सिरोंज में एक निजी अस्पताल के संचालक पर युवती से दुष्कर्म के आरोप के बाद, कुशवाह समाज ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया। समाज के सैकड़ों लोगों ने सड़क पर उतरकर आरोपी डॉक्टर को तुरंत फांसी देने और अस्पताल की मान्यता रद्द करने की मांग की, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यह पूरा मामला शहर के संजीवनी अस्पताल का है, जिसके संचालक डॉ. संजीव माथुर पर इलाज के लिए आई समाज की एक युवती का यौन शोषण करने का आरोप है। इस घटना के विरोध में शनिवार दोपहर 1 बजे छतरीनाका से कुशवाह समाज का एक विशाल जुलूस निकाला गया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष नारायण कुशवाह और जिला अध्यक्ष मनोज कुशवाह की अगुवाई में यह जुलूस कस्टम, कठाली, मुख्य बाजार और पुराना बस स्टैंड होते हुए करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा। एसडीएम को कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने अस्पताल के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, पीड़िता का 15 दिनों तक इलाज चला, जिसमें उसे केवल दोपहर में भर्ती रखा जाता था और रात को घर भेज दिया जाता था, जो आयुष्मान योजना के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस अनियमितता को देखते हुए अस्पताल में बड़े आयुष्मान कार्ड घोटाले की आशंका जताते हुए गहन जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, यदि अस्पताल की बिल्डिंग अवैध है तो उस पर बुलडोजर चलाने और आरोपी डॉक्टर द्वारा पीड़िता के भाई पर दर्ज कराए गए मारपीट के केस को वापस लेने की मांग भी की गई है। सिरोंज टीआई गजेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि आरोपी डॉक्टर संजीव माथुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और वह फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में भोपाल में अपना इलाज करा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 74, 75(1)(i), 332(B) और 351 (3) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सिरोंज में एक निजी अस्पताल के संचालक पर युवती से दुष्कर्म के आरोप के बाद, कुशवाह समाज ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया। समाज के सैकड़ों लोगों ने सड़क पर उतरकर आरोपी डॉक्टर को तुरंत फांसी देने और अस्पताल की मान्यता रद्द करने की मांग की, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यह पूरा मामला शहर के संजीवनी अस्पताल का है, जिसके संचालक डॉ. संजीव माथुर पर इलाज के लिए आई समाज की एक युवती
का यौन शोषण करने का आरोप है। इस घटना के विरोध में शनिवार दोपहर 1 बजे छतरीनाका से कुशवाह समाज का एक विशाल जुलूस निकाला गया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष नारायण कुशवाह और जिला अध्यक्ष मनोज कुशवाह की अगुवाई में यह जुलूस कस्टम, कठाली, मुख्य बाजार और पुराना बस स्टैंड होते हुए करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा। एसडीएम को कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने अस्पताल के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ज्ञापन के अनुसार, पीड़िता का 15 दिनों तक इलाज चला, जिसमें उसे केवल दोपहर में भर्ती रखा जाता था और रात को घर भेज दिया जाता था, जो आयुष्मान योजना के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस अनियमितता को देखते हुए अस्पताल में बड़े आयुष्मान कार्ड घोटाले की आशंका जताते हुए गहन जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, यदि अस्पताल की बिल्डिंग अवैध है तो उस पर बुलडोजर चलाने और आरोपी डॉक्टर द्वारा पीड़िता के भाई
पर दर्ज कराए गए मारपीट के केस को वापस लेने की मांग भी की गई है। सिरोंज टीआई गजेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि आरोपी डॉक्टर संजीव माथुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और वह फिलहाल पुलिस अभिरक्षा में भोपाल में अपना इलाज करा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 74, 75(1)(i), 332(B) और 351 (3) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
- उपयोगकर्ता ने अपनी एक नई पोस्ट साझा करते हुए अपने सभी दोस्तों से उसे पसंद (लाइक) करने का विशेष अनुरोध किया है।1
- बीना में अधिवक्ता संघ के चुनावों के लिए शनिवार को सुबह 10:00 बजे से मतदान शुरू हो गया, जो शाम 4:00 बजे तक चलेगा। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल जबलपुर के तहत हो रहे ये चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए जा रहे हैं। इसमें कुल 269 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सह सचिव और पुस्तकालय अध्यक्ष के पदों के लिए वोट डाल रहे हैं। मतदान प्रक्रिया मुख्य चुनाव अधिकारी एड. राकेश मिश्रा, सहायक मुख्य चुनाव अधिकारी एड. धीरज सिंह लोधी और एड. नेहा मिश्रा की निगरानी में पूरी की जा रही है। अध्यक्ष पद के लिए त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है, जिसमें एड. सुरेंद्र सोनी, एड. अनिल शर्मा और एड. रामकुमार पुरोहित चुनाव मैदान में हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए एड. प्रीति लखेरा, एड. कृष्णा केथोरिया, एड. सुरेंद्र चौधरी और एड. शैलेंद्र दुबे के बीच प्रतिस्पर्धा है। इसी तरह, सचिव पद पर एड. सुरेश यादव और एड. त्रिलोक सिंह राजपूत; सह सचिव पद पर एड. अभिषेक राजे और एड. अमित सेन; तथा पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर एड. आरती राय और एड. पूनम खटीक के बीच वोटिंग हो रही है। इस बीच, कार्यकारिणी सदस्य पद पर एड. डी के जैन, एड. टी आर सुमन और एड. नारायण प्रसाद गौतम निर्विरोध चुने जा चुके हैं। महिला कार्यकारिणी में भी एड. लक्ष्मी सोनी और एड. शिखा विश्वकर्मा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है। बीना की विधायक एडवोकेट निर्मला सप्रे ने भी मतदान केंद्र पहुंचकर अपना वोट डाला और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। मतदान के दौरान ऐसे चेहरे भी देखने को मिले जो कभी वकालत के सिलसिले में अदालत नहीं आए, लेकिन आज संघ चुनाव में मतदान करने पहुंचे। शाम 4 बजे के बाद मतगणना की जाएगी और परिणामों की घोषणा की जाएगी।4
- बीना विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को बड़ा झटका दिया है, उनकी याचिका खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुरक्षित रखे गए फैसले को सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, इसलिए इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विधानसभा अध्यक्ष को किसी मामले में निर्णय लेने के लिए निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता द्वारा कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे याचिका में कोई तात्कालिकता भी प्रतीत नहीं हुई। यह पूरा मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जब निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी, जिसमें उन्होंने भाजपा प्रत्याशी महेश राय को 6,155 वोटों से हराया था। इसके बाद, 5 मई 2024 को वह राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच पर दिखाई दीं और 6 मई 2024 को उनके भाजपा में शामिल होने का दावा किया गया। इसी घटना को आधार बनाकर 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। बाद में नवंबर 2024 में इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 9 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने निर्मला सप्रे और विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया था। उमंग सिंघार का आरोप है कि कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होने के बावजूद निर्मला सप्रे ने भाजपा सरकार का समर्थन किया और भाजपा की शपथ लेने के बाद भी विधानसभा सदस्यता बरकरार रखी, जो दल-बदल कानून का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद, अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर ही लिया जाएगा। इस बीच, बीना में कांग्रेस नेता प्रदीप राय ने प्रेस वार्ता कर हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए कहा है कि कांग्रेस इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी और अपनी न्यायिक लड़ाई जारी रखेगी।1
- अशोकनगर के शासकीय लॉ कॉलेज में जनभागीदारी समिति द्वारा विभिन्न मदों में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि के विरोध में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन जिला कलेक्टर साहब से मिलने पर उन्हें असंवेदनशील रवैया देखने को मिला। AIDSO की नेहरू पीजी कॉलेज इकाई के सचिव शिशुपाल ने बताया कि वर्तमान में लॉ कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, और इस सत्र 2026-27 के लिए जनभागीदारी समिति ने फीस में ₹6962 की भारी वृद्धि कर दी है। सत्र 2023-24 में लॉ कॉलेज की फीस ₹5349 थी, जिसे बढ़ाकर ₹12311 कर दिया गया है। संगठन ने इस फीस वृद्धि को छात्र विरोधी और शिक्षा विरोधी कदम बताया, क्योंकि सरकारी संस्थानों का उद्देश्य सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि फीस बढ़ाकर शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुँच से दूर करना। अधिकांश छात्र निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनके लिए हजारों रुपये की अतिरिक्त फीस का बोझ उठाना संभव नहीं है। संगठन ने बताया कि उन्होंने 16 जून को भी ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर साहब को इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। जब प्रतिनिधिमंडल जिलाधीश महोदय से मिलने गया, तो उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक समस्या है और वे इसे नहीं सुन सकते, बल्कि यदि कोई व्यक्तिगत समस्या हो तो बताएं। फीस वृद्धि को लेकर कलेक्टर साहब का कहना था कि यदि एलएलबी में फीस बढ़ी है, तो जो छात्र फीस नहीं भर सकते, वे अन्य कम फीस वाले विषय में प्रवेश लें। AIDSO ने इस रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कलेक्टर साहब को छात्रों के प्रति असंवेदनशील नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्र हित में पूरी जिम्मेदारी से निर्णय लेना चाहिए। AIDSO का कहना है कि एक ओर सरकार “सब पढ़ें, सब बढ़ें” जैसे लोकलुभावन नारे देती है, वहीं दूसरी ओर लगातार सरकारी कॉलेजों में फीस वृद्धि करके छात्रों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। विभिन्न मदों के नाम पर की गई ₹6962 की वृद्धि पूरी तरह अनुचित है, जिससे छात्र आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होंगे। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि पर शीघ्र रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से चार प्रमुख मांगें रखी हैं: लॉ कॉलेज में की गई ₹6962 की फीस वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए; छात्रों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों की जांच कर उन्हें तुरंत रोका जाए; जनभागीदारी फंड में पारदर्शिता लाई जाए; और लॉ कॉलेज में शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक स्टाफ की स्थाई भर्ती की जाए।1
- बिहार में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर एक गहरा सियासी संग्राम छिड़ गया है। इस घटना पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह वास्तव में एक एनकाउंटर था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है। इस मामले को लेकर विशेष रूप से यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या भरत तिवारी ब्राह्मण थे, और यही वजह थी कि उनका एनकाउंटर किया गया।1
- विदिशा में मोहर्रम की दसवीं तारीख पर शुक्रवार को बाबड़ी वाले बाबा सहित विभिन्न सवारियाँ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कर्बला के लिए रवाना होंगी। इस अवसर पर, बाबड़ी वाले बाबा की सवारी सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल पेश करेगी, क्योंकि वर्षों से एक हिंदू कुशवाहा परिवार इसकी सेवा करता आ रहा है। बड़े बाजार स्थित बाबड़ी वाले बाबा की मजार लोगों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, जिसके ठीक सामने बजरंगबली मंदिर है। यहाँ दोनों धर्मों के लोग बिना किसी भेदभाव के अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं, जो विदिशा की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। कुशवाहा परिवार के अनुसार, उनके पूर्वजों ने बाबा की सेवा शुरू की थी और अब परिवार की पाँचवीं पीढ़ी इस परंपरा को निभा रही है। हर साल परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य के सिर पर बाबा की सवारी उठाई जाती है, और फूलों तथा पारंपरिक सजावट से सजी इस सवारी को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचते हैं। परिवार का कहना है कि इस आयोजन के लिए किसी भी तरह का चंदा नहीं लिया जाता है, बल्कि पूरी व्यवस्था परिवार द्वारा स्वयं की जाती है। श्रद्धालु अपनी इच्छा से सेवा और भंडारे में सहयोग करते हैं। इस साल भी सवारी के लिए मुंबई से पारंपरिक ढोल और दिल्ली से सेहरा मंगवाया गया है। परिवार के सदस्य रोहित कुशवाहा ने बताया कि यह सवारी अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विदिशा की पहचान बन चुकी है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय समान रूप से भाग लेते हैं। स्थानीय निवासी विनोद कुमार सोनी के अनुसार, यह परंपरा दशकों से बिना किसी रुकावट के चली आ रही है और आज भी सामाजिक एकता व भाईचारे का संदेश देती है।4
- अशोकनगर जिले की पिपरई में 'अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति' ने पिपरई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन पिपरई तहसीलदार अंजनी कुमार चौधरी को दिया गया, जिसे जिला कलेक्टर तक पहुँचाया जाना है। समिति की मुख्य मांग क्षेत्र की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शाकिर अहमद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि पिपरई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 50 से अधिक गांवों की आबादी के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहाँ सामान्य और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए हजारों ग्रामीण निर्भर करते हैं। समिति के सदस्य विक्रम तांवरे ने यह भी बताया कि नवीन और विशाल भवन होने के बावजूद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों की कमी है। इसी अभाव के कारण मरीजों को मामूली जांच और उपचार के लिए भी अशोकनगर, गुना या अन्य जिलों में रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों को धन और समय दोनों की हानि होती है और कई बार उनकी जान पर भी संकट आ जाता है। समिति की प्रमुख मांगों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों जैसे महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), शिशु रोग विशेषज्ञ और सर्जन की नियुक्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-रे मशीन की स्थापना और नियमित संचालन, सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) सुविधा तत्काल प्रारंभ करने, पैथोलॉजी लैब स्थापित कर सभी आवश्यक जांचों की व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की नियुक्ति करने, कम से कम 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली दो से तीन एंबुलेंस की व्यवस्था करने और एक शव वाहन की व्यवस्था करने की मांग की गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपते समय मुख्य रूप से रमेश रजक, गोविंद अहिरवार, निखिल अहिरवार और अलग-अलग गांवों से अन्य लोग उपस्थित थे।1
- गुना जिले के कुंभराज थाना क्षेत्र में ढाई वर्षीय मासूम की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि जिस पिता ने अपने बेटे की मौत पर शोक व्यक्त किया था, उसी ने पारिवारिक रंजिश के चलते अपने मासूम बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी थी। आरोपी पिता ने यह साजिश अपने भाइयों और माता-पिता को झूठे हत्या प्रकरण में फंसाने के लिए रची थी। पुलिस के अनुसार, 25 जून 2026 को ढाई वर्षीय बालक को कुंभराज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मृत अवस्था में लाया गया था। मौत संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने तत्काल मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामले की गहन विवेचना की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने मृतक के परिजनों और संबंधित लोगों से अलग-अलग पूछताछ की, जिसमें बालक के पिता मनोज साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास पाए गए। वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आधार पर गहन पूछताछ में मनोज साहू टूट गया और उसने अपने पुत्र की हत्या करना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी मनोज साहू ने बताया कि उसका अपने भाइयों और माता-पिता से मकान के हिस्से और किराए को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। साथ ही, पत्नी के छोड़कर चले जाने के कारण वह मानसिक रूप से भी परेशान था। इसी रंजिश के चलते उसने अपने मासूम बेटे की हत्या कर परिवार के अन्य सदस्यों को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी मनोज पुत्र रामविलास साहू (33 वर्ष), निवासी गीतानगर कॉलोनी, कुंभराज के खिलाफ अपराध क्रमांक 103/26 के तहत धारा 103(1) बीएनएस में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। इस सनसनीखेज मामले के खुलासे में थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज त्यागी, उपनिरीक्षक होतम सिंह बघेल, भमावद चौकी प्रभारी राजीव गौर सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने अथवा अपराध छिपाने का कोई भी प्रयास कानून से बच नहीं सकता है और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जाएगी।1
- विदिशा में एसबीआई गोल्ड लोन फर्जीवाड़े की जाँच के दायरे में आए बैंक कर्मी मनोज सोनी ने अपने खामखेड़ा स्थित फार्म हाउस में खुद को छर्रे वाली बंदूक से गोली मारकर घायल कर लिया है। एक छर्रा उनके दिल के ऊपर लगा है, जबकि एक अन्य जगह भी छर्रा लगा है। फार्म हाउस पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना विदिशा में उनके परिवार को दी। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। इस घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। यह ध्यान देने योग्य है कि दो दिन पहले ही सीबीआई ने बैंक लोन फर्जीवाड़े की जाँच के दौरान मनोज सोनी के परिवार द्वारा संचालित 'एमपी ज्वैलर्स' को सील किया था।4