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अशोकनगर के शासकीय लॉ कॉलेज में जनभागीदारी समिति द्वारा विभिन्न मदों में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि के विरोध में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन जिला कलेक्टर साहब से मिलने पर उन्हें असंवेदनशील रवैया देखने को मिला। AIDSO की नेहरू पीजी कॉलेज इकाई के सचिव शिशुपाल ने बताया कि वर्तमान में लॉ कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, और इस सत्र 2026-27 के लिए जनभागीदारी समिति ने फीस में ₹6962 की भारी वृद्धि कर दी है। सत्र 2023-24 में लॉ कॉलेज की फीस ₹5349 थी, जिसे बढ़ाकर ₹12311 कर दिया गया है। संगठन ने इस फीस वृद्धि को छात्र विरोधी और शिक्षा विरोधी कदम बताया, क्योंकि सरकारी संस्थानों का उद्देश्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि फीस बढ़ाकर शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुँच से दूर करना। अधिकांश छात्र निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनके लिए हजारों रुपये की अतिरिक्त फीस का बोझ उठाना संभव नहीं है। संगठन ने बताया कि उन्होंने 16 जून को भी ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर साहब को इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। जब प्रतिनिधिमंडल जिलाधीश महोदय से मिलने गया, तो उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक समस्या है और वे इसे नहीं सुन सकते, बल्कि यदि कोई व्यक्तिगत समस्या हो तो बताएं। फीस वृद्धि को लेकर कलेक्टर साहब का कहना था कि यदि एलएलबी में फीस बढ़ी है, तो जो छात्र फीस नहीं भर सकते, वे अन्य कम फीस वाले विषय में प्रवेश लें। AIDSO ने इस रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कलेक्टर साहब को छात्रों के प्रति असंवेदनशील नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्र हित में पूरी जिम्मेदारी से निर्णय लेना चाहिए। AIDSO का कहना है कि एक ओर सरकार “सब पढ़ें, सब बढ़ें” जैसे लोकलुभावन नारे देती है, वहीं दूसरी ओर लगातार सरकारी कॉलेजों में फीस वृद्धि करके छात्रों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। विभिन्न मदों के नाम पर की गई ₹6962 की वृद्धि पूरी तरह अनुचित है, जिससे छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होंगे। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि पर शीघ्र रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से चार प्रमुख मांगें रखी हैं: लॉ कॉलेज में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए; छात्रों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों की जांच कर उन्हें तुरंत रोका जाए; जनभागीदारी फंड में पारदर्शिता लाई जाए; और लॉ कॉलेज में शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ की स्थाई भर्ती की जाए।

17 hrs ago
user_रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
पत्रकार अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
17 hrs ago

अशोकनगर के शासकीय लॉ कॉलेज में जनभागीदारी समिति द्वारा विभिन्न मदों में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि के विरोध में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन जिला कलेक्टर साहब से मिलने पर उन्हें असंवेदनशील रवैया देखने को मिला। AIDSO की नेहरू पीजी कॉलेज इकाई के सचिव शिशुपाल ने बताया कि वर्तमान में लॉ कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, और इस सत्र 2026-27 के लिए जनभागीदारी समिति ने फीस में ₹6962 की भारी वृद्धि कर दी है। सत्र 2023-24 में लॉ कॉलेज की फीस ₹5349 थी, जिसे बढ़ाकर ₹12311 कर दिया गया है। संगठन ने इस फीस वृद्धि को छात्र विरोधी और शिक्षा विरोधी कदम बताया, क्योंकि सरकारी संस्थानों का उद्देश्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि फीस बढ़ाकर शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुँच से दूर करना। अधिकांश छात्र निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनके लिए हजारों रुपये की अतिरिक्त फीस का बोझ उठाना संभव नहीं है। संगठन ने बताया कि उन्होंने 16 जून को भी ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर साहब को इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। जब प्रतिनिधिमंडल जिलाधीश महोदय से मिलने गया, तो उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक समस्या है और वे इसे नहीं सुन सकते, बल्कि यदि कोई व्यक्तिगत समस्या हो तो बताएं। फीस वृद्धि को लेकर कलेक्टर साहब का कहना था कि यदि एलएलबी में फीस बढ़ी है, तो जो छात्र फीस नहीं भर सकते, वे अन्य कम फीस वाले विषय में प्रवेश लें। AIDSO ने इस रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कलेक्टर साहब को छात्रों के प्रति असंवेदनशील नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्र हित में पूरी जिम्मेदारी से निर्णय लेना चाहिए। AIDSO का कहना है कि एक ओर सरकार “सब पढ़ें, सब बढ़ें” जैसे लोकलुभावन नारे देती है, वहीं दूसरी ओर लगातार सरकारी कॉलेजों में फीस वृद्धि करके छात्रों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। विभिन्न मदों के नाम पर की गई ₹6962 की वृद्धि पूरी तरह अनुचित है, जिससे छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होंगे। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि पर शीघ्र रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से चार प्रमुख मांगें रखी हैं: लॉ कॉलेज में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए; छात्रों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों की जांच कर उन्हें तुरंत रोका जाए; जनभागीदारी फंड में पारदर्शिता लाई जाए; और लॉ कॉलेज में शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ की स्थाई भर्ती की जाए।

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    अशोकनगर के शासकीय लॉ कॉलेज में जनभागीदारी समिति द्वारा विभिन्न मदों में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि के विरोध में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन जिला कलेक्टर साहब से मिलने पर उन्हें असंवेदनशील रवैया देखने को मिला।

AIDSO की नेहरू पीजी कॉलेज इकाई के सचिव शिशुपाल ने बताया कि वर्तमान में लॉ कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, और इस सत्र 2026-27 के लिए जनभागीदारी समिति ने फीस में ₹6962 की भारी वृद्धि कर दी है। सत्र 2023-24 में लॉ कॉलेज की फीस ₹5349 थी, जिसे बढ़ाकर ₹12311 कर दिया गया है। संगठन ने इस फीस वृद्धि को छात्र विरोधी और शिक्षा विरोधी कदम बताया, क्योंकि सरकारी संस्थानों का उद्देश्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि फीस बढ़ाकर शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुँच से दूर करना। अधिकांश छात्र निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनके लिए हजारों रुपये की अतिरिक्त फीस का बोझ उठाना संभव नहीं है।

संगठन ने बताया कि उन्होंने 16 जून को भी ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर साहब को इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। जब प्रतिनिधिमंडल जिलाधीश महोदय से मिलने गया, तो उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक समस्या है और वे इसे नहीं सुन सकते, बल्कि यदि कोई व्यक्तिगत समस्या हो तो बताएं। फीस वृद्धि को लेकर कलेक्टर साहब का कहना था कि यदि एलएलबी में फीस बढ़ी है, तो जो छात्र फीस नहीं भर सकते, वे अन्य कम फीस वाले विषय में प्रवेश लें। AIDSO ने इस रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कलेक्टर साहब को छात्रों के प्रति असंवेदनशील नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्र हित में पूरी जिम्मेदारी से निर्णय लेना चाहिए।

AIDSO का कहना है कि एक ओर सरकार “सब पढ़ें, सब बढ़ें” जैसे लोकलुभावन नारे देती है, वहीं दूसरी ओर लगातार सरकारी कॉलेजों में फीस वृद्धि करके छात्रों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। विभिन्न मदों के नाम पर की गई ₹6962 की वृद्धि पूरी तरह अनुचित है, जिससे छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होंगे। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि पर शीघ्र रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से चार प्रमुख मांगें रखी हैं: लॉ कॉलेज में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए; छात्रों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों की जांच कर उन्हें तुरंत रोका जाए; जनभागीदारी फंड में पारदर्शिता लाई जाए; और लॉ कॉलेज में शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ की स्थाई भर्ती की जाए।
    user_रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
    रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
    पत्रकार अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • गुना जिले के कुंभराज थाना क्षेत्र में ढाई वर्षीय मासूम की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि जिस पिता ने अपने बेटे की मौत पर शोक व्यक्त किया था, उसी ने पारिवारिक रंजिश के चलते अपने मासूम बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी थी। आरोपी पिता ने यह साजिश अपने भाइयों और माता-पिता को झूठे हत्या प्रकरण में फंसाने के लिए रची थी। पुलिस के अनुसार, 25 जून 2026 को ढाई वर्षीय बालक को कुंभराज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मृत अवस्था में लाया गया था। मौत संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने तत्काल मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामले की गहन विवेचना की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने मृतक के परिजनों और संबंधित लोगों से अलग-अलग पूछताछ की, जिसमें बालक के पिता मनोज साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए गए। वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार पर गहन पूछताछ में मनोज साहू टूट गया और उसने अपने पुत्र की हत्या करना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी मनोज साहू ने बताया कि उसका अपने भाइयों और माता-पिता से मकान के हिस्से और किराए को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। साथ ही, पत्नी के छोड़कर चले जाने के कारण वह मानसिक रूप से भी परेशान था। इसी रंजिश के चलते उसने अपने मासूम बेटे की हत्या कर परिवार के अन्य सदस्यों को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी मनोज पुत्र रामविलास साहू (33 वर्ष), निवासी गीतानगर कॉलोनी, कुंभराज के खिलाफ अपराध क्रमांक 103/26 के तहत धारा 103(1) बीएनएस में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। इस सनसनीखेज मामले के खुलासे में थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज त्यागी, उपनिरीक्षक होतम सिंह बघेल, भमावद चौकी प्रभारी राजीव गौर सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने अथवा अपराध छिपाने का कोई भी प्रयास कानून से बच नहीं सकता है और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जाएगी।
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    गुना जिले के कुंभराज थाना क्षेत्र में ढाई वर्षीय मासूम की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि जिस पिता ने अपने बेटे की मौत पर शोक व्यक्त किया था, उसी ने पारिवारिक रंजिश के चलते अपने मासूम बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी थी। आरोपी पिता ने यह साजिश अपने भाइयों और माता-पिता को झूठे हत्या प्रकरण में फंसाने के लिए रची थी।

पुलिस के अनुसार, 25 जून 2026 को ढाई वर्षीय बालक को कुंभराज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मृत अवस्था में लाया गया था। मौत संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने तत्काल मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामले की गहन विवेचना की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने मृतक के परिजनों और संबंधित लोगों से अलग-अलग पूछताछ की, जिसमें बालक के पिता मनोज साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए गए। वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार पर गहन पूछताछ में मनोज साहू टूट गया और उसने अपने पुत्र की हत्या करना स्वीकार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी मनोज साहू ने बताया कि उसका अपने भाइयों और माता-पिता से मकान के हिस्से और किराए को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। साथ ही, पत्नी के छोड़कर चले जाने के कारण वह मानसिक रूप से भी परेशान था। इसी रंजिश के चलते उसने अपने मासूम बेटे की हत्या कर परिवार के अन्य सदस्यों को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी मनोज पुत्र रामविलास साहू (33 वर्ष), निवासी गीतानगर कॉलोनी, कुंभराज के खिलाफ अपराध क्रमांक 103/26 के तहत धारा 103(1) बीएनएस में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

इस सनसनीखेज मामले के खुलासे में थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज त्यागी, उपनिरीक्षक होतम सिंह बघेल, भमावद चौकी प्रभारी राजीव गौर सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने अथवा अपराध छिपाने का कोई भी प्रयास कानून से बच नहीं सकता है और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जाएगी।
    user_Deepak ojha
    Deepak ojha
    Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • गुना जिले की कुम्भराज थाना पुलिस ने एक ढाई वर्षीय मासूम बालक की संदिग्ध मृत्यु के मामले का सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसमें पिता ने ही अपने बच्चे की हत्या कर परिवार के अन्य सदस्यों को झूठे हत्या के मुकदमे में फंसाने की साजिश रची थी। दिनांक 25 जून 2026 को कुम्भराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ढाई वर्षीय बालक को मृत अवस्था में लाया गया था। बालक की मृत्यु संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की मृत्यु गला दबाकर किए जाने से होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने गहन विवेचना प्रारंभ की। जांच के दौरान, पुलिस ने मृतक बालक के परिजनों और संबंधित व्यक्तियों से अलग-अलग पूछताछ की। विवेचना में बालक के पिता मनोज साहू के कथनों में लगातार विरोधाभास पाए गए, जिसके बाद उससे वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक आधार पर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान आरोपी मनोज साहू टूट गया और उसने अपने पुत्र की गला दबाकर हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि उसका अपने भाइयों एवं माता-पिता से मकान के हिस्से और किराये को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। साथ ही, उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान था। इसी कारण उसने अपने मासूम पुत्र की हत्या कर अपने भाइयों और माता-पिता को झूठे हत्या के प्रकरण में फंसाने की साजिश रची थी। जांच में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने पर कुम्भराज थाना पुलिस ने आरोपी मनोज पुत्र रामविलास साहू (उम्र 33 वर्ष), निवासी गीतानगर कॉलोनी, कुम्भराज, जिला गुना के विरुद्ध अपराध क्रमांक 103/26 अंतर्गत धारा 103(1) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इस गंभीर और संवेदनशील प्रकरण के सफल खुलासे में कुम्भराज थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज त्यागी, उपनिरीक्षक होतम सिंह बघेल, भमावद चौकी प्रभारी सउनि राजीव गौर, सउनि तुलाराम जाटव, प्रधान आरक्षक शिवशंकर तथा आरक्षक सत्येन्द्र गुर्जर, सुनील धाकड़, अवनीश जाट, दिलीप धाकड़, सत्येन्द्र रावत, धर्मवीर रावत एवं जालम डाबर की सराहनीय भूमिका रही है। गुना पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी जघन्य अपराध को छिपाने अथवा निर्दोष व्यक्तियों को झूठे प्रकरण में फंसाने का कोई भी प्रयास कानून से नहीं बच सकता। पुलिस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, गुना पुलिस निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित विवेचना के माध्यम से सत्य को सामने लाकर दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
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    गुना जिले की कुम्भराज थाना पुलिस ने एक ढाई वर्षीय मासूम बालक की संदिग्ध मृत्यु के मामले का सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसमें पिता ने ही अपने बच्चे की हत्या कर परिवार के अन्य सदस्यों को झूठे हत्या के मुकदमे में फंसाने की साजिश रची थी। दिनांक 25 जून 2026 को कुम्भराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ढाई वर्षीय बालक को मृत अवस्था में लाया गया था। बालक की मृत्यु संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की मृत्यु गला दबाकर किए जाने से होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने गहन विवेचना प्रारंभ की।

जांच के दौरान, पुलिस ने मृतक बालक के परिजनों और संबंधित व्यक्तियों से अलग-अलग पूछताछ की। विवेचना में बालक के पिता मनोज साहू के कथनों में लगातार विरोधाभास पाए गए, जिसके बाद उससे वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक आधार पर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान आरोपी मनोज साहू टूट गया और उसने अपने पुत्र की गला दबाकर हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि उसका अपने भाइयों एवं माता-पिता से मकान के हिस्से और किराये को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। साथ ही, उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान था। इसी कारण उसने अपने मासूम पुत्र की हत्या कर अपने भाइयों और माता-पिता को झूठे हत्या के प्रकरण में फंसाने की साजिश रची थी।

जांच में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने पर कुम्भराज थाना पुलिस ने आरोपी मनोज पुत्र रामविलास साहू (उम्र 33 वर्ष), निवासी गीतानगर कॉलोनी, कुम्भराज, जिला गुना के विरुद्ध अपराध क्रमांक 103/26 अंतर्गत धारा 103(1) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इस गंभीर और संवेदनशील प्रकरण के सफल खुलासे में कुम्भराज थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज त्यागी, उपनिरीक्षक होतम सिंह बघेल, भमावद चौकी प्रभारी सउनि राजीव गौर, सउनि तुलाराम जाटव, प्रधान आरक्षक शिवशंकर तथा आरक्षक सत्येन्द्र गुर्जर, सुनील धाकड़, अवनीश जाट, दिलीप धाकड़, सत्येन्द्र रावत, धर्मवीर रावत एवं जालम डाबर की सराहनीय भूमिका रही है।

गुना पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी जघन्य अपराध को छिपाने अथवा निर्दोष व्यक्तियों को झूठे प्रकरण में फंसाने का कोई भी प्रयास कानून से नहीं बच सकता। पुलिस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, गुना पुलिस निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित विवेचना के माध्यम से सत्य को सामने लाकर दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
    user_Idris Mansoori TNP News
    Idris Mansoori TNP News
    Tent House Supplier Guna, Madhya Pradesh•
    7 hrs ago
  • सिरोंज में एक निजी अस्पताल के संचालक पर युवती से दुष्कर्म के आरोप के बाद, कुशवाह समाज ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया। समाज के सैकड़ों लोगों ने सड़क पर उतरकर आरोपी डॉक्टर को तुरंत फांसी देने और अस्पताल की मान्यता रद्द करने की मांग की, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यह पूरा मामला शहर के संजीवनी अस्पताल का है, जिसके संचालक डॉ. संजीव माथुर पर इलाज के लिए आई समाज की एक युवती का यौन शोषण करने का आरोप है। इस घटना के विरोध में शनिवार दोपहर 1 बजे छतरीनाका से कुशवाह समाज का एक विशाल जुलूस निकाला गया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष नारायण कुशवाह और जिला अध्यक्ष मनोज कुशवाह की अगुवाई में यह जुलूस कस्टम, कठाली, मुख्य बाजार और पुराना बस स्टैंड होते हुए करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा। एसडीएम को कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने अस्पताल के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, पीड़िता का 15 दिनों तक इलाज चला, जिसमें उसे केवल दोपहर में भर्ती रखा जाता था और रात को घर भेज दिया जाता था, जो आयुष्मान योजना के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस अनियमितता को देखते हुए अस्पताल में बड़े आयुष्मान कार्ड घोटाले की आशंका जताते हुए गहन जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, यदि अस्पताल की बिल्डिंग अवैध है तो उस पर बुलडोजर चलाने और आरोपी डॉक्टर द्वारा पीड़िता के भाई पर दर्ज कराए गए मारपीट के केस को वापस लेने की मांग भी की गई है। सिरोंज टीआई गजेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि आरोपी डॉक्टर संजीव माथुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और वह फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में भोपाल में अपना इलाज करा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 74, 75(1)(i), 332(B) और 351 (3) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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    सिरोंज में एक निजी अस्पताल के संचालक पर युवती से दुष्कर्म के आरोप के बाद, कुशवाह समाज ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया। समाज के सैकड़ों लोगों ने सड़क पर उतरकर आरोपी डॉक्टर को तुरंत फांसी देने और अस्पताल की मान्यता रद्द करने की मांग की, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

यह पूरा मामला शहर के संजीवनी अस्पताल का है, जिसके संचालक डॉ. संजीव माथुर पर इलाज के लिए आई समाज की एक युवती का यौन शोषण करने का आरोप है। इस घटना के विरोध में शनिवार दोपहर 1 बजे छतरीनाका से कुशवाह समाज का एक विशाल जुलूस निकाला गया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष नारायण कुशवाह और जिला अध्यक्ष मनोज कुशवाह की अगुवाई में यह जुलूस कस्टम, कठाली, मुख्य बाजार और पुराना बस स्टैंड होते हुए करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा।

एसडीएम को कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने अस्पताल के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, पीड़िता का 15 दिनों तक इलाज चला, जिसमें उसे केवल दोपहर में भर्ती रखा जाता था और रात को घर भेज दिया जाता था, जो आयुष्मान योजना के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस अनियमितता को देखते हुए अस्पताल में बड़े आयुष्मान कार्ड घोटाले की आशंका जताते हुए गहन जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, यदि अस्पताल की बिल्डिंग अवैध है तो उस पर बुलडोजर चलाने और आरोपी डॉक्टर द्वारा पीड़िता के भाई पर दर्ज कराए गए मारपीट के केस को वापस लेने की मांग भी की गई है।

सिरोंज टीआई गजेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि आरोपी डॉक्टर संजीव माथुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और वह फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में भोपाल में अपना इलाज करा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 74, 75(1)(i), 332(B) और 351 (3) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
    user_रिपोर्टर rupesh yadav
    रिपोर्टर rupesh yadav
    सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • बीना के इटावा बाजार में एक ज्वेलर्स की दुकान में चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है, जहाँ चोरों ने थाना परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित दुकान को निशाना बनाया। इस घटना में लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और नगदी गायब हो गई, जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश है और पुलिस की रात्रि गश्त एवं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देर रात अज्ञात चोरों ने ज्वेलर्स व्यापारी अनिल सोनी की दुकान का ताला तोड़ा। सुबह जब दुकानदार दुकान खोलने पहुंचे तो उन्हें शटर के ताले टूटे मिले। दुकान के अंदर अलमारी भी टूटी हुई थी और उसमें रखे कीमती जेवरात गायब थे। दुकानदार अनिल सोनी के अनुसार, चोर लगभग 7 से 10 हजार रुपये नकद और 4 से 5 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गए। चोरी हुए सामान में अंगूठियां, पायल, बिछिया जैसे अन्य कीमती जेवर शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। चोरी की इस वारदात के बाद सर्राफा व्यापारी संघ के अध्यक्ष राजकुमार सोनी, भारत भूषण सोनी और जितेंद्र राय समेत कई व्यापारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द चोरों को गिरफ्तार करने और बाजार क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की पुरजोर मांग की है।
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    बीना के इटावा बाजार में एक ज्वेलर्स की दुकान में चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है, जहाँ चोरों ने थाना परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित दुकान को निशाना बनाया। इस घटना में लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और नगदी गायब हो गई, जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश है और पुलिस की रात्रि गश्त एवं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

देर रात अज्ञात चोरों ने ज्वेलर्स व्यापारी अनिल सोनी की दुकान का ताला तोड़ा। सुबह जब दुकानदार दुकान खोलने पहुंचे तो उन्हें शटर के ताले टूटे मिले। दुकान के अंदर अलमारी भी टूटी हुई थी और उसमें रखे कीमती जेवरात गायब थे। दुकानदार अनिल सोनी के अनुसार, चोर लगभग 7 से 10 हजार रुपये नकद और 4 से 5 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गए। चोरी हुए सामान में अंगूठियां, पायल, बिछिया जैसे अन्य कीमती जेवर शामिल हैं।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। चोरी की इस वारदात के बाद सर्राफा व्यापारी संघ के अध्यक्ष राजकुमार सोनी, भारत भूषण सोनी और जितेंद्र राय समेत कई व्यापारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द चोरों को गिरफ्तार करने और बाजार क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की पुरजोर मांग की है।
    user_Mp news 24live
    Mp news 24live
    पत्रकार बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बीना में शुक्रवार को मोहर्रम का त्यौहार बड़े उल्लास और अकीदत के साथ मनाया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए ताजियों के भव्य जुलूस निकाले, जिससे शहरभर में गम और शोक का माहौल रहा। इस अवसर पर आपसी भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिली। सुबह से ही विभिन्न मोहल्लों से ताजिये निकलकर मुख्य मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचे। जुलूस में शामिल अजादार 'या हुसैन, या हुसैन' के नौहे पढ़ते हुए चल रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, वहीं हिंदू समुदाय के लोगों ने भी जगह-जगह शरबत और पानी पिलाकर जुलूस का स्वागत किया। इस मौके पर असलम शेर खान ने मोहर्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह महीना इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और इंसानियत के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी, और उनका पैगाम था कि जुल्म के सामने कभी नहीं झुकना चाहिए। खान ने जोर दिया कि मोहर्रम हमें आपसी भाईचारा, अमन और इंसानियत बनाए रखने की सीख देता है, और यह त्यौहार गम का होते हुए भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने का एक सार्वभौमिक संदेश देता है। जुलूस के दौरान जगह-जगह सबील भी लगाई गईं। शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी कर्बला पहुंचकर शांति और भाईचारे के लिए दुआ की। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मोहर्रम का त्यौहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
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    बीना में शुक्रवार को मोहर्रम का त्यौहार बड़े उल्लास और अकीदत के साथ मनाया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए ताजियों के भव्य जुलूस निकाले, जिससे शहरभर में गम और शोक का माहौल रहा। इस अवसर पर आपसी भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिली।

सुबह से ही विभिन्न मोहल्लों से ताजिये निकलकर मुख्य मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचे। जुलूस में शामिल अजादार 'या हुसैन, या हुसैन' के नौहे पढ़ते हुए चल रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, वहीं हिंदू समुदाय के लोगों ने भी जगह-जगह शरबत और पानी पिलाकर जुलूस का स्वागत किया।

इस मौके पर असलम शेर खान ने मोहर्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह महीना इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और इंसानियत के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी, और उनका पैगाम था कि जुल्म के सामने कभी नहीं झुकना चाहिए। खान ने जोर दिया कि मोहर्रम हमें आपसी भाईचारा, अमन और इंसानियत बनाए रखने की सीख देता है, और यह त्यौहार गम का होते हुए भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने का एक सार्वभौमिक संदेश देता है।

जुलूस के दौरान जगह-जगह सबील भी लगाई गईं। शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी कर्बला पहुंचकर शांति और भाईचारे के लिए दुआ की। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मोहर्रम का त्यौहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
    user_Rakesh sen
    Rakesh sen
    बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • अशोकनगर जिले की पिपरई में 'अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति' ने पिपरई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन पिपरई तहसीलदार अंजनी कुमार चौधरी को दिया गया, जिसे जिला कलेक्टर तक पहुँचाया जाना है। समिति की मुख्य मांग क्षेत्र की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शाकिर अहमद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि पिपरई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 50 से अधिक गांवों की आबादी के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहाँ सामान्य और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए हजारों ग्रामीण निर्भर करते हैं। समिति के सदस्य विक्रम तांवरे ने यह भी बताया कि नवीन और विशाल भवन होने के बावजूद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों की कमी है। इसी अभाव के कारण मरीजों को मामूली जांच और उपचार के लिए भी अशोकनगर, गुना या अन्य जिलों में रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों को धन और समय दोनों की हानि होती है और कई बार उनकी जान पर भी संकट आ जाता है। समिति की प्रमुख मांगों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों जैसे महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), शिशु रोग विशेषज्ञ और सर्जन की नियुक्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-रे मशीन की स्थापना और नियमित संचालन, सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) सुविधा तत्काल प्रारंभ करने, पैथोलॉजी लैब स्थापित कर सभी आवश्यक जांचों की व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की नियुक्ति करने, कम से कम 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली दो से तीन एंबुलेंस की व्यवस्था करने और एक शव वाहन की व्यवस्था करने की मांग की गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपते समय मुख्य रूप से रमेश रजक, गोविंद अहिरवार, निखिल अहिरवार और अलग-अलग गांवों से अन्य लोग उपस्थित थे।
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    अशोकनगर जिले की पिपरई में 'अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति' ने पिपरई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन पिपरई तहसीलदार अंजनी कुमार चौधरी को दिया गया, जिसे जिला कलेक्टर तक पहुँचाया जाना है। समिति की मुख्य मांग क्षेत्र की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शाकिर अहमद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि पिपरई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 50 से अधिक गांवों की आबादी के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहाँ सामान्य और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए हजारों ग्रामीण निर्भर करते हैं। समिति के सदस्य विक्रम तांवरे ने यह भी बताया कि नवीन और विशाल भवन होने के बावजूद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों की कमी है। इसी अभाव के कारण मरीजों को मामूली जांच और उपचार के लिए भी अशोकनगर, गुना या अन्य जिलों में रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों को धन और समय दोनों की हानि होती है और कई बार उनकी जान पर भी संकट आ जाता है।

समिति की प्रमुख मांगों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों जैसे महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), शिशु रोग विशेषज्ञ और सर्जन की नियुक्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-रे मशीन की स्थापना और नियमित संचालन, सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) सुविधा तत्काल प्रारंभ करने, पैथोलॉजी लैब स्थापित कर सभी आवश्यक जांचों की व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की नियुक्ति करने, कम से कम 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली दो से तीन एंबुलेंस की व्यवस्था करने और एक शव वाहन की व्यवस्था करने की मांग की गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपते समय मुख्य रूप से रमेश रजक, गोविंद अहिरवार, निखिल अहिरवार और अलग-अलग गांवों से अन्य लोग उपस्थित थे।
    user_रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
    रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
    पत्रकार अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक दुखद घटना सामने आई है। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक दुखद घटना सामने आई है। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
    user_Ravindra
    Ravindra
    Singer अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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