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@@@@मेरे गांव की होली @@#
Rajendra Tabiyar
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- Post by Rajendra Tabiyar1
- कुशलगढ़ नगर में धूलंडी पर्व हर्षोल्लास और सामाजिक समरसता के साथ मनाया गया। गली-मोहल्लों में रंग-गुलाल की फुहारों से शहर रंगमय नजर आया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक विद्या निकेतन में एकत्रित होकर घोष व वंदन के साथ “राणा की जय, शिवाजी की जय” उद्घोष करते हुए नगर भ्रमण पर निकले और अनुशासित ढंग से होली खेली। प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों एवं महिलाओं ने भी आपसी सद्भाव से गुलाल लगाकर पर्व मनाया। युवाओं की टोलियां उत्साह में झूमती दिखीं। खंड संचालक कैलाश राव ने होली को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। पूर्व संसदीय सचिव भीमाबाई डामोर, बैंक अधिकारी जितेंद्र राठौर, तहसीलदार हरीश सोनी, समाजसेवी मुकेश अग्रवाल, समाजसेवी मनोहर कावड़िया और एडवोकेट हरेंद्र पाठक ने प्रेम, एकता और सद्भाव से पर्व मनाने का संदेश दिया। इस दौरान वरिष्ठ रमेश तलेसेरा का जन्मदिन भी संगठन के लोगों ने मनाया।1
- बांसवाड़ा में हो रहे 2026 की होली बहुत ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें सभी महिला पुरुष और गाजे बाजे के साथ होली का आनंद ले रहे हैं1
- सीमलवाड़ा। चौतरा क्षेत्र में धुलंडी पर्व को लेकर उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। चौतरा गांव में बंजारा समाज की ओर से धुलंडी पर्व बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। भाजपा मंडल उपाध्यक्ष उदयलाल बंजारा के निवास पर आयोजित गैर नृत्य महोत्सव में समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जमकर गैर नृत्य खेला। सुबह से ही समाज के लोग एकत्रित होने लगे। ढोल, कुंडी और थाली की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियों ने गोल घेरा बनाकर गैर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। रंग-गुलाल की बौछारों के बीच पूरा वातावरण फागुन के रंग में रंगा नजर आया। एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर धुलंडी की शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम के दौरान भाजपा मंडल उपाध्यक्ष उदयलाल बंजारा ने सभी को धुलंडी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारा और परंपराओं के संरक्षण का संदेश देते हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेज कर रखने का आह्वान किया। महिलाओं ने भी पारंपरिक गीतों पर गैर नृत्य में सहभागिता निभाई, जिससे कार्यक्रम में विशेष उत्साह का संचार हुआ। बच्चों में भी पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। पूरे आयोजन के दौरान सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहा। अंत में समाजजनों द्वारा प्रसाद वितरण किया गया तथा सभी ने मिलकर पर्व को आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाने का संकल्प लिया। धुलंडी के इस आयोजन ने चौतरा में उत्सव जैसा माहौल बना दिया।1
- कोकापुर में ग्रामीणों ने होली के धधकते अंगारे नंगे पांव पार किए कोकापुर के ग्रामीणों ने होली के धधकते अंगारे नंगे पांव पार करने की अपनी सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए शौर्य प्रदर्शन किया। मंगलवार को अल सुबह बुजुर्ग व युवा स्नान करके भीगे हुए वस्त्रों में ही होली चौक पहुंचे। जहां ढोल व कुंडियों की थाप और होली माता के जयकारों के बीच होली माता को धोक लगाकर दहकते होली के अंगारों पर चल कर जलती होली को पार कर लिया। यह सिलसिला एक के बाद एक चलता रहा। जिसे देखने के लिए गांव सहित आसपास क्षेत्रो के लोग उमड़ पड़े। जलते होली के अंगारों को पार करते ग्रामीणों को देखकर हरकोई हैरान था । इसमें भाग लेने वाले ग्रामीणों का गांव के सर्व समाज की ओर से बहुमान किया गया। • अखिलेश पंड्या3
- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी मोहकमपुरा में जलती होली देखने उमड़ा जनसैलाब राजस्थान के बांसवाड़ा जिले सहित ग्रामीण अंचलों में रिति रिवाज संस्कृति अध्यात्म के साथ हुआं होलीका का दहन बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के मध्यप्रदेश की सिमा से सटे बड़ी सरवा, पाटन,छोटी सरवा व मोहकमपुरा में होलीका दहन को देखने जन सैलाव उमड़ा इतना ही नहीं मोहकमपुरा में जब होलीका दहन हो रहा था तब गांव के लोग फागुन के गीत गाते हुए इस पवित्र त्योहार को मना कर खुशी का इजहार कर रहे थे1
- नई ग्राम पंचायत जगलावदा को आदर्श ग्राम पंचायत बनाने में सभी नागरिकों का समर्थन मिल रहा है होगा वह अच्छा ही होगा1
- बागीदौरा उपखण्ड के नौगामा में बरसों पुरानी गढ़भेदन परंपरा का निर्वाह धुलंडी पर हुआ। गांववासी होली चौक पर एकत्रित हुए। युवाओं ने गढ़ भेदकर शक्ति का प्रदर्शन किया। दोपहर में ढूंढोंत्सव आयोजित हुआ तथा शाम 5 बजे काली कल्याण धाम में महंत सूर्यवीरसिंह चौहान के सान्निध्य में पारम्परिक आयोजन शुरू हुआ। ढ़ोल -नगाड़ों की गूंज से माहौल उत्साहित हो उठा। 25 युवाओं ने कमर में सफेद कपड़े की रस्सी बांधी। दोनों ओर 50-50 युवाओं की टीमों ने गढ़ भेदन की आजमाइश की। कार्यक्रम देर तक चला। गढ़ भेदन के बाद युवाओं ने पारम्परिक लोकनृत्य किया। महिलाओं ने फाग गीत गाकर जोश बढ़ाया। आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।1