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सरकार द्वारा बेघर किए गए लोगों में शामिल एक बच्ची के आँसू देखकर एक रिपोर्टर भावुक हो गया। बच्ची की मार्मिक स्थिति देखकर रिपोर्टर की भावनाएँ उमड़ पड़ीं।
(Journalist) Madhur kumar
सरकार द्वारा बेघर किए गए लोगों में शामिल एक बच्ची के आँसू देखकर एक रिपोर्टर भावुक हो गया। बच्ची की मार्मिक स्थिति देखकर रिपोर्टर की भावनाएँ उमड़ पड़ीं।
- (Journalist) Madhur kumarसंडीला, हरदोई, उत्तर प्रदेश💣1 hr ago
- (Journalist) Madhur kumarसंडीला, हरदोई, उत्तर प्रदेश😡1 hr ago
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- भारत से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी ट्रम्प वर्ष 2027 में भारत के दौरे पर आ सकते हैं। बताया गया है कि वे इस संभावित दौरे की तैयारी में हैं।1
- लखनऊ में इन दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और अदालतों की प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस वायरल वीडियो में एक पेशकार कथित तौर पर अदालत कक्ष के भीतर जज साहब के पास बैठा, तारीख लेने पहुंचे लोगों से खुलेआम 100 से 200 रुपये लेते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर न्याय के मंदिर कहे जाने वाले कोर्ट परिसर में यदि तारीख के नाम पर इस तरह पैसे लिए जा रहे हैं, तो यह किस बात की वसूली है? सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब यह सब कथित तौर पर जज साहब के ठीक बगल में हो रहा है, तो क्या यह उनकी नज़र में नहीं आता, या फिर यह सिस्टम में सामान्य मान लिया गया है। आम जनता का कहना है कि न्याय पाने के लिए लोग पहले ही अदालतों के चक्कर काटते हैं, ऐसे में अगर हर तारीख पर अलग से पैसे देने पड़ें तो गरीब और कमजोर वर्ग के लिए न्याय और भी मुश्किल हो जाता है। फिलहाल वायरल वीडियो की सत्यता और यह मामला किस अदालत का है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन इस वीडियो ने न्याय व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।1
- उन्नाव जिले के बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के इस्माइलपुर आँबापारा (कुर्मिन खेड़ा) गाँव निवासी और उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता, यश भारती से सम्मानित प्रमुख समाजसेवी फारूक अहमद एडवोकेट ने आज बांगरमऊ नगर में एक प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने बांगरमऊ के चौमुखी विकास के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष करने का अपना संकल्प दोहराया। यह प्रेस वार्ता नगर के मोहल्ला गुलाम मुस्तफा निवासी प्रमुख समाजसेवी फजलुर्रहमान के आवास पर आयोजित की गई थी। फारूक अहमद ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करना है और वह बिना किसी जाति या मजहब के भेदभाव के निरंतर समाज की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने अपनी वकालत को पेशा बताते हुए भी पूरी ईमानदारी और न्यायप्रियता से काम करने की बात कही। वरिष्ठ अधिवक्ता ने बांगरमऊ क्षेत्र को मिली पूर्व की सौगातों का भी ब्योरा साझा किया, जिन्हें उनके प्रयासों से जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय में दायर किया गया था। उनके इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप बांगरमऊ को तहसील का दर्जा मिला, क्षेत्र में सब रजिस्ट्रार ऑफिस की स्थापना हुई, और बेहटा मुजावर पुलिस चौकी को सुदृढ़ीकरण और उच्चीकरण के बाद नया थाना बनाया गया। इसके अतिरिक्त, गोशा कुतुब ग्राम के पास शारदा नहर पर नया पुल और क्षेत्र की जनता के लिए रोडवेज बस अड्डा बनवाया गया, तथा ग्रामीण इलाकों में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्थापित कराए गए। फारूक अहमद एडवोकेट ने बताया कि बांगरमऊ के विकास की यह यात्रा अभी जारी है। वर्तमान में उनकी दो प्रमुख मांगें शासन-प्रशासन के समक्ष विचाराधीन हैं: बांगरमऊ क्षेत्र में एक सुव्यवस्थित पोस्टमार्टम हाउस की आवश्यकता और क्षेत्र की बड़ी आबादी तथा भौगोलिक विस्तार को देखते हुए इसे शीघ्र ही नया जिला बनाया जाना। उन्होंने प्रेस वार्ता के अंत में मीडिया और पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें सम्मानित पत्रकार साथियों का सहयोग और जनता का स्नेह मिलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब सब मिलकर बांगरमऊ को जिला बनाने में सफल होंगे। इस अवसर पर उनके साथ प्रमुख समाजसेवी सैयद सगीरुल हसन उर्फ मुन्ना भाई, मो० अजमल एडवोकेट, समाजसेवी फजलुर्रहमान सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।1
- कांग्रेस सांसद राकेश राठौर ने अयोध्या से जुड़े चर्चित प्रकरण की जांच को लेकर राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सीतापुर से मिली खबर के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में एसआईटी की कार्रवाई में केवल "छोटी मछलियों" को फंसाया गया, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों को बचा लिया गया। राठौर ने इस पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी के बजाय सीबीआई से कराने की मांग की, ताकि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित हो सके। सांसद ने आगे कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में गंभीर लापरवाही बरती गई है और जनता की भावनाओं के साथ मजाक किया गया है। उन्होंने लखनऊ से संबंधित एक मामले का भी जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब आवश्यक मानक पूरे नहीं थे, तब संबंधित संस्थान का पंजीकरण आखिर किस आधार पर किया गया। राकेश राठौर ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में अयोध्या प्रकरण को लेकर सियासी बहस के एक बार फिर तेज होने की संभावना है।1
- विदेश मंत्रालय (MEA) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता है। इस स्पष्टीकरण ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं है, तो भारतीय नागरिकता कैसे निर्धारित की जाएगी? MEA के अनुसार, आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज मुख्य रूप से पहचान या निवास के प्रमाण के तौर पर कार्य करते हैं। ये दस्तावेज कुछ गैर-नागरिकों को भी जारी किए जा सकते हैं, जिससे ये भी नागरिकता के विश्वसनीय प्रमाण के रूप में अनुपयोगी हो जाते हैं। मौजूदा व्यवस्था में, भारत में नागरिकता मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत जन्म, वंश या पंजीकरण के आधार पर तय की जाती है। इस स्थिति में, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सामान्य पहचान दस्तावेज नागरिकता सिद्ध करने में अपर्याप्त हैं, तो भविष्य में व्यक्ति की भारतीय नागरिकता किस आधार पर तय की जाएगी? इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या यह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की तैयारी का संकेत है।2
- राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र में एक परिवार ने घर में घुसकर मारपीट और लूटपाट किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे अरविंदो चौकी क्षेत्र में हुई, जब कुछ लोग "जनगणना करने" के बहाने घर का गेट खुलवाकर अंदर घुस आए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। पीड़िता का आरोप है कि हमलावरों ने उसके पति और छोटे बच्चे के साथ भी मारपीट की, और घर से लाखों रुपये के जेवरात, नकदी तथा मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने इस मामले में काशीनाथ तिवारी और उनकी पत्नी कालिंदी तिवारी समेत कुछ अन्य लोगों पर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का यह भी कहना है कि आरोपी पक्ष दर्जनों लोगों के साथ मकान खाली कराने के उद्देश्य से पहुंचा था और इस दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए। हालांकि, पड़ोस में लगे कैमरों में घटना की फुटेज होने का दावा किया जा रहा है। परिवार का कहना है कि यह घटना एक पुराने मकान विवाद से जुड़ी है, जिसमें पीड़िता के ससुर वीरेंद्र प्रताप सिंह ने आरोपित पक्ष को 35 लाख रुपये दिए थे और भुगतान न होने पर मकान से जुड़ा एक एग्रीमेंट किया गया था। सूचना मिलने पर पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। हालांकि, पीड़ित परिवार ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है; उनके मुताबिक, उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया गया था, लेकिन न तो मेडिकल कराया गया और न ही उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के बाद से परिवार खुद को डरा और सहमा हुआ बता रहा है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है और पीड़ित परिवार की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया जाता है या नहीं।1
- Post by Krishnan1
- सरकार द्वारा बेघर किए गए लोगों में शामिल एक बच्ची के आँसू देखकर एक रिपोर्टर भावुक हो गया। बच्ची की मार्मिक स्थिति देखकर रिपोर्टर की भावनाएँ उमड़ पड़ीं।1