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झारखंड सरकार द्वारा संचालित 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि अरमा लटदाग़ के जंगल के पास पिछले कई दिनों से एक एंबुलेंस लावारिस और 'मूर्छित' हालत में पड़ी हुई पाई गई है। एंबुलेंस का नंबर jh 01 Ch–7068 है, और इसकी इस दयनीय स्थिति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब इमरजेंसी सेवा का वाहन खुद ही 'बेहोशी की हालत' में है, तो वह मरीजों की क्या ही सेवा करेगा। यह घटना झारखंड सरकार की 108 एंबुलेंस इमरजेंसी सर्विस की लचर व्यवस्था और धूल फांकती हकीकत को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
झारखंड सरकार द्वारा संचालित 108 एंबुलेंस सेवा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि अरमा लटदाग़ के जंगल के पास पिछले कई दिनों से एक एंबुलेंस लावारिस और 'मूर्छित' हालत में पड़ी हुई पाई गई है। एंबुलेंस का नंबर jh 01 Ch–7068 है, और इसकी इस दयनीय स्थिति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब इमरजेंसी सेवा का वाहन खुद ही 'बेहोशी की हालत' में है, तो वह मरीजों की क्या ही सेवा करेगा। यह घटना झारखंड सरकार की 108 एंबुलेंस इमरजेंसी सर्विस की लचर व्यवस्था और धूल फांकती हकीकत को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
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- खुंटी में जनजातीय ग्रामीण उत्सव जन भागीदारी कार्यक्रम के विषय पर खुंटी परियोजना निदेशक आईसीडीएस आलोक शिकारी कच्छप ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया।1
- गुमला के सिसई थाना परिसर में बकरीद पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन हेतु एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव और अंचल पुलिस निरीक्षक गुलशन भेंगरा ने की, जिसमें पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की अपील की गई। पुलिस प्रशासन ने लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने का आग्रह किया। साथ ही, सोशल मीडिया पर गलत अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर तत्काल थाना प्रभारी को सूचना देने के निर्देश दिए गए, ताकि ऐसे व्यक्तियों पर उचित कार्रवाई की जा सके। बैठक के दौरान अंजुमन फलाहुल मुस्लेमिन संगठन सिसई ने बकरीद की नमाज़ के निर्धारित समय की जानकारी दी। बताया गया कि सिसई के आठ अलग-अलग मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक नमाज़ अदा की जाएगी। संगठन ने पशु बलि की तस्वीरें या वीडियो लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात भी कही। प्रशासन ने आगामी 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया। विशेष रूप से, 28 मई को बृहस्पतिवार होने के कारण सिसई प्रखंड में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भारी भीड़ की आशंका के मद्देनजर सड़कों पर वाहनों के आवागमन को वन-वे (एक तरफा) रखा जाएगा, ताकि जाम की स्थिति न बने और आम जनता को असुविधा न हो। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सिसई उत्तरी विजयलक्ष्मी कुमारी, पंसस रेखा देवी, जाकिर अली, थाना प्रभारी नीरज कुमार, एसआई अजय कुमार, जनप्रतिनिधि सुनीता कुमारी, शकुंतला देवी, बंदीराम उरांव, शांति समिति के सदस्य अंजुमन सदर सलमान अली, बैबूल अंसारी, निरंजन सिंह, तेजमोहन साहु, विपिन बिहारी झा, कैप्टन लोहरा उरांव, मनोज वर्मा, सूरज सिंह, नवल महतो, सुप्रदीप साहु सहित कई अन्य प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।4
- झारखंड के गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित बंगारू में 'मोनू सुपर' नामक एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप, कई लोगों के जख्मी होने की खबर मिली है।1
- रांची में एक शातिर चोर ने चोरी की एक अजीबोगरीब घटना को अंजाम दिया है। चोर ने पहले सामान का बिल बनवाया, फिर उसे अपनी गाड़ी में रखा और उसके बाद मौके से रफूचक्कर हो गया। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
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- गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।3