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शहडोल की नंदिनी गुप्ता को पीएमईजीपी योजना का लाभ प्राप्त हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप वह आत्मनिर्भर बन गई हैं। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
Angad Tiwari
शहडोल की नंदिनी गुप्ता को पीएमईजीपी योजना का लाभ प्राप्त हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप वह आत्मनिर्भर बन गई हैं। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
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- Post by पत्रकारिता1
- उमरिया में आयोजित राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का उद्घाटन समारोह एक विवादित सांस्कृतिक प्रस्तुति के कारण चर्चा में आ गया है। अमर शहीद खेल मैदान में हुए इस कार्यक्रम के दौरान फिल्मी गीत “नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान” पर एक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने आयोजन की गरिमा और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग एवं लोक शिक्षण संचालनालय के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का उद्देश्य अंडर-15 और अंडर-17 वर्ग के खिलाड़ियों में खेल भावना, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था। इस आयोजन में प्रदेशभर से खिलाड़ी शामिल हुए थे, लेकिन उद्घाटन समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरा ध्यान खेल से हटाकर इस विवाद की ओर मोड़ दिया। समारोह में मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने इस गाने के चयन पर घोर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि स्कूली बच्चों और नाबालिग खिलाड़ियों की मौजूदगी में ऐसे गीत पर नृत्य कराना समझ से परे है, क्योंकि खेल प्रतियोगिताएं बच्चों को प्रेरणा, संस्कार और सकारात्मक सोच प्रदान करने का माध्यम होनी चाहिए। दर्शकों ने बताया कि आधुनिक परिधानों में कलाकारों के नृत्य से कई अभिभावकों ने असहजता महसूस की, उनका मानना है कि जहां से अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया जाता है, उसी मंच पर ऐसी प्रस्तुति विरोधाभासी है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करते समय जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों ने इसकी समीक्षा क्यों नहीं की। इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में चलाए गए गीत की जानकारी नहीं थी और बीच कार्यक्रम में गीत शुरू होने के बाद तत्काल कुछ कह पाना संभव नहीं था। उन्होंने इस संबंध में जिला खेल अधिकारी से जानकारी लेने की बात कही है। हालांकि, आयोजन समिति की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में स्कूल और खेल आयोजनों में प्रस्तुत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पूर्व समीक्षा अनिवार्य की जाए, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके। सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता देश की प्रतिष्ठित स्कूली प्रतियोगिताओं में से एक है, जो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर प्रदान करती है। इस विवाद ने आयोजन की उपलब्धियों के बजाय व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निगरानी पर बहस छेड़ दी है, और अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।2
- उमरिया/बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में घुनघुटी पुलिस ने कोरेक्स कल्फ सीरप की तस्करी में शामिल चार तस्करों को धर दबोचा है।1
- आदिवासी बहुल शहडोल जिले में सोशल मीडिया के डिजिटल धोखे का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ इंस्टाग्राम पर महंगी और आलीशान लाइफस्टाइल की फर्जी पहचान बनाकर एक युवक ने कॉलेज की फर्स्ट ईयर की छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था। खुद को बड़ी-बड़ी कोठियों का मालिक बताने वाले इस युवक की हकीकत जब सामने आई, तो हर कोई दंग रह गया, क्योंकि वह असल में घरों में पुट्टी-पुताई का काम करने वाला एक मजदूर निकला। जैतपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को मुरैना जिले से सकुशल बरामद कर लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान ग्वालियर जिले के रहने वाले करण धानुक के रूप में हुई है। करण ने इंस्टाग्राम पर अपनी असल पहचान छिपाकर 'करण राजपूत' नाम से एक फर्जी आईडी बना रखी थी। पेशे से पुट्टी और पुताई का काम करने वाला करण, जब बड़े-बड़े आलीशान बंगलों और कोठियों में काम करने जाता था, तो वहीं की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो खींचकर अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करता था, जिससे वह सोशल मीडिया पर खुद को बेहद संपन्न और रईस दिखाता था। इंस्टाग्राम की इसी झूठी और चमक-दमक वाली लाइफस्टाइल को सच मानकर जैतपुर क्षेत्र की 18 साल की कॉलेज छात्रा उसके जाल में फंस गई। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और आरोपी ने छात्रा को अपने साथ चलने के लिए मना लिया। योजना के मुताबिक, करण ट्रेन और बस बदलकर ग्वालियर से शहडोल के जैतपुर पहुंचा और छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर फरार हो गया। बेटी के घर न लौटने पर परेशान परिजनों ने जैतपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जैतपुर थाना प्रभारी जेपी शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी जांच (साइबर सेल) और मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम मुरैना जिले के एक सुदूर गांव में पहुंची और छात्रा को सकुशल बरामद कर लिया। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही शातिर आरोपी करण धानुक मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस टीम ने कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छात्रा को उसके परिजनों के हवाले कर दिया है। फिलहाल, पुलिस आरोपी करण की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।1
- मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जब सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर मौली लपेटी और अपने पति की लंबी आयु के लिए 108 बार परिक्रमा कर प्रार्थना की। हिंदू धर्म में इस तिथि को पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, पितरों के तर्पण तथा पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बना। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या एवं संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान, साथ ही ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है। जिले में स्थित मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र तटों जैसे रामघाट, पुष्कर बांध, कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पर पुण्य स्नान कर जप, तप, ध्यान, दान और पूजन-अर्चन किया। इसके उपरांत, मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। धर्माचार्यों का मत है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। इसी मान्यता के चलते अमरकंटक में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस पर्व के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया, और कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया, साथ ही अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया। पूरे जिले भर में सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने नजदीक के पीपल के वृक्षों की श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया। अमरकंटक में नर्मदा मंदिर परिसर, रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल तथा वट वृक्षों का भी विधिवत पूजन किया गया। महिलाओं ने कच्चे धागे से वृक्षों की परिक्रमा करते हुए अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की। लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने कल्याण सेवा आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शांतिकुंज आश्रम, बर्फानी आश्रम, मार्कण्डेय आश्रम, धारकुंडी आश्रम तथा गुरु नानक गुरुद्वारा सहित अनेक धार्मिक संस्थानों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। इन संस्थानों में शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नर्मदा महापुराण कथा का भव्य आयोजन भी हुआ। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।3
- बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के चलते मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वनकर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस समूह में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 5 वन रक्षक भी शामिल थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन द नेचर कंज़र्वेंसी और एसएनएपी फाउंडेशन ने किया। बाँधवगढ़ से वनरक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान वनकर्मियों को हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के ऑपरेशन, ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण, हाथियों के व्यवहार अध्ययन, कैम्प, हाथियों के प्रबंधन तथा शारीरिक बनावट के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के अधिकारियों, क्विक रिस्पॉन्स टीमों तथा स्थानीय समुदायों से भी संवाद कर मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की रणनीतियों को समझा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से बाँधवगढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और अब यह क्षेत्र उनके स्थायी रहवास के रूप में उभर रहा है। ऐसे में, यह विशेष प्रशिक्षण भविष्य में प्रभावी हाथी प्रबंधन और क्षेत्र के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाएगा।3
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों के मद्देनजर वन विभाग अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वन कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन रक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा सहित कई कर्मी शामिल थे, जहाँ उन्होंने हाथी प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हाथियों के व्यवहार, उनकी निगरानी और आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के पहुँचने पर उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों का आकलन, हाथियों की प्रोफाइलिंग, कैम्प हाथियों का प्रबंधन तथा वन्यजीवों के व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने विभिन्न परिस्थितियों में हाथियों के साथ सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कार्य करने के उपाय भी बताए। इस दौरान, गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के आईएफएस अधिकारियों, वाइल्डलाइफ स्क्वाड, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद आयोजित किए गए। इन संवादों में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने, ग्रामीणों को जागरूक करने और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की रणनीतियों पर चर्चा हुई। यह उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले लगभग आठ वर्षों से जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और वर्तमान में यह क्षेत्र हाथियों के लिए एक स्थायी आवास के रूप में विकसित हो चुका है। वन विभाग का मानना है कि यह स्थिति यहाँ के समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र का संकेत है, हालाँकि हाथियों की मौजूदगी से रिजर्व से लगे गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। वन विभाग को विश्वास है कि इस विशेष प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव भविष्य में हाथियों के बेहतर प्रबंधन, ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।2
- धार्मिक विद्वानों के अनुसार, 15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग प्राप्त हुआ। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या और संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान तथा ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है। धर्माचार्यों का कहना है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। ऐसी मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा एवं भक्ति से किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य समस्त तीर्थों में किए गए पुण्य कर्मों के समान फलदायी होता है। इसी कारण अमरकंटक में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस पर्व के अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, साथ ही अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया। कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल एवं वट वृक्ष के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया। इसके अतिरिक्त, अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया गया। वट वृक्ष की पूजा करने वाली महिलाओं ने अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु की कामना की। पूरे दिन मंदिरों, घाटों और आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा। इन सब के चलते 'नर्मदे हर' के जयघोष और भक्ति भाव से सराबोर अमरकंटक का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।1
- सीधी जिले के जनपद पंचायत कुसमी के ग्राम टमसार में कुसमी-महखोर मार्ग पर सड़क किनारे खोदी गई एक नाली को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने इस निर्माण के लिए वन विभाग पर मनमानी का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि यह नाली राजनीतिक षड्यंत्र के तहत, चौराहे क्षेत्र में व्यापारियों और गुमटी संचालकों को जानबूझकर परेशान करने की नीयत से खोदी गई है। इस नाली के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के कथित तानाशाही रवैये के चलते क्षेत्र में अक्सर दुर्घटनाओं जैसी स्थितियां बनती रहती हैं। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि बरसात के मौसम में यह नाली और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान को खतरा उत्पन्न होने की आशंका है। इस संबंध में स्थानीय व्यापारियों और गुमटी संचालकों ने ग्राम पंचायत के सरपंच मकरंद सिंह के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जानकारी मिलने पर तहसीलदार कुसमी नारायण सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थल का निरीक्षण कर नाप-जोख कराई। बताया गया है कि तहसीलदार ने ग्रामीणों को सूचित किया कि संबंधित भूमि के रिकॉर्ड और सीमांकन के अनुसार, उक्त क्षेत्र में खोदी गई नाली अवैध है और पचासा क्षेत्र में स्थित है। बावजूद इसके, ग्रामीणों और व्यापारियों ने मांग की है कि यदि नाली आवश्यक है तो उसकी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिसमें ढक्कन लगाना और चेतावनी संकेत स्थापित करना शामिल हो, ताकि कोई दुर्घटना न हो। अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि यदि बरसात के दौरान इस अवैध नाली के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जनहित में उचित निर्णय लेने का आग्रह किया है।3