिलाफ वे आवाज उठाएंगी। दीपिका रावत ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर प्रभारी प्राचार्य और नियमित स्टाफ द्वारा अपने चहेतों, परिचितों और रिश्तेदारों को अवसर देने के लिए पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो कानूनी कार्रवाई और कठोर कदम उठाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए भी संगठन के माध्यम से हर संभव प्रयास किया जाएगा और अतिथि शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।1
- पाली बालाबेहट रोड़ एक चार पहिया वाहन ने दो बाइकों में टक्कर, टक्कर में छः लोग घायल पाली बालाबेहट रोड़ एक चार पहिया वाहन ने दो बाइकों में टक्कर, टक्कर में छः लोग घायल, बाइक सवार ग्राम चीमना के बताए जा रहे1
- देखिये कैसे इस छोटी बच्ची ने एक बिल्ली को पकड़ के खिला रही है।।1
- सड़क के गड्ढों में तैरकर अनोखा प्रदर्शन, पूर्व जनपद अध्यक्ष ने जताया आक्रोश प्रशासन की अनदेखी से नाराज, बोले- जल्द सड़क नहीं सुधरी तो होगा बड़ा जन-आंदोलन लोकेशन:-बीना रिपोर्टर:-राकेश सेन बीना :-कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अपना जन्मदिन न मनाते हुए पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। वे सीधे बीना-आगासौद-मुंगावली मार्ग के जलभराव वाले गहरे गड्ढों में उतर गए और तैरकर अपना विरोध जताया। दरअसल, बीना-आगासौद-मुंगावली मार्ग पर रिफाइनरी और जेपी पावर प्लांट से जुड़े पेट्रोल-डीजल के टैंकर, फ्लाई ऐश से भरे डंपर और गैस टैंकर जैसे सैकड़ों भारी वाहन रोज गुजरते हैं। इसके बावजूद न तो रिफाइनरी प्रबंधन, न जेपी प्रबंधन और न ही लोक निर्माण विभाग इस सड़क की सुध ले रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते इस मार्ग की हालत बद से बदतर हो चुकी है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसी को लेकर इंदर सिंह ठाकुर अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और पानी से लबालब भरे गड्ढों में बैठकर व तैरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने शासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही सड़कों के मरम्मत कार्य शुरू नहीं किए गए तो जनता के सहयोग से एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस अवसर पर एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह ठाकुर ने भी शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए जमकर निशाना साधा। तहसीलदार अंबरपंथी की तबीयत खराब होने पर उन्होंने फोन पर आसपास सन देते हुए कहा शीघ्र ही इस रोड के लिए लोक निर्माण विभाग को पत्राचार एवं शीघ्रकारी लगाने के निर्देश दे दिए गए इसके बाद इंदर सिंह ठाकुर ने अपना प्रदर्शन बंद किया। प्रदर्शन में सेवादल अध्यक्ष प्रमोद राय, अमित ठाकुर, सेवादल यंग ब्रिगेड प्रभारी भूपेंद्र गोंदना, रितिक सिंह, रामबाबू ठाकुर, विजय सिंह, कल्याण सिंह, शुभम ठाकुर, शिवकुमार चढ़ार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन मौजूद रहे।4