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मऊ जिले के रानीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत दौलसेपुर में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत अत्यंत शर्मनाक है, जहाँ स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी करोड़ों की योजनाएँ दम तोड़ रही हैं। लाखों की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय पिछले पाँच वर्षों से बंद पड़ा है, जिसके गेट पर ताला लगा है और अंदर बकरियाँ बंधी मिलीं। दीवार पर स्पष्ट रूप से "सामुदायिक शौचालय, ग्राम पंचायत दौलसेपुर, विकास खंड रानीपुर, जनपद मऊ" लिखा होने के बावजूद, ग्रामीण, विशेषकर महिलाएँ, खुले में शौच करने को मजबूर हैं। इसी तरह, कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का भी निजी इस्तेमाल हो रहा है, जहाँ केंद्र के अंदर बकरियाँ बंधी हैं और उपले व लकड़ी भरकर रखी गई है, जबकि कूड़ा अलग करने वाली मशीनें जंग खा रही हैं। इसके अतिरिक्त, गाँव में स्वीकृत कूड़ा घर का निर्माण अधूरा है और अमृत सरोवर की सिर्फ खुदाई कर उसे छोड़ दिया गया है; बीते पाँच वर्षों में एक भी योजना पूरी नहीं हो पाई है। 27 मई 2026 को जीपीएस कैमरे से ली गई तस्वीरों में शौचालय और आरआरसी सेंटर की बदहाली तथा बाहर फैली गंदगी और गोबर के उपलों का ढेर कैद है। ग्रामीणों में इन स्थितियों को लेकर गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि हर काम का बजट पास होने और भुगतान होने के बावजूद कोई सुविधा नहीं मिली है, और सरकारी धन का यह दुरुपयोग जिम्मेदारों की मिलीभगत से हुआ है। ग्रामीणों ने तत्काल शौचालय और आरआरसी सेंटर को चालू करने की मांग की है।

22 hrs ago
user_Ramesh Kumar
Ramesh Kumar
Teacher मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ, उत्तर प्रदेश•
22 hrs ago

मऊ जिले के रानीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत दौलसेपुर में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत अत्यंत शर्मनाक है, जहाँ स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी करोड़ों की योजनाएँ दम तोड़ रही हैं। लाखों की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय पिछले पाँच वर्षों से बंद पड़ा है, जिसके गेट पर ताला लगा है और अंदर बकरियाँ बंधी मिलीं। दीवार पर स्पष्ट रूप से "सामुदायिक शौचालय, ग्राम पंचायत दौलसेपुर, विकास खंड रानीपुर, जनपद मऊ" लिखा होने के बावजूद, ग्रामीण, विशेषकर महिलाएँ, खुले में शौच करने को मजबूर हैं। इसी तरह, कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का भी निजी इस्तेमाल हो रहा है, जहाँ केंद्र के अंदर बकरियाँ बंधी हैं और उपले व लकड़ी भरकर रखी गई है, जबकि कूड़ा अलग करने वाली मशीनें जंग खा रही हैं। इसके अतिरिक्त, गाँव में स्वीकृत कूड़ा घर का निर्माण अधूरा है और अमृत सरोवर की सिर्फ खुदाई कर उसे छोड़ दिया गया है; बीते पाँच वर्षों में एक भी योजना पूरी नहीं हो पाई है। 27 मई 2026 को जीपीएस कैमरे से ली गई तस्वीरों में शौचालय और आरआरसी सेंटर की बदहाली तथा बाहर फैली गंदगी और गोबर के उपलों का ढेर कैद है। ग्रामीणों में इन स्थितियों को लेकर गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि हर काम का बजट पास होने और भुगतान होने के बावजूद कोई सुविधा नहीं मिली है, और सरकारी धन का यह दुरुपयोग जिम्मेदारों की मिलीभगत से हुआ है। ग्रामीणों ने तत्काल शौचालय और आरआरसी सेंटर को चालू करने की मांग की है।

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  • मऊ जिले के रानीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत दौलसेपुर में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत अत्यंत शर्मनाक है, जहाँ स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी करोड़ों की योजनाएँ दम तोड़ रही हैं। लाखों की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय पिछले पाँच वर्षों से बंद पड़ा है, जिसके गेट पर ताला लगा है और अंदर बकरियाँ बंधी मिलीं। दीवार पर स्पष्ट रूप से "सामुदायिक शौचालय, ग्राम पंचायत दौलसेपुर, विकास खंड रानीपुर, जनपद मऊ" लिखा होने के बावजूद, ग्रामीण, विशेषकर महिलाएँ, खुले में शौच करने को मजबूर हैं। इसी तरह, कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का भी निजी इस्तेमाल हो रहा है, जहाँ केंद्र के अंदर बकरियाँ बंधी हैं और उपले व लकड़ी भरकर रखी गई है, जबकि कूड़ा अलग करने वाली मशीनें जंग खा रही हैं। इसके अतिरिक्त, गाँव में स्वीकृत कूड़ा घर का निर्माण अधूरा है और अमृत सरोवर की सिर्फ खुदाई कर उसे छोड़ दिया गया है; बीते पाँच वर्षों में एक भी योजना पूरी नहीं हो पाई है। 27 मई 2026 को जीपीएस कैमरे से ली गई तस्वीरों में शौचालय और आरआरसी सेंटर की बदहाली तथा बाहर फैली गंदगी और गोबर के उपलों का ढेर कैद है। ग्रामीणों में इन स्थितियों को लेकर गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि हर काम का बजट पास होने और भुगतान होने के बावजूद कोई सुविधा नहीं मिली है, और सरकारी धन का यह दुरुपयोग जिम्मेदारों की मिलीभगत से हुआ है। ग्रामीणों ने तत्काल शौचालय और आरआरसी सेंटर को चालू करने की मांग की है।
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    मऊ जिले के रानीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत दौलसेपुर में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत अत्यंत शर्मनाक है, जहाँ स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी करोड़ों की योजनाएँ दम तोड़ रही हैं। लाखों की लागत से निर्मित सामुदायिक शौचालय पिछले पाँच वर्षों से बंद पड़ा है, जिसके गेट पर ताला लगा है और अंदर बकरियाँ बंधी मिलीं। दीवार पर स्पष्ट रूप से "सामुदायिक शौचालय, ग्राम पंचायत दौलसेपुर, विकास खंड रानीपुर, जनपद मऊ" लिखा होने के बावजूद, ग्रामीण, विशेषकर महिलाएँ, खुले में शौच करने को मजबूर हैं।

इसी तरह, कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का भी निजी इस्तेमाल हो रहा है, जहाँ केंद्र के अंदर बकरियाँ बंधी हैं और उपले व लकड़ी भरकर रखी गई है, जबकि कूड़ा अलग करने वाली मशीनें जंग खा रही हैं। इसके अतिरिक्त, गाँव में स्वीकृत कूड़ा घर का निर्माण अधूरा है और अमृत सरोवर की सिर्फ खुदाई कर उसे छोड़ दिया गया है; बीते पाँच वर्षों में एक भी योजना पूरी नहीं हो पाई है। 27 मई 2026 को जीपीएस कैमरे से ली गई तस्वीरों में शौचालय और आरआरसी सेंटर की बदहाली तथा बाहर फैली गंदगी और गोबर के उपलों का ढेर कैद है। ग्रामीणों में इन स्थितियों को लेकर गहरा आक्रोश है, उनका आरोप है कि हर काम का बजट पास होने और भुगतान होने के बावजूद कोई सुविधा नहीं मिली है, और सरकारी धन का यह दुरुपयोग जिम्मेदारों की मिलीभगत से हुआ है। ग्रामीणों ने तत्काल शौचालय और आरआरसी सेंटर को चालू करने की मांग की है।
    user_Ramesh Kumar
    Ramesh Kumar
    Teacher मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • मऊ जिले में जनसामान्य की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के उद्देश्य से आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन ने तहसील सदर में फरियादियों की शिकायतें सुनीं। उन्होंने सभी उपस्थित अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक ढंग से निस्तारण सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका निष्पक्ष एवं प्रभावी समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण के दौरान संबंधित शिकायतकर्ता से अवश्य बातचीत की जाए ताकि उनकी संतुष्टि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान तहसील सदर में कुल 116 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 08 शिकायतों का मौके पर ही सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, 04 शिकायतों के समाधान हेतु राजस्व और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम को मौके पर भेजा गया। प्राप्त शिकायतों में सर्वाधिक 70 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित थीं, जबकि विकास विभाग से 16 और पुलिस विभाग से 11 शिकायतें प्राप्त हुईं, तथा शेष शिकायतें अन्य विभागों से जुड़ी थीं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को जनसमस्याओं के निस्तारण में संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रदर्शन करने का निर्देश दिया, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, उप जिलाधिकारी सदर अवधेश चौहान, तहसीलदार शैलेंद्र प्रताप सिंह सहित जनपद के समस्त संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने पुनः दोहराया कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की प्राथमिकता है और अधिकारी इसमें लापरवाही न बरतें।
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    मऊ जिले में जनसामान्य की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के उद्देश्य से आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन ने तहसील सदर में फरियादियों की शिकायतें सुनीं। उन्होंने सभी उपस्थित अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक ढंग से निस्तारण सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका निष्पक्ष एवं प्रभावी समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण के दौरान संबंधित शिकायतकर्ता से अवश्य बातचीत की जाए ताकि उनकी संतुष्टि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान तहसील सदर में कुल 116 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 08 शिकायतों का मौके पर ही सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, 04 शिकायतों के समाधान हेतु राजस्व और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम को मौके पर भेजा गया। प्राप्त शिकायतों में सर्वाधिक 70 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित थीं, जबकि विकास विभाग से 16 और पुलिस विभाग से 11 शिकायतें प्राप्त हुईं, तथा शेष शिकायतें अन्य विभागों से जुड़ी थीं।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को जनसमस्याओं के निस्तारण में संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रदर्शन करने का निर्देश दिया, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, उप जिलाधिकारी सदर अवधेश चौहान, तहसीलदार शैलेंद्र प्रताप सिंह सहित जनपद के समस्त संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने पुनः दोहराया कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की प्राथमिकता है और अधिकारी इसमें लापरवाही न बरतें।
    user_RISHI RAI
    RISHI RAI
    घोसी, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • यह साबित करते हुए कि बुलंद हौसलों के साथ कुछ भी असंभव नहीं है, एक गांव के दो लड़कों ने अपनी असाधारण रचनात्मकता का प्रदर्शन किया है। इन लड़कों ने चुंबक का इस्तेमाल कर एक ऐसा मैग्नेटिक पावर जनरेटर बनाया है, जिसकी मदद से उन्होंने एक ट्यूबवेल तक को सफलतापूर्वक चला दिया। जनरेटर से पानी निकलता देख आस-पास के लोग भी यह देखकर हैरान रह गए। उनकी इस अद्भुत उपलब्धि का वीडियो अब इंटरनेट पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है।
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    यह साबित करते हुए कि बुलंद हौसलों के साथ कुछ भी असंभव नहीं है, एक गांव के दो लड़कों ने अपनी असाधारण रचनात्मकता का प्रदर्शन किया है। इन लड़कों ने चुंबक का इस्तेमाल कर एक ऐसा मैग्नेटिक पावर जनरेटर बनाया है, जिसकी मदद से उन्होंने एक ट्यूबवेल तक को सफलतापूर्वक चला दिया। जनरेटर से पानी निकलता देख आस-पास के लोग भी यह देखकर हैरान रह गए। उनकी इस अद्भुत उपलब्धि का वीडियो अब इंटरनेट पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है।
    user_ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    ΒᖇΙJΣSΗ ΨΛᗪΛᐯ
    Voice of people आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    52 min ago
  • आजमगढ़ जनपद की पुलिस ने एक बार फिर तकनीक का बेहतरीन उपयोग करते हुए आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। पुलिस कप्तान डॉ. अनिल कुमार के कुशल निर्देशन में चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के तहत, आजमगढ़ पुलिस ने कुल 448 एण्ड्रायड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 94 लाख रुपये बताई गई है। आजमगढ़ पुलिस के 'सी0ई0आई0आर0 (CEIR)' पोर्टल आधारित इस अभियान ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आंकड़ों के अनुसार, केवल मई 2026 में 448 एण्ड्रायड मोबाइल फोन (लगभग 94 लाख रुपये कीमत के) बरामद किए गए हैं। वर्ष 2026 में अब तक कुल 1407 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपये है, बरामद किए जा चुके हैं। पिछले 28 महीनों की कुल उपलब्धि की बात करें तो, पुलिस ने अब तक 4650 मोबाइल फोन, जिनकी कुल कीमत लगभग 11 करोड़ 22 लाख रुपये है, बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किए हैं। अभियान की इस बड़ी सफलता के उपरांत, दिनांक 07 जून 2026 को जनपद के पुलिस अधीक्षक (SP) चिराग जैन ने रिजर्व पुलिस लाइन, आजमगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में इन बरामद मोबाइलों को उनके वास्तविक स्वामियों के हाथों में सौंपा। अपने खोए हुए फोन वापस पाकर मोबाइल स्वामियों के चेहरे खुशी से खिल उठे, और उन्होंने आजमगढ़ पुलिस की तत्परता एवं कार्यशैली की जमकर सराहना की। यह सफलता सीसीटीएनएस (CCTNS) सेल की सक्रियता का परिणाम है, जहाँ नागरिक 'सी0ई0आई0आर' (CEIR) पोर्टल पर अपनी ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराते हैं, और पुलिस टीम तकनीक का उपयोग कर मोबाइलों को ट्रेस कर बरामद करती है।
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    आजमगढ़ जनपद की पुलिस ने एक बार फिर तकनीक का बेहतरीन उपयोग करते हुए आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। पुलिस कप्तान डॉ. अनिल कुमार के कुशल निर्देशन में चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के तहत, आजमगढ़ पुलिस ने कुल 448 एण्ड्रायड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 94 लाख रुपये बताई गई है।

आजमगढ़ पुलिस के 'सी0ई0आई0आर0 (CEIR)' पोर्टल आधारित इस अभियान ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आंकड़ों के अनुसार, केवल मई 2026 में 448 एण्ड्रायड मोबाइल फोन (लगभग 94 लाख रुपये कीमत के) बरामद किए गए हैं। वर्ष 2026 में अब तक कुल 1407 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपये है, बरामद किए जा चुके हैं। पिछले 28 महीनों की कुल उपलब्धि की बात करें तो, पुलिस ने अब तक 4650 मोबाइल फोन, जिनकी कुल कीमत लगभग 11 करोड़ 22 लाख रुपये है, बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किए हैं।

अभियान की इस बड़ी सफलता के उपरांत, दिनांक 07 जून 2026 को जनपद के पुलिस अधीक्षक (SP) चिराग जैन ने रिजर्व पुलिस लाइन, आजमगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में इन बरामद मोबाइलों को उनके वास्तविक स्वामियों के हाथों में सौंपा। अपने खोए हुए फोन वापस पाकर मोबाइल स्वामियों के चेहरे खुशी से खिल उठे, और उन्होंने आजमगढ़ पुलिस की तत्परता एवं कार्यशैली की जमकर सराहना की। यह सफलता सीसीटीएनएस (CCTNS) सेल की सक्रियता का परिणाम है, जहाँ नागरिक 'सी0ई0आई0आर' (CEIR) पोर्टल पर अपनी ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराते हैं, और पुलिस टीम तकनीक का उपयोग कर मोबाइलों को ट्रेस कर बरामद करती है।
    user_Arun Pandey
    Arun Pandey
    आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जहाँगीरगंज के सुतहरपारा क्षेत्र में रातों-रात लाखों रुपये के जेवर चोरी होने से हड़कंप मच गया है। इस चोरी की घटना ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है, जिससे उनमें काफी चिंता और भय का माहौल है।
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    जहाँगीरगंज के सुतहरपारा क्षेत्र में रातों-रात लाखों रुपये के जेवर चोरी होने से हड़कंप मच गया है। इस चोरी की घटना ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है, जिससे उनमें काफी चिंता और भय का माहौल है।
    user_24News उत्तर प्रदेश
    24News उत्तर प्रदेश
    Azamgarh, Uttar Pradesh•
    6 hrs ago
  • राजस्थान के जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के एक कार्यक्रम के दौरान एक बेहद खूबसूरत और दिल छू लेने वाला क्षण देखने को मिला। इसी कार्यक्रम में नन्हा दिलखुश विश्नोई पूरे आत्मविश्वास के साथ मुख्यमंत्री की ओर बढ़ा, जिससे वहां मौजूद हर कोई भावुक हो उठा। दिलखुश की मासूमियत देखकर सुरक्षाकर्मियों के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई और किसी ने उसे मंच तक पहुँचने से नहीं रोका। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी स्नेहपूर्वक उस बच्चे को मंच पर बुलाया, उसे टॉफी दिलवाई और बड़े प्यार से उससे बातचीत की। मंच से वापस लौटते समय दिलखुश के चेहरे पर ऐसी खुशी थी, मानो उसने कोई बड़ी जीत हासिल की हो। नीचे पहुँचते ही उसकी माँ ने उसे तुरंत गले लगा लिया। अब यह प्यारा और हृदयस्पर्शी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों का दिल जीत रहा है।
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    राजस्थान के जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के एक कार्यक्रम के दौरान एक बेहद खूबसूरत और दिल छू लेने वाला क्षण देखने को मिला। इसी कार्यक्रम में नन्हा दिलखुश विश्नोई पूरे आत्मविश्वास के साथ मुख्यमंत्री की ओर बढ़ा, जिससे वहां मौजूद हर कोई भावुक हो उठा।

दिलखुश की मासूमियत देखकर सुरक्षाकर्मियों के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई और किसी ने उसे मंच तक पहुँचने से नहीं रोका। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी स्नेहपूर्वक उस बच्चे को मंच पर बुलाया, उसे टॉफी दिलवाई और बड़े प्यार से उससे बातचीत की।

मंच से वापस लौटते समय दिलखुश के चेहरे पर ऐसी खुशी थी, मानो उसने कोई बड़ी जीत हासिल की हो। नीचे पहुँचते ही उसकी माँ ने उसे तुरंत गले लगा लिया। अब यह प्यारा और हृदयस्पर्शी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों का दिल जीत रहा है।
    user_नवोदय वार्ता
    नवोदय वार्ता
    Newspaper publisher मऊ, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • आजमगढ़ पुलिस ने गुमशुदा मोबाइल फोन बरामदगी अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मई 2026 में खोए हुए 448 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹94 लाख बताई गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान के तहत, सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर मोबाइल फोन की तलाश की गई। रविवार को अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन ने रिजर्व पुलिस लाइन में इन बरामद मोबाइल फोन को उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किया। पुलिस के अनुसार, फरवरी 2024 से शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 4650 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹11 करोड़ 22 लाख है। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक 1407 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹3 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपये है। अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने आजमगढ़ पुलिस का आभार व्यक्त किया और इस अभियान की सराहना की है। आजमगढ़ पुलिस की यह उपलब्धि, जिसमें 28 माह में कुल ₹11.22 करोड़ मूल्य के 4650 खोए मोबाइल फोन उनके स्वामियों को लौटाए गए हैं, अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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    आजमगढ़ पुलिस ने गुमशुदा मोबाइल फोन बरामदगी अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मई 2026 में खोए हुए 448 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹94 लाख बताई गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान के तहत, सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर मोबाइल फोन की तलाश की गई। रविवार को अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन ने रिजर्व पुलिस लाइन में इन बरामद मोबाइल फोन को उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किया।

पुलिस के अनुसार, फरवरी 2024 से शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 4650 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹11 करोड़ 22 लाख है। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक 1407 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹3 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपये है।

अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने आजमगढ़ पुलिस का आभार व्यक्त किया और इस अभियान की सराहना की है। आजमगढ़ पुलिस की यह उपलब्धि, जिसमें 28 माह में कुल ₹11.22 करोड़ मूल्य के 4650 खोए मोबाइल फोन उनके स्वामियों को लौटाए गए हैं, अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
    user_शैलेन्द्र पत्रकार
    शैलेन्द्र पत्रकार
    आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद की सरसेना ग्राम सभा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का एक बड़ा उदाहरण बन गई है, जहाँ करोड़ों रुपये की लागत से बनी सब्जी मंडी खंडहर में तब्दील हो चुकी है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'अमृत सरोवर' योजना के तहत बना तालाब भी जंगल में बदल गया है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है, और इसे सरकारी धन का दुरुपयोग बताया जा रहा है। ग्राम सभा में निर्मित सब्जी मंडी अब दिखावे का प्रतीक बनकर रह गई है। यहाँ न तो कोई दुकान है और न ही कोई व्यापारी। टिनशेड के नीचे सिर्फ कचरा, टूटे क्रेट और झाड़-झंखाड़ जमा हो गए हैं। ग्रामीणों द्वारा सवाल पूछे जाने पर, वर्तमान में प्रशासक के रूप में कार्यरत ग्राम प्रधान ने चौंकाने वाला जवाब देते हुए कहा कि "अभी दिखावा रहा हु"। इस बयान से स्पष्ट हो जाता है कि मंडी का निर्माण केवल कागजी कार्यवाही और तस्वीरों के लिए किया गया था, जिसके चलते किसान धूप और बारिश में सड़क किनारे सब्जी बेचने को विवश हैं। इसी तरह, आजादी के 75वें वर्ष 'अमृत महोत्सव' के अवसर पर शुरू किए गए 'अमृत सरोवर अभियान' के तहत सरसेना के गाटा संख्या 1024 में एक तालाब बनाया गया था। इसके प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख में '75 आजादी का अमृत महोत्सव' और तत्कालीन प्रधान अमलता देवी का नाम भी अंकित है। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट है। तालाब का बेस पूरी तरह से घास और झाड़ियों से भर गया है, जबकि सीमेंट से बने घाट और सीढ़ियों पर मिट्टी व कचरा जमा है। ऐसे में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और सौंदर्यीकरण के तीनों प्रमुख उद्देश्य विफल साबित हुए हैं, और गर्मी के दिनों में मवेशियों को भी पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।
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    उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद की सरसेना ग्राम सभा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का एक बड़ा उदाहरण बन गई है, जहाँ करोड़ों रुपये की लागत से बनी सब्जी मंडी खंडहर में तब्दील हो चुकी है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'अमृत सरोवर' योजना के तहत बना तालाब भी जंगल में बदल गया है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है, और इसे सरकारी धन का दुरुपयोग बताया जा रहा है।

ग्राम सभा में निर्मित सब्जी मंडी अब दिखावे का प्रतीक बनकर रह गई है। यहाँ न तो कोई दुकान है और न ही कोई व्यापारी। टिनशेड के नीचे सिर्फ कचरा, टूटे क्रेट और झाड़-झंखाड़ जमा हो गए हैं। ग्रामीणों द्वारा सवाल पूछे जाने पर, वर्तमान में प्रशासक के रूप में कार्यरत ग्राम प्रधान ने चौंकाने वाला जवाब देते हुए कहा कि "अभी दिखावा रहा हु"। इस बयान से स्पष्ट हो जाता है कि मंडी का निर्माण केवल कागजी कार्यवाही और तस्वीरों के लिए किया गया था, जिसके चलते किसान धूप और बारिश में सड़क किनारे सब्जी बेचने को विवश हैं।

इसी तरह, आजादी के 75वें वर्ष 'अमृत महोत्सव' के अवसर पर शुरू किए गए 'अमृत सरोवर अभियान' के तहत सरसेना के गाटा संख्या 1024 में एक तालाब बनाया गया था। इसके प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख में '75 आजादी का अमृत महोत्सव' और तत्कालीन प्रधान अमलता देवी का नाम भी अंकित है। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट है। तालाब का बेस पूरी तरह से घास और झाड़ियों से भर गया है, जबकि सीमेंट से बने घाट और सीढ़ियों पर मिट्टी व कचरा जमा है। ऐसे में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और सौंदर्यीकरण के तीनों प्रमुख उद्देश्य विफल साबित हुए हैं, और गर्मी के दिनों में मवेशियों को भी पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।
    user_Ramesh Kumar
    Ramesh Kumar
    Teacher मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
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