लगातार बारिश और बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही के कारण आलनियावास गांव के रास्ते पूरी तरह बदहाल हो चुके हैं। खराब और कीचड़युक्त रास्तों से गुजरने वाले इन भारी वाहनों के कारण आम लोगों के साथ-साथ स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने कई स्थानों पर रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर रखकर बजरी से भरे वाहनों की आवाजाही रोकने का प्रयास किया था। हालांकि, आरोप है कि बजरी खनन से जुड़े लोगों ने उन पत्थरों को हटाकर रास्ता फिर से खोल दिया और पत्थर रखने वाले ग्रामीणों को धमकियां भी दीं। इसके बाद ग्रामीणों ने थांवला थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उनके लौटते ही बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली फिर से उसी रास्ते से गुजरने लगे। इस स्थिति को देखते हुए कुछ किसानों ने दोबारा बीच रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर लगाकर भारी वाहनों का रास्ता बंद कर दिया। वहीं, गांव के छोटे वाहनों और लोगों की आवाजाही बनी रहे, इसके लिए ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने एक वैकल्पिक रास्ता भी तैयार किया है ताकि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को दिक्कत न हो। ग्रामीण डालूराम माली ने बताया कि उनके घर के सामने से प्रतिदिन सैकड़ों बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजरते हैं, जिससे पूरा रास्ता खराब हो गया है। मामले में गोपीराम माली, ताराचंद माली और ओमप्रकाश माली ने प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग की है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और सुरक्षित आवागमन मिल सके। इस संबंध में उपखंड अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया ने बताया कि मामले की जानकारी खनन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अवैध रूप से निकलने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी, खराब रास्ते की मरम्मत के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया जाएगा और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
लगातार बारिश और बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही के कारण आलनियावास गांव के रास्ते पूरी तरह बदहाल हो चुके हैं। खराब और कीचड़युक्त रास्तों से गुजरने वाले इन भारी वाहनों के कारण आम लोगों के साथ-साथ स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने कई स्थानों पर रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर रखकर बजरी से भरे वाहनों की आवाजाही रोकने का प्रयास किया था। हालांकि, आरोप है कि बजरी खनन से जुड़े लोगों ने उन पत्थरों को हटाकर रास्ता फिर से खोल दिया और पत्थर रखने वाले ग्रामीणों को धमकियां भी दीं। इसके बाद ग्रामीणों ने थांवला थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उनके लौटते ही बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली फिर से उसी रास्ते से गुजरने लगे। इस स्थिति को देखते हुए कुछ किसानों ने दोबारा बीच रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर लगाकर भारी वाहनों का रास्ता बंद कर दिया। वहीं, गांव के छोटे वाहनों और लोगों की आवाजाही बनी रहे, इसके लिए ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने एक वैकल्पिक रास्ता भी तैयार किया है ताकि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को दिक्कत न हो। ग्रामीण डालूराम माली ने बताया कि उनके घर के सामने से प्रतिदिन सैकड़ों बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजरते हैं, जिससे पूरा रास्ता खराब हो गया है। मामले में गोपीराम माली, ताराचंद माली और ओमप्रकाश माली ने प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग की है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और सुरक्षित आवागमन मिल सके। इस संबंध में उपखंड अधिकारी विनीत कुमार सुखाड़िया ने बताया कि मामले की जानकारी खनन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अवैध रूप से निकलने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी, खराब रास्ते की मरम्मत के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया जाएगा और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
- रियान बड़ी उपखंड क्षेत्र के लुगिया गांव निवासी मेघवाल परिवार ने अपनी पुश्तैनी अनुसूचित जाति (एससी) भूमि के कथित फर्जी नामांतरण का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा है। पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय की गुहार लगाई है। ज्ञापन में नाथूराम मेघवाल, धारूराम मेघवाल और उनकी बहनों चुका देवी व सोहनी देवी ने बताया कि ग्राम बीजाथल स्थित खसरा नंबरों की भूमि पर उनके पूर्वज, जैसे शिवरण पुत्र घिसा, राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 लागू होने से पहले से ही काश्तकार रहे हैं। नाथूराम मेघवाल के अनुसार, उनके पिता ने आर्थिक तंगी के कारण जमीन उगमाराम जाट को केवल बटाई पर दी थी। आरोप है कि पिता के निधन के बाद उगमाराम जाट ने कूटचित दस्तावेजों के आधार पर बिना वैधानिक रूपांतरण के एससी वर्ग की भूमि ओबीसी वर्ग में अपने नाम करवा ली। वहीं, सुगनचंद जैन पर आरोप है कि उन्होंने बंटवारे के दौरान पिता की जाति गलत तरीके से जैन दर्ज करवाकर अवैध रूप से भूमि अपने नाम कर ली। पीड़ित पक्ष का दावा है कि प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से सैकड़ों बीघा भूमि का रिकॉर्ड बदला गया है, जबकि नियमतः बिना रूपांतरण के एससी भूमि किसी अन्य वर्ग के नाम दर्ज नहीं की जा सकती। परिवार ने जिला प्रशासन से दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने और पुश्तैनी जमीन वापस दिलाने की मांग की है। इस संबंध में जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने ज्ञापन मिलने की बात स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया है कि मामले की विस्तृत जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- भाजपा समर्थकों और कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' कोई साधारण छात्र आंदोलन नहीं है। उनका आरोप है कि यह आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियों द्वारा समर्थित एक सोची-समझी 'सोशल मीडिया टूलकिट' या राजनीतिक प्रयोग है, जिसका सीधा मकसद युवाओं को भड़काना और पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुँचाना है। दूसरी तरफ, आंदोलनकारी छात्रों और स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए छात्रों की वास्तविक आवाज और शांतिपूर्ण विरोध को 'राजनीति से प्रेरित' बता रही है। छात्रों का आरोप है कि सरकार इस तरह के दावे करके जनता को असली मुद्दों से गुमराह करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, पूरे मामले में 'मोदी विरोध की राजनीति बनाम राहुल गांधी का पीएम चेहरा' का समीकरण भी चर्चा में है। विश्लेषण के अनुसार, भले ही मोदी को टारगेट किया जा रहा हो, लेकिन राहुल गांधी का पीएम बनना अभी दूर की कौड़ी है और विपक्ष की अपनी कई कमजोरियां सामने आ रही हैं।1
- अजमेर के पीसांगन थाना क्षेत्र में हुए मर्डर केस का एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने खुलासा कर दिया है। लगातार पति के विरोध के कारण यह खौफनाक साजिश रची गई थी, जिसमें पत्नी ने अपने प्रेमी और उसके साथियों के साथ मिलकर पति मुकेश को मौत के घाट उतार दिया। मामले में मृतक के बड़े भाई ने हत्या का शक जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर सक्रिय हुई पुलिस ने मामले की जांच कर हत्याकांड का पर्दाफाश किया और हत्यारी पत्नी सहित तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।1
- अजमेर में दरगाह बाईपास, नागफनी रोड, अढ़ाई दिन का झोपड़ा सड़क, अंदर कोट और नई सड़क बाईपास की हालत बेहद खराब हो चुकी है। सड़कों के हिस्से टूट-टूटकर रास्ते पर गिर रहे हैं और पूरी सड़क जर्जर हो चुकी है। प्रशासन की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए इन रास्तों पर तुरंत सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की माँग उठाई गई है। इन प्रमुख मार्गों से होकर बहुत से मेहमान और श्रद्धालु शहर में आते हैं, जिससे अजमेर की छवि खराब हो रही है। दरगाह बाईपास और आसपास की सड़कों की दुर्दशा पर ध्यान देने और निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की माँग की गई है।1
- अजमेर में जनप्रतिनिधि वाद से जुड़े आनासागर वेटरलैंड मामले में न्यायालय में सुनवाई हुई। इस मामले में अजमेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल पक्षकार हैं। याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि आनासागर वेटरलैंड का सीमांकन (डिमार्केशन) किए बिना किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाए। मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने न्यायालय को जानकारी दी कि कुल 12 पक्षकारों में से 4 पक्षकार अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके साथ ही, संबंधित पक्ष की ओर से कोई भी आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। इस मामले में आगे की सुनवाई अब न्यायालय के निर्देशानुसार संपन्न होगी।1
- रियान बड़ी क्षेत्र के पिपलिया गांव में शुक्रवार को 11 केवी विद्युत लाइन का तार टूटकर नाड़ी के पानी में गिर जाने से बड़ा हादसा हो गया। नाड़ी के पानी में करंट फैलने की वजह से वहां पानी पीने गई किसान मेवाराम गुर्जर की भैंस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बिजली आपूर्ति बंद करवाई। पीड़ित किसान मेवाराम गुर्जर ने बताया कि भैंस उनकी आजीविका का मुख्य साधन थी और इस घटना से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन और विद्युत विभाग से उचित मुआवजा दिलाने तथा दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र में कई स्थानों पर पुराने और जर्जर विद्युत तार लटक रहे हैं, जिससे भविष्य में भी बड़े हादसों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से सभी जर्जर लाइनों की तत्काल जांच कराकर मरम्मत कराने की मांग की है। वहीं प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तार टूटने जैसी घटना की सूचना तुरंत विभाग को दें और बिजली बंद होने तक तारों के पास न जाएं।1
- अजमेर के पीसांगन थाना क्षेत्र स्थित नाथूथला गांव में मुकेश सिंह रावत का शव घर की चारपाई पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। मृतक के गले और आंख पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे उसके भाई ने हत्या की आशंका जताई है। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी विमला और एक अन्य युवक को हिरासत में ले लिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहा आपसी विवाद और घटना की रात एक अज्ञात गाड़ी का फार्म हाउस पर आना मुख्य संदिग्ध कड़ियाँ बनकर सामने आई हैं। मृतक के 12 वर्षीय बेटे नरेश ने खुलासा किया कि रात करीब 12 बजे जब उसकी नींद खुली, तो उसकी मां कमरे में नहीं थी और पास के कमरे से रोने-चीखने की आवाजें आ रही थीं। वहीं ग्रामीणों के अनुसार पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था, जिसे तीन दिन पहले ही समाज के लोगों ने समझाइश कर शांत कराया था। शुरुआती तकनीकी साक्ष्यों और बयानों के आधार पर पुलिस ने पत्नी को डिटेन किया है। मामले की सघन जांच पीसांगन थानाधिकारी पारुल यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लालचंद कायल और ग्रामीण वृत्ताधिकारी शमशेर सिंह की निगरानी में की जा रही है। अजमेर के जेएलएन अस्पताल में मेडिकल बोर्ड द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम और एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह और पूरी साजिश का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा। मृतक मुकेश अपने पीछे 5 मासूम बच्चों को छोड़ गया है।4