उमरिया जिले के घुंघुटी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से जमा रेत के बड़े भंडार पर बुधवार को खनिज विभाग ने कार्रवाई की, जिसमें लगभग 21 ट्रॉली रेत जब्त की गई। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, लेकिन इससे जितने सवालों के जवाब मिले, उससे कहीं ज्यादा नए सवाल खड़े हो गए हैं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था और न ही रेत के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सके। इसके बाद विभाग ने जब्त रेत को वन विभाग की चौकी में सुपुर्द कर दिया। खनिज सर्वेयर नवरत सिंह आर्मो ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि रेत लावारिस हालत में मिली थी और फिलहाल इसका वास्तविक मालिक कौन है, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि इस कार्रवाई से कई अनुत्तरित प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस स्थान से रेत जब्त की गई, वहां से थोड़ी दूरी पर एक 'डिग्गी' (भारी वाहन) खराब हालत में खड़ी मिली थी। क्षेत्र के लोगों का दावा है कि इसी वाहन का उपयोग रेत के भंडारण के लिए किया गया था। ऐसे में यह सबसे बड़ा सवाल है कि जब मौके के आसपास संदिग्ध वाहन मौजूद था, तो उसे जब्त क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग को उसके मालिक की जानकारी थी, या जांच अभी अधूरी है? इधर, गांव और बाजार में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से घुंघुटी निवासी एक प्रभावशाली व्यक्ति, जिन्हें 'मिश्रा जी' के नाम से जाना जाता है, को इस पूरे 'खेल' का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी व्यक्ति का नाम विभागीय रिकॉर्ड में सामने आया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। फिर भी, रेलवे की जमीन पर इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण होना कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत वहां कैसे पहुंची और किसके संरक्षण में यह स्टॉक तैयार किया गया। फिलहाल, खनिज विभाग की इस कार्रवाई ने अवैध रेत कारोबार पर शिकंजा कसने का संदेश जरूर दिया है, लेकिन जब तक इस स्टॉक के असली मालिक और इसके पीछे काम कर रहे लोगों का खुलासा नहीं होता, तब तक घुंघुटी का यह रेत रहस्य चर्चा का विषय बना रहेगा।
उमरिया जिले के घुंघुटी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से जमा रेत के बड़े भंडार पर बुधवार को खनिज विभाग ने कार्रवाई की, जिसमें लगभग 21 ट्रॉली रेत जब्त की गई। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, लेकिन इससे जितने सवालों के जवाब मिले, उससे कहीं ज्यादा नए सवाल खड़े हो गए हैं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था और न ही रेत के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सके। इसके बाद विभाग ने जब्त रेत को वन विभाग की चौकी में सुपुर्द कर दिया। खनिज सर्वेयर नवरत सिंह आर्मो ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि रेत लावारिस हालत में मिली थी और फिलहाल इसका वास्तविक मालिक कौन है, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि इस कार्रवाई से कई अनुत्तरित प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस स्थान से रेत जब्त की गई, वहां से थोड़ी दूरी पर एक 'डिग्गी' (भारी वाहन) खराब हालत में खड़ी मिली थी। क्षेत्र के लोगों का दावा है कि इसी वाहन का उपयोग रेत के भंडारण के लिए किया गया था। ऐसे में यह सबसे बड़ा सवाल है कि जब मौके के आसपास संदिग्ध वाहन मौजूद था, तो उसे जब्त क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग को उसके मालिक की जानकारी थी, या जांच अभी अधूरी है? इधर, गांव और बाजार में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से घुंघुटी निवासी एक प्रभावशाली व्यक्ति, जिन्हें 'मिश्रा जी' के नाम से जाना जाता है, को इस पूरे 'खेल' का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी व्यक्ति का नाम विभागीय रिकॉर्ड में सामने आया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। फिर भी, रेलवे की जमीन पर इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण होना कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत वहां कैसे पहुंची और किसके संरक्षण में यह स्टॉक तैयार किया गया। फिलहाल, खनिज विभाग की इस कार्रवाई ने अवैध रेत कारोबार पर शिकंजा कसने का संदेश जरूर दिया है, लेकिन जब तक इस स्टॉक के असली मालिक और इसके पीछे काम कर रहे लोगों का खुलासा नहीं होता, तब तक घुंघुटी का यह रेत रहस्य चर्चा का विषय बना रहेगा।
- उमरिया जिले के घुंघुटी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से जमा रेत के बड़े भंडार पर बुधवार को खनिज विभाग ने कार्रवाई की, जिसमें लगभग 21 ट्रॉली रेत जब्त की गई। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, लेकिन इससे जितने सवालों के जवाब मिले, उससे कहीं ज्यादा नए सवाल खड़े हो गए हैं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था और न ही रेत के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सके। इसके बाद विभाग ने जब्त रेत को वन विभाग की चौकी में सुपुर्द कर दिया। खनिज सर्वेयर नवरत सिंह आर्मो ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि रेत लावारिस हालत में मिली थी और फिलहाल इसका वास्तविक मालिक कौन है, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि इस कार्रवाई से कई अनुत्तरित प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस स्थान से रेत जब्त की गई, वहां से थोड़ी दूरी पर एक 'डिग्गी' (भारी वाहन) खराब हालत में खड़ी मिली थी। क्षेत्र के लोगों का दावा है कि इसी वाहन का उपयोग रेत के भंडारण के लिए किया गया था। ऐसे में यह सबसे बड़ा सवाल है कि जब मौके के आसपास संदिग्ध वाहन मौजूद था, तो उसे जब्त क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग को उसके मालिक की जानकारी थी, या जांच अभी अधूरी है? इधर, गांव और बाजार में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से घुंघुटी निवासी एक प्रभावशाली व्यक्ति, जिन्हें 'मिश्रा जी' के नाम से जाना जाता है, को इस पूरे 'खेल' का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी व्यक्ति का नाम विभागीय रिकॉर्ड में सामने आया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। फिर भी, रेलवे की जमीन पर इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण होना कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत वहां कैसे पहुंची और किसके संरक्षण में यह स्टॉक तैयार किया गया। फिलहाल, खनिज विभाग की इस कार्रवाई ने अवैध रेत कारोबार पर शिकंजा कसने का संदेश जरूर दिया है, लेकिन जब तक इस स्टॉक के असली मालिक और इसके पीछे काम कर रहे लोगों का खुलासा नहीं होता, तब तक घुंघुटी का यह रेत रहस्य चर्चा का विषय बना रहेगा।1
- उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित रेस्ट हाउस में जनसंघ के संस्थापक परम श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में मनाया गया। यह कार्यक्रम आज, 23 जून को भाजपा मंडल अध्यक्ष श्रीमती राधा विजय तिवारी, महामंत्री विमल अग्रवाल और कार्यक्रम प्रभारी प्रदीप सोनी के नेतृत्व में मंडल पाली सहित समस्त बूथों पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित की गई और दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, साथ ही उनके योगदान को याद किया गया। अध्यक्ष राधा विजय तिवारी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन और उनका बलिदान देश की चुनौतियों एवं विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रेरणा देता है। इस कार्यक्रम में कई लोग उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से मंडल अध्यक्ष श्रीमती राधा विजय तिवारी, महामंत्री विमल अग्रवाल, कार्यक्रम प्रभारी प्रदीप सोनी, कामता विश्वकर्मा, नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश पटेल, प्रभात अवधिया, किशन कोरी, सुरेश वर्मा, ममता बर्मन, भरत प्रजापति, कौशल यादव, कमल सिंह, भीम सिंह, देवी सिंह, इब्बू खान, रवि गुप्ता और भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे।3
- उमरिया स्थित इमामबाड़ा में रात्रि पहर उमरिया वाले बाबा हुजूर की तशरीफ आमद हुई। बाबा हुजूर की यह सवारी इमामबाड़ा से जियारत करने के बाद भारी जनसैलाब के साथ शहर के विभिन्न इलाकों के लिए रवाना हुई। यात्रा के दौरान, बाबा हुजूर ने रमपुरी और मोहनपुरी स्थित अखाड़ों में जियारत की, जिसके बाद जामा मस्जिद में भी जियारत की। उनके चाहने वालों ने दीदार कर अपने और परिवार की खुशहाली के लिए मन ही मन दुआएं मांगीं। बाबा हुजूर ने बखरी और खलेशर स्थित विभिन्न अखाड़ा चौकों तथा ताबूतों की जियारत करते हुए, साथ चल रहे अकीदतमंद जनसैलाब के हक में दुआएं कीं। उन्होंने नगर के सभी अखाड़ा चौक और ताबूतों में जियारत कर अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा। बाबा हुजूर की सवारी फिर कैम्प अखाड़ा पहुंची, जहाँ उन्होंने अपनी तकरीर में लोगों को खुदा की इबादत कर सबसे पहले नेक इंसान बनने और नफरत करने वालों को ताकीद करने का संदेश दिया। इसके बाद, मस्जिद कैम्प में उन्होंने उमरिया वाले बाबा के कैम्प के लोगों को अपने फैज से नेक राह पर चलने की दुआएं दीं। अंत में, बाबा हुजूर ने इमामबाड़ा जाकर कयाम किया और सभी इमामबाड़ा के खादिमों को हिदायतें देकर सजदा किया। इस पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन का कार्य सराहनीय रहा।1
- रात्रि पहर उमरिया के इमामबाड़ा में उमरिया वाले बाबा हुजूर की तशरीफ आमद हुई, जहाँ उन्होंने अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा और उनकी खुशहाली की कामना की। बाबा हुजूर की सवारी इमामबाड़ा से निकलकर, जियारत करने के बाद, भारी जन सैलाब के साथ रवाना हुई। उनकी सवारी शहर के रमपुरी और मोहनपुरी स्थित अखाड़ों में जियारत करने के बाद जामा मस्जिद पहुँची, जहाँ बाबा हुजूर ने जियारत की। बाबा हुजूर के चाहने वालों ने उनका दीदार कर मन ही मन अपने और अपने परिवार की खुशहाली के लिए दुआएं कीं। जगह-जगह अपनी नजरे इनायत करते हुए, बाबा हुजूर ने उमरिया के बखरी और खलेशर स्थित विभिन्न अखाड़ा चौकों और ताबूतों की जियारत की, साथ ही साथ चल रहे अकीदतमंदों के हक में भी दुआएं कीं। उन्होंने नगर के सभी अखाड़ा चौक और ताबूतों में जियारत की एवं अकीदतमंदों को अपनी दुआओं से नवाजा। इसके बाद बाबा हुजूर की सवारी कैम्प अखाड़ा पहुँची, जहाँ उन्होंने अपनी तकरीर में लोगों को खुदा की इबादत कर सबसे पहले नेक इंसान बनने की सीख दी और नफरत करने वालों को ताकीद किया। कैम्प अखाड़े से वे मस्जिद कैम्प गए और वहाँ के लोगों को अपने फैज से नेक राह पर चलने की दुआएं दीं। अंत में, बाबा हुजूर ने इमामबाड़ा जाकर कयाम किया और सभी इमामबाड़ा के खादिमों को हिदायतें देकर सजदा किया। इस पूरी यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन का कार्य सराहनीय रहा, जिसने रामपुरी, मोहनपुरी, बखरी, खलेसर और कैंप मोहल्ला में गस्त की सवारी के साथ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।2
- रीवा रोड स्थित मदन एजेंसी के बगल से पुलिस लाइन को जोड़ने वाले मार्ग पर सीवर लाइन के कर्मचारियों ने लापरवाही दिखाते हुए बीच सड़क पर 20 फीट से भी अधिक गहरा गड्ढा खोद दिया। कार्य को अधूरा छोड़कर कर्मचारी वहां से चले गए, जिससे स्थानीय रहवासियों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस अधूरी खुदाई के कारण 40 से अधिक घरों का आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। खासकर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद परेशानी भरी हो गई है, जिससे उनकी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।1
- मध्यप्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधों की रोकथाम और डिजिटल सुरक्षा के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक प्रदेशव्यापी साइबर जागरूकता अभियान "SAFE CLICK-2026" का शुभारंभ किया है। इस अभियान का राज्य स्तरीय उद्घाटन मुख्यमंत्री एवं पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश द्वारा यूट्यूब वेबकास्ट के माध्यम से किया गया। इसी क्रम में, डिंडौरी जिले में कलेक्टर अंजु पवन भदौरिया और पुलिस अधीक्षक आशीष खरे की उपस्थिति में साइबर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर अभियान की शुरुआत की गई। इस अवसर पर अधिकारियों ने नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान, नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी लिंक, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, तथा ओटीपी व बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने के जोखिमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने लोगों से सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने की अपील की और किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने का सुझाव दिया। अधिकारियों ने वर्तमान में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों, जैसे डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, फर्जी पुलिस/सीबीआई/ईडी अधिकारी बनकर ठगी, केवाईसी अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी, फर्जी लोन एवं निवेश योजनाएं, टेलीग्राम और व्हाट्सएप टास्क फ्रॉड, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड, कस्टमर केयर फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, मेट्रिमोनियल फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन और क्यूआर कोड स्कैन करवाकर ठगी, के बारे में बताया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश, लिंक या आकर्षक ऑफर पर विश्वास न करें और बैंक खाता, ओटीपी, एटीएम कार्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी स्थिति में साझा न करें। अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध की स्थिति में त्वरित शिकायत करने से ठगी गई राशि को वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। इस अभियान के तहत जिले के शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य प्रमुख स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाकर सुरक्षित डिजिटल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा साइबर अपराधों की रोकथाम में जनसहभागिता सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेखा धर्मेन्द्र सिंह, एसडीओपी सतीश द्विवेदी, डीएसपी पुरुषोत्तम मरावी, यातायात प्रभारी सुभाष उइके, थाना प्रभारी कोतवाली दुर्गा प्रसाद नगपुरे, प्रभारी रक्षित निरीक्षक कुंवर सिंह ओलाडी, सूबेदार अभिनव राय सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। अभियान "SAFE CLICK-2026" पूरे जिले में "सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधों के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं" संदेश के साथ लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करेगा।2
- अनूपपुर पुलिस महिला सुरक्षा के प्रति सजगता दिखाते हुए त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। पुलिस अधीक्षक श्री विक्रांत मुराब के निर्देश पर जिले के सभी थाना प्रभारियों को महिला संबंधी घटनाओं में संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसी क्रम में, कोतवाली अनूपपुर पुलिस ने छेड़छाड़ के एक आरोपी को गिरफ्तार कर एक त्वरित और प्रभावी ऑपरेशन को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब दिनांक 23 जून 2026 को कोतवाली अनूपपुर में एक 27 वर्षीय महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि शाम करीब 04:00 से 05:00 बजे के बीच, जब वह अपने घर पर अकेली थी, आरोपी नीरज यादव (लगभग 22 वर्षीय, पिता: प्रहलाद यादव, निवासी ग्राम औढेरा, अनूपपुर) उसके घर पहुंचा। आरोपी ने महिला के साथ अश्लील हरकत तथा छेड़छाड़ का प्रयास किया, जिसके बाद महिला के विरोध करने और आवाज़ लगाने पर वह मौके से भाग गया। महिला की शिकायत पर, थाने में अपराध क्रमांक 380/26 दर्ज करते हुए, भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(va) के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए, थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद जैन के नेतृत्व में उपनिरिक्षक सरिता लकड़ा, प्रधान आरक्षक विनय बैस, प्रधान आरक्षक शिवशंकर प्रजापति और चालक प्रधान आरक्षक खेमराज सिंह की एक टीम ने तत्काल जांच कर आरोपी नीरज यादव को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यक प्रक्रियाएं जारी हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही एक महिला संबंधी प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।2
- उमरिया जिले की जनपद पंचायत करकेली की ग्राम पंचायत देवरा में शासकीय सड़क निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की गई है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत देवरा के हरिजन मोहल्ला वार्ड क्रमांक 2 में पहले कभी सड़क नहीं थी और लोग खेतों की मेड़ से आवागमन करते थे। स्थानीय निवासियों द्वारा अपनी निजी भूमि शपथ पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराने के बाद, पंचायत ने 115 मीटर लंबी और 03 मीटर चौड़ी कंक्रीट सड़क के निर्माण को ₹4,18,000 की लागत से स्वीकृति दी थी। श्रमिकों द्वारा लगभग ₹60,000 का कार्य कराते हुए जैसे ही मिट्टी डालकर सड़क को आकार दिया गया, कुछ शपथ कर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कार्य को रुकवा दिया। इस पूरे मामले की शिकायत आज दर्ज कराई गई है।3