प्रचंड गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग: नावाडीह चौक का जलमीनार खराब, खबर छपने के बाद भी प्रशासन मौन प्रचंड गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग: नावाडीह चौक का जलमीनार खराब, खबर छपने के बाद भी प्रशासन मौन प्रचंड गर्मी के बीच डुमरी प्रखंड के नावाडीह चौक स्थित जलमीनार खराब होने से ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट गहरा गया है। जानकारी देते हुए मंगलवार शाम पाँच बजे ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है, जिसके कारण आसपास के दर्जनों परिवार पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार खबर प्रकाशित की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो जनप्रतिनिधियों ने कोई पहल की और न ही संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। भीषण गर्मी में पानी की समस्या ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बंद रहने से महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब जलमीनार की मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि गर्मी के इस मौसम में लोगों को राहत मिल सके।
प्रचंड गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग: नावाडीह चौक का जलमीनार खराब, खबर छपने के बाद भी प्रशासन मौन प्रचंड गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग: नावाडीह चौक का जलमीनार खराब, खबर छपने के बाद भी प्रशासन मौन प्रचंड गर्मी के बीच डुमरी प्रखंड के नावाडीह चौक स्थित जलमीनार खराब होने से ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट गहरा गया है। जानकारी देते हुए मंगलवार शाम पाँच बजे ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है, जिसके कारण आसपास के दर्जनों परिवार पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार खबर प्रकाशित की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो जनप्रतिनिधियों ने कोई पहल की और न ही संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। भीषण गर्मी में पानी की समस्या ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बंद रहने से महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब जलमीनार की मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि गर्मी के इस मौसम में लोगों को राहत मिल सके।
- प्रचंड गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग: नावाडीह चौक का जलमीनार खराब, खबर छपने के बाद भी प्रशासन मौन प्रचंड गर्मी के बीच डुमरी प्रखंड के नावाडीह चौक स्थित जलमीनार खराब होने से ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट गहरा गया है। जानकारी देते हुए मंगलवार शाम पाँच बजे ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है, जिसके कारण आसपास के दर्जनों परिवार पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार खबर प्रकाशित की जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो जनप्रतिनिधियों ने कोई पहल की और न ही संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। भीषण गर्मी में पानी की समस्या ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बंद रहने से महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब जलमीनार की मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, ताकि गर्मी के इस मौसम में लोगों को राहत मिल सके।1
- गुमला:जिला समाहरणालय परिसर में आज उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में साप्ताहिक जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं दूर-दराज क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याओं एवं मांगों को उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया। उपायुक्त ने सभी आवेदनों को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक मामले का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित, पारदर्शी एवं न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निष्पादन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान प्रखंड बिशुनपुर अंतर्गत ग्राम चिंगारी से आए टाना भगत समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत के स्मारक स्थल के सुंदरीकरण एवं श्रद्धालुओं के ठहराव हेतु अतिथि गेस्ट हाउस निर्माण की मांग प्रस्तुत की गई। इस पर उपायुक्त ने संबंधित विभाग को प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में टाना भगत समुदाय द्वारा कृषि कार्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ट्रैक्टर, ट्रॉली, सिंचाई पंपसेट तथा अन्य कृषि यंत्रों के वितरण से संबंधित मांग भी रखी गई। उपायुक्त ने कृषि विभाग को इस संबंध में योजनानुसार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। राजस्व, निबंध एवं भूमि सुधार विभाग से संबंधित एक आवेदन में आवेदक द्वारा पूर्व में निर्गत पत्र के आलोक में लंबित जांच/कार्यवाही की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। इस पर उपायुक्त ने संबंधित विभाग को शीघ्र अद्यतन स्थिति उपलब्ध कराने एवं कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया। प्रखंड बिशुनपुर के ग्राम नरमा की उर्शिला कुमारी द्वारा राशन कार्ड में पुत्री का नाम जोड़ने में हो रही देरी के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया गया। उपायुक्त ने जिला आपूर्ति पदाधिकारी को मामले का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि लाभार्थी को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। प्रखंड सिसई अंतर्गत ग्राम बानपुर पानीलता के सुरेश उराँव द्वारा आवास निर्माण हेतु भूमि पर अनुमति प्रदान करने के संबंध में आवेदन दिया गया। इस पर उपायुक्त ने संबंधित अंचलाधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रखंड कामडारा के ग्राम कोटवो के आनंद मसीह तोपनो, अंजुल तोपनो एवं बिनोद तोपनो द्वारा भूमि सुधार उपसमाहर्ता, बसिया न्यायालय में लंबित S.A.R. वादों के निष्पादन में विलंब की समस्या रखी गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारी को वादों की समीक्षा कर शीघ्र निष्पादन एवं आदेश उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त अन्य आवेदकों द्वारा भी पेंशन, जन वितरण प्रणाली, राजस्व मामलों एवं आधारभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याएं प्रस्तुत की गईं, जिन पर उपायुक्त द्वारा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जन शिकायत निवारण दिवस के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को उनकी समस्याओं के समाधान हेतु एक प्रभावी एवं सुलभ मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।2
- गुमला जिला के खोरा गांव की एक 13 वर्षीय बच्ची के 2018 से लापता मामले(वर्तमान आयु 21 वर्ष) पर कल हाईकोर्ट के द्वारा डीजीपी व गुमला एसपी से जांच रिपोर्ट की मांग की। वही पुलिस अनुसंधान में अभी तक बच्ची का पता नही चलने पर कोर्ट ने जांच की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए तेजी से परिणाम लाने का निर्देश दिया था। साथ ही दो सप्ताह के भीतर जांच में कोई ठोस प्रगति नही होने पर केस की जांच सीबीआई को सौंपने की बात कही। हाईकोर्ट के द्वारा नाराजगी जाहिर करने के बाद आज राज्य की डीजीपी गुमला पहुंची और सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अभी तक किये गये अनुसंधानों की समीक्षा की। साथ ही लापता बच्ची के परिजनों को भी बुलाकर करीब 2 घंटे तक उनसे बंद कमरे में पूरी जानकारी ली गयी। डीजीपी ने कहा कि पुलिस के द्वारा लापता बच्ची के केश में काफी मेहनत की गई है। लंबे समय से लोग लगे है लेकिन अभी तक कोई खास जानकारी नही मिल पाई है। पुलिस के द्वारा फिर से पूरे केस का रिव्यू कराया जा रहा है। इससे पूर्व सर्किट हाउस पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाइट, तदाशा मिश्रा, डीजीपी, झारखंड।2
- Post by Pawan arya1
- गणवेश व चाट कैलेंडर वितरण के पश्चात सीडीपीओ ने सभी सेविकाओं एवं सहायिका को दिया आवश्यक निर्देश1
- Post by AAM JANATA1
- सिमडेगा:- नगर परिषद के दैनिक सफाईकर्मियों ने नगर परिषद अध्यक्ष ओलिभर लकड़ा से मुलाकात कर समय पर मजदूरी भुगतान की मांग की। न० प० अध्यक्ष तुरन्त ही बाजारटोली स्थित एन०जी०ओ० कार्यालय जाकर कर्मचारियों को मजदूरी भुगतान करने का निर्देश दिया। एन०जी०ओ० कर्मचारी ने कहा ट्रेजरी बंद होने के कारण भुगतान रुका हुआ है जैसे ही ट्रेजरी खुलेगा मजदूरी भुगतान कर दिया जाएगा।1
- रुद्रपुर जंगल में भीषण आग से मचा हड़कंप: वन विभाग नदारद, ग्रामीण जान जोखिम में डाल बुझाने में जुटे जारी प्रखंड अंतर्गत रुद्रपुर जंगल में लगी भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जानकारी देते हुए मंगलवार की शाम पाँच बजे बताया गया कि असामाजिक तत्वों द्वारा जंगल में आग लगाए जाने की आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण पूरा वन क्षेत्र धुएं और आग की लपटों से घिर गया है। आग तेजी से फैलने के कारण आसपास के गांवों में भी दहशत का माहौल बन गया है। आग की लपटें इतनी तेज हैं कि दूर-दराज के इलाकों से भी धुएं का गुबार साफ दिखाई दे रहा है। इस भीषण आग में जंगल के छोटे-छोटे बेशकीमती पौधे जलकर राख हो रहे हैं, वहीं जंगली जानवरों और पक्षियों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आग लगने की सूचना वन विभाग को देने के बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि विभागीय सुस्ती और जागरूकता की कमी के कारण असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जो आए दिन जंगलों को आग के हवाले कर देते हैं। जब आग ने विकराल रूप लेना शुरू किया तो कई स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने के लिए जंगल की ओर दौड़ पड़े। सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण घंटों तक आग पर काबू पाने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन आग की भयावहता के कारण स्थिति लगातार नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। जंगल में लगी इस आग से पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुँच रहा है। जमीन पर रहने वाले जीव-जंतु, पक्षियों के घोंसले और छोटे पौधे पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो पूरा रुद्रपुर वन क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ सकता है। समाचार लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका था और लपटें लगातार फैलती जा रही थीं।1