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सतना शहर के गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड में फर्जी मेडिकल बनाने वाले मास्टरमाइंड अमित खरे का एक और कारनामा सामने आया है। जबलपुर स्थित स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल के संचालक अमित खरे ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतरवा दिया। पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया है। जघन्य वारदात का पर्दाफाश होने के बाद मुख्य आरोपी अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है।
रोहित कुमार पाठक
सतना शहर के गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड में फर्जी मेडिकल बनाने वाले मास्टरमाइंड अमित खरे का एक और कारनामा सामने आया है। जबलपुर स्थित स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल के संचालक अमित खरे ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतरवा दिया। पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया है। जघन्य वारदात का पर्दाफाश होने के बाद मुख्य आरोपी अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है।
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- सतना जिले के अमरपाटन स्थित ग्राम पंचायत मुकुंदपुर के वार्ड क्रमांक 2 की हरिजन बस्ती में ग्रामीण भारी पेयजल संकट और अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। करीब दो सौ लोगों की इस बस्ती के बीचों-बीच स्थित इकलौता हैंडपंप पिछले कई महीनों से खराब पड़ा हुआ है। इसके अलावा बस्ती में आधी-अधूरी बनी नाली हादसों को दावत दे रही है और इससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। नाली और रोड का निर्माण पूरा न होने के कारण बारिश के बाद पूरी बस्ती में जलभराव की स्थिति बन जाती है। पानी की किल्लत के कारण महिलाओं को कीचड़ से होकर बस्ती से दूर स्थित दूसरे हैंडपंप से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत के साथ-साथ 181 हेल्पलाइन पर भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि खराब पड़े हैंडपंप को तुरंत सुधारा जाए तथा अधूरी नाली और रोड का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात के मौसम में ग्रामीणों को पानी की समस्या और आवागमन की दिक्कतों से निजात मिल सके।4
- सतना जिले के ग्राम छुलहा में मानसून की बारिश के कारण 900 मीटर का कच्चा रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गया है। इस वजह से स्कूली बच्चों, बीमार बुजुर्गों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस कच्चे मार्ग पर 'बेशरम के पौधे' लगाकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारिश के कारण यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर गया है, जिससे बच्चों को घुटनों तक कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया था। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मार्ग को पक्का करवाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने सांसद, विधायक और कलेक्टर से भी गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश शासन की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। लगातार सामने आ रहे वीडियो और विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थानीय जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने का दोबारा आश्वासन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रजातंत्र में जनता के पास अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और वे अपनी इस मूलभूत आवश्यकता के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश में प्रजातंत्र की अवधारणा बदल चुकी है, जहाँ पब्लिक को मालिक माना जाता था, वहाँ अब परिभाषा बदल गई है। हाल ही में नागौद क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर बच्चों ने आंदोलन किया। लेकिन, फर्जी आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। आज तक एक ट्रॉली मुरम तक नहीं पड़ी। यह घटना ग्राम छुलहा में घटी, जो पंचायत गिनजारा के अंतर्गत आता है। यह पूरा मामला रैगांव विधानसभा क्षेत्र में है और जनपद पंचायत नागौद, सतना में स्थित है। मोदी यादव के राज में मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग अब फेल सरकार हटाओ, देश बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के नागौद में प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) इकाई द्वारा आयोजित एक परिचर्चा गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रेमचंद की जयंती पखवाड़े के अंतर्गत अखंड ज्योति विद्यालय, इंदिरा नगर, नागौद में किया गया था। गोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद ने अपेक्षाकृत अल्प जीवन में जो विराट साहित्य-संपदा रची, वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। उनकी सहज भाषा, जीवन से जुड़े पात्र, गहरी मानवीय संवेदना और अंतर्निहित सामाजिक संदेश ही उनकी रचनाओं को कालजयी बनाते हैं। दाहिया ने 'नमक का दरोगा' और 'ईदगाह' जैसी कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर मूल्यबोध, सामाजिक चेतना और मानवीय नैतिकता का साहित्य है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यदि आज़ादी से पूर्व के भारत का वास्तविक सामाजिक चित्र देखना हो, तो उसे प्रेमचंद के साहित्य में सहजता से देखा जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में रामलाल सिंह परिहार ने कहा कि प्रेमचंद को समझने के लिए उनके साहित्य को जीवनानुभवों के साथ जोड़कर पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट लेखन का आधार गंभीर अध्ययन और सतत पठन है। साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है और प्रेमचंद इस परंपरा के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं। विशिष्ट अतिथि विजयशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जनजीवन के सबसे विश्वसनीय कथाकार हैं। उन्होंने किसान, स्त्री, श्रमिक और समाज के उपेक्षित वर्गों के संघर्ष को साहित्य में अमर कर दिया। उन्होंने प्रेमचंद के प्रसिद्ध कथन 'साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के आगे मशाल लेकर चलना है' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को सच्ची श्रद्धांजलि उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और उनके साहित्यिक अवदान को संरक्षित रखने में निहित है। कालिका त्रिपाठी ने अपनी कविता के माध्यम से प्रेमचंद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के उपेक्षित, वंचित और शोषित वर्गों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। उनकी कहानियाँ आज भी सामाजिक विषमताओं, अन्याय और मानवीय संघर्ष की उतनी ही प्रामाणिक अभिव्यक्ति हैं, जितनी अपने समय में थीं। राजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि हिंदी साहित्य में दलितों, किसानों और शोषित समाज के जीवन का जितना संवेदनशील एवं यथार्थपरक चित्रण प्रेमचंद ने किया, वह अप्रतिम है। रामहित त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ मनुष्य के भीतर मानवीय मूल्यों को जागृत करती हैं और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती हैं। बालेंदु प्रभाकर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। उन्होंने किसानों, श्रमिकों, दलितों और वंचित वर्गों की पीड़ा को साहित्य की मुख्यधारा में प्रतिष्ठित किया। अरुण पयासी ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना के सीमित दायरे से निकालकर सामाजिक यथार्थ का दर्पण बनाया। उनका लेखन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक जागृति और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। पी.के. अहिरवार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात किए जाने योग्य मूल्य-परंपरा है। उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर के. दाहिया, पुष्पेंद्र पाठक, सीताशरण परासर अमन त्रिपाठी तथा अनुपम दाहिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।2
- सतना के बेला में 04 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक चलने वाले 'स्वैच्छिकता पर्व एवं दस्तक अभियान' के तहत शनिवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा सहयोगिनियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग, टीकाकरण, विटामिन-जिंक-ओआरएस का वितरण, वजन-लंबाई माप, कुपोषित बच्चों की पहचान और पोषण आहार पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि समिति के सदस्य घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने का प्रयास करेंगे। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि दस्तक अभियान का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना और कुपोषण को जड़ से खत्म करना है। सभी ने मिलकर अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। मुख्य रूप से बैठक में ममता सिंह (ब्लॉक समन्वयक), संदीप वर्मा (अध्यक्ष, अस्तित्व पब्लिक वेलफेयर सोसाइटी बेला), राम प्रसाद साहू (पत्रकार), संगीता विश्वकर्मा (अध्यक्ष, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति), सौरभ सेन (सचिव), ओ.पी. तिवारी (सुपरवाइजर), सीएचओ प्रमोद सिंह, सीएचओ खुशबू सिंह, सीएचओ ललित सिंह, सीएचओ रजनी पटेल, प्रवीण कुशवाहा, पूजा दहिया (ANM), ममता शर्मा, मंजू वर्मा (नर्स) सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं उपस्थित रहीं।4
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमरपाटन उप-जिले में स्थित रामपथ नेशनल हाईवे पर उचेहरा में बने रोड ओवर ब्रिज (ROB) पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टोल वसूली तो की जा रही है, लेकिन आमजन की सुरक्षा और सुविधा की कोई परवाह नहीं की जा रही। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ROB की खराब स्थिति के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई सुधार नहीं किया जा रहा। टोल बूथ पर टोल वसूली नियमित रूप से जारी है, लेकिन ब्रिज की मरम्मत या रखरखाव के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। लोगों में रोष है कि उनकी सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है।1
- मैहर के स्वामी नीलकंठ ओइला आश्रम में पूज्य स्वामी श्री बम महाराज की प्रतिमा खंडित होने के मामले में विवाद गहरा गया है। आश्रम ट्रस्ट के सचिव सतेंद्र सिंह बघेल, सदस्य राजाराम तिवारी और कोषाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह गोलू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना को सुनियोजित बताया। ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार, महाराज जी की प्रतिमा पिछले एक साल से ज्यादा समय से आश्रम के भीतर सुरक्षित रखी हुई थी। बिना किसी को जानकारी दिए अचानक प्रतिमा की स्थापना कराने की बात सामने आई और फिर साजिश के तहत उसे खंडित कर दिया गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह गोलू ने इस पूरे विवाद के लिए मैहर विधायक को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विधायक आश्रम की बेशकीमती जमीन को हड़पना चाहते हैं। इसी मकसद से प्रशासन पर दबाव बनाकर ट्रस्ट के कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है, ताकि मुद्दे से ध्यान भटकाकर आश्रम की बेसुमार संपत्ति में हेरफेर किया जा सके। इस घटना के बाद महाराज जी के भक्तों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है और पुलिस ने खंडित प्रतिमा समेत आश्रम से जुड़े इस गंभीर विवाद की जांच शुरू कर दी है।1
- मैहर माता मंदिर में बाढ़ आने का एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। पुलिस ने इस वायरल वीडियो की जांच के बाद इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। यह भ्रामक वीडियो 'अध्यात्म' नामक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था। AI तकनीक से तैयार किए गए इस फर्जी वीडियो के जरिए श्रद्धालुओं में गलत जानकारी फैलाई गई है।1