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शहडोल जिला मुख्यालय में कॉन्वेंट स्कूल के सामने यातायात नियमों की सरेआम अनदेखी का मामला सामने आया है, जहाँ एक चार पहिया वाहन चालक को खुले मैदान में खतरनाक स्टंट करते हुए देखा गया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब चालक वाहन से स्टंट कर रहा था, उस समय आसपास कई स्कूली बच्चे मौजूद थे। चालक ने किसी भी प्रकार की सुरक्षा या जोखिम की परवाह किए बिना वाहन दौड़ाया, जिससे एक बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई थी। स्थानीय नागरिकों ने इसे कोई इकलौती घटना मानने से इनकार किया है। निवासियों का आरोप है कि शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में अक्सर बाइक चालक अपने वाहनों के साइलेंसर से तेज धमाकेदार आवाजें निकालकर दहशत फैलाते हैं। इन गतिविधियों के कारण राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के लिए हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि इन शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा ऐसे लापरवाह वाहन चालकों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

11 hrs ago
user_राहुल सिंह राणा
राहुल सिंह राणा
Newspaper advertising department सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
11 hrs ago

शहडोल जिला मुख्यालय में कॉन्वेंट स्कूल के सामने यातायात नियमों की सरेआम अनदेखी का मामला सामने आया है, जहाँ एक चार पहिया वाहन चालक को खुले मैदान में खतरनाक स्टंट करते हुए देखा गया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब चालक वाहन से स्टंट कर रहा था, उस समय आसपास कई स्कूली बच्चे मौजूद थे। चालक ने किसी भी प्रकार की सुरक्षा या जोखिम की परवाह किए बिना वाहन दौड़ाया, जिससे एक बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई थी। स्थानीय नागरिकों ने इसे कोई इकलौती घटना मानने से इनकार किया है। निवासियों का आरोप है कि शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में अक्सर बाइक चालक अपने वाहनों के साइलेंसर से तेज धमाकेदार आवाजें निकालकर दहशत फैलाते हैं। इन गतिविधियों के कारण राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के लिए हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि इन शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा ऐसे लापरवाह वाहन चालकों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल न होने के कारण बारिश के मौसम में बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुँचने के लिए सामान्य 4 से 5 किलोमीटर की दूरी के बजाय अमरपुर होकर लगभग 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई बार विद्यालय पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दौरान नदी में जलभराव से पूर्व में भी कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी हैं। छात्र-छात्राओं ने अपनी पढ़ाई सुचारु रखने और पुल निर्माण की मांग को लेकर 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि हलफल-भदार नदी के संगम क्षेत्र में जलभराव पहले से अधिक हो रहा है, कुछ ग्रामीणों ने इसके लिए ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे आवागमन के साथ-साथ किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हलफल-भदार नदी से जुड़े रेत समूहों से शासन को राजस्व मिलता है, इसलिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) मद या अन्य उपयुक्त योजना से पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मौखिक एवं लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने शिक्षकों पर कार्रवाई तो कर दी, लेकिन पुल के अभाव में हर वर्ष हजारों छात्र-छात्राओं की प्रभावित होती पढ़ाई और उनके भविष्य की चिंता नहीं की। उन्होंने जिला कलेक्टर से शीघ्र मौके का निरीक्षण कर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्रीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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    जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल न होने के कारण बारिश के मौसम में बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुँचने के लिए सामान्य 4 से 5 किलोमीटर की दूरी के बजाय अमरपुर होकर लगभग 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई बार विद्यालय पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता।

ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दौरान नदी में जलभराव से पूर्व में भी कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी हैं। छात्र-छात्राओं ने अपनी पढ़ाई सुचारु रखने और पुल निर्माण की मांग को लेकर 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि हलफल-भदार नदी के संगम क्षेत्र में जलभराव पहले से अधिक हो रहा है, कुछ ग्रामीणों ने इसके लिए ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे आवागमन के साथ-साथ किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी बढ़ रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि हलफल-भदार नदी से जुड़े रेत समूहों से शासन को राजस्व मिलता है, इसलिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) मद या अन्य उपयुक्त योजना से पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मौखिक एवं लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने शिक्षकों पर कार्रवाई तो कर दी, लेकिन पुल के अभाव में हर वर्ष हजारों छात्र-छात्राओं की प्रभावित होती पढ़ाई और उनके भविष्य की चिंता नहीं की। उन्होंने जिला कलेक्टर से शीघ्र मौके का निरीक्षण कर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्रीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • डिंडोरी से अमरकंटक को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित कूड़ा गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नाली निर्माण के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस निर्माण कार्य के चलते गांव के बीच का रास्ता अवरुद्ध हो गया है, जिससे एक ओर तो चारों तरफ कीचड़ फैल गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को आवाजाही में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या जीआरटीसी कंपनी द्वारा पैदा की गई है, जो इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाली का निर्माण कार्य करवा रही है, और ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी उनकी परेशानियों से पूरी तरह बेखबर है।
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    डिंडोरी से अमरकंटक को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित कूड़ा गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नाली निर्माण के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस निर्माण कार्य के चलते गांव के बीच का रास्ता अवरुद्ध हो गया है, जिससे एक ओर तो चारों तरफ कीचड़ फैल गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को आवाजाही में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या जीआरटीसी कंपनी द्वारा पैदा की गई है, जो इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाली का निर्माण कार्य करवा रही है, और ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी उनकी परेशानियों से पूरी तरह बेखबर है।
    user_Santosh Ahirwar
    Santosh Ahirwar
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • मध्य प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से एक वर्ष तक प्रतिमाह ₹1,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है, जिससे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसके माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पाद प्राप्त होते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।
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    मध्य प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से एक वर्ष तक प्रतिमाह ₹1,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है, जिससे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है।

उन्होंने यह भी बताया कि इसके माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पाद प्राप्त होते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।
    user_खमोद चंदेल
    खमोद चंदेल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • डिंडोरी जिले के बजाग में साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधों से बचाव के लिए नागरिकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, क्यूआर कोड लिंक और ओटीपी जैसी बैंक से संबंधित कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें। इस सुरक्षा संदेश का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोटवारों की मदद ली जा रही है। गाँव-गाँव जाकर कोटवारों के माध्यम से लोगों को साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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    डिंडोरी जिले के बजाग में साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधों से बचाव के लिए नागरिकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, क्यूआर कोड लिंक और ओटीपी जैसी बैंक से संबंधित कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें।

इस सुरक्षा संदेश का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोटवारों की मदद ली जा रही है। गाँव-गाँव जाकर कोटवारों के माध्यम से लोगों को साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
    user_राजेश कुमार मरावी
    राजेश कुमार मरावी
    Voice of people बजाग, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • डिंडोरी जिले के एक गांव में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप्प थी। इस लंबी अवधि तक बिजली न मिलने से उत्पन्न हुई परेशानी के बाद, गांव के युवाओं ने स्वयं निर्णय लेते हुए स्थिति को सुधारने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप, गांव में बिजली फिर से चालू हो सकी।
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    डिंडोरी जिले के एक गांव में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप्प थी। इस लंबी अवधि तक बिजली न मिलने से उत्पन्न हुई परेशानी के बाद, गांव के युवाओं ने स्वयं निर्णय लेते हुए स्थिति को सुधारने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप, गांव में बिजली फिर से चालू हो सकी।
    user_Subhash Singh
    Subhash Singh
    बजाग, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • डिण्डौरी में भारतीय किसान संघ ने किसानों और ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में शहपुरा में 132 केवी विद्युत सबस्टेशन का काम तुरंत शुरू कराने, बिलगड़ा बांध के वेस्टवेयर और ढोंढ़ा बैगा टोला के घरों में आई दरारों की जांच कराने, कृषि उपसंचालक द्वारा किसानों के फोन न उठाने पर नाराजगी जताते हुए मार्गदर्शन मांगने और उद्यानिकी विभाग के स्थायी कार्यालय स्थापित करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ ने बताया कि शहपुरा विकासखंड में मजबूत विद्युत व्यवस्था के लिए लंबे समय से 132 केवी सबस्टेशन की मांग की जा रही है। एक साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालपुर में एक कार्यक्रम के दौरान शहपुरा में 132 केवी सबस्टेशन स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ। इससे शहपुरा और मेंहदवानी विकासखंड के 316 गाँव अघोषित बिजली कटौती से प्रभावित हैं, जिससे किसानों, पेयजल व्यवस्था, शिक्षा और दैनिक जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। किसान संघ ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर तत्काल अमल करते हुए सबस्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की। ज्ञापन में बिलगड़ा जलाशय मध्यम परियोजना के इंटेकवेल निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग का मुद्दा भी उठाया गया। किसान संघ का आरोप है कि इस ब्लास्टिंग के कारण बांध के वेस्टवेयर और ढोंढ़ा बैगा टोला के दर्जनों मकानों में दरारें आ गई हैं। संघ ने आशंका व्यक्त की है कि यदि समय रहते जांच और मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में जनहानि या कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने विशेषज्ञों से तत्काल जांच कराकर सुरक्षा और मरम्मत कार्य कराने की मांग की है। कृषि उपसंचालक के कार्य व्यवहार को लेकर भी किसान संघ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। ज्ञापन में कहा गया है कि कृषि उपसंचालक किसानों के फोन कॉल रिसीव नहीं करते, जिससे किसान अपनी समस्याएं नहीं बता पाते। खरीफ सीजन के दौरान समय पर बीज उपलब्ध न होने के कारण कई किसानों की बोनी प्रभावित हुई थी। संघ ने सवाल उठाया कि जब अधिकारी किसानों की बात ही नहीं सुनेंगे, तो शासन की योजनाओं का लाभ उन तक कैसे पहुँचेगा और किसान किससे बात करें। इसके अतिरिक्त, किसान संघ ने उद्यानिकी विभाग के जिला और विकासखंड स्तर पर स्थायी कार्यालय स्थापित करने की भी मांग की। संघ का कहना है कि स्थायी कार्यालय न होने से किसानों को योजनाओं और तकनीकी सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता और उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है। संघ ने सभी विकासखंडों में उद्यानिकी विभाग के स्थायी कार्यालय जनपद पंचायत या कृषि विभाग परिसर में संचालित करने का सुझाव दिया। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, जिला कोषाध्यक्ष विवेकानंद साहू सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों के हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
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    डिण्डौरी में भारतीय किसान संघ ने किसानों और ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में शहपुरा में 132 केवी विद्युत सबस्टेशन का काम तुरंत शुरू कराने, बिलगड़ा बांध के वेस्टवेयर और ढोंढ़ा बैगा टोला के घरों में आई दरारों की जांच कराने, कृषि उपसंचालक द्वारा किसानों के फोन न उठाने पर नाराजगी जताते हुए मार्गदर्शन मांगने और उद्यानिकी विभाग के स्थायी कार्यालय स्थापित करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

संघ ने बताया कि शहपुरा विकासखंड में मजबूत विद्युत व्यवस्था के लिए लंबे समय से 132 केवी सबस्टेशन की मांग की जा रही है। एक साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालपुर में एक कार्यक्रम के दौरान शहपुरा में 132 केवी सबस्टेशन स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ। इससे शहपुरा और मेंहदवानी विकासखंड के 316 गाँव अघोषित बिजली कटौती से प्रभावित हैं, जिससे किसानों, पेयजल व्यवस्था, शिक्षा और दैनिक जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। किसान संघ ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर तत्काल अमल करते हुए सबस्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।

ज्ञापन में बिलगड़ा जलाशय मध्यम परियोजना के इंटेकवेल निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग का मुद्दा भी उठाया गया। किसान संघ का आरोप है कि इस ब्लास्टिंग के कारण बांध के वेस्टवेयर और ढोंढ़ा बैगा टोला के दर्जनों मकानों में दरारें आ गई हैं। संघ ने आशंका व्यक्त की है कि यदि समय रहते जांच और मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में जनहानि या कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने विशेषज्ञों से तत्काल जांच कराकर सुरक्षा और मरम्मत कार्य कराने की मांग की है।

कृषि उपसंचालक के कार्य व्यवहार को लेकर भी किसान संघ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। ज्ञापन में कहा गया है कि कृषि उपसंचालक किसानों के फोन कॉल रिसीव नहीं करते, जिससे किसान अपनी समस्याएं नहीं बता पाते। खरीफ सीजन के दौरान समय पर बीज उपलब्ध न होने के कारण कई किसानों की बोनी प्रभावित हुई थी। संघ ने सवाल उठाया कि जब अधिकारी किसानों की बात ही नहीं सुनेंगे, तो शासन की योजनाओं का लाभ उन तक कैसे पहुँचेगा और किसान किससे बात करें।

इसके अतिरिक्त, किसान संघ ने उद्यानिकी विभाग के जिला और विकासखंड स्तर पर स्थायी कार्यालय स्थापित करने की भी मांग की। संघ का कहना है कि स्थायी कार्यालय न होने से किसानों को योजनाओं और तकनीकी सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता और उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है। संघ ने सभी विकासखंडों में उद्यानिकी विभाग के स्थायी कार्यालय जनपद पंचायत या कृषि विभाग परिसर में संचालित करने का सुझाव दिया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, जिला कोषाध्यक्ष विवेकानंद साहू सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों के हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
    user_खमोद चंदेल
    खमोद चंदेल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी विकासखंड में किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों तथा गोदामों का औचक निरीक्षण किया गया। पर्यटक कृषि विकास अधिकारी अभिषेक तिवारी ने एसडीओ के रूप में ब्यौहारी में यह निरीक्षण किया, जिसमें स्टॉक अभिलेख, लाइसेंस और विक्रय व्यवस्था का गहन परीक्षण किया गया। इस दौरान, गुणवत्ता परीक्षण हेतु विभिन्न कृषि आदानों के नमूने नियमानुसार संग्रहित कर प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए। निरीक्षण के दौरान सभी विक्रेताओं को निर्देश दिए गए कि वे केवल प्रमाणित एवं मानक गुणवत्ता वाले कृषि आदानों का ही विक्रय करें, सभी अभिलेखों को अद्यतन रखें तथा किसानों को निर्धारित दर पर सामग्री उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्हें शासन के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करने एवं किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचने के लिए भी निर्देशित किया गया।
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    मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी विकासखंड में किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों तथा गोदामों का औचक निरीक्षण किया गया। पर्यटक कृषि विकास अधिकारी अभिषेक तिवारी ने एसडीओ के रूप में ब्यौहारी में यह निरीक्षण किया, जिसमें स्टॉक अभिलेख, लाइसेंस और विक्रय व्यवस्था का गहन परीक्षण किया गया।

इस दौरान, गुणवत्ता परीक्षण हेतु विभिन्न कृषि आदानों के नमूने नियमानुसार संग्रहित कर प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए। निरीक्षण के दौरान सभी विक्रेताओं को निर्देश दिए गए कि वे केवल प्रमाणित एवं मानक गुणवत्ता वाले कृषि आदानों का ही विक्रय करें, सभी अभिलेखों को अद्यतन रखें तथा किसानों को निर्धारित दर पर सामग्री उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्हें शासन के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करने एवं किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचने के लिए भी निर्देशित किया गया।
    user_Durgesh Kumar Gupta
    Durgesh Kumar Gupta
    Electrician Beohari, Shahdol•
    23 hrs ago
  • सिंगरौली जिले के देवसर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत महुआ के खजूर टोला में सड़क की बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। बारिश के चलते पूरी सड़क कीचड़ से भर गई है, जिससे यहाँ से गुजरना बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की दुर्दशा के कारण आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस समय पर गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को भी इसी कीचड़ से होकर विद्यालय जाना पड़ता है, जिससे न केवल उनके कपड़े और किताबें खराब हो रही हैं, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। इसके अलावा, दैनिक जरूरतों के लिए बाजार जाने वाले लोगों के लिए पैदल चलना दूभर हो गया है और दोपहिया वाहन फिसलने का डर हमेशा बना रहता है। ग्रामीणों ने अब ग्राम पंचायत के सरपंच और क्षेत्रीय विधायक से इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए खजूर टोला तक पक्की सड़क का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही, प्रशासन से बरसात के मौसम को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील की गई है ताकि आवागमन सुगम बनाया जा सके और लोगों को दैनिक परेशानियों से राहत मिल सके।
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    सिंगरौली जिले के देवसर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत महुआ के खजूर टोला में सड़क की बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। बारिश के चलते पूरी सड़क कीचड़ से भर गई है, जिससे यहाँ से गुजरना बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की दुर्दशा के कारण आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस समय पर गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूली बच्चों को भी इसी कीचड़ से होकर विद्यालय जाना पड़ता है, जिससे न केवल उनके कपड़े और किताबें खराब हो रही हैं, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। इसके अलावा, दैनिक जरूरतों के लिए बाजार जाने वाले लोगों के लिए पैदल चलना दूभर हो गया है और दोपहिया वाहन फिसलने का डर हमेशा बना रहता है।

ग्रामीणों ने अब ग्राम पंचायत के सरपंच और क्षेत्रीय विधायक से इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए खजूर टोला तक पक्की सड़क का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही, प्रशासन से बरसात के मौसम को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील की गई है ताकि आवागमन सुगम बनाया जा सके और लोगों को दैनिक परेशानियों से राहत मिल सके।
    user_Rajneesh Mauriya journalist
    Rajneesh Mauriya journalist
    Court reporter कुसमी, सीधी, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • उमरिया जिले के करकेली से सटे बसकुटा गांव में गुरुवार को डीके राइस मिल में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना इसलिए भी हैरान करने वाली है, क्योंकि यह बरसात के मौसम में हुई जब आमतौर पर आग लगने की घटनाएं कम होती हैं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और मिल में भंडारित हजारों क्विंटल धान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत और पसीने की कमाई कुछ ही देर में राख में बदल गई। गनीमत रही कि कुछ ही देर में दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पा लिया गया, हालांकि तब तक भारी मात्रा में धान जलकर नष्ट हो चुका था। आग लगने के पीछे का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। इस घटना ने धान मिलों में भंडारित अनाज की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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    उमरिया जिले के करकेली से सटे बसकुटा गांव में गुरुवार को डीके राइस मिल में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना इसलिए भी हैरान करने वाली है, क्योंकि यह बरसात के मौसम में हुई जब आमतौर पर आग लगने की घटनाएं कम होती हैं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और मिल में भंडारित हजारों क्विंटल धान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत और पसीने की कमाई कुछ ही देर में राख में बदल गई।

गनीमत रही कि कुछ ही देर में दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पा लिया गया, हालांकि तब तक भारी मात्रा में धान जलकर नष्ट हो चुका था। आग लगने के पीछे का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। इस घटना ने धान मिलों में भंडारित अनाज की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    user_अनुज सेन  राष्ट्रचंडिका अखबार
    अनुज सेन राष्ट्रचंडिका अखबार
    Lawyer Bandhogarh, Umaria•
    21 hrs ago
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