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गीदगढ़ से महुआखेड़ा तक भूमि पूजन के 2 साल बाद भी नहीं बनी 62 लाख की ग्रेवल रोड, 8–10 गांवों के लोग परेशान — रेल पटरी से गुजरने को मजबूर, कई जानें जा चुकीं गीदगढ़ से महुआखेड़ा तक भूमि पूजन के 2 साल बाद भी नहीं बनी 62 लाख की ग्रेवल रोड, 8–10 गांवों के लोग परेशान — रेल पटरी से गुजरने को मजबूर, कई जानें जा चुकीं
ABBTAK NEWS Dewangnj
गीदगढ़ से महुआखेड़ा तक भूमि पूजन के 2 साल बाद भी नहीं बनी 62 लाख की ग्रेवल रोड, 8–10 गांवों के लोग परेशान — रेल पटरी से गुजरने को मजबूर, कई जानें जा चुकीं गीदगढ़ से महुआखेड़ा तक भूमि पूजन के 2 साल बाद भी नहीं बनी 62 लाख की ग्रेवल रोड, 8–10 गांवों के लोग परेशान — रेल पटरी से गुजरने को मजबूर, कई जानें जा चुकीं
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- रायसेन जिले के सिलवानी में स्टेट हाईवे-44 पर बना जुनिया नदी का पुल लोगों के लिए खतरा बनता जा रहा है। पुल पर रेलिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेत नहीं हैं, जबकि रोज़ाना स्कूल बस, एंबुलेंस और भारी वाहन गुजरते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।1
- -vineet maheshwari 9981322343 मध्य प्रदेश के छोटे से शहर रायसेन की 21 वर्षीय खुशी गहलोत की कहानी आज उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं। एक ड्राइवर की बेटी, जिसने धूल भरे मैदानों से अपना सफर शुरू किया था, अब इंडियन वुमेन्स लीग (IWL) के चकाचौंध भरे मैदानों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। संघर्षों से भरा रहा शुरुआती सफर खुशी के लिए फुटबॉल का मैदान चुनना आसान नहीं था। पिता पेशे से ड्राइवर हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि खेल के लिए महंगे स्पाइक्ड जूते या विशेष डाइट का खर्च उठाया जा सके। फुटबॉल को अपनी 'लाइफलाइन' मानने वाली खुशी ने हार नहीं मानी। 2017 में स्कूल से शुरुआत करने के बाद, उन्होंने अपनी ट्रेनिंग और किट का खर्च निकालने के लिए डेढ़ साल तक प्राइवेट नौकरी भी की। वह दिन में काम करती थीं और रातों में जी-तोड़ प्रैक्टिस। तेज रफ्तार और दमदार स्टैमिना बनी पहचान सेंट्रल मिडफील्डर के तौर पर खेलने वाली खुशी को उनकी रफ्तार और स्टैमिना के लिए जाना जाता है। लोकल टूर्नामेंट के दौरान स्काउट किए जाने के बाद उन्होंने रीजनल टीम में जगह बनाई। वर्तमान में वह अपनी टीम डीएफए रायसेन का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, जिसने पहली बार IWL के लिए क्वालीफाई कर इतिहास रचा है। लक्ष्य अभी बाकी है सीनियर नेशनल चैंपियनशिप पर फोकस करने के लिए खुशी ने हाल ही में अपनी नौकरी छोड़ दी है। वह कहती हैं, "मैदान पर मेरा हर गोल मेरे परिवार और रायसेन के सम्मान के लिए होता है।" आर्थिक चुनौतियां आज भी बरकरार हैं, लेकिन खुशी का हौसला उनके खेल की तरह ही अडिग है। खुशी ने बताया कि 12 नेशनल खेल चुकी है ।1
- Post by PS24NEWS1
- Post by AM NEWS1
- Post by Ajay Suryavanshi1
- मवई गांव में रेलवे स्टेशन पर कोई निर्माण नहीं हुआ ना लाइट की सुविधा ना पानी की यात्रियों को बहुत परेशानी आ रही है1
- रायसेन जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में बेगमगंज रोड स्थित घाना जसरथी जोड़ के पास शनिवार रात करीब 9 बजे थ्रेसर लगा एक ट्रैक्टर पलट गया। जानकारी के मुताबिक चालक की लापरवाही के कारण ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलटा। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। #1