कर्नाटक की राजनीति में 3 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी.के. शिवकुमार ने राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस शपथ ग्रहण के साथ ही उनका वर्षों पुराना राजनीतिक संघर्ष और एक व्यक्तिगत संकल्प पूरा हो गया। दरअसल, वर्ष 2019 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद डी.के. शिवकुमार ने यह प्रण लिया था कि जब तक वे मुख्यमंत्री नहीं बन जाते, तब तक अपनी दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। लगभग सात वर्षों तक इस संकल्प का पालन करने के बाद, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही उनका यह प्रण भी पूर्ण हो गया। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले शिवकुमार वर्ष 1989 में पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति तैयार करने और पार्टी नेताओं को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई, जिस कारण उन्हें कांग्रेस का "ट्रबलशूटर" भी कहा जाता है। साल 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी और तिहाड़ जेल में बिताए गए दिनों के बाद भी शिवकुमार ने हार नहीं मानी और राजनीति में दमदार वापसी करते हुए अपनी संगठनात्मक क्षमता के बल पर पार्टी में मजबूत स्थान बनाए रखा। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद डी.के. शिवकुमार ने इस उपलब्धि को जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और लंबे संघर्ष की जीत बताया। उनके समर्थकों ने भी इसे धैर्य, संकल्प और राजनीतिक प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया। तिहाड़ जेल से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का डी.के. शिवकुमार का यह सफर भारतीय राजनीति की चर्चित संघर्ष गाथाओं में शुमार हो गया है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देता है।
कर्नाटक की राजनीति में 3 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी.के. शिवकुमार ने राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस शपथ ग्रहण के साथ ही उनका वर्षों पुराना राजनीतिक संघर्ष और एक व्यक्तिगत संकल्प पूरा हो गया। दरअसल, वर्ष 2019 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद डी.के. शिवकुमार ने यह प्रण लिया था कि जब तक वे मुख्यमंत्री नहीं बन जाते, तब तक अपनी दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। लगभग सात वर्षों तक इस संकल्प का पालन करने के बाद, मुख्यमंत्री पद
की शपथ लेते ही उनका यह प्रण भी पूर्ण हो गया। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले शिवकुमार वर्ष 1989 में पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति तैयार करने और पार्टी नेताओं को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई, जिस कारण उन्हें कांग्रेस का "ट्रबलशूटर" भी कहा जाता है। साल 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी और तिहाड़ जेल में बिताए गए दिनों के बाद भी शिवकुमार ने हार नहीं मानी और राजनीति में दमदार वापसी करते हुए अपनी संगठनात्मक
क्षमता के बल पर पार्टी में मजबूत स्थान बनाए रखा। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद डी.के. शिवकुमार ने इस उपलब्धि को जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और लंबे संघर्ष की जीत बताया। उनके समर्थकों ने भी इसे धैर्य, संकल्प और राजनीतिक प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया। तिहाड़ जेल से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का डी.के. शिवकुमार का यह सफर भारतीय राजनीति की चर्चित संघर्ष गाथाओं में शुमार हो गया है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देता है।
- कर्नाटक की राजनीति में 3 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी.के. शिवकुमार ने राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस शपथ ग्रहण के साथ ही उनका वर्षों पुराना राजनीतिक संघर्ष और एक व्यक्तिगत संकल्प पूरा हो गया। दरअसल, वर्ष 2019 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद डी.के. शिवकुमार ने यह प्रण लिया था कि जब तक वे मुख्यमंत्री नहीं बन जाते, तब तक अपनी दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। लगभग सात वर्षों तक इस संकल्प का पालन करने के बाद, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही उनका यह प्रण भी पूर्ण हो गया। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले शिवकुमार वर्ष 1989 में पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति तैयार करने और पार्टी नेताओं को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई, जिस कारण उन्हें कांग्रेस का "ट्रबलशूटर" भी कहा जाता है। साल 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी और तिहाड़ जेल में बिताए गए दिनों के बाद भी शिवकुमार ने हार नहीं मानी और राजनीति में दमदार वापसी करते हुए अपनी संगठनात्मक क्षमता के बल पर पार्टी में मजबूत स्थान बनाए रखा। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद डी.के. शिवकुमार ने इस उपलब्धि को जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और लंबे संघर्ष की जीत बताया। उनके समर्थकों ने भी इसे धैर्य, संकल्प और राजनीतिक प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया। तिहाड़ जेल से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का डी.के. शिवकुमार का यह सफर भारतीय राजनीति की चर्चित संघर्ष गाथाओं में शुमार हो गया है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देता है।3
- बेंगलुरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्याण मंदिर का लोकार्पण किया है। वे इस ध्याण मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए।1
- सूरजपुर, छत्तीसगढ़ में 3 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए "वनवासी" शब्द के प्रयोग के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया गया। सूरजपुर के अग्रसेन चौक (पुराना बस स्टैंड) पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के सैकड़ों लोग, जिनमें भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी भी शामिल थे, इकट्ठा हुए। उन्होंने गृह मंत्री का पुतला दहन कर और जोरदार नारेबाजी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। प्रतिकूल मौसम, जिसमें तेज धूप और अचानक हुई बारिश भी शामिल थी, के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर डटे रहे। यह विरोध केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 24 मई 2026 को जनजाति सुरक्षा मंच के एक कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय को "वनवासी" कहकर संबोधित करने के बाद उपजे व्यापक आक्रोश का परिणाम है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग) के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीनतम मूलवासी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी अपनी अनूठी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति है। उन्होंने "आदिवासी" शब्द को उनकी ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि "वनवासी" शब्द इस पहचान को सीमित और विकृत करता है, जो न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से उचित है। पोया ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए बताया कि अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी समुदाय को "अनुसूचित जनजाति" के रूप में मान्यता प्राप्त है, और अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 एवं 46 उन्हें समानता, गरिमा, सांस्कृतिक अधिकार और विकास की संवैधानिक गारंटी प्रदान करते हैं। ऐसे में, भ्रामक शब्दों का प्रयोग संविधान की मूल भावना के विपरीत है। बी.पी.एस. पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी शब्दावली का प्रयोग जारी रहा, तो ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन का समापन महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ। समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए वैधानिक तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है। इस कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक जुनास एक्का, जिला उपाध्यक्ष सुमन टोप्पो, युवा प्रभाग संभाग अध्यक्ष राजा क्षितिज कुमार सिंह उइके सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्षों—शिव प्रताप सिंह आयाम (सूरजपुर), गुलाब सिंह नेताम (रामानुजनगर), विनय पावले (भैयाथान), चंद्रसेन सिंह पोया (ओड़गी), संपलाल सिंह पोया (प्रतापपुर), तथा प्रेमनगर कार्यकारिणी अध्यक्ष सूरज सिंह पोर्ते—के साथ अशोक पैकरा, गीता पंडो, मनीष प्रताप सिंह उर्रे, संदीप कुशवाहा, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी, दीपक मानिकपुरी, अमित कुमार मिंज, अमित कुमार सिंह खैरवार, मीना गौतम, युगेश सोनपाकर, दीपक सिंह धुर्वे जैसे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।4
- सूरजपुर जिले में गृह मंत्री अमित शाह के कथित बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन युवा प्रभाग और सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित किया गया था।4
- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मनपट क्षेत्र से संबंधित दो जुड़वा भाइयों के बारे में एक जानकारी साझा की गई है। इस जानकारी के अनुसार, ये जुड़वा भाई वर्ष 2026 तक काफी प्रसिद्ध हो जाएंगे। पोस्ट में इन जुड़वा भाइयों को देखने का उल्लेख करते हुए, लोगों से एक 'लाइक' देने का आग्रह भी किया गया है।1
- बुलबुल में आजकल लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, जिसका कारण नगर निगम की बड़ी लापरवाही बताई जा रही है। पहले शाम को ठीक से पानी आता था, लेकिन आजकल 10-15 मिनट से ज़्यादा पानी नहीं दिया जा रहा है।1
- धरमजयगढ़ क्षेत्र की मांड नदी में अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला बदस्तूर जारी है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप खतरे में पड़ गया है। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता और लगातार हो रही अनदेखी का फायदा उठाकर रेत चोरी करने वाले अपना ठिकाना बदल-बदलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। पहले धर्मजयगढ़ के केरा कोना में सक्रिय रहे अवैध उत्खननकर्ताओं ने अब आमादरहा एनीकट के आसपास नया केंद्र बना लिया है, जहाँ से लगातार रेत निकाले जाने की चर्चा है और मांड नदी दिन-ब-दिन अवैध उत्खननकर्ताओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बनती जा रही है। बीते दिनों केरा कोना में हुई कार्रवाई के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अवैध उत्खनन पर रोक लगेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कारोबारियों के हौसले पस्त होने के बजाय उन्होंने सिर्फ अपना ठिकाना बदल लिया। जानकारी के अनुसार, खनन स्थल पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कुछ लोगों ने अन्य ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने हेतु रास्तों पर बड़े पत्थर रखकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अवैध कारोबार को संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा है। इस अनियंत्रित रेत उत्खनन से पुल-पुलिया, एनीकट और नदी तटों जैसी सरकारी संरचनाओं की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके साथ ही, नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार हो रहे खनन से तट कटाव, जलधारण क्षमता में कमी और संरचनात्मक क्षति जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होने की आशंका बनी हुई है।1
- राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित प्लरिश स्टे होटल में बुधवार को भीषण आग लगने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि आग होटल के बेसमेंट में संचालित रेस्टोरेंट से शुरू हुई और देखते ही देखते इसने विकराल रूप ले लिया, जिससे पूरी इमारत आग की चपेट में आ गई। होटल में ठहरे लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई, और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए होटल की खिड़कियों से छलांग लगा दी। हादसे के दौरान चीख-पुकार और भगदड़ का माहौल बना रहा, जिसमें एक मां ने अपने बच्चे को सीने से लगाकर तीसरी मंजिल से कूदकर जान बचाने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एंबुलेंस के पहुंचने में देरी होने पर कई घायलों को लोगों ने अपने कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया। दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।2