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कुचेंदु गांव की गौशाला में पानी की व्यवस्था धड़ाम, ग्राम प्रधान ने ग्राम पंचायत अधिकारी के ऊपर लगाए गंभीर आरोप बबेरू ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत कुचेंदू ग्राम पंचायत मे बनी गौशाला में इस तरह की चिलचिलाती धूप और गर्मी से गौवंशों की प्यास से हालत खराब हो रही है। गौशाला में पानी पीने की व्यवस्थाएं पूरी तरह से धड़ाम है, जब इस विषय में ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा से बातचीत की गई, तो बताया कि पिछले फरवरी माह से गौशाला में लगा समरसेबल खराब पड़ा है, कई बार ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह व खंड विकास अधिकारी को लिखित में पत्र दे चुके हैं, और समस्या का समाधान कराए जाने की मांग किया है। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक समरसेबल बन नहीं पाया है। जिससे गोवंशों को पीने के लिए तालाब से समरसेबल के माध्यम से पानी पीने के लिए भर व्यवस्था की जाती है,। वहीं ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा ने ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के ऊपर गंभीर आरोप भी लगाया है, और कहा कि ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के द्वारा भूसा और अन्य सामग्री का भुगतान नहीं करवा रही हैं, जबकि ग्राम पंचायत के खाते में पर्याप्त धन करीब 11 लाख रुपए पड़ा हुआ है, और यह भी आरोप लगाया कि जब तक 50% कमीशन नहीं मिलेगा तब तक मैं भुगतान नहीं करूंगी, क्या कहा ग्राम प्रधान कमलेश वर्मा आप भी सुने

6 hrs ago
user_JSB NEWS UP
JSB NEWS UP
पत्रकारिता Baberu, Banda•
6 hrs ago

कुचेंदु गांव की गौशाला में पानी की व्यवस्था धड़ाम, ग्राम प्रधान ने ग्राम पंचायत अधिकारी के ऊपर लगाए गंभीर आरोप बबेरू ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत कुचेंदू ग्राम पंचायत मे बनी गौशाला में इस तरह की चिलचिलाती धूप और गर्मी से गौवंशों की प्यास से हालत खराब हो रही है। गौशाला में पानी पीने की व्यवस्थाएं पूरी तरह से धड़ाम है, जब इस विषय में ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा से बातचीत की गई, तो बताया कि पिछले फरवरी माह से गौशाला में लगा समरसेबल खराब पड़ा है, कई बार ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह व खंड विकास अधिकारी को लिखित में पत्र दे चुके हैं, और समस्या का समाधान कराए जाने की मांग किया है। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक समरसेबल बन नहीं पाया है। जिससे गोवंशों को पीने के लिए तालाब से समरसेबल के माध्यम से पानी पीने के लिए भर व्यवस्था की जाती है,। वहीं ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा ने ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के ऊपर गंभीर आरोप भी लगाया है, और कहा कि ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के द्वारा भूसा और अन्य सामग्री का भुगतान नहीं करवा रही हैं, जबकि ग्राम पंचायत के खाते में पर्याप्त धन करीब 11 लाख रुपए पड़ा हुआ है, और यह भी आरोप लगाया कि जब तक 50% कमीशन नहीं मिलेगा तब तक मैं भुगतान नहीं करूंगी, क्या कहा ग्राम प्रधान कमलेश वर्मा आप भी सुने

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  • बबेरू ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत कुचेंदू ग्राम पंचायत मे बनी गौशाला में इस तरह की चिलचिलाती धूप और गर्मी से गौवंशों की प्यास से हालत खराब हो रही है। गौशाला में पानी पीने की व्यवस्थाएं पूरी तरह से धड़ाम है, जब इस विषय में ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा से बातचीत की गई, तो बताया कि पिछले फरवरी माह से गौशाला में लगा समरसेबल खराब पड़ा है, कई बार ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह व खंड विकास अधिकारी को लिखित में पत्र दे चुके हैं, और समस्या का समाधान कराए जाने की मांग किया है। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक समरसेबल बन नहीं पाया है। जिससे गोवंशों को पीने के लिए तालाब से समरसेबल के माध्यम से पानी पीने के लिए भर व्यवस्था की जाती है,। वहीं ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा ने ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के ऊपर गंभीर आरोप भी लगाया है, और कहा कि ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के द्वारा भूसा और अन्य सामग्री का भुगतान नहीं करवा रही हैं, जबकि ग्राम पंचायत के खाते में पर्याप्त धन करीब 11 लाख रुपए पड़ा हुआ है, और यह भी आरोप लगाया कि जब तक 50% कमीशन नहीं मिलेगा तब तक मैं भुगतान नहीं करूंगी, क्या कहा ग्राम प्रधान कमलेश वर्मा आप भी सुने
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    बबेरू ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत कुचेंदू ग्राम पंचायत मे बनी गौशाला में इस तरह की चिलचिलाती धूप और गर्मी से गौवंशों की प्यास से हालत खराब हो रही है। गौशाला में पानी पीने की व्यवस्थाएं पूरी तरह से धड़ाम है, जब इस विषय में ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा से बातचीत की गई, तो बताया कि पिछले फरवरी माह से गौशाला में लगा समरसेबल खराब पड़ा है, कई बार ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह व खंड विकास अधिकारी को लिखित में पत्र दे चुके हैं, और समस्या का समाधान कराए जाने की मांग किया है। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक समरसेबल बन नहीं पाया है। जिससे गोवंशों को पीने के लिए तालाब से समरसेबल के माध्यम से पानी पीने के लिए भर व्यवस्था की जाती है,। वहीं ग्राम प्रधान कमलेश कुमार वर्मा ने ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के ऊपर गंभीर आरोप भी लगाया है, और कहा कि ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह के द्वारा भूसा और अन्य सामग्री का भुगतान नहीं करवा रही हैं, जबकि ग्राम पंचायत के खाते में पर्याप्त धन करीब 11 लाख रुपए पड़ा हुआ है, और यह भी आरोप लगाया कि जब तक 50% कमीशन नहीं मिलेगा तब तक मैं भुगतान नहीं करूंगी, क्या कहा ग्राम प्रधान कमलेश वर्मा आप भी सुने
    user_JSB NEWS UP
    JSB NEWS UP
    पत्रकारिता Baberu, Banda•
    6 hrs ago
  • Post by Ram Kripal
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    Post by Ram Kripal
    user_Ram Kripal
    Ram Kripal
    बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मा.काशीराम जयंती पर कांग्रेस पार्टी ने कांशीराम के सामाजिक न्याय के संघर्ष को याद करते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठाई।
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    मा.काशीराम जयंती पर कांग्रेस पार्टी ने कांशीराम के सामाजिक न्याय के संघर्ष को याद करते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठाई।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बांदा के रामदा होटल में नेशनल एंटी करप्शन कमिटी आफ इंडिया के जिला इकाई के पदाधिकारी को प्रशस्ति पत्र और आई कार्ड देकर नियुक्त किया गया और उज्जवल भविष्य की कामना की
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    बांदा के रामदा होटल में नेशनल एंटी करप्शन कमिटी आफ इंडिया के जिला इकाई के पदाधिकारी को प्रशस्ति पत्र और आई कार्ड देकर नियुक्त किया गया  और उज्जवल भविष्य की कामना की
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बांदा । जनपद में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी को रोकने के लिए जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने रविवार को शहर के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और गैस एजेंसियों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों की जांच कर गैस सिलेंडरों के उपयोग और वितरण व्यवस्था की पड़ताल की गई। जांच के दौरान साई दरबार रेस्टोरेंट में कुल 12 गैस सिलेंडर पाए गए, जिनमें 3 कमर्शियल और 9 घरेलू श्रेणी के सिलेंडर थे। रेस्टोरेंट में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग पाए जाने पर संचालक के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा सारंग होटल, कृष्णा स्वीट्स, सिग्नेचर और राजदरबार रेस्टोरेंट में भी जांच की गई। यहां उपयोग में लाए जा रहे सभी गैस सिलेंडर कमर्शियल श्रेणी के पाए गए और किसी भी प्रकार का घरेलू सिलेंडर परिसर में नहीं मिला। संयुक्त टीम ने संकल्प गैस एजेंसी और आराधना इंडेन गैस एजेंसी का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और त्वरित बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आराधना इंडेन गैस एजेंसी में मौजूद लोगों ने समय पर गैस न मिलने की शिकायत की। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि टोकन किसी और के नाम पर जारी हुआ, जबकि गैस की डिलीवरी किसी अन्य व्यक्ति को कर दी गई। ऑनलाइन रिपोर्ट और भौतिक रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया, जिसके चलते एजेंसी संचालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है और अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में आवश्यक वस्तुओं, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और कहीं भी जमाखोरी, कालाबाजारी या घरेलू गैस के अवैध उपयोग की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
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    बांदा । जनपद में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी को रोकने के लिए जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने रविवार को शहर के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और गैस एजेंसियों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों की जांच कर गैस सिलेंडरों के उपयोग और वितरण व्यवस्था की पड़ताल की गई। जांच के दौरान साई दरबार रेस्टोरेंट में कुल 12 गैस सिलेंडर पाए गए, जिनमें 3 कमर्शियल और 9 घरेलू श्रेणी के सिलेंडर थे। रेस्टोरेंट में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग पाए जाने पर संचालक के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा सारंग होटल, कृष्णा स्वीट्स, सिग्नेचर और राजदरबार रेस्टोरेंट में भी जांच की गई। यहां उपयोग में लाए जा रहे सभी गैस सिलेंडर कमर्शियल श्रेणी के पाए गए और किसी भी प्रकार का घरेलू सिलेंडर परिसर में नहीं मिला। संयुक्त टीम ने संकल्प गैस एजेंसी और आराधना इंडेन गैस एजेंसी का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और त्वरित बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आराधना इंडेन गैस एजेंसी में मौजूद लोगों ने समय पर गैस न मिलने की शिकायत की। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि टोकन किसी और के नाम पर जारी हुआ, जबकि गैस की डिलीवरी किसी अन्य व्यक्ति को कर दी गई। ऑनलाइन रिपोर्ट और भौतिक रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया, जिसके चलते एजेंसी संचालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है और अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में आवश्यक वस्तुओं, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और कहीं भी जमाखोरी, कालाबाजारी या घरेलू गैस के अवैध उपयोग की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
    user_Shrikant Shrivastav
    Shrikant Shrivastav
    पत्रकार Banda, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
  • जय जय बुंदेलखंड 🙏 बुंदेलखंड पृथक राज्य को लेकर बांदा में गांव गांव - पांव पांव यात्रा में हजारों के संख्या में बुंदेली साथी उपस्थित हुए।। आप सभी साथी अगर जमीन में नहीं उतर सकते तो सोशल मीडिया के माध्यम से बुंदेलखंड पृथक राज्य के लिए आवाज उठाए ।। आपका अपना - अंकित कुमार मिश्रा 🙏 #bundelkhandnews #हम_तो_बुंदेली_हैं_जी #बुंदेलखंड #बुंदेलखंड_पृथक_राज्य #जय_जय_बुंदेलखंड 🙏
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    जय जय बुंदेलखंड 🙏
बुंदेलखंड पृथक राज्य को लेकर बांदा में गांव गांव - पांव पांव यात्रा में हजारों के संख्या में बुंदेली साथी उपस्थित हुए।।
आप सभी साथी अगर जमीन में नहीं उतर सकते तो सोशल मीडिया के माध्यम से बुंदेलखंड पृथक राज्य के लिए आवाज उठाए ।।
आपका अपना - अंकित कुमार मिश्रा 🙏 
#bundelkhandnews #हम_तो_बुंदेली_हैं_जी #बुंदेलखंड #बुंदेलखंड_पृथक_राज्य #जय_जय_बुंदेलखंड 🙏
    user_Adv Ankit Kumar Mishra
    Adv Ankit Kumar Mishra
    Lawyer अतर्रा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • #Apkiawajdigital ​गाजियाबाद/दिल्ली | रविवार, 15 मार्च 2026 ​विशेष संवाददाता: किसी माता-पिता के लिए इससे हृदयविदारक क्षण क्या होगा कि वे अपने ही जिगर के टुकड़े को 'अंतिम विदाई' देने के लिए अस्पताल ले जाएं, यह जानते हुए कि अब वह कभी वापस नहीं लौटेगा। गाजियाबाद के लोनी निवासी हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर बेजान पड़े थे, रविवार को दिल्ली एम्स (AIIMS) पहुंचाए गए। यहां मेडिकल बोर्ड की देखरेख में उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाकर 'इच्छा मृत्यु' (पैसिव यूथेनेशिया) देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ​एक हादसे ने छीन ली थी मुस्कान ​घटना साल 2011 की है, जब हरीश चंडीगढ़ में पढ़ रहे थे। एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। तब से हरीश न बोल सके, न हिल सके। वह एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए जिसे चिकित्सा विज्ञान में 'कोमा' कहा जाता है। देश के बड़े से बड़े अस्पताल हरीश को दोबारा खड़ा करने में नाकाम रहे। ​13 साल की तपस्या और खाली होती तिजोरी ​हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे को वापस पाने के लिए अपनी जिंदगी की हर पाई खर्च कर दी। मां ने 13 सालों तक साये की तरह अपने बेटे की सेवा की, उसे नहलाने से लेकर खिलाने तक का हर काम एक नवजात शिशु की तरह किया। लेकिन जब आर्थिक संसाधन पूरी तरह खत्म हो गए और हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा, तो भारी मन से माता-पिता ने 'इच्छा मृत्यु' का कठिन विकल्प चुना। ​"सबको माफ करना, सबसे माफी मांगना..." ​रविवार की सुबह जब एम्बुलेंस हरीश को एम्स ले जाने के लिए उनके घर पहुंची, तो पूरा मोहल्ला फफक कर रो पड़ा। माता-पिता ने रुंधे गले और कांपते हाथों से अपने बेटे को विदा किया। सोशल मीडिया पर भी यह विदाई वायरल हो रही है, जहां लोग कह रहे हैं— "हरीश, अब सब कष्टों से मुक्त होकर जाओ।" कानूनी प्रक्रिया के तहत विदाई भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु) को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है। हरीश का मामला भी इसी कानूनी दायरे में आता है। एम्स के डॉक्टरों की टीम और कानूनी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में अब हरीश को शांतिपूर्ण मृत्यु की ओर ले जाया जा रहा है। ​संपादकीय टिप्पणी: हरीश राणा की कहानी केवल एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम और हमारे देश की महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच पिसते आम आदमी की दास्तां भी है। 13 साल तक एक बेजान शरीर में जान तलाशने वाले इस परिवार का धैर्य वंदनीय है।
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    #Apkiawajdigital
​गाजियाबाद/दिल्ली | रविवार, 15 मार्च 2026
​विशेष संवाददाता: किसी माता-पिता के लिए इससे हृदयविदारक क्षण क्या होगा कि वे अपने ही जिगर के टुकड़े को 'अंतिम विदाई' देने के लिए अस्पताल ले जाएं, यह जानते हुए कि अब वह कभी वापस नहीं लौटेगा। गाजियाबाद के लोनी निवासी हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर बेजान पड़े थे, रविवार को दिल्ली एम्स (AIIMS) पहुंचाए गए। यहां मेडिकल बोर्ड की देखरेख में उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाकर 'इच्छा मृत्यु' (पैसिव यूथेनेशिया) देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
​एक हादसे ने छीन ली थी मुस्कान
​घटना साल 2011 की है, जब हरीश चंडीगढ़ में पढ़ रहे थे। एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। तब से हरीश न बोल सके, न हिल सके। वह एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए जिसे चिकित्सा विज्ञान में 'कोमा' कहा जाता है। देश के बड़े से बड़े अस्पताल हरीश को दोबारा खड़ा करने में नाकाम रहे।
​13 साल की तपस्या और खाली होती तिजोरी
​हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे को वापस पाने के लिए अपनी जिंदगी की हर पाई खर्च कर दी। मां ने 13 सालों तक साये की तरह अपने बेटे की सेवा की, उसे नहलाने से लेकर खिलाने तक का हर काम एक नवजात शिशु की तरह किया। लेकिन जब आर्थिक संसाधन पूरी तरह खत्म हो गए और हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा, तो भारी मन से माता-पिता ने 'इच्छा मृत्यु' का कठिन विकल्प चुना।
​"सबको माफ करना, सबसे माफी मांगना..."
​रविवार की सुबह जब एम्बुलेंस हरीश को एम्स ले जाने के लिए उनके घर पहुंची, तो पूरा मोहल्ला फफक कर रो पड़ा। माता-पिता ने रुंधे गले और कांपते हाथों से अपने बेटे को विदा किया। सोशल मीडिया पर भी यह विदाई वायरल हो रही है, जहां लोग कह रहे हैं— "हरीश, अब सब कष्टों से मुक्त होकर जाओ।"  कानूनी प्रक्रिया के तहत विदाई
भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु) को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है। हरीश का मामला भी इसी कानूनी दायरे में आता है। एम्स के डॉक्टरों की टीम और कानूनी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में अब हरीश को शांतिपूर्ण मृत्यु की ओर ले जाया जा रहा है।
​संपादकीय टिप्पणी: हरीश राणा की कहानी केवल एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम और हमारे देश की महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच पिसते आम आदमी की दास्तां भी है। 13 साल तक एक बेजान शरीर में जान तलाशने वाले इस परिवार का धैर्य वंदनीय है।
    user_ApkiAwajDigital
    ApkiAwajDigital
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • बबेरू कस्बे के बबेरू ग्राम पंचायत भवन मे आज शनिवार की दोपहर बबेरू ग्रामीण के ग्राम पंचायत सदस्यों की बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी ग्राम पंचायत सदस्यों व ग्राम प्रधान को बुलाया गया था, जिसमें करीब 15 ग्राम पंचायत सदस्य बैठक पर पहुंचे, लेकिन ग्राम प्रधान श्रीमती कंचन वर्मा बैठक पर उपस्थित नहीं हुई, जिसमें जिसमें दोपहर ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह की अध्यक्षता पर सदस्यों की बैठक की गई, जिसमें सदस्यों ने आरोप लगाया की कभी भी ग्राम पंचायत सदस्यों की बैठक में प्रधान उपस्थित नहीं होती हैं, यहां तक की राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस में भी शामिल नहीं हुई, और जो भी विकास कार्यों की फाइलें थी वह भी बैठक पर नहीं दिखाई जाती, वही ग्राम पंचायत सदस्य राकेश पटेल ने बताया कि 5 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन अभी तक सभी सदस्यों का जो ₹100 बैठक का मानदेय दिया जाता है, वह भी नहीं दिया गया, अगर मान दे की बात करते हैं तो ग्राम प्रधान 50% कमीशन मांगती हैं। वहीं बिना बैठक के विकास कार्य कैसे कर लिए जाते हैं, यही समझ में नहीं आता, जिसमें सभी ग्राम पंचायत सदस्यों ने कहां की कि जब हमको किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती, और ना ही हमको बुलाया जाता, इससे अच्छा हम सभी लोग शपथ पत्र के साथ है इस्तीफा देने को मजबूर होंगे। बैठक में राकेश पटेल,अजय कुमार ,सुधीर कुमार, महेश वर्मा, प्रीति देवी, दीपा देवी, बृजेश कुमार, श्याम बाबू, रामलखन, उषा देवी, रविकांत सहित ग्राम पंचायत सदस्य मौजूद रहे। वहीं पिछले दिनों बबेरू ग्रामीण कि ग्राम प्रधान श्रीमती कंचन वर्मा ने चित्रकूट धाम मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है की, ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह 30% भुगतान के नाम पर कमिशन की बात करती हैं, और कहती है कि जब तक 30% कमीशन नहीं दिया जाएगा, तो भुगतान मैं नहीं करूंगी।
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    बबेरू कस्बे के बबेरू ग्राम पंचायत भवन मे आज शनिवार की दोपहर बबेरू ग्रामीण के ग्राम पंचायत सदस्यों की बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें सभी ग्राम पंचायत सदस्यों व ग्राम प्रधान को बुलाया गया था, जिसमें करीब 15 ग्राम पंचायत सदस्य बैठक पर पहुंचे, लेकिन ग्राम प्रधान श्रीमती कंचन वर्मा बैठक पर उपस्थित नहीं हुई, जिसमें जिसमें दोपहर  ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह की अध्यक्षता पर सदस्यों की बैठक की गई, जिसमें सदस्यों ने आरोप लगाया की कभी भी ग्राम पंचायत सदस्यों की बैठक में प्रधान उपस्थित नहीं होती हैं, यहां तक की राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस में भी शामिल नहीं हुई, और जो भी विकास कार्यों की फाइलें थी वह भी बैठक पर नहीं दिखाई जाती, वही ग्राम पंचायत सदस्य राकेश पटेल ने बताया कि 5 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन अभी तक सभी सदस्यों का जो ₹100 बैठक का मानदेय दिया जाता है, वह भी नहीं दिया गया, अगर मान दे की बात करते हैं तो ग्राम प्रधान 50% कमीशन मांगती हैं। वहीं बिना बैठक के विकास कार्य कैसे कर लिए जाते हैं, यही समझ में नहीं आता, जिसमें सभी ग्राम पंचायत सदस्यों ने कहां की कि जब हमको किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती, और ना ही हमको बुलाया जाता, इससे अच्छा हम सभी लोग शपथ पत्र के साथ है इस्तीफा देने को मजबूर होंगे।
बैठक में राकेश पटेल,अजय कुमार ,सुधीर कुमार, महेश वर्मा, प्रीति देवी, दीपा देवी, बृजेश कुमार, श्याम बाबू, रामलखन, उषा देवी, रविकांत सहित ग्राम पंचायत सदस्य मौजूद रहे।
वहीं पिछले दिनों बबेरू ग्रामीण कि ग्राम प्रधान श्रीमती कंचन वर्मा ने चित्रकूट धाम मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है की, ग्राम पंचायत अधिकारी पूजा सिंह 30% भुगतान के नाम पर कमिशन की बात करती हैं, और कहती है कि जब तक 30% कमीशन नहीं दिया जाएगा, तो भुगतान मैं नहीं करूंगी।
    user_JSB NEWS UP
    JSB NEWS UP
    पत्रकारिता Baberu, Banda•
    12 hrs ago
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