मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जब सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर मौली लपेटी और अपने पति की लंबी आयु के लिए 108 बार परिक्रमा कर प्रार्थना की। हिंदू धर्म में इस तिथि को पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, पितरों के तर्पण तथा पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बना। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या एवं संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान, साथ ही ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है। जिले में स्थित मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र तटों जैसे रामघाट, पुष्कर बांध, कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पर पुण्य स्नान कर जप, तप, ध्यान, दान और पूजन-अर्चन किया। इसके उपरांत, मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। धर्माचार्यों का मत है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। इसी मान्यता के चलते अमरकंटक में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस पर्व के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया, और कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया, साथ ही अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया। पूरे जिले भर में सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने नजदीक के पीपल के वृक्षों की श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया। अमरकंटक में नर्मदा मंदिर परिसर, रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल तथा वट वृक्षों का भी विधिवत पूजन किया गया। महिलाओं ने कच्चे धागे से वृक्षों की परिक्रमा करते हुए अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की। लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने कल्याण सेवा आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शांतिकुंज आश्रम, बर्फानी आश्रम, मार्कण्डेय आश्रम, धारकुंडी आश्रम तथा गुरु नानक गुरुद्वारा सहित अनेक धार्मिक संस्थानों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। इन संस्थानों में शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नर्मदा महापुराण कथा का भव्य आयोजन भी हुआ। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जब सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर मौली लपेटी और अपने पति की लंबी आयु के लिए 108 बार परिक्रमा कर प्रार्थना की। हिंदू धर्म में इस तिथि को पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, पितरों के तर्पण तथा पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बना। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या एवं संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान, साथ ही ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है। जिले में स्थित मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र
तटों जैसे रामघाट, पुष्कर बांध, कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पर पुण्य स्नान कर जप, तप, ध्यान, दान और पूजन-अर्चन किया। इसके उपरांत, मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। धर्माचार्यों का मत है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। इसी मान्यता के चलते अमरकंटक में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस पर्व के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया, और कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया, साथ ही अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया। पूरे जिले भर में सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने नजदीक के पीपल के वृक्षों की श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर
व्रत एवं पूजन संपन्न किया। अमरकंटक में नर्मदा मंदिर परिसर, रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल तथा वट वृक्षों का भी विधिवत पूजन किया गया। महिलाओं ने कच्चे धागे से वृक्षों की परिक्रमा करते हुए अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की। लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने कल्याण सेवा आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शांतिकुंज आश्रम, बर्फानी आश्रम, मार्कण्डेय आश्रम, धारकुंडी आश्रम तथा गुरु नानक गुरुद्वारा सहित अनेक धार्मिक संस्थानों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। इन संस्थानों में शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नर्मदा महापुराण कथा का भव्य आयोजन भी हुआ। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
- जिले में अवैध नशे के कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत चिरमिरी पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस ने किराना दुकान की आड़ में अवैध महुआ शराब का कारोबार करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 15 लीटर महुआ शराब और परिवहन में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल जब्त की गई है। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज श्री दीपक कुमार झा (IPS), पुलिस अधीक्षक एमसीबी रत्ना सिंह (IPS) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र नायक के निर्देशन में तथा नगर पुलिस अधीक्षक चिरमिरी दीपिका मिंज के मार्गदर्शन में जिले भर में अवैध शराब और मादक पदार्थों के कारोबारियों के विरुद्ध चलाए जा रहे निरंतर अभियान का हिस्सा है। थाना प्रभारी चिरमिरी निरीक्षक विजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि हल्दीबाड़ी निवासी राकेश गुप्ता किराना दुकान की आड़ में अवैध महुआ शराब का संग्रहण और विक्रय कर रहा है। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने 6 नंबर गोलाई क्षेत्र में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को मोटरसाइकिल से महुआ शराब का परिवहन करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। तलाशी के दौरान, आरोपियों के कब्जे से प्लास्टिक के झोले में रखी लगभग 15 लीटर महुआ शराब बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3,000 रुपये बताई गई है। इसके साथ ही, शराब परिवहन में प्रयुक्त हीरो पैशन प्रो मोटरसाइकिल भी जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 60,000 रुपये है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राकेश गुप्ता (पिता गुलाब गुप्ता, उम्र 42 वर्ष, निवासी भैसा दफाई, हल्दीबाड़ी) और मदन सिंह (पिता कबिलाश सिंह, उम्र 29 वर्ष, निवासी बगनच्चा दफाई, हल्दीबाड़ी) के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों के विरुद्ध थाना चिरमिरी में अपराध क्रमांक 257/2026 के तहत आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। चिरमिरी पुलिस की इस प्रभावी कार्रवाई को क्षेत्र में अवैध नशे के कारोबार पर एक बड़ी चोट माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब, मादक पदार्थों और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी विजय सिंह के साथ त्रिलोक साहू, संतोष साहू, अशोक एक्का, चन्द्रसेन राजपूत, एम.डी. हाफिज और मदन राजवाड़े की भूमिका सराहनीय रही।2
- डिंडोरी जिले के दुल्लूपुर गांव में नाचते-गाते समय हुए विवाद के बाद एक धारदार हथियार से हमला किया गया है। इस हमले में घायल हुए व्यक्ति का जिला चिकित्सालय में उपचार जारी है।2
- उमरिया जिले की पाली पुलिस और घुनघुटी चौकी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹35 लाख मूल्य के चोरी हुए औद्योगिक उपकरण बरामद कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह घटना 11 जून की रात ग्राम अमिलिहा में निर्माणाधीन पुल परियोजना में कार्यरत टीवीसीएल कंपनी के कैंप में हुई थी, जहाँ पुल निर्माण में उपयोग की जाने वाली पीक्यूसी मशीन के पाँच अत्याधुनिक सेंसर चोरी कर लिए गए थे। इन सेंसरों की चोरी से निर्माण कंपनी में हड़कंप मच गया था। आरोपियों ने पहले काम मांगने के बहाने कैंप में प्रवेश किया और मौका मिलते ही लाखों रुपये के उपकरण लेकर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया और तत्काल जांच शुरू की गई। तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम विदिशा जिले पहुँची, जहाँ आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर आरोपी जंगल की ओर भाग निकले, लेकिन भागने की हड़बड़ी में उनके कब्जे से चोरी का सामान भरा बैग मौके पर छूट गया। पुलिस ने बैग जब्त कर उसमें रखे सभी पाँच सेंसर बरामद कर लिए। कंपनी के अधिकारियों ने भी बरामद उपकरणों की पहचान कर चोरी हुए सेंसरों के रूप में उनकी पुष्टि की है। हालाँकि, दोनों आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे हैं, लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। उमरिया पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल लाखों रुपये का मशरूका बरामद कराया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि अपराधियों के लिए अब जिले में बच निकलना आसान नहीं है।1
- उमरिया में आयोजित राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का उद्घाटन समारोह एक विवादित सांस्कृतिक प्रस्तुति के कारण चर्चा में आ गया है। अमर शहीद खेल मैदान में हुए इस कार्यक्रम के दौरान फिल्मी गीत “नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान” पर एक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने आयोजन की गरिमा और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग एवं लोक शिक्षण संचालनालय के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का उद्देश्य अंडर-15 और अंडर-17 वर्ग के खिलाड़ियों में खेल भावना, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था। इस आयोजन में प्रदेशभर से खिलाड़ी शामिल हुए थे, लेकिन उद्घाटन समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरा ध्यान खेल से हटाकर इस विवाद की ओर मोड़ दिया। समारोह में मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने इस गाने के चयन पर घोर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि स्कूली बच्चों और नाबालिग खिलाड़ियों की मौजूदगी में ऐसे गीत पर नृत्य कराना समझ से परे है, क्योंकि खेल प्रतियोगिताएं बच्चों को प्रेरणा, संस्कार और सकारात्मक सोच प्रदान करने का माध्यम होनी चाहिए। दर्शकों ने बताया कि आधुनिक परिधानों में कलाकारों के नृत्य से कई अभिभावकों ने असहजता महसूस की, उनका मानना है कि जहां से अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया जाता है, उसी मंच पर ऐसी प्रस्तुति विरोधाभासी है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करते समय जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों ने इसकी समीक्षा क्यों नहीं की। इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में चलाए गए गीत की जानकारी नहीं थी और बीच कार्यक्रम में गीत शुरू होने के बाद तत्काल कुछ कह पाना संभव नहीं था। उन्होंने इस संबंध में जिला खेल अधिकारी से जानकारी लेने की बात कही है। हालांकि, आयोजन समिति की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में स्कूल और खेल आयोजनों में प्रस्तुत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पूर्व समीक्षा अनिवार्य की जाए, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके। सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता देश की प्रतिष्ठित स्कूली प्रतियोगिताओं में से एक है, जो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर प्रदान करती है। इस विवाद ने आयोजन की उपलब्धियों के बजाय व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निगरानी पर बहस छेड़ दी है, और अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।2
- डिंडोरी जिले के समनापुर स्थित जनपद पंचायत में एक जनकल्याण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण और हितग्राही शामिल हुए, जहाँ उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई और पात्र हितग्राहियों से आवेदन प्राप्त किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शासन की जनहितकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। शिविर के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को भी गंभीरता से सुना गया, जिसके बाद संबंधित विभागों को उन पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष चमरू नेताम, मंडल अध्यक्ष शिवराम राजपूत, मंडल अध्यक्ष माधव टेकाम, अशोक संत, जनपद अध्यक्ष पंवती कुशराम, उपाध्यक्ष नीतूलखनबर्मन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज जैन, रोहित उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविर के माध्यम से शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने और आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का प्रयास किया गया, जिसके तहत ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याओं और मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए।4
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) से भीमनगर की गलियों में पहुँचे और 12वीं बोर्ड की टॉपर चांदनी विश्वकर्मा के घर जाकर उन्हें बधाई दी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चांदनी और उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात की, साथ ही परिवार के साथ एक सेल्फी भी ली। मुख्यमंत्री ने चांदनी की उत्कृष्ट सफलता पर उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि विषम परिस्थितियों के बावजूद, चांदनी ने अपने परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प से यह उपलब्धि हासिल की है, जो प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।1
- शहडोल की नंदिनी गुप्ता को पीएमईजीपी योजना का लाभ प्राप्त हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप वह आत्मनिर्भर बन गई हैं। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।1
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों के मद्देनजर वन विभाग अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वन कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन रक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा सहित कई कर्मी शामिल थे, जहाँ उन्होंने हाथी प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हाथियों के व्यवहार, उनकी निगरानी और आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के पहुँचने पर उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों का आकलन, हाथियों की प्रोफाइलिंग, कैम्प हाथियों का प्रबंधन तथा वन्यजीवों के व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने विभिन्न परिस्थितियों में हाथियों के साथ सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कार्य करने के उपाय भी बताए। इस दौरान, गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के आईएफएस अधिकारियों, वाइल्डलाइफ स्क्वाड, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद आयोजित किए गए। इन संवादों में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने, ग्रामीणों को जागरूक करने और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की रणनीतियों पर चर्चा हुई। यह उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले लगभग आठ वर्षों से जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और वर्तमान में यह क्षेत्र हाथियों के लिए एक स्थायी आवास के रूप में विकसित हो चुका है। वन विभाग का मानना है कि यह स्थिति यहाँ के समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र का संकेत है, हालाँकि हाथियों की मौजूदगी से रिजर्व से लगे गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। वन विभाग को विश्वास है कि इस विशेष प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव भविष्य में हाथियों के बेहतर प्रबंधन, ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।2
- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में युवा कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में उग्र प्रदर्शन किया, जिसके तहत एक पुतला दहन किया गया और राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। यह प्रदर्शन युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष अनुराग सिंह अंबुज की अगुवाई में, जिला महासचिव अजय सिंह सोमवंशी के नेतृत्व में और युवा प्रदेश सचिव विक्रम प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नामांकन रद्द करने की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत करार देते हुए अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने मांग की कि विपक्षी दलों के प्रत्याशियों को सत्ता के कथित दबाव में चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की कथित तानाशाही एवं अलोकतांत्रिक प्रवृत्तियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि सभी प्रत्याशियों को चुनाव में समान अवसर मिल सके। इसके साथ ही, भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। युवा कांग्रेस ने यह भी कहा कि दुर्भावनापूर्ण मंशा अथवा पक्षपातपूर्ण तरीके से नामांकन पत्र निरस्त करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के विरुद्ध तत्काल निलंबन और विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाए। युवा कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है और किसी भी प्रत्याशी को अनुचित तरीके से चुनावी प्रक्रिया से बाहर करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर अपना विरोध जताया।4