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उमरिया/बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में घुनघुटी पुलिस ने कोरेक्स कल्फ सीरप की तस्करी में शामिल चार तस्करों को धर दबोचा है।

14 hrs ago
user_JIYAUDDIN ANSARI
JIYAUDDIN ANSARI
Voice of people Budar, Shahdol•
14 hrs ago

उमरिया/बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में घुनघुटी पुलिस ने कोरेक्स कल्फ सीरप की तस्करी में शामिल चार तस्करों को धर दबोचा है।

More news from Shahdol and nearby areas
  • उमरिया/बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में घुनघुटी पुलिस ने कोरेक्स कल्फ सीरप की तस्करी में शामिल चार तस्करों को धर दबोचा है।
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    उमरिया/बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में घुनघुटी पुलिस ने कोरेक्स कल्फ सीरप की तस्करी में शामिल चार तस्करों को धर दबोचा है।
    user_JIYAUDDIN ANSARI
    JIYAUDDIN ANSARI
    Voice of people Budar, Shahdol•
    14 hrs ago
  • आदिवासी बहुल शहडोल जिले में सोशल मीडिया के डिजिटल धोखे का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ इंस्टाग्राम पर महंगी और आलीशान लाइफस्टाइल की फर्जी पहचान बनाकर एक युवक ने कॉलेज की फर्स्ट ईयर की छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था। खुद को बड़ी-बड़ी कोठियों का मालिक बताने वाले इस युवक की हकीकत जब सामने आई, तो हर कोई दंग रह गया, क्योंकि वह असल में घरों में पुट्टी-पुताई का काम करने वाला एक मजदूर निकला। जैतपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को मुरैना जिले से सकुशल बरामद कर लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान ग्वालियर जिले के रहने वाले करण धानुक के रूप में हुई है। करण ने इंस्टाग्राम पर अपनी असल पहचान छिपाकर 'करण राजपूत' नाम से एक फर्जी आईडी बना रखी थी। पेशे से पुट्टी और पुताई का काम करने वाला करण, जब बड़े-बड़े आलीशान बंगलों और कोठियों में काम करने जाता था, तो वहीं की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो खींचकर अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करता था, जिससे वह सोशल मीडिया पर खुद को बेहद संपन्न और रईस दिखाता था। इंस्टाग्राम की इसी झूठी और चमक-दमक वाली लाइफस्टाइल को सच मानकर जैतपुर क्षेत्र की 18 साल की कॉलेज छात्रा उसके जाल में फंस गई। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और आरोपी ने छात्रा को अपने साथ चलने के लिए मना लिया। योजना के मुताबिक, करण ट्रेन और बस बदलकर ग्वालियर से शहडोल के जैतपुर पहुंचा और छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर फरार हो गया। बेटी के घर न लौटने पर परेशान परिजनों ने जैतपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जैतपुर थाना प्रभारी जेपी शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी जांच (साइबर सेल) और मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम मुरैना जिले के एक सुदूर गांव में पहुंची और छात्रा को सकुशल बरामद कर लिया। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही शातिर आरोपी करण धानुक मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस टीम ने कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छात्रा को उसके परिजनों के हवाले कर दिया है। फिलहाल, पुलिस आरोपी करण की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।
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    आदिवासी बहुल शहडोल जिले में सोशल मीडिया के डिजिटल धोखे का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ इंस्टाग्राम पर महंगी और आलीशान लाइफस्टाइल की फर्जी पहचान बनाकर एक युवक ने कॉलेज की फर्स्ट ईयर की छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था। खुद को बड़ी-बड़ी कोठियों का मालिक बताने वाले इस युवक की हकीकत जब सामने आई, तो हर कोई दंग रह गया, क्योंकि वह असल में घरों में पुट्टी-पुताई का काम करने वाला एक मजदूर निकला। जैतपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को मुरैना जिले से सकुशल बरामद कर लिया है।

पकड़े गए आरोपी की पहचान ग्वालियर जिले के रहने वाले करण धानुक के रूप में हुई है। करण ने इंस्टाग्राम पर अपनी असल पहचान छिपाकर 'करण राजपूत' नाम से एक फर्जी आईडी बना रखी थी। पेशे से पुट्टी और पुताई का काम करने वाला करण, जब बड़े-बड़े आलीशान बंगलों और कोठियों में काम करने जाता था, तो वहीं की खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो खींचकर अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करता था, जिससे वह सोशल मीडिया पर खुद को बेहद संपन्न और रईस दिखाता था।

इंस्टाग्राम की इसी झूठी और चमक-दमक वाली लाइफस्टाइल को सच मानकर जैतपुर क्षेत्र की 18 साल की कॉलेज छात्रा उसके जाल में फंस गई। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और आरोपी ने छात्रा को अपने साथ चलने के लिए मना लिया। योजना के मुताबिक, करण ट्रेन और बस बदलकर ग्वालियर से शहडोल के जैतपुर पहुंचा और छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर फरार हो गया। बेटी के घर न लौटने पर परेशान परिजनों ने जैतपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जैतपुर थाना प्रभारी जेपी शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी जांच (साइबर सेल) और मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश शुरू की।

कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम मुरैना जिले के एक सुदूर गांव में पहुंची और छात्रा को सकुशल बरामद कर लिया। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही शातिर आरोपी करण धानुक मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस टीम ने कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छात्रा को उसके परिजनों के हवाले कर दिया है। फिलहाल, पुलिस आरोपी करण की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।
    user_Dilawar singh
    Dilawar singh
    Budar, Shahdol•
    15 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जब सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर मौली लपेटी और अपने पति की लंबी आयु के लिए 108 बार परिक्रमा कर प्रार्थना की। हिंदू धर्म में इस तिथि को पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, पितरों के तर्पण तथा पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बना। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या एवं संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान, साथ ही ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है। जिले में स्थित मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र तटों जैसे रामघाट, पुष्कर बांध, कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पर पुण्य स्नान कर जप, तप, ध्यान, दान और पूजन-अर्चन किया। इसके उपरांत, मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। धर्माचार्यों का मत है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। इसी मान्यता के चलते अमरकंटक में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस पर्व के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया, और कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया, साथ ही अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया। पूरे जिले भर में सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने नजदीक के पीपल के वृक्षों की श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया। अमरकंटक में नर्मदा मंदिर परिसर, रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल तथा वट वृक्षों का भी विधिवत पूजन किया गया। महिलाओं ने कच्चे धागे से वृक्षों की परिक्रमा करते हुए अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की। लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने कल्याण सेवा आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शांतिकुंज आश्रम, बर्फानी आश्रम, मार्कण्डेय आश्रम, धारकुंडी आश्रम तथा गुरु नानक गुरुद्वारा सहित अनेक धार्मिक संस्थानों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। इन संस्थानों में शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नर्मदा महापुराण कथा का भव्य आयोजन भी हुआ। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
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    मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जब सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर मौली लपेटी और अपने पति की लंबी आयु के लिए 108 बार परिक्रमा कर प्रार्थना की। हिंदू धर्म में इस तिथि को पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, पितरों के तर्पण तथा पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बना। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या एवं संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान, साथ ही ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है।

जिले में स्थित मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। उन्होंने मां नर्मदा के पवित्र तटों जैसे रामघाट, पुष्कर बांध, कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पर पुण्य स्नान कर जप, तप, ध्यान, दान और पूजन-अर्चन किया। इसके उपरांत, मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। धर्माचार्यों का मत है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। इसी मान्यता के चलते अमरकंटक में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया।

इस पर्व के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया, और कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया, साथ ही अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया।

पूरे जिले भर में सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने नजदीक के पीपल के वृक्षों की श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया। अमरकंटक में नर्मदा मंदिर परिसर, रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल तथा वट वृक्षों का भी विधिवत पूजन किया गया। महिलाओं ने कच्चे धागे से वृक्षों की परिक्रमा करते हुए अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की।

लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने कल्याण सेवा आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शांतिकुंज आश्रम, बर्फानी आश्रम, मार्कण्डेय आश्रम, धारकुंडी आश्रम तथा गुरु नानक गुरुद्वारा सहित अनेक धार्मिक संस्थानों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। इन संस्थानों में शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नर्मदा महापुराण कथा का भव्य आयोजन भी हुआ।

इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
    user_Rajesh Shukla
    Rajesh Shukla
    Salesperson Anuppur, Madhya Pradesh•
    9 hrs ago
  • धार्मिक विद्वानों के अनुसार, 15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग प्राप्त हुआ। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या और संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान तथा ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है। धर्माचार्यों का कहना है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। ऐसी मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा एवं भक्ति से किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य समस्त तीर्थों में किए गए पुण्य कर्मों के समान फलदायी होता है। इसी कारण अमरकंटक में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस पर्व के अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, साथ ही अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया। कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल एवं वट वृक्ष के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया। इसके अतिरिक्त, अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया गया। वट वृक्ष की पूजा करने वाली महिलाओं ने अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु की कामना की। पूरे दिन मंदिरों, घाटों और आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा। इन सब के चलते 'नर्मदे हर' के जयघोष और भक्ति भाव से सराबोर अमरकंटक का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
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    धार्मिक विद्वानों के अनुसार, 15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग प्राप्त हुआ। इसके साथ ही, पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या और संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जिसे मेष और तुला संक्रांति के समान तथा ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी माना जाता है।

धर्माचार्यों का कहना है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। ऐसी मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा एवं भक्ति से किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य समस्त तीर्थों में किए गए पुण्य कर्मों के समान फलदायी होता है। इसी कारण अमरकंटक में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया।

इस पर्व के अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया, साथ ही अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया। कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल एवं वट वृक्ष के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया। इसके अतिरिक्त, अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया गया। वट वृक्ष की पूजा करने वाली महिलाओं ने अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु की कामना की। पूरे दिन मंदिरों, घाटों और आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा।

इन सब के चलते 'नर्मदे हर' के जयघोष और भक्ति भाव से सराबोर अमरकंटक का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। इस प्रकार, विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
    user_Anupam Singh patrkar
    Anupam Singh patrkar
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के गोहपारू क्षेत्र में ग्राम पंचायत बरकोड़ा में नकली डीएपी खाद के अवैध भंडारण का बड़ा मामला सामने आया है। सहायक संचालक कृषि विभाग की एक टीम ने दीनबंधु नापित के घर पर दोपहर लगभग 2 बजे छापामार कार्रवाई करते हुए करीब 100 बोरी डीएपी खाद जब्त की है। बताया गया है कि यह खाद गैरकानूनी तरीके से संग्रहित की गई थी और ईपको कंपनी के नाम व रैपर का इस्तेमाल कर किसानों को गुमराह किए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि यह नकली या डुप्लीकेट डीएपी खाद छत्तीसगढ़ से लाकर शहडोल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बेची जा रही थी। इस कार्रवाई के बाद, कृषि विभाग ने मामले को लेकर मीडिया से दूरी बनाए रखी है, जिससे पूरे मामले को दबाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, किसानों में इस घटना को लेकर गहरा रोष देखा जा रहा है। अब यह सवाल उठ रहा है कि किसानों की मेहनत और उनकी फसल के साथ खिलवाड़ करने वाले इस नेटवर्क पर प्रशासन कितनी सख्त कार्रवाई करेगा। फिलहाल, कृषि विभाग द्वारा मामले की जांच जारी है।
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    मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के गोहपारू क्षेत्र में ग्राम पंचायत बरकोड़ा में नकली डीएपी खाद के अवैध भंडारण का बड़ा मामला सामने आया है। सहायक संचालक कृषि विभाग की एक टीम ने दीनबंधु नापित के घर पर दोपहर लगभग 2 बजे छापामार कार्रवाई करते हुए करीब 100 बोरी डीएपी खाद जब्त की है। बताया गया है कि यह खाद गैरकानूनी तरीके से संग्रहित की गई थी और ईपको कंपनी के नाम व रैपर का इस्तेमाल कर किसानों को गुमराह किए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि यह नकली या डुप्लीकेट डीएपी खाद छत्तीसगढ़ से लाकर शहडोल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बेची जा रही थी।

इस कार्रवाई के बाद, कृषि विभाग ने मामले को लेकर मीडिया से दूरी बनाए रखी है, जिससे पूरे मामले को दबाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, किसानों में इस घटना को लेकर गहरा रोष देखा जा रहा है। अब यह सवाल उठ रहा है कि किसानों की मेहनत और उनकी फसल के साथ खिलवाड़ करने वाले इस नेटवर्क पर प्रशासन कितनी सख्त कार्रवाई करेगा। फिलहाल, कृषि विभाग द्वारा मामले की जांच जारी है।
    user_Sumit Singh Chandel
    Sumit Singh Chandel
    Newspaper publisher गोहपारू, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • उमरिया जिले की पाली पुलिस और घुनघुटी चौकी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹35 लाख मूल्य के चोरी हुए औद्योगिक उपकरण बरामद कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह घटना 11 जून की रात ग्राम अमिलिहा में निर्माणाधीन पुल परियोजना में कार्यरत टीवीसीएल कंपनी के कैंप में हुई थी, जहाँ पुल निर्माण में उपयोग की जाने वाली पीक्यूसी मशीन के पाँच अत्याधुनिक सेंसर चोरी कर लिए गए थे। इन सेंसरों की चोरी से निर्माण कंपनी में हड़कंप मच गया था। आरोपियों ने पहले काम मांगने के बहाने कैंप में प्रवेश किया और मौका मिलते ही लाखों रुपये के उपकरण लेकर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया और तत्काल जांच शुरू की गई। तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम विदिशा जिले पहुँची, जहाँ आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर आरोपी जंगल की ओर भाग निकले, लेकिन भागने की हड़बड़ी में उनके कब्जे से चोरी का सामान भरा बैग मौके पर छूट गया। पुलिस ने बैग जब्त कर उसमें रखे सभी पाँच सेंसर बरामद कर लिए। कंपनी के अधिकारियों ने भी बरामद उपकरणों की पहचान कर चोरी हुए सेंसरों के रूप में उनकी पुष्टि की है। हालाँकि, दोनों आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे हैं, लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। उमरिया पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल लाखों रुपये का मशरूका बरामद कराया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि अपराधियों के लिए अब जिले में बच निकलना आसान नहीं है।
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    उमरिया जिले की पाली पुलिस और घुनघुटी चौकी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹35 लाख मूल्य के चोरी हुए औद्योगिक उपकरण बरामद कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह घटना 11 जून की रात ग्राम अमिलिहा में निर्माणाधीन पुल परियोजना में कार्यरत टीवीसीएल कंपनी के कैंप में हुई थी, जहाँ पुल निर्माण में उपयोग की जाने वाली पीक्यूसी मशीन के पाँच अत्याधुनिक सेंसर चोरी कर लिए गए थे। इन सेंसरों की चोरी से निर्माण कंपनी में हड़कंप मच गया था।

आरोपियों ने पहले काम मांगने के बहाने कैंप में प्रवेश किया और मौका मिलते ही लाखों रुपये के उपकरण लेकर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया और तत्काल जांच शुरू की गई।

तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम विदिशा जिले पहुँची, जहाँ आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर आरोपी जंगल की ओर भाग निकले, लेकिन भागने की हड़बड़ी में उनके कब्जे से चोरी का सामान भरा बैग मौके पर छूट गया। पुलिस ने बैग जब्त कर उसमें रखे सभी पाँच सेंसर बरामद कर लिए। कंपनी के अधिकारियों ने भी बरामद उपकरणों की पहचान कर चोरी हुए सेंसरों के रूप में उनकी पुष्टि की है।

हालाँकि, दोनों आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे हैं, लेकिन पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। उमरिया पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल लाखों रुपये का मशरूका बरामद कराया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि अपराधियों के लिए अब जिले में बच निकलना आसान नहीं है।
    user_THEJAYY
    THEJAYY
    Local News Reporter पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • उमरिया में आयोजित राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का उद्घाटन समारोह एक विवादित सांस्कृतिक प्रस्तुति के कारण चर्चा में आ गया है। अमर शहीद खेल मैदान में हुए इस कार्यक्रम के दौरान फिल्मी गीत “नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान” पर एक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने आयोजन की गरिमा और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग एवं लोक शिक्षण संचालनालय के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का उद्देश्य अंडर-15 और अंडर-17 वर्ग के खिलाड़ियों में खेल भावना, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था। इस आयोजन में प्रदेशभर से खिलाड़ी शामिल हुए थे, लेकिन उद्घाटन समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरा ध्यान खेल से हटाकर इस विवाद की ओर मोड़ दिया। समारोह में मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने इस गाने के चयन पर घोर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि स्कूली बच्चों और नाबालिग खिलाड़ियों की मौजूदगी में ऐसे गीत पर नृत्य कराना समझ से परे है, क्योंकि खेल प्रतियोगिताएं बच्चों को प्रेरणा, संस्कार और सकारात्मक सोच प्रदान करने का माध्यम होनी चाहिए। दर्शकों ने बताया कि आधुनिक परिधानों में कलाकारों के नृत्य से कई अभिभावकों ने असहजता महसूस की, उनका मानना है कि जहां से अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया जाता है, उसी मंच पर ऐसी प्रस्तुति विरोधाभासी है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करते समय जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों ने इसकी समीक्षा क्यों नहीं की। इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में चलाए गए गीत की जानकारी नहीं थी और बीच कार्यक्रम में गीत शुरू होने के बाद तत्काल कुछ कह पाना संभव नहीं था। उन्होंने इस संबंध में जिला खेल अधिकारी से जानकारी लेने की बात कही है। हालांकि, आयोजन समिति की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में स्कूल और खेल आयोजनों में प्रस्तुत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पूर्व समीक्षा अनिवार्य की जाए, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके। सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता देश की प्रतिष्ठित स्कूली प्रतियोगिताओं में से एक है, जो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर प्रदान करती है। इस विवाद ने आयोजन की उपलब्धियों के बजाय व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निगरानी पर बहस छेड़ दी है, और अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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    उमरिया में आयोजित राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का उद्घाटन समारोह एक विवादित सांस्कृतिक प्रस्तुति के कारण चर्चा में आ गया है। अमर शहीद खेल मैदान में हुए इस कार्यक्रम के दौरान फिल्मी गीत “नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान” पर एक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने आयोजन की गरिमा और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग एवं लोक शिक्षण संचालनालय के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का उद्देश्य अंडर-15 और अंडर-17 वर्ग के खिलाड़ियों में खेल भावना, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था। इस आयोजन में प्रदेशभर से खिलाड़ी शामिल हुए थे, लेकिन उद्घाटन समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरा ध्यान खेल से हटाकर इस विवाद की ओर मोड़ दिया।

समारोह में मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने इस गाने के चयन पर घोर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि स्कूली बच्चों और नाबालिग खिलाड़ियों की मौजूदगी में ऐसे गीत पर नृत्य कराना समझ से परे है, क्योंकि खेल प्रतियोगिताएं बच्चों को प्रेरणा, संस्कार और सकारात्मक सोच प्रदान करने का माध्यम होनी चाहिए। दर्शकों ने बताया कि आधुनिक परिधानों में कलाकारों के नृत्य से कई अभिभावकों ने असहजता महसूस की, उनका मानना है कि जहां से अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया जाता है, उसी मंच पर ऐसी प्रस्तुति विरोधाभासी है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करते समय जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों ने इसकी समीक्षा क्यों नहीं की।

इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम में चलाए गए गीत की जानकारी नहीं थी और बीच कार्यक्रम में गीत शुरू होने के बाद तत्काल कुछ कह पाना संभव नहीं था। उन्होंने इस संबंध में जिला खेल अधिकारी से जानकारी लेने की बात कही है। हालांकि, आयोजन समिति की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में स्कूल और खेल आयोजनों में प्रस्तुत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पूर्व समीक्षा अनिवार्य की जाए, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके।

सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता देश की प्रतिष्ठित स्कूली प्रतियोगिताओं में से एक है, जो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर प्रदान करती है। इस विवाद ने आयोजन की उपलब्धियों के बजाय व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निगरानी पर बहस छेड़ दी है, और अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।
    user_Tapas Gupta
    Tapas Gupta
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अनूपपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बदरा सभागार में ग्रामीण विकास विभाग के बदरा कलस्टर की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना कुमारी ने कलस्टर के सभी ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों को जल संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने पर विशेष बल दिया। श्रीमती कुमारी ने 'एक बगिया मां के नाम' योजना के तहत हितग्राही मूलक पौधारोपण के गैप फिलिंग कार्य को पूरा करने तथा पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें पर्याप्त खाद और नियमित पानी प्रदान करने पर भी जोर दिया। इस दौरान, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बदरा कलस्टर के विभिन्न विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी मनरेगा श्री रावेन्द्र पटेल, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रवि गोयल, एसडीओ सुरेंद्र पांडे, इंजीनियर लव श्रीवास्तव और सहायक कार्यक्रम अधिकारी श्री अरविंद सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
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    अनूपपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बदरा सभागार में ग्रामीण विकास विभाग के बदरा कलस्टर की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना कुमारी ने कलस्टर के सभी ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों को जल संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने पर विशेष बल दिया।

श्रीमती कुमारी ने 'एक बगिया मां के नाम' योजना के तहत हितग्राही मूलक पौधारोपण के गैप फिलिंग कार्य को पूरा करने तथा पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें पर्याप्त खाद और नियमित पानी प्रदान करने पर भी जोर दिया। इस दौरान, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बदरा कलस्टर के विभिन्न विकास कार्यों की गहन समीक्षा की।

बैठक में जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी मनरेगा श्री रावेन्द्र पटेल, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रवि गोयल, एसडीओ सुरेंद्र पांडे, इंजीनियर लव श्रीवास्तव और सहायक कार्यक्रम अधिकारी श्री अरविंद सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Anupam Singh patrkar
    Anupam Singh patrkar
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
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